आमोस 6
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
आमोस अध्याय 6 की बाइबल व्याख्या
व्याख्या
आमोस 6 उन लोगों को संबोधित है जो अपने आराम में इतने डूबे हुए हैं कि उन्हें अपने आस-पास की तबाही दिखाई ही नहीं देती। सिय्योन और सामरिया के अमीर लोग, जो इस्राएल के घराने में सम्मानित और प्रसिद्ध हैं, अपने आपको सुरक्षित समझते हैं। वे हाथी दाँत के पलंगों पर लेटते हैं, महँगा मांस खाते हैं, संगीत का आनंद लेते हैं, दाखमधु कटोरों में पीते हैं और उत्तम तेल से अपने शरीर को सजाते हैं। यह एक ऐसे समाज का चित्र है जिसने विलासिता को अपना धर्म बना लिया है।
परन्तु इस सारे सुख के बीच एक भयानक बात कही गई है, वे यूसुफ पर आनेवाली विपत्ति का हाल सुनकर शोकित नहीं होते। यूसुफ यहाँ इस्राएल के लोगों का प्रतीक है, अपने ही भाई-बंधु, जो कष्ट में हैं, जिनका न्याय कुचला जा रहा है। अमीर लोग जानते हैं कि चारों ओर पीड़ा है, लेकिन उनका दिल उस पीड़ा से छूता ही नहीं। यह उदासीनता ही उनका सबसे बड़ा पाप है।
परमेश्वर यहोवा स्वयं अपनी शपथ खाकर कहते हैं कि उन्हें याकूब के घमण्ड से घृणा है। जो घर आज हँसी-मजाक और संगीत से भरे हैं, वे इतने वीरान हो जाएँगे कि दस लोग भी एक घर में बचें तो वे भी मर जाएँगे। यहाँ तक कि जब कोई शव को घर से बाहर निकालने आएगा, तो वह इतना डरा हुआ होगा कि वह यहोवा का नाम भी लेने से मना करेगा, क्योंकि नाश इतना भारी होगा कि उसे शब्दों में बांधना ही डरावना लगेगा।
आगे परमेश्वर एक तीखा सवाल पूछते हैं, क्या घोड़े चट्टान पर दौड़ सकते हैं? यह असंभव है। वैसे ही असंभव है कि जो न्याय को विष में और धर्म को कड़वे फल में बदल दें, वे परमेश्वर के आशीष में बने रहें। ये लोग अपनी सफलता पर गर्व करते हैं, वे कहते हैं कि उन्होंने अपने ही बल से यह सब पाया है। इसी घमण्ड के जवाब में परमेश्वर एक शत्रु जाति खड़ी करने की घोषणा करते हैं, जो पूरे देश को संकट में डाल देगी।
इसका अर्थ क्या है?
यह अध्याय हमें एक असुविधाजनक सच्चाई से रूबरू कराता है, आराम अपने आप में पाप नहीं है, परन्तु आराम जो दूसरों के दर्द के प्रति आँखें बंद कर दे, वह परमेश्वर के सामने घृणित है। यहाँ के लोग धार्मिक हैं, वे यहोवा के नाम से परिचित हैं, वे सिय्योन में रहते हैं जहाँ मंदिर है। पर उनका धर्म केवल बाहरी सुविधा बन गया है, वह उनके दिल को नहीं बदलता।
यह पाठ यह भी दिखाता है कि आत्मनिर्भरता का घमण्ड कितना खतरनाक है। जब वे कहते हैं "क्या हम अपने ही यत्न से सामर्थी नहीं हो गए", तब वे परमेश्वर को अपने जीवन से पूरी तरह बाहर निकाल देते हैं। सफलता उनके अपने हाथों का परिणाम बन जाती है, परमेश्वर की कोई जगह नहीं रहती। और यही रवैया है जो नाश की ओर ले जाता है।
बड़ी कहानी से जोड़
आमोस की यह चेतावनी भविष्य में एक और आवाज़ से जुड़ती है। यीशु मसीह ने भी धनी और आराम में डूबे लोगों को चेताया, और गरीबों तथा दुःखी लोगों को आशीष का वचन दिया। यीशु स्वयं यूसुफ की तरह अपने ही भाइयों द्वारा तिरस्कृत हुए, उन्होंने उस दर्द को अपने ऊपर ले लिया जिससे सामरिया के अमीर लोग मुँह मोड़ लेते थे। मसीह में परमेश्वर स्वयं मानवीय पीड़ा में उतर आए, उदासीन नहीं रहे।
यह अध्याय हमें यह भी सिखाता है कि परमेश्वर का न्याय और उनका प्रेम एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वे इसलिए क्रोधित होते हैं क्योंकि वे प्रेम करते हैं, और अन्याय से नफरत करते हैं क्योंकि वे न्यायी हैं। सूली पर यीशु ने वह कीमत चुकाई जो न्याय और दया दोनों को एक साथ पूरा करती है।
तुम्हारे लिए
अपने जीवन को ईमानदारी से देखो। तुम्हारे पास जो सुविधा है, चाहे वह आर्थिक हो, सामाजिक हो या पारिवारिक, क्या वह तुम्हें दूसरों के दर्द के प्रति संवेदनशील बनाती है, या उससे दूर करती है? स्क्रीन के पीछे की ज़िंदगी में यह बहुत आसान है कि तुम अपनी खुद की समस्याओं और आराम में इतने डूब जाओ कि आस-पास के किसी की तकलीफ तुम्हें छू ही न पाए।
अपने आप से यह भी पूछो, क्या तुम अपनी सफलता का श्रेय पूरी तरह अपने आप को देते हो? पढ़ाई में अच्छे अंक, खेल में जीत, सामाजिक जीवन में लोकप्रियता, यह सब आसानी से घमण्ड बन सकता है। परमेश्वर तुम्हें यह याद दिलाना चाहते हैं कि तुम्हारी हर क्षमता उन्ही की देन है, और यह क्षमता दूसरों की सेवा के लिए है, आत्ममुग्धता के लिए नहीं।
बातचीत के लिए
तुम्हारे जीवन में ऐसा कौन सा "आराम" है जो तुम्हें दूसरों के दर्द से बेखबर रखता है?
क्या तुम कभी अपनी सफलता का पूरा श्रेय खुद को देते हो, परमेश्वर को भूलकर? इसका असर तुम्हारे दिल पर कैसे पड़ता है?
साथ में प्रार्थना
प्रभु परमेश्वर, हमें वह संवेदनशीलता दीजिए जो हमारे भाई-बहनों के दर्द को देख सके और महसूस कर सके। हमें आराम में सोने न दें, बल्कि हमारे दिल को जगाएँ। हमें याद दिलाएँ कि हमारी हर क्षमता आपकी देन है। हमें विनम्र बनाइए, और हमें अपने प्रेम में जीना सिखाइए। यीशु मसीह के नाम में, आमेन।
आमोस 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
आमोस 6 किस विषय में है?
आमोस 6 क्या कहता है?
आमोस 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर आमोस 6 से क्या सीख सकते हैं?
आमोस 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तुम हाथीदाँत के पलंगों पर लेटे हो और अपने बिछौनों पर पाँव फैलाए हुए हो," आमोस यह नहीं कह रहा कि आराम पाप है। दुख यह है कि उसी