3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

लूका 4

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाई

एक जंगल था। बहुत बड़ा जंगल। वहाँ रेत ही रेत थी।

यीशु उस जंगल में गए। पवित्र आत्मा उनके साथ थे। यीशु ने चालीस दिन कुछ नहीं खाया। एक दिन, दो दिन, बहुत दिन। फिर उन्हें बहुत भूख लगी।

तभी शैतान आया। शैतान बुरा था। उसने कहा, "पत्थर को रोटी बना दो।" यीशु ने कहा, "नहीं। लिखा है, रोटी से ही जीवन नहीं चलता।"

शैतान ने फिर कोशिश की। उसने ऊँची जगह से सारी दुनिया दिखाई। उसने कहा, "मुझे प्रणाम करो, यह सब तुम्हारा हो जाएगा।" यीशु ने कहा, "नहीं। केवल परमेश्वर की उपासना होगी।"

शैतान ने तीसरी बार कोशिश की। उसने यीशु को मंदिर की छत पर खड़ा किया। उसने कहा, "यहाँ से कूद जाओ।" यीशु ने कहा, "नहीं। परमेश्वर की परीक्षा मत करो।"

शैतान हार गया। वह चला गया।

इसका अर्थ क्या है?

यीशु हर बार "नहीं" बोले। हर बार उन्होंने परमेश्वर का वचन याद किया। यीशु मजबूत थे। बहुत मजबूत।

फिर यीशु गलील गए। वे नासरत गए, जहाँ वे बड़े हुए थे। सब्त के दिन वे आराधनालय गए। उन्होंने एक पुस्तक खोली। उन्होंने पढ़ा, "परमेश्वर का आत्मा मुझ पर है। मैं गरीबों को खुशखबरी सुनाऊँगा। मैं अंधों को दृष्टि दूँगा।"

उन्होंने पुस्तक बंद की। सब लोग उन्हें देख रहे थे। यीशु ने कहा, "आज यह पूरा हुआ है।"

समानता की कड़ी

यह बात सदियों पहले लिखी गई थी। परमेश्वर ने वादा किया था, कोई आएगा। कोई जो अंधों को दृष्टि देगा। कोई जो दुखियों की मदद करेगा। यीशु ही वह हैं। परमेश्वर अपना वादा निभाते हैं।

फिर यीशु कफरनहूम गए। वहाँ एक आदमी था, उसके अंदर बुरी आत्मा थी। वह चिल्लाया। यीशु ने कहा, "चुप हो जाओ! निकल जाओ!" और वह आत्मा निकल गई।

फिर यीशु शमौन के घर गए। शमौन की सास बीमार थी, बहुत तेज बुखार था। यीशु ने बुखार को डाँटा। बुखार तुरंत उतर गया। वह उठी और सबकी सेवा करने लगी।

शाम को बहुत लोग आए। बीमार लोग, दुखी लोग। यीशु ने हर एक पर हाथ रखा। हर एक को अच्छा किया।

तुम्हारे लिए

यीशु शैतान से लड़े और जीते। यीशु बीमारों को ठीक करते हैं। यीशु दुखियों की मदद करते हैं। जब तुम डरो, यीशु को बुला सकते हो। जब तुम बीमार हो, यीशु जानते हैं। वे तुमसे प्यार करते हैं।

बात करें

यीशु ने शैतान को कैसे "नहीं" कहा?

यीशु ने शमौन की सास को कैसे ठीक किया?

साथ में प्रार्थना

प्रिय यीशु, आप बहुत मजबूत हैं। आप बीमारों को ठीक करते हैं। मुझे भी अच्छा रखिए। मुझे अपने पास रखिए। आमीन।

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लूका 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लूका 4 किस विषय में है?
यीशु उस जंगल में गए। पवित्र आत्मा उनके साथ थे। यीशु ने चालीस दिन कुछ नहीं खाया। एक दिन, दो दिन, बहुत दिन। फिर उन्हें बहुत भूख लगी।
लूका 4 क्या कहता है?
शैतान ने तीसरी बार कोशिश की। उसने यीशु को मंदिर की छत पर खड़ा किया। उसने कहा, "यहाँ से कूद जाओ।" यीशु ने कहा, "नहीं। परमेश्वर की परीक्षा मत करो।"
लूका 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
उन्होंने पुस्तक बंद की। सब लोग उन्हें देख रहे थे। यीशु ने कहा, "आज यह पूरा हुआ है।"
नन्हे बच्चे लूका 4 से क्या सीख सकते हैं?
फिर यीशु शमौन के घर गए। शमौन की सास बीमार थी, बहुत तेज बुखार था। यीशु ने बुखार को डाँटा। बुखार तुरंत उतर गया। वह उठी और सबकी सेवा करने लगी।
लूका 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय यीशु, आप बहुत मजबूत हैं। आप बीमारों को ठीक करते हैं। मुझे भी अच्छा रखिए। मुझे अपने पास रखिए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

यरदन में आकाश खुला, आवाज़ आई, आत्मा उतरा। और उसके तुरंत बाद? जंगल। "यीशु पवित्र आत्मा से भरा हुआ, यरदन से लौटा; और आत्मा की अगुआई से जंगल में फिरता रहा।" आत्मा से भरा होना तुझे कठिनाई से बाहर नहीं, कई बार उसके भीतर ले जाता है। तेरा सूनापन इस बात का सबूत नहीं कि परमेश्वर ने तुझे छोड़ दिया। शायद वही तुझे वहाँ ले गया है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

फिर शैतान उसे ऊँचे स्थान पर ले गया और उसे पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए।" पल भर में। शैतान की हर पेशकश में यही जल्दबाजी होती है, सब कुछ अभी, बिना प्रतीक्षा, बिना क्रूस। परमेश्वर धीरे काम करता है, जंगल से होकर, आज्ञाकारिता से होकर। जो रास्ता तुझे एक ही झटके में सब देने का वादा करे, उससे सावधान रह।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।"

ध्यान दीजिए, "कुछ समय के लिये।" शैतान गया, पर हमेशा के लिये नहीं। यीशु ने जीता, फिर भी परीक्षा का दरवाज़ा बंद नहीं हुआ।

आप भी शायद सोचते हैं कि एक बड़ी लड़ाई जीतने के बाद सब खत्म हो गया। पर वह लौटकर आता है, नए मौके ढूँढ़ता है। इसलिए जीत के बाद भी सतर्क रहिए, और यीशु के पास ठहरे रहिए, जो हर बार आपके साथ खड़े हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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