रूत 3
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक दिन नाओमी ने रूत से कहा, "मेरी बेटी।" उसकी आवाज़ नरम थी, जैसे माँ की आवाज़ होती है। नाओमी को रूत की बहुत चिंता थी। नाओमी ने कहा, "बोअज़ हमारे कुटुम्बी हैं। आज रात वे खलिहान में जौ फटकेंगे। हवा में जौ की खुशबू फैलेगी।" नाओमी ने कहा, "स्नान कर, तेल लगा, अच्छे कपड़े पहन। फिर खलिहान जा। पर चुपचाप जाना, धीरे धीरे।" रूत ने सुना। उसने कहा, "जो आप कहती हैं, वही करूँगी।"
रात हो गई। बहुत अंधेरी रात। ऊपर तारे टिमटिमा रहे थे। बोअज़ ने खाया, पिया। उनका मन खुश था, भरा पेट, थकी हुई बाँहें। वे जौ के बड़े ढेर के पास लेट गए। जौ की गंध हर तरफ थी। सब चुप हो गया। बहुत चुप। सिर्फ पवन की सरसराहट। रूत धीरे धीरे आई, बहुत धीरे, जैसे बिल्ली के पंजे। उसने बोअज़ के पाँव के पास लेट गई।
इसका अर्थ क्या है?
आधी रात हुई। अचानक बोअज़ चौंक गए। उन्होंने झुककर देखा, अरे, यहाँ कोई स्त्री लेटी है! उनका दिल तेज़ धड़का। उन्होंने पूछा, "तू कौन है?" रूत ने धीरे से कहा, "मैं रूत हूँ। अपनी चद्दर मुझे ओढ़ा दें। आप हमारी रक्षा कर सकते हैं।"
बोअज़ ने कहा, "डर मत, बेटी। तू भली स्त्री है।" उनकी आवाज़ गर्म थी, दया से भरी, जैसे धूप। वे बोले, "मैं तेरी मदद करूँगा। पर एक और कुटुम्बी है, उससे पहले पूछना होगा।"
रूत रातभर वहाँ लेटी रही, शांत, बिना डरे। भोर होने से पहले, जब आसमान अभी भूरा था, वह उठी। बोअज़ ने कहा, "अपनी चद्दर फैला।" उन्होंने उसमें बहुत जौ भर दिया, ढेर सारा जौ। भारी बोरा! रूत उसे उठाकर घर ले गई, कदम कदम, अंधेरे रास्ते पर।
मुख्य सूत्र
नाओमी ने पूछा, "बेटी, क्या हुआ?" रूत ने सब कुछ बताया, हर बात, बिना छुपाए। फिर उसने जौ की बोरी दिखाई। कितना जौ था! नाओमी की आँखें चमक उठीं। उसने कहा, "अब चैन से बैठ। बोअज़ इस काम को पूरा करेंगे।"
बोअज़ एक अच्छे आदमी थे। उन्होंने रूत को खाली हाथ नहीं भेजा। परमेश्वर भी ऐसे ही हैं। वे अपने बच्चों को खाली हाथ नहीं भेजते। वे हमेशा कुछ अच्छा देते हैं, कुछ जो पेट भरे और दिल को शांति दे। बहुत समय बाद, इसी परिवार में यीशु मसीह का जन्म हुआ। परमेश्वर ने रूत को नहीं भूला था, एक पल के लिए भी नहीं।
तुम्हारे लिए
क्या तुमने कभी अंधेरे में डर लगा है? रूत भी डर सकती थी। पर वह चली गई, क्योंकि उसे नाओमी पर भरोसा था। परमेश्वर पर भी भरोसा किया जा सकता है, हर दिन, हर रात, यहाँ तक कि अंधेरे में भी।
बात करें
रूत रात में खलिहान क्यों गई थी?
बोअज़ ने रूत को जाने से पहले क्या दिया?
साथ में प्रार्थना
प्रभु, धन्यवाद कि आप हमें कभी खाली हाथ नहीं भेजते। जैसे बोअज़ ने रूत को जौ दिया, वैसे ही आप हमें भी अच्छी चीज़ें देते हैं। हमें डर से बचाइए, दिन में और रात में भी। आमीन।
रूत 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
रूत 3 किस विषय में है?
रूत 3 क्या कहता है?
रूत 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे रूत 3 से क्या सीख सकते हैं?
रूत 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
नाओमी ने बेतलेहेम लौटते समय कहा था, "मैं भरी पूरी चली गई थी, परन्तु यहोवा ने मुझे खाली हाथ लौटा दिया है।" और अब बोअज़ रूत से कहता है, "अपनी सास के पास खाली हाथ न जा।" जो शब्द उसके दुःख का था, वही शब्द अब उसकी आशा बन गया। परमेश्वर तुम्हारी शिकायत को याद रखता है, और चुपचाप उसी जगह भरना शुरू करता है।
नाओमी की सलाह में एक बात चुभती है: रूत को खुद कुछ माँगना नहीं था, बस बोअज़ के पाँवों के पास लेट जाना था. "तब वह आप ही तुझे बता देगा कि तुझे क्या करना है." यह भरोसा है, बेबसी भी. तू भी कभी अपनी ज़रूरत किसी के पाँवों में रखकर चुप रहा है? हमारा छुड़ानेवाला ऐसे ही चुप पड़े दिल को पहचान लेता है.
रूत मोआब की थी, विधवा थी, दूसरों के खेतों में बचे हुए सिले बीनती थी। फिर भी बोअज कहता है, "मेरे नगर के फाटक में रहनेवाले सब जानते हैं कि तू भली स्त्री है।" उसने अपने बारे में कोई सफाई नहीं दी थी। नाओमी के प्रति उसकी वफादारी ही पूरे नगर में उसका परिचय बन गई। तेरे चुपचाप किए हुए काम भी बोलते हैं। लोग जो तेरे बारे में जानते हैं, वह तेरी बातों से नहीं, तेरे रोज़ के व्यवहार से बना है।
नाओमी रूत से कहती है, "हे मेरी बेटी, जब तक तू न जान ले कि इस बात का कैसा फल निकलेगा, तब तक चुपचाप बैठी रह।" रूत ने अपना काम कर दिया था, अब बैठ जाना ही उसका काम था। और कारण यह था कि बोअज चैन से नहीं बैठेगा जब तक बात निपट न जाए।
तेरा चुपचाप बैठना आलस नहीं, भरोसा है। कोई और तेरे लिए बेचैन है।
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