1 तीमुथियुस 6
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
The Explanation
पौलुस यह पत्र अपने युवा साथी तीमुथियुस को लिख रहे हैं। तीमुथियुस एक कलीसिया (मसीही समुदाय) की देखभाल कर रहा था, और पौलुस उसे कुछ ज़रूरी बातें समझाना चाहते हैं।
पहले पौलुस दासों की बात करते हैं, जो उस ज़माने में बहुत आम थी। वे कहते हैं कि दासों को अपने स्वामियों का आदर करना चाहिए, ताकि परमेश्वर के नाम पर कोई निन्दा न हो। फिर पौलुस चेतावनी देते हैं कि कुछ लोग झूठी शिक्षा फैलाते हैं और सोचते हैं कि भक्ति यानी परमेश्वर की भक्ति करना पैसे कमाने का एक तरीका है। पौलुस इसे साफ़ इनकार करते हैं। वे कहते हैं, "सन्तोष सहित भक्ति बड़ी लाभ है।" यानी परमेश्वर के साथ जीना और उसमें संतुष्ट रहना ही सच्ची दौलत है, पैसे नहीं।
पौलुस आगे कहते हैं कि हम इस दुनिया में कुछ लाए नहीं और कुछ ले जा भी नहीं सकते। इसलिए जो पैसे के पीछे भागते हैं, वे कई फंदों में फँस जाते हैं। पौलुस एक कड़ी बात कहते हैं, "रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है।" ध्यान दें, पौलुस यह नहीं कहते कि पैसा बुरा है, बल्कि पैसे का लोभ यानी बहुत ज़्यादा चाहत बुरी है।
फिर पौलुस तीमुथियुस को प्रोत्साहित करते हैं कि वह धार्मिकता, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज और नम्रता का पीछा करे। वे इसे एक कुश्ती यानी एक कठिन लड़ाई कहते हैं, जिसमें तीमुथियुस को डटकर लड़ना है। अंत में पौलुस धनवान लोगों को सलाह देते हैं कि वे अभिमानी न बनें, बल्कि उदार बनें और भलाई में अपनी दौलत लगाएं। पत्र के आखिर में पौलुस तीमुथियुस से कहते हैं कि वह उसे दी गई अमानत यानी विश्वास की सच्ची शिक्षा की रखवाली करे, और झूठी बातों से दूर रहे।
What Does This Mean?
यह अध्याय दिल की एक गहरी बात पर उँगली रखता है, हम अपनी संतुष्टि कहाँ से पाते हैं। पौलुस का समय हमसे अलग था, पर सवाल वही है जो आज भी है, क्या हमें लगता है कि ज़्यादा चीज़ें हमें ख़ुश करेंगी? पौलुस साफ़ कहते हैं कि यह झूठ है। संतुष्टि पैसे से नहीं आती, परमेश्वर के साथ के रिश्ते से आती है।
यह भी दिलचस्प है कि पौलुस विश्वास को एक कुश्ती कहते हैं। इससे पता चलता है कि सच्चाई में टिके रहना आसान नहीं है, इसमें मेहनत और हिम्मत लगती है। पौलुस यह छुपाते नहीं कि कुछ लोग रास्ते से भटक गए हैं। वे ईमानदार हैं कि विश्वास में गिरना संभव है।
The Common Thread
पूरे पत्र में पौलुस "प्रभु यीशु मसीह" की बात करते हैं, जो एक दिन प्रगट होंगे। यह एक बड़ा वादा है, यीशु मसीह वापस आएँगे और तब सब कुछ साफ़ हो जाएगा। पौलुस परमेश्वर को "राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु" कहते हैं, जो अमर है और अगम्य ज्योति में रहता है, यानी इतना महान कि कोई मनुष्य उन्हें पूरी तरह देख नहीं सकता। यही परमेश्वर हमें बुलाते हैं कि हम अनन्त जीवन को धर लें, यानी उसे अपना लें और उसमें जीवित रहें। यह जीवन पैसों से नहीं मिलता, यह यीशु मसीह के द्वारा मिलता है, जिन्होंने पिलातुस के सामने भी सच्चाई का साक्षी दिया।
For You
तुम शायद अभी बहुत पैसा नहीं कमा रहे, पर लोभ की शुरुआत छोटी चीज़ों से होती है, नए खिलौने चाहिए, दोस्त के पास जो है वह मेरे पास भी होना चाहिए। पौलुस की बात यहाँ भी सच है, अगर तुम्हारे पास खाने और पहनने को है, तो सन्तोष सीखो। यह मुश्किल है, पर यह कोई कमज़ोरी नहीं, यह एक ताकत है जो परमेश्वर देते हैं। और जब तुम्हें लगे कि विश्वास में टिके रहना कठिन है, तो याद रखो, पौलुस ने इसे कुश्ती कहा। इसका मतलब है कि हिम्मत हारना ठीक नहीं, पर संघर्ष करना सामान्य है।
Talk About It
तुम्हें क्या लगता है, वे कौन सी छोटी-छोटी चीज़ें हैं जो तुम्हें लगता है कि तुम्हें ज़रूर चाहिए, पर जिनके बिना भी तुम खुश रह सकते हो?
पौलुस कहते हैं कि विश्वास में टिके रहना एक कुश्ती जैसा है। तुम्हारे लिए विश्वास में सबसे कठिन बात क्या है?
Praying Together
प्रिय परमेश्वर, हमें सिखाइए कि सच्ची संतुष्टि आपसे मिलती है, चीज़ों से नहीं। जब हम लोभ में फँसने लगें, तो हमें थाम लीजिए। हमें हिम्मत दीजिए ताकि हम विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़ सकें, और अंत तक आपके साथ चल सकें। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
1 तीमुथियुस 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 तीमुथियुस 6 किस विषय में है?
1 तीमुथियुस 6 क्या कहता है?
1 तीमुथियुस 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 तीमुथियुस 6 से क्या सीख सकते हैं?
1 तीमुथियुस 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस धनवानों से यह नहीं कहता कि सब कुछ छोड़ दो। वह कहता है, "चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।" धन बुरा नहीं, बस डोलता है। जिस पर तू टिकना चाहता है, वही हिल रहा है। और परमेश्वर? वह देने में कंजूस नहीं, वह तेरे आनन्द के लिये देता है। सवाल यह है कि तू भरोसा किस पर रखता है, देनेवाले पर या देन पर।
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