1 तीमुथियुस 6
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
पौलुस अपनी इस पत्री के अंत में तीमुथियुस को कुछ बहुत सीधी बातें कहते हैं, ऐसी बातें जो सुनने में कठोर लग सकती हैं, पर जो असल में बहुत ईमानदार हैं। पहले वे दासों की बात करते हैं, जो उस समय के समाज की सच्चाई थी, और कहते हैं कि विश्वास किसी को अपने हालात से भागने का बहाना नहीं देता, बल्कि जहाँ आप हैं वहाँ ईमानदारी से जीने की ताकत देता है।
फिर पौलुस उन लोगों की बात करते हैं जो कुछ और ही सिखाते हैं, जो प्रभु यीशु मसीह की खरी बातों को नहीं मानते। ऐसे लोगों के बारे में वे कहते हैं कि उन्हें विवाद और शब्दों पर तर्क करने का रोग है। यह एक तीखा वाक्य है। पौलुस यह नहीं कह रहे कि सवाल पूछना बुरा है, बल्कि यह कि कुछ लोग भक्ति को पैसा कमाने का एक तरीका बना लेते हैं।
इसके बाद आता है वह वाक्य जो पूरे अध्याय का केंद्र है: "पर सन्तोष सहित भक्ति बड़ी लाभ है।" पौलुस बहुत साफ कहते हैं, हम खाली हाथ इस दुनिया में आए हैं और खाली हाथ ही जाएँगे। इसलिए रुपये का लोभ, धनी बनने की चाहत, यह सब आदमी को फंदे में फँसा देता है और अंत में विनाश की ओर ले जाता है। यह कोई हल्की चेतावनी नहीं है, पौलुस कहते हैं कि इस लोभ के पीछे भागते हुए कितने लोग विश्वास से भटक गए और अपने आपको दुखों से छलनी बना लिया।
फिर वे तीमुथियुस को, और हम सबको, एक और रास्ता दिखाते हैं: धार्मिकता, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज और नम्रता का पीछा करना। यह एक कुश्ती है, एक लड़ाई है, आराम से बैठकर मिलने वाली चीज़ नहीं। और इस लड़ाई के अंत में अनन्त जीवन है, वही जीवन जिसके लिए तीमुथियुस बुलाया गया था।
अंत में पौलुस धनवानों को सीधे संदेश देते हैं, अभिमानी न बनें, अनिश्चित धन पर भरोसा न रखें, बल्कि परमेश्वर पर जो सब कुछ बहुतायत से देते हैं। और भलाई में, उदारता में धनी बनने की बात कहते हैं।
इसका अर्थ क्या है?
यह अध्याय पैसे के बारे में है, पर असल में यह पैसे से भी ज़्यादा गहरी चीज़ के बारे में है, यह इस बारे में है कि आप अपना दिल कहाँ लगाते हैं। पौलुस यह नहीं कहते कि पैसा बुरा है। वे कहते हैं कि रुपये का लोभ बुराइयों की जड़ है। फर्क समझिए, समस्या पैसे में नहीं है, समस्या उस चाहत में है जो पैसे को अपने जीवन का केंद्र बना देती है।
आपकी उम्र में यह बहुत असली सवाल है। हर तरफ से यही संदेश आता है कि सफलता, पैसा, स्टेटस, यही असली संतोष देंगे। सोशल मीडिया पर सब अपनी सबसे चमकदार जिंदगी दिखा रहे हैं, और मन में यह डर बैठ जाता है कि जिसके पास ज़्यादा है वही सुरक्षित है। पौलुस यहाँ हमें रोककर पूछते हैं, क्या तुम सच में मानते हो कि यह सब तुम्हें ले जा सकते हो?
और वह दूसरी बात भी उतनी ही ज़रूरी है, विश्वास को किसी फायदे के लिए इस्तेमाल करना। धर्म को एक उपकरण बना लेना, अपनी बात मनवाने का, अपनी छवि चमकाने का, अपना नाम बनाने का। पौलुस कहते हैं यह भक्ति नहीं, यह अभिमान है।
सुर्ख़ धागा
यह अध्याय सीधे यीशु मसीह की ओर इशारा करता है। पौलुस याद दिलाते हैं कि यीशु ने पुन्तियुस पिलातुस के सामने अच्छा अंगीकार किया, यानी सच्चाई की कीमत चुकाई, तब भी जब वह कीमत बहुत भारी थी। जिस विश्वास की अच्छी कुश्ती की बात हो रही है, वह अकेली लड़ाई नहीं है, यीशु ने भी वही लड़ाई लड़ी, और उन्होंने जीत ली।
और यह भी सुनिए, अनन्त जीवन की बात यहाँ खाली वादा नहीं है। यह उसी परमेश्वर से आता है जो अगम्य ज्योति में रहता है, जो राजाओं का राजा है, और जो एक दिन यीशु मसीह को प्रगट करेगा। यह पूरी कहानी उस बड़ी सच्चाई से जुड़ी है, कि यह दुनिया, इसका पैसा, इसकी चमक, यह अंतिम नहीं है। कुछ और स्थायी है, और वह परमेश्वर के पास है, यीशु में।
आपके लिए
अपने से ईमानदारी से पूछिए, आपकी सुरक्षा किसमें है? अगर कल आपके पास कुछ न बचे, कोई पैसा नहीं, कोई डिग्री नहीं, कोई फॉलोवर्स नहीं, तो क्या आपके पास फिर भी कुछ बचेगा? पौलुस कहते हैं संतोष सहित भक्ति बड़ी लाभ है, यह कोई सुविधा की बात नहीं, यह एक ऐसा सच है जो आपकी पूरी सोच को बदल सकता है।
यह भी देखिए कि आप अपने विश्वास का इस्तेमाल कैसे करते हैं। क्या आप बहस में जीतने के लिए बाइबल इस्तेमाल करते हैं, या सच में उसे सुनने और जीने के लिए? भक्ति कोई प्रतियोगिता नहीं है।
बात करें
अगर पैसा आपके जीवन का केंद्र नहीं है, तो सच में क्या है? क्या आपका जीवन इस बात की गवाही देता है?
पौलुस कहते हैं कुछ लोग बहस और तर्क को धर्म का नाम देते हैं। आपने अपने आसपास या अपने भीतर ऐसा कब देखा है?
साथ में प्रार्थना
प्रभु, हमारे दिल इतनी आसानी से पैसे और चमक की ओर खिंच जाते हैं। हमें सिखाइए कि सच्चा संतोष कहाँ है। हमें उस भक्ति की ओर मोड़िए जो दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आपसे सच्चे प्रेम के लिए है। हमें विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़ने की शक्ति दीजिए, और वह अनन्त जीवन थामने की, जिसके लिए आपने हमें बुलाया है। आमीन।
1 तीमुथियुस 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 तीमुथियुस 6 किस विषय में है?
1 तीमुथियुस 6 क्या कहता है?
1 तीमुथियुस 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर 1 तीमुथियुस 6 से क्या सीख सकते हैं?
1 तीमुथियुस 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस धनवानों से यह नहीं कहता कि सब कुछ छोड़ दो। वह कहता है, "चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।" धन बुरा नहीं, बस डोलता है। जिस पर तू टिकना चाहता है, वही हिल रहा है। और परमेश्वर? वह देने में कंजूस नहीं, वह तेरे आनन्द के लिये देता है। सवाल यह है कि तू भरोसा किस पर रखता है, देनेवाले पर या देन पर।
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