2 पतरस 3
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
स्पष्टीकरण
पतरस अपनी पत्री के अंतिम अध्याय में पहुँच चुके हैं, और यहाँ वे कोई नया विषय शुरू नहीं करते, बल्कि याद दिलाते हैं। वे कहते हैं कि यह उनकी दूसरी पत्री है, और दोनों में उद्देश्य एक ही है, विश्वासियों के मन को उभारना, ताकि वे भविष्यद्वक्ताओं की बातें और प्रभु की आज्ञा न भूलें। फिर पतरस एक सीधी चेतावनी देते हैं, अंतिम दिनों में हँसी-उपहास करनेवाले आएँगे। ये लोग गंभीर आलोचक नहीं होंगे, बल्कि ऐसे लोग जो सीधा मज़ाक उड़ाएँगे, "उसके आने की प्रतिज्ञा कहाँ गई? सब कुछ तो वैसा ही चल रहा है जैसा सदा से चलता रहा है।" यानी, प्रभु के दोबारा आने की बात एक पुराना, थका हुआ वादा लगेगी, जो कभी पूरा नहीं होता।
पतरस इसका जवाब देते हैं इतिहास से। वे याद दिलाते हैं कि परमेश्वर के वचन से आकाश और पृथ्वी बने, और उसी वचन से जलप्रलय में पुरानी दुनिया नाश हुई। यानी दुनिया हमेशा एक जैसी नहीं रही है, और उसका अंत भी परमेश्वर के वचन से ही आएगा, इस बार आग से। फिर वे एक गहरी बात कहते हैं, प्रभु के यहाँ एक दिन हज़ार वर्ष के बराबर है, और हज़ार वर्ष एक दिन के बराबर। इसका मतलब यह नहीं कि परमेश्वर धीमे हैं, बल्कि यह कि वे समय को हमारी तरह नहीं देखते। जो देर लगती है, वह असल में धीरज है, क्योंकि परमेश्वर नहीं चाहते कि कोई नाश हो, बल्कि सबको मन फिराव का अवसर मिले।
फिर आता है वह दिन जिसकी बात हो रही है, प्रभु का दिन, जो चोर के समान अचानक आएगा। आकाश शोर के साथ लुप्त हो जाएगा, तत्व पिघल जाएँगे, पृथ्वी और उसके काम परखे जाएँगे। यह सुनकर डर लगे, यह स्वाभाविक है। पर पतरस इसे डराने के लिए नहीं कहते, बल्कि जीने के तरीके के लिए, "तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए?" इस नाश के पीछे एक वादा है, नए आकाश और नई पृथ्वी की, जिनमें धार्मिकता वास करेगी। पतरस विश्वासियों को कहते हैं कि इस आस के कारण निष्कलंक और निर्दोष जीवन जीने का यत्न करें, और प्रभु के धीरज को उद्धार समझें, ठीक जैसा पौलुस ने भी लिखा, हालाँकि उसकी कुछ बातें समझना कठिन है, और कुछ लोग उन्हें खींच-तान कर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं। अंत में पतरस चेतावनी देते हैं कि सतर्क रहें, और यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाएँ।
इसका क्या मतलब है?
यह अध्याय एक ऐसे सवाल का जवाब है जो हर पीढ़ी पूछती है, अगर परमेश्वर सच में हैं, अगर उन्होंने वादा किया है कि वे लौटेंगे और सब कुछ ठीक करेंगे, तो देर क्यों हो रही है। यह सवाल कमज़ोरी की निशानी नहीं है, बल्कि ईमानदारी की। पतरस इसे नज़रअंदाज़ नहीं करते, वे सीधे स्वीकार करते हैं कि मज़ाक उड़ानेवाले आएँगे और उनका तर्क सुनने लायक लगेगा। लेकिन फिर वे इसका जवाब देते हैं इतिहास और समय की समझ से। जो लोग सोचते हैं कि दुनिया हमेशा एक जैसी चलती रहेगी, वे यह भूल जाते हैं कि दुनिया एक बार पहले भी पूरी तरह बदल चुकी है, जलप्रलय में। और परमेश्वर का धीरज, कमज़ोरी नहीं, प्रेम है। जितनी देर हो रही है, उतने ज़्यादा लोगों को पलटने का मौका मिल रहा है।
मुख्य सूत्र
यह पूरा अध्याय क्रूस और खाली कब्र की ओर इशारा करता है। परमेश्वर जिसने एक बार वचन से दुनिया बनाई और वचन से उसे नाश किया, वही परमेश्वर यीशु मसीह में मानव बना, मरा और जी उठा, यह इस बात का प्रमाण है कि उनके वादे झूठे नहीं होते। अंतिम दिन की न्याय और नए आकाश-पृथ्वी की आस, यह वही कहानी है जो पूरी बाइबल में चलती है, परमेश्वर टूटी हुई सृष्टि को छोड़ते नहीं, वे उसे नया बनाते हैं। यीशु का दोबारा आना अंत नहीं, बल्कि उस काम का पूरा होना है जो उन्होंने क्रूस पर शुरू किया।
