गलातियों 6
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
शाम हो चुकी थी। एक छोटे से कमरे में दीया जल रहा था। दीये की लौ धीरे-धीरे हिल रही थी। मेज़ पर एक बड़ा कागज़ रखा था। और वहाँ पौलुस बैठा था।
पौलुस परमेश्वर का दोस्त था। उसके हाथ थके हुए थे। पर वह लिखना चाहता था। वह अपने दोस्तों को चिट्ठी लिख रहा था। धीरे-धीरे। एक-एक अक्षर।
"देखो," पौलुस ने लिखा। "मैंने कितने बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है!" बहुत बड़े अक्षर। ताकि सब पढ़ सकें। ताकि कोई भूले नहीं।
और पौलुस ने यह लिखा: एक दूसरे का बोझ उठाओ।
इसका क्या अर्थ है?
बोझ क्या होता है? बोझ भारी चीज़ होती है।
सोचो, एक बच्चा एक टोकरी उठाए चल रहा है। टोकरी बहुत भारी है। उसके हाथ दुखते हैं। उसका मुँह लाल हो गया है। वह रुक जाता है।
तभी कोई आता है। और टोकरी का दूसरा कान पकड़ लेता है। अब टोकरी हल्की हो गई! दोनों साथ-साथ चलते हैं।
कभी-कभी बोझ दिखाई नहीं देता। कोई बच्चा उदास होता है। कोई डरता है। वह भी भारी होता है। तब तुम पास जाकर बैठ सकते हो। तब तुम भी बोझ उठाते हो।
फिर पौलुस ने खेत की बात लिखी। एक किसान खेत में जाता है। उसके हाथ में छोटे-छोटे बीज हैं। वह बीज मिट्टी में डालता है। एक, दो, तीन, और भी बहुत सारे।
फिर वह इंतज़ार करता है। बारिश आती है। सूरज गरम-गरम चमकता है। कुछ दिखाई नहीं देता। पर नीचे, मिट्टी के अंदर, बीज बढ़ रहा है।
और एक दिन! हरे-हरे पौधे बाहर आते हैं। पूरा खेत भर जाता है।
पौलुस कहता है: जो तुम बोते हो, वही उगता है। अच्छाई बोओ। और थको मत। सही समय पर वह उगेगी।
बड़ी कहानी का धागा
पर पौलुस ने सबसे ज़रूरी बात आखिर में लिखी।
पौलुस ने लिखा कि वह सिर्फ़ एक चीज़ पर खुश होता है। प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर।
क्योंकि सबसे भारी बोझ यीशु ने उठाया। हमारा बोझ। जो हम कभी उठा ही नहीं सकते थे।
और यीशु सब कुछ नया बना देते हैं। जैसे बीज से नया पौधा निकलता है। वैसे ही यीशु तुम्हें नया बनाते हैं। परमेश्वर तुमसे बहुत प्यार करते हैं।
तुम्हारे लिए
आज तुम भी एक छोटा बीज बो सकते हो।
तुम माँ के लिए कुछ उठा सकते हो। तुम अपना खिलौना बाँट सकते हो। तुम किसी उदास बच्चे के पास बैठ सकते हो।
छोटा सा काम। छोटे बीज जैसा। पर परमेश्वर उसे देखते हैं। और परमेश्वर उसे बढ़ाते हैं।
बात करें
तुम्हारा कौन सा बोझ भारी लगता है? किसने कभी तुम्हारी मदद की?
आज तुम किसकी मदद कर सकते हो?
मिलकर प्रार्थना
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप मेरा बोझ उठाते हैं। मुझे भी मदद करना सिखाइए। आज एक छोटा सा अच्छा काम। आमीन।
गलातियों 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
गलातियों 6 किस विषय में है?
गलातियों 6 क्या कहता है?
गलातियों 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे गलातियों 6 से क्या सीख सकते हैं?
गलातियों 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पर हर एक जन अपने ही काम को जाँच ले, तब उसे दूसरे के विषय में नहीं पर अपने ही विषय में घमण्ड करने का अवसर मिलेगा।"
तुलना हमेशा झूठ बोलती है। किसी से बेहतर दिखकर हम खुद को अच्छा मान लेते हैं, किसी से पीछे रहकर खुद को बेकार। पौलुस कहता है, नज़र दूसरे की थाली से हटाकर अपने काम पर डाल। परमेश्वर के सामने तेरा हिसाब सिर्फ तेरा है। आज तू किसके पैमाने पर खुद को तौल रहा है?
पौलुस अपनी बात यहीं खत्म करता है, "आगे को कोई मुझे दुःख न दे, क्योंकि मैं यीशु के दागों को अपनी देह में लिए फिरता हूँ।" जो लोग खतने के निशान पर घमंड कर रहे थे, उनके सामने पौलुस अपने कोड़ों और पत्थरों के निशान रखता है। ये उसका प्रमाणपत्र थे कि वह किसका है। तुम्हारे जीवन में मसीह के लिए उठाया कोई ऐसा दाग है, जिसे तुम छिपाते हो? वही शायद तुम्हारी सबसे सच्ची गवाही है।
तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।"
गौर करो, गिरे हुए भाई को उठाने की ज़िम्मेदारी उसे दी गई है जो आत्मिक है, पर साथ ही चेतावनी भी उसी को दी गई है। जो सुधारने जाता है, वही सबसे ज़्यादा खतरे में है, क्योंकि दूसरे का पाप देखकर खुद को ऊँचा समझना बहुत आसान है।
तुम किसी को संभालने जाते हो, तो किस लहजे में जाते हो?
जितने लोग शरीर में अच्छे दिखना चाहते हैं, वे तुम्हें खतना कराने के लिये विवश करते हैं, केवल इसलिए कि वे मसीह के क्रूस के कारण सताए न जाएँ।" पौलुस उनकी नीयत खोल देता है, बाहर से धार्मिकता, भीतर से डर। दूसरों पर नियम लादना आसान है, क्रूस की बदनामी उठाना कठिन। तू भी सोच, तेरी भक्ति में कितना कुछ सिर्फ दिखने के लिए है, और कितना यीशु के लिए?
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