3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

नीतिवचन 14

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

परमेश्वर की व्याख्या

एक घर था। उस घर में एक माँ रहती थी। माँ बहुत बुद्धिमान थी। वह हर दिन अपने हाथों से घर को सुंदर बनाती थी। झाड़ू लगाती, खाना बनाती, बच्चों को प्यार करती।

पर एक और घर था। उस घर में भी एक माँ थी। वह मूर्ख थी। उसने अपने ही हाथों से अपना घर तोड़ दिया। कैसे? वह चिल्लाती थी। वह झगड़ा करती थी। धीरे धीरे घर उदास हो गया।

बुद्धिमान लोग सच बोलते हैं। मूर्ख लोग झूठ बोलते हैं। सुनो, एक खेत में एक बैल था। बैल बड़ा और मजबूत। उसके बिना खेत खाली रहता, कोई अन्न नहीं उगता। पर बैल के साथ, अन्न बहुत बढ़ता। बैल से थोड़ा काम भी होता है, गंदगी भी होती है। पर बिना बैल के कुछ भी नहीं मिलता।

इसका क्या मतलब है?

सुनो, कोई रास्ता होता है जो देखने में सीधा लगता है। पर उसके अंत में मृत्यु मिलती है। यह डरावना लगता है, है ना? इसलिए बुद्धिमान लोग डरकर बुराई से हटते हैं। जैसे कोई गरम चूल्हे से हाथ हटा लेता है, वैसे ही।

क्रोध जल्दी आ जाता है। पर जो धीरे से क्रोध करता है, वह समझदार है। शांत मन शरीर को भी अच्छा रखता है। पर जलन से हड्डियाँ भी गल जाती हैं। इसलिए शांत रहना अच्छा है।

समान सूत्र

यहोवा का भय मानना, जीवन का सोता है। सोता मतलब पानी का झरना, जो कभी नहीं सूखता। यहोवा के भय में दृढ़ भरोसा है। यह उनकी संतानों के लिए शरणस्थान होगा। शरणस्थान मतलब सुरक्षित जगह, जैसे माँ की गोद।

धर्मी को मृत्यु के समय भी शरण मिलती है। यीशु मसीह भी यही करते हैं। वे अपनी बाहों में बच्चों को उठाते हैं। वे कहते हैं, आओ, मेरे पास आओ। मैं तुम्हें सुरक्षित रखूँगा।

तुम्हारे लिए

जो दीन लोगों पर अनुग्रह करता, वह धन्य होता है। दीन मतलब जिनके पास कम है, जो कमजोर हैं। क्या तुम अपने छोटे भाई या बहन के साथ प्यार से खेलते हो? क्या तुम किसी दुखी दोस्त को गले लगाते हो?

परमेश्वर देखते हैं जब तुम प्यार करते हो। वे खुश होते हैं।

बातचीत के लिए

जब तुम्हें गुस्सा आता है, तुम क्या करते हो?

तुम किसे प्यार से मदद कर सकते हो, आज?

आओ मिलकर प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर,

आप हमारे शरणस्थान हैं। हमें शांत मन दीजिए। हमें प्यार करना सिखाइए। धन्यवाद कि आप हमें सुरक्षित रखते हैं।

यीशु के नाम में, आमीन।

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नीतिवचन 14 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नीतिवचन 14 किस विषय में है?
एक घर था। उस घर में एक माँ रहती थी। माँ बहुत बुद्धिमान थी। वह हर दिन अपने हाथों से घर को सुंदर बनाती थी। झाड़ू लगाती, खाना बनाती, बच्चों को प्यार करती।
नीतिवचन 14 क्या कहता है?
बुद्धिमान लोग सच बोलते हैं। मूर्ख लोग झूठ बोलते हैं। सुनो, एक खेत में एक बैल था। बैल बड़ा और मजबूत। उसके बिना खेत खाली रहता, कोई अन्न नहीं उगता। पर बैल के साथ, अन्न बहुत बढ़ता। बैल से थोड़ा काम भी होता है, गंदगी भी होती है। पर बिना बैल के कुछ भी नहीं मिलता।
नीतिवचन 14 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
क्रोध जल्दी आ जाता है। पर जो धीरे से क्रोध करता है, वह समझदार है। शांत मन शरीर को भी अच्छा रखता है। पर जलन से हड्डियाँ भी गल जाती हैं। इसलिए शांत रहना अच्छा है।
नन्हे बच्चे नीतिवचन 14 से क्या सीख सकते हैं?
धर्मी को मृत्यु के समय भी शरण मिलती है। यीशु मसीह भी यही करते हैं। वे अपनी बाहों में बच्चों को उठाते हैं। वे कहते हैं, आओ, मेरे पास आओ। मैं तुम्हें सुरक्षित रखूँगा।
नीतिवचन 14 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर देखते हैं जब तुम प्यार करते हो। वे खुश होते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

सच्चा साक्षी प्राण बचाने वाला होता है, परन्तु जो झूठी बातें उड़ाता है, वह छल करता है।" यह अदालत की बात है, जहाँ किसी की जान एक गवाही पर टिकी होती है। सोचो, तुम्हारा सच बोलना किसी को बचा सकता है। और तुम्हारी चुप्पी या हल्की सी बढ़ा चढ़ाकर कही बात किसी को डुबा सकती है। आज किसके बारे में तुम्हें सच कहना है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

जो झट क्रोध करे, वह मूर्खता का काम करेगा, और जो बुरी युक्ति निकालता है, उससे लोग बैर रखते हैं।"

गौर कर, यहाँ दो लोग हैं। एक गरम, जो पल भर में भड़क उठता है। दूसरा ठंडा, जो शांति से बैठकर बदला सोचता है। हम अक्सर पहले वाले को ही पापी समझते हैं और दूसरे को समझदार।

तेरा गुस्सा किस तरह का है? जो फूट पड़ता है, या जो चुपचाप योजना बनाता है?

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हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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