3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

मत्ती 8

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

पहाड़ से यीशु नीचे उतरे। बहुत सारे लोग उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। तभी एक आदमी आया। उसकी त्वचा पर घाव थे। बहुत बुरे घाव। वह झुका और बोला, "प्रभु, आप चाहें तो मुझे ठीक कर सकते हैं।"

यीशु ने अपना हाथ बढ़ाया। उन्होंने उस आदमी को छुआ। धीरे से। और कहा, "मैं चाहता हूँ। तू ठीक हो जा।" उसी पल घाव चले गए। एकदम साफ त्वचा।

फिर यीशु एक शहर में गए। वहाँ एक सैनिक आया। उसका नौकर घर में बीमार पड़ा था। बहुत दुखी। सैनिक ने कहा, "प्रभु, बस कह दीजिए। आपको मेरे घर आने की भी ज़रूरत नहीं। मैं जानता हूँ, आपका एक शब्द काफी है।" यीशु को यह सुनकर अचरज हुआ। उन्होंने कहा, "ऐसा भरोसा मैंने कहीं नहीं देखा।" और वैसा ही हुआ। उसी पल नौकर ठीक हो गया।

बाद में यीशु पतरस के घर गए। पतरस की सास बुखार में तप रही थी। यीशु ने उसका हाथ छुआ। बुखार उतर गया। वह उठी और सबकी सेवा करने लगी।

शाम हुई। बहुत सारे बीमार लोग लाए गए। यीशु ने सबको ठीक किया। एक-एक को।

एक दिन यीशु नाव में बैठे। चेले भी साथ थे। झील पर अचानक तेज़ आँधी आई। लहरें ऊँची उठीं, नाव डूबने लगी। पर यीशु सो रहे थे। चेले डर गए। बहुत डर गए। उन्होंने यीशु को जगाया, "प्रभु, हमें बचाइए! हम डूब रहे हैं!" यीशु उठे। उन्होंने हवा और पानी को डाँटा। तुरंत सब शांत हो गया। एकदम शांत, जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

इसका क्या अर्थ है?

यीशु में बहुत बड़ी ताकत है। वे बीमारी को ठीक कर सकते हैं। वे तूफान को भी शांत कर सकते हैं। किसी और के पास इतनी ताकत नहीं। लोगों ने कहा, "यह कैसा मनुष्य है, जिसकी आज्ञा हवा और पानी भी मानते हैं!"

समान सूत्र

यीशु ने बीमारों को छुआ, जैसे कोई उन्हें बहुत प्यार करता हो। वे डरते नहीं थे, छूने से भी नहीं। उस सैनिक ने कहा कि यीशु का एक शब्द काफी है। यही सच है। यीशु का एक शब्द बीमारी को, तूफान को, सब कुछ को बदल सकता है। परमेश्वर ऐसे ही हैं, बोलते हैं और चीज़ें बदल जाती हैं।

तुम्हारे लिए

कभी तुम भी डरते हो? अंधेरे से, शोर से, अकेलेपन से? चेले भी डरे थे। पर यीशु वहीं थे, नाव में, साथ में। तुम जब डरो, तो यीशु से कह सकते हो, "प्रभु, मुझे बचाइए।" वे सुनते हैं। वे पास हैं।

बातचीत के लिए

जब तुम डरते हो, तो तुम किससे कहते हो?

तुम्हें क्या लगता है, यीशु ने उस बीमार आदमी को क्यों छुआ?

साथ में प्रार्थना

प्रिय यीशु, आप बहुत ताकतवर हैं। आपने बीमारों को ठीक किया। आपने तूफान को शांत किया। जब मैं डरूँ, तो मुझे याद दिलाइए कि आप मेरे पास हैं। आमीन।

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मत्ती 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मत्ती 8 किस विषय में है?
पहाड़ से यीशु नीचे उतरे। बहुत सारे लोग उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। तभी एक आदमी आया। उसकी त्वचा पर घाव थे। बहुत बुरे घाव। वह झुका और बोला, "प्रभु, आप चाहें तो मुझे ठीक कर सकते हैं।"
मत्ती 8 क्या कहता है?
फिर यीशु एक शहर में गए। वहाँ एक सैनिक आया। उसका नौकर घर में बीमार पड़ा था। बहुत दुखी। सैनिक ने कहा, "प्रभु, बस कह दीजिए। आपको मेरे घर आने की भी ज़रूरत नहीं। मैं जानता हूँ, आपका एक शब्द काफी है।" यीशु को यह सुनकर अचरज हुआ। उन्होंने कहा, "ऐसा भरोसा मैंने कहीं नहीं देखा।" और वैसा ही हुआ। उसी पल नौकर ठीक हो गया।
मत्ती 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
शाम हुई। बहुत सारे बीमार लोग लाए गए। यीशु ने सबको ठीक किया। एक-एक को।
नन्हे बच्चे मत्ती 8 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु में बहुत बड़ी ताकत है। वे बीमारी को ठीक कर सकते हैं। वे तूफान को भी शांत कर सकते हैं। किसी और के पास इतनी ताकत नहीं। लोगों ने कहा, "यह कैसा मनुष्य है, जिसकी आज्ञा हवा और पानी भी मानते हैं!"
मत्ती 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी तुम भी डरते हो? अंधेरे से, शोर से, अकेलेपन से? चेले भी डरे थे। पर यीशु वहीं थे, नाव में, साथ में। तुम जब डरो, तो यीशु से कह सकते हो, "प्रभु, मुझे बचाइए।" वे सुनते हैं। वे पास हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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