3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

फिलिप्पियों 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात थी। बहुत अँधेरी रात।

एक छोटे से कमरे में एक आदमी बैठा था। उसका नाम पौलुस था।

कमरा ठंडा था। दीवारें पत्थर की थीं। दरवाज़े पर एक बड़ा ताला था।

पौलुस जेल में था। वह बाहर नहीं जा सकता था।

उसके पैरों में लोहे की ज़ंजीर थी। वह खनकती थी। खन, खन, खन।

पास में एक छोटा सा दीया जल रहा था। उसकी रोशनी काँप रही थी।

पौलुस के हाथ में कागज़ था। और एक कलम।

क्या वह रो रहा था? नहीं।

पौलुस मुस्कुरा रहा था। सच में, वह खुश था।

वह अपने दोस्तों को चिट्ठी लिख रहा था। दूर एक शहर में उसके दोस्त रहते थे। उस शहर का नाम था फिलिप्पी।

पौलुस ने लिखा: "मैं तुम्हें याद करता हूँ। हर बार जब मैं तुम्हें याद करता हूँ, मैं परमेश्वर को धन्यवाद देता हूँ।"

बाहर एक सिपाही खड़ा था। उसके पास तलवार थी।

सिपाही ने सुना। पौलुस गा रहा था। पौलुस यीशु के बारे में बात कर रहा था।

सिपाही ने सोचा: यह आदमी जेल में है। फिर भी खुश है? क्यों?

इसका क्या अर्थ है?

पौलुस खुश था, क्योंकि यीशु उसके पास थे।

ताला दरवाज़े को बंद कर सकता था। ज़ंजीर पैरों को बाँध सकती थी।

पर यीशु को कोई बंद नहीं कर सकता था। यीशु अंदर भी थे, ठीक पौलुस के पास।

इसलिए पौलुस ने लिखा: "मैं आनन्दित हूँ। और आनन्दित रहूँगा भी।"

और उसने अपने दोस्तों के लिए प्रार्थना की। "परमेश्वर, इनका प्यार और बड़ा हो जाए।"

जुड़ा हुआ धागा

पौलुस ने एक और बात लिखी। एक बहुत सुंदर बात।

वह बात यह थी: परमेश्वर ने तुम में एक अच्छा काम शुरू किया है।

और परमेश्वर उसे पूरा भी करेंगे। वे बीच में नहीं छोड़ेंगे।

सोचो, कोई एक छोटा सा पौधा लगाता है। वह उसे रोज़ पानी देता है। रोज़, रोज़, रोज़। जब तक वह बड़ा न हो जाए।

परमेश्वर ऐसे ही हैं।

वे तुम्हें छोड़कर नहीं जाते। कभी नहीं।

यीशु ने पौलुस को नहीं छोड़ा, अँधेरी जेल में भी नहीं।

तुम्हारे लिए

कभी कभी तुम भी अकेले होते हो।

शायद रात में। अँधेरे में। बिस्तर में।

या तुम्हें डर लगता है। या तुम गिर गए और घुटना दुखता है।

तब याद रखना: यीशु पास हैं।

तुम उन्हें देख नहीं सकते। पर वे सुनते हैं।

पौलुस ने जेल में बात की। और यीशु ने सुना।

तुम अपने बिस्तर से बात कर सकते हो। और यीशु सुनते हैं।

और जानते हो पौलुस ने क्या किया? उसने अपने दोस्तों के बारे में सोचा।

तुम भी किसी के बारे में सोच सकते हो। किसी दोस्त के बारे में। और उसके लिए प्रार्थना कर सकते हो।

बात करो

अगर तुम अँधेरे कमरे में हो, तो तुम्हें कैसा लगता है?

तुम किस दोस्त के लिए आज प्रार्थना करना चाहते हो?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु यीशु,

आप हमेशा पास रहते हैं।

अँधेरे में भी। धन्यवाद।

मेरे दोस्तों को भी संभालिए।

आमीन।

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फिलिप्पियों 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

फिलिप्पियों 1 किस विषय में है?
वह अपने दोस्तों को चिट्ठी लिख रहा था। दूर एक शहर में उसके दोस्त रहते थे। उस शहर का नाम था फिलिप्पी।
फिलिप्पियों 1 क्या कहता है?
सिपाही ने सुना। पौलुस गा रहा था। पौलुस यीशु के बारे में बात कर रहा था।
फिलिप्पियों 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
ताला दरवाज़े को बंद कर सकता था। ज़ंजीर पैरों को बाँध सकती थी।
नन्हे बच्चे फिलिप्पियों 1 से क्या सीख सकते हैं?
इसलिए पौलुस ने लिखा: "मैं आनन्दित हूँ। और आनन्दित रहूँगा भी।"
फिलिप्पियों 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
वह बात यह थी: परमेश्वर ने तुम में एक अच्छा काम शुरू किया है।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

पौलुस की प्रार्थना यह नहीं थी कि तुम बुरे और भले में फर्क कर सको, वह तो साफ है। वह चाहता था कि तुम "उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो।" सबसे कठिन चुनाव अच्छे और बुरे के बीच नहीं, दो अच्छी चीज़ों के बीच होता है। और यह समझ किताबों से नहीं, बढ़ते हुए प्रेम से आती है। आज तुम्हारा समय किस अच्छी चीज़ पर लग रहा है, जो सबसे उत्तम चीज़ को खा रही है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

जंजीरों में बंधा पौलुस अपनी तकलीफ़ नहीं गिनाता, वह कहता है, "इसमें परमेश्वर मेरा गवाह है कि मैं मसीह यीशु के समान प्रेम करके तुम सब की लालसा करता हूँ।" ध्यान दे, यह उसका अपना स्नेह नहीं, मसीह का स्नेह है जो उसके भीतर से बह रहा है। किसी के लिए तड़पना सिखाया नहीं जाता, वह मसीह के साथ रहने से भीतर उतरता है। आज तेरा दिल किसके लिए तड़पता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

कुछ लोग मसीह का प्रचार इसलिए कर रहे थे कि पौलुस की जंजीरों में और दुःख जोड़ें, "पर वे स्वार्थ से मसीह की घोषणा करते हैं, निष्कपटता से नहीं।" सोचो, जेल में बैठे आदमी को अपने ही भाइयों से चोट मिल रही थी। फिर भी पौलुस टूटा नहीं, क्योंकि उसकी खुशी अपने नाम पर नहीं, मसीह के नाम पर टिकी थी। तुम्हारी खुशी किस पर टिकी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

पौलुस जेल में बैठा है, और लिखता है, "चाहे मैं आकर तुम्हें देखूँ, चाहे न आऊँ।" यानी उसकी मौजूदगी उनके खड़े रहने की शर्त नहीं थी। कोई देख रहा हो या न देख रहा हो, चाल-चलन वही रहे।

सोचो, जब कोई आत्मिक सहारा देनेवाला पास नहीं होता, तब तुम्हारा चलना कैसा होता है? वहीं पता चलता है कि सुसमाचार तुम्हारे भीतर कितना गहरा उतरा है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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