आपके लिए
तुम्हारी ज़िंदगी में शायद यह सवाल किसी क्लासरूम की चर्चा में, किसी दोस्त की टिप्पणी में, या अपने ही मन में उठा हो, "अगर परमेश्वर हैं, तो दुनिया इतनी टूटी हुई क्यों है, और अगर वे लौटने वाले हैं, तो अब तक क्यों नहीं आए?" यह सवाल पूछना गलत नहीं है। पतरस भी इससे नहीं डरते। पर देखो कि वे कहाँ ले जाते हैं, इंतज़ार की ओर नहीं, तैयारी की ओर। सवाल यह नहीं है कि प्रभु कब आएँगे, सवाल यह है कि जब तक वे नहीं आते, तुम कैसे जी रहे हो। पवित्रता, भक्ति, निष्कलंक जीवन, ये शब्द पुराने लग सकते हैं, पर इनका मतलब है, ऐसी ज़िंदगी जो झूठ, तुलना और थकाने वाली परफॉर्मेंस से मुक्त हो, क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारी पहचान यीशु मसीह में है, न कि किसी और चीज़ में। धीरज रखना कमज़ोरी नहीं, विश्वास है।
इस पर चर्चा करें
अगर परमेश्वर के धीरज का मतलब है कि वे किसी को खोना नहीं चाहते, तो इसका तुम्हारे उन लोगों के लिए क्या मतलब है जो अभी परमेश्वर से दूर हैं?
क्या तुम्हारी ज़िंदगी में ऐसा कुछ है जो तुम "अभी छोड़ दूँगा" कहकर टालते रहते हो, यह जानते हुए कि अंत में सब कुछ परखा जाएगा?
साथ में प्रार्थना
प्रभु, हमें माफ़ करें जब हम आपके धीरज को देर समझ लेते हैं। हमारी आँखें खोलें ताकि हम देख सकें कि आपका इंतज़ार करना कितना बड़ा प्रेम है। हमें ऐसी ज़िंदगी दें जो नए आकाश और नई पृथ्वी की आस में जीती है, निष्कलंक और सच्ची, यीशु मसीह के अनुग्रह में बढ़ती हुई। आमीन।
2 पतरस 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 पतरस 3 किस विषय में है?
2 पतरस 3 क्या कहता है?
2 पतरस 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर 2 पतरस 3 से क्या सीख सकते हैं?
2 पतरस 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पतरस यह मानने से नहीं कतराता कि पौलुस की कुछ बातों "का समझना कठिन है।" कितनी राहत की बात है। अगर बाइबल के कुछ पन्ने तुम्हें उलझा देते हैं, तो तुम अकेले नहीं हो। असली खतरा कठिनाई नहीं, "खींच-तान" है, जब हम वचन को अपनी मर्जी के आकार में मोड़ देते हैं। पूछते रहो, ठहरे रहो, पर उसे अपने हिसाब से मत काटो।
जिसे तू देरी समझ रहा है, वह असल में दरवाज़ा खुला रखा जाना है। पतरस लिखता है, "प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कुछ लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है।" सोच, जिस व्यक्ति के लिए तू प्रार्थना करते करते थक गया है, शायद उसी के लिए परमेश्वर समय रोके हुए है। और शायद कभी तेरे लिए भी उसने ऐसे ही रोका था।
इसलिए, हे प्रियों, जब तुम इन बातों की प्रतीक्षा करते हो, तो यत्न करो कि तुम शान्ति से उसके सामने निष्कलंक और निर्दोष ठहरो।" पतरस प्रतीक्षा को आलस नहीं, मेहनत कहता है। तू जिसकी राह देख रहा है, वही तेरे आज के फैसलों को गढ़ता है। और ध्यान दे, वह कहता है शान्ति से, घबराहट से नहीं। उस दिन से डरकर नहीं, उस दिन की आस में जीना है।
वे तो जान-बूझकर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा आकाश प्राचीनकाल से वर्तमान है।" ध्यान दो, पतरस यह नहीं कहता कि उन्हें पता नहीं था। उन्हें पता था, पर उन्होंने भूलना चुना। कुछ सच्चाइयाँ हम इसलिए भुला देते हैं क्योंकि याद रखने पर जीवन बदलना पड़ेगा। आज खुद से पूछो: कौन सी बात है जो तुम जानते हो, पर याद नहीं करना चाहते?
छोटे बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और प्राथमिक आयु (7-12) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें