तीतुस 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
समुद्र के किनारे एक छोटा सा गाँव था। सुबह हुई। सूरज गरम था। हवा में नमक की खुशबू थी।
वहाँ तीतुस रहता था। उसके हाथ में एक चिट्ठी थी। चिट्ठी उसके दोस्त पौलुस ने भेजी थी।
तीतुस ने चिट्ठी खोली। वह पढ़ने लगा। और फिर उसने सब लोगों को बुलाया।
लोग आए। बहुत सारे लोग आए। बूढ़े दादा जी आए, धीरे-धीरे चलते हुए। बूढ़ी दादी जी आईं, अपनी छड़ी के साथ। जवान माँएँ आईं, गोद में छोटे बच्चे लेकर। जवान लड़के आए, दौड़ते हुए। काम करने वाले लोग भी आए।
सब बैठ गए। सब चुप हो गए। तीतुस ने कहा, "सुनो! परमेश्वर की बात सुनो।"
इसका क्या अर्थ है?
तीतुस ने दादा जी की तरफ देखा। उसने कहा, "आप शांत रहिए। परमेश्वर पर भरोसा रखिए। और सबसे प्रेम कीजिए।"
फिर उसने दादी जी की तरफ देखा। "आप अच्छी बातें सिखाइए। किसी को बुरा मत कहिए।"
फिर माँओं की तरफ। "अपने बच्चों से प्रेम कीजिए। अपने घर का ध्यान रखिए।"
फिर लड़कों की तरफ। "तुम भी समझदार बनो।"
फिर काम करने वालों की तरफ। "तुम चोरी मत करो। सच बोलो।"
और तीतुस ने कहा, "और मैं? मैं भी अच्छा करूँगा। तुम मुझे देख सकते हो।"
सब लोग सुनते रहे। एक छोटी लड़की ने पूछा, "क्यों? हम क्यों अच्छा करें?"
जोड़ने वाला धागा
तीतुस मुस्कुराया। उसने चिट्ठी ऊपर उठाई।
उसने कहा, "क्योंकि परमेश्वर ने हमें एक तोहफा दिया।"
सब चुप हो गए। बहुत चुप।
"परमेश्वर ने यीशु को भेजा," तीतुस ने कहा। "यीशु ने खुद को हमारे लिए दे दिया। वे हमें गंदी बातों से छुड़ाते हैं। वे हमें साफ करते हैं। बिलकुल साफ। जैसे धुले हुए कपड़े।"
"और अब हम यीशु के हैं," तीतुस ने कहा। "उनके अपने लोग।"
हवा चली। समुद्र की लहरें आवाज़ करती रहीं। और लोगों के दिल गरम हो गए।
तीतुस ने आखिरी बात कही। "और एक दिन यीशु फिर आएँगे। हम उनका इंतज़ार करते हैं।"
तुम्हारे लिए
तीतुस की चिट्ठी में तुम्हारे लिए भी जगह है।
तुम छोटे हो। पर तुम भी यीशु के हो।
तुम सच बोल सकते हो। तब भी, जब गिलास तुमने गिराया हो।
तुम अपनी रोटी बाँट सकते हो। आधी तुम्हारी, आधी दोस्त की।
तुम "माफ़ करना" कह सकते हो। छोटे मुँह से, छोटी सी आवाज़ में।
और जब तुम ऐसा करते हो, तो लोग देखते हैं। और वे सोचते हैं, "कितना सुंदर!"
क्योंकि यीशु तुमसे प्रेम करते हैं। पहले से ही। हमेशा।
बात करें
तुम आज किसे कुछ दे सकते हो? रोटी, या खिलौना, या एक प्यारी बात?
यीशु ने तुम्हें साफ किया है। तुम्हें कैसा लगता है, जब कोई तुमसे कहता है, "मैं तुमसे प्रेम करता हूँ"?
साथ मिलकर प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर,
धन्यवाद कि आपने यीशु को भेजा।
धन्यवाद कि मैं आपका हूँ।
मुझे सच बोलना सिखाइए।
मुझे बाँटना सिखाइए।
आमीन।
तीतुस 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
तीतुस 2 किस विषय में है?
तीतुस 2 क्या कहता है?
तीतुस 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे तीतुस 2 से क्या सीख सकते हैं?
तीतुस 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस यहाँ दासों से बात कर रहा है, उन लोगों से जिनके पास न पद था, न आवाज़। फिर भी कहता है कि वे "हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर के उपदेश की शोभा बढ़ाएँ।" जैसे गहना किसी को सुंदर बना देता है, वैसे ही तेरी छोटी सी ईमानदारी परमेश्वर की शिक्षा को सुंदर बनाती है। जो पैसा तूने नहीं चुराया, जो काम तूने पूरा किया, वही आज सुसमाचार का गहना है।
ध्यान दे, पौलुस सूची के अंत में कारण जोड़ता है: "कि परमेश्वर के वचन की निंदा न होने पाए।" यानी तेरा घर, तेरी रसोई, तेरे छोटे छोटे फैसले परमेश्वर के नाम से जुड़े हैं। जिसे कोई नहीं देखता, वहीं सुसमाचार की इज़्ज़त बनती या बिगड़ती है। तेरा साधारण दिन भी उसकी गवाही है।
पौलुस बूढ़ी स्त्रियों को मंच नहीं देता, वह उनकी जीभ की बात करता है। "दोष लगानेवाली और पियक्कड़ नहीं, पर अच्छी बातें सिखानेवाली हों।" वही मुँह जो किसी की इज़्ज़त उतार सकता है, वही किसी जवान बहन को थाम भी सकता है। आज तेरी बातचीत में कौन सा मुँह बोल रहा है? रसोई और फोन कॉल भी कक्षा हैं।
पौलुस ने अभी अभी बताया था कि बुज़ुर्ग, जवान और दास कैसे जिएँ, और फिर लिखता है, "क्योंकि परमेश्वर का वह अनुग्रह प्रगट हुआ है, जो सब मनुष्यों के उद्धार का कारण है।" उस छोटे से शब्द "क्योंकि" पर रुक जा। तेरे बदलने की ताकत तेरे इरादों में नहीं, उस अनुग्रह में है जो पहले ही आ चुका है। वह छिपा नहीं रहा। आज तेरी रसोई में, तेरे काम की जगह पर, वही अनुग्रह तुझे चुपचाप सिखा रहा है।
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