3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

रोमियों 7

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात हो गई थी। बाहर सब शांत था। एक छोटे कमरे में दीपक जल रहा था। दीपक की लौ धीरे-धीरे हिल रही थी।

वहाँ पौलुस बैठा था। उसके हाथ में कलम थी। पौलुस एक चिट्ठी लिख रहा था। अपने दोस्तों के लिए।

उसने कलम स्याही में डुबोई। फिर वह चुप हो गया। वह अपने दिल के बारे में सोचने लगा।

पौलुस ने लिखा: "मेरे भाइयों, सुनो। मैं अच्छा करना चाहता हूँ। बहुत अच्छा। पर कभी-कभी मैं अच्छा नहीं करता।"

पौलुस ने आगे लिखा: "परमेश्वर कहते हैं: लालच मत कर। यह बात अच्छी है। बहुत अच्छी। पर मेरे भीतर कुछ है। वह कहता है: मुझे चाहिए! मुझे चाहिए!"

पौलुस ने कलम रख दी। वह उदास था। उसने कहा: "जो मैं चाहता हूँ, वह मैं नहीं करता। और जो मैं नहीं चाहता, वही कर बैठता हूँ।"

दीपक जलता रहा। कमरा शांत था। पौलुस ने धीरे से कहा: "आह! मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ। मुझे कौन बचाएगा?"

इसका क्या अर्थ है?

पौलुस चुप बैठा रहा। बहुत देर तक।

और फिर… फिर उसे कुछ याद आया। कुछ बहुत सुंदर।

उसे यीशु याद आए।

पौलुस के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने जल्दी से कलम उठाई। उसने लिखा: "परमेश्वर का धन्यवाद हो! हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा!"

पौलुस अकेला नहीं था। कोई उसे बचाने आया था। यीशु।

जोड़नेवाला धागा

यीशु मर गए थे। पर वे कब्र में नहीं रहे। परमेश्वर ने उन्हें जिला दिया। यीशु जी उठे! वे जीवित हैं।

और यीशु कहते हैं: "अब तुम मेरे हो।"

पौलुस अब यीशु का था। पूरी तरह। जैसे एक पेड़ अच्छे फल देता है, ऐसे ही पौलुस का दिल अब परमेश्वर के लिए अच्छे फल देने लगा।

पौलुस ने चिट्ठी मोड़ दी। वह खुश था। बहुत खुश।

तुम्हारे लिए

तुम्हारे दिल में भी कभी ऐसा होता है।

तुम सोचते हो: मैं अपनी गाड़ी बाँट दूँगा। मैं अच्छा बनूँगा।

और फिर तुम गाड़ी कस के पकड़ लेते हो। तुम कहते हो: नहीं! मेरी है!

और बाद में तुम्हारा पेट भारी लगता है। तुम्हें अच्छा नहीं लगता।

पौलुस को भी ऐसा लगता था। सुनो, तुम अकेले नहीं हो।

तुम यीशु को बुला सकते हो। बस कहो: "यीशु, मेरी मदद कीजिए।"

यीशु सुनते हैं। हर बार। और वे तुमसे बहुत प्यार करते हैं।

इस पर बात करो

कभी ऐसा हुआ है कि तुमने कुछ अच्छा करना चाहा, पर कर नहीं पाए? बताओ।

पौलुस को कौन बचाने आया? और वे तुम्हें भी बचाते हैं। यह सुनकर तुम्हें कैसा लगता है?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु यीशु,

मैं अच्छा बनना चाहता हूँ।

पर कभी-कभी मैं नहीं बन पाता।

आप मेरी मदद कीजिए।

धन्यवाद कि आप जीवित हैं।

धन्यवाद कि मैं आपका हूँ।

आमीन।

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रोमियों 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

रोमियों 7 किस विषय में है?
रात हो गई थी। बाहर सब शांत था। एक छोटे कमरे में दीपक जल रहा था। दीपक की लौ धीरे-धीरे हिल रही थी।
रोमियों 7 क्या कहता है?
पौलुस ने लिखा: "मेरे भाइयों, सुनो। मैं अच्छा करना चाहता हूँ। बहुत अच्छा। पर कभी-कभी मैं अच्छा नहीं करता।"
रोमियों 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
दीपक जलता रहा। कमरा शांत था। पौलुस ने धीरे से कहा: "आह! मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ। मुझे कौन बचाएगा?"
नन्हे बच्चे रोमियों 7 से क्या सीख सकते हैं?
पौलुस अब यीशु का था। पूरी तरह। जैसे एक पेड़ अच्छे फल देता है, ऐसे ही पौलुस का दिल अब परमेश्वर के लिए अच्छे फल देने लगा।
रोमियों 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम यीशु को बुला सकते हो। बस कहो: "यीशु, मेरी मदद कीजिए।"

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

पौलुस अपनी हार में भी एक गवाही ढूँढ़ लेता है: "यदि मैं वह करता हूँ जो मैं नहीं चाहता, तो मैं मान लेता हूँ कि व्यवस्था भली है।" सोचो, जो बेचैनी पाप करने के बाद तुम्हारे भीतर उठती है, वही सबूत है कि परमेश्वर की आज्ञा तुम्हें अब भी सुंदर लगती है। वह कसक दुश्मन नहीं, गवाह है। उसे दबाओ मत, उसे लेकर मसीह के पास जाओ।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

पौलुस यहाँ विवाह का उदाहरण दे रहा है। जब तक पति जीवित है, पत्नी बंधी हुई है। पर मृत्यु के बाद वह स्वतंत्र है। यह सिर्फ नियम की बात नहीं, यह हमारी कहानी है। व्यवस्था से हमारा पुराना बंधन मसीह की मृत्यु में टूट गया। अब तुम किसी और के हो, उसके जो मरे हुओं में से जी उठा। क्या तुम अब भी पुराने पति की तरह व्यवस्था से डरते हुए जी रहे हो?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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