3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

सभोपदेशक 7

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

कहानी क्या कहती है

एक बार एक बुद्धिमान राजा था। उसका नाम था सुलैमान। सुलैमान ने बहुत सोचा। वह सोचता रहा। वह सोचता रहा।

सुलैमान ने देखा कि जीवन में सब कुछ एक जैसा नहीं होता। कभी धूप। कभी बारिश। कभी हँसी। कभी आँसू।

सुलैमान ने कहा, "सुनो! एक अच्छा नाम बहुत खास होता है। जब लोग तुम्हारा नाम सुनें, तो मुस्कुराएँ। यह सबसे सुंदर इत्र से भी अच्छा है।"

फिर सुलैमान ने कुछ और कहा। "कभी-कभी हम रोते हैं। कभी-कभी हम दुखी होते हैं। पर परमेश्वर तब भी हमारे पास हैं। वे सुख के दिन देते हैं। और वे कठिन दिन भी देखते हैं।"

सुलैमान ने कहा, "जल्दी गुस्सा मत करो। रुको। साँस लो। परमेश्वर धीरज देते हैं।"

इसका क्या मतलब है

सुलैमान बहुत बुद्धिमान थे। पर वे जानते थे कि परमेश्वर उनसे भी बड़े हैं। परमेश्वर सब कुछ जानते हैं। हम सब कुछ नहीं जानते।

कभी-कभी दिन खुशी वाला होता है। तब हम खेलते हैं। हम गाते हैं। हम हँसते हैं।

कभी-कभी दिन उदास होता है। शायद कोई गिर गया। शायद खिलौना टूट गया। शायद कोई डाँट पड़ी।

पर देखो! परमेश्वर दोनों दिनों में हैं। खुशी वाले दिन भी। और उदास दिन भी। वे कभी दूर नहीं जाते।

बड़ी कहानी

सुलैमान ने कहा, "पृथ्वी पर कोई भी एकदम अच्छा नहीं है।" सब लोग कभी न कभी गलती करते हैं। तुम भी। मैं भी। सब।

पर सुनो! परमेश्वर ने एक बेटा भेजा। उनका नाम है यीशु। यीशु कभी गलती नहीं करते थे। वे एकदम अच्छे थे।

यीशु हमसे प्यार करते हैं। जब हम गलती करते हैं, हम यीशु से कहते हैं। और वे माफ कर देते हैं। वे हमारा हाथ पकड़ते हैं।

यीशु सबसे बड़े बुद्धिमान हैं। सुलैमान से भी बड़े। वे हमें रास्ता दिखाते हैं।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हें आज हँसी आई? यह परमेश्वर की देन है। उन्हें धन्यवाद कहो।

क्या तुम्हें आज रोना आया? परमेश्वर तुम्हें देख रहे थे। वे तुम्हारे पास थे।

और अगली बार जब गुस्सा आए, याद रखो। रुको। साँस लो। परमेश्वर से कहो, "मेरी मदद कीजिए।"

बात करो

तुम्हें आज किस बात से खुशी हुई? और किस बात से दुख हुआ?

जब तुम्हें गुस्सा आता है, तब तुम क्या कर सकते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हर दिन मेरे साथ हैं। खुशी वाले दिन भी। उदास दिन भी। मुझे धीरज दीजिए। और यीशु का हाथ थामना सिखाइए। आमीन।

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सभोपदेशक 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

सभोपदेशक 7 किस विषय में है?
एक बार एक बुद्धिमान राजा था। उसका नाम था सुलैमान। सुलैमान ने बहुत सोचा। वह सोचता रहा। वह सोचता रहा।
सभोपदेशक 7 क्या कहता है?
सुलैमान ने कहा, "जल्दी गुस्सा मत करो। रुको। साँस लो। परमेश्वर धीरज देते हैं।"
सभोपदेशक 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पर देखो! परमेश्वर दोनों दिनों में हैं। खुशी वाले दिन भी। और उदास दिन भी। वे कभी दूर नहीं जाते।
नन्हे बच्चे सभोपदेशक 7 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु सबसे बड़े बुद्धिमान हैं। सुलैमान से भी बड़े। वे हमें रास्ता दिखाते हैं।
सभोपदेशक 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें आज किस बात से खुशी हुई? और किस बात से दुख हुआ?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

हँसी से खेद उत्तम है, क्योंकि उदास मुख से मन सुधरता है।" सुलैमान हँसी के विरुद्ध नहीं है, वह उस हँसी के विरुद्ध है जो सच्चाई से बचकर भागती है। दुख तुम्हें बैठाकर वह सवाल पूछता है जिसे तुम भीड़ और शोर में टालते रहे। जो आँसू तुम आज रो रहे हो, शायद वही तुम्हारे भीतर कुछ सीधा कर रहे हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

अति धर्मी न बन, और न अपने आप को बुद्धिमान बना; तू अपने आप को क्यों नाश करे?"

यह पाप करने की छूट नहीं है। यह उस थकान की चेतावनी है जो अपने आप को सिद्ध साबित करते रहने से आती है। जब धार्मिकता एक नाप बन जाती है, तो पहले हम दूसरों को नापते हैं, फिर खुद को, और अंत में परमेश्वर को भी।

तू क्या साबित करने में घिस रहा है? उसने तुझे पहले ही अपना कहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

सुख के दिन में आनन्दित रह, और दुःख के दिन में सोच; क्योंकि परमेश्वर ने दोनों को एक साथ रखा है, ताकि मनुष्य अपने बाद होनेवाली किसी बात को न जान सके।" कल का पन्ना तुझसे छिपा है, यह सज़ा नहीं, दया है। अच्छे दिन को पूरे मन से जी ले, और भारी दिन में बैठकर सोच कि परमेश्वर तुझे क्या सिखा रहा है। दोनों उसी के हाथ से आते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

किसी बात के आरम्भ से उसका अन्त उत्तम है, और अधीर मनुष्य से धीरजवन्त उत्तम है।"

शुरुआत में उत्साह होता है, वादे होते हैं, सपने होते हैं। पर अन्त में सच्चाई सामने आती है, क्या टिका, क्या फल आया।

तू शायद बीच में है, थका हुआ, फल की राह देखता हुआ। रुक मत। धीरज रख। जो शुरू हुआ, उसका अन्त उससे भी सुन्दर होगा।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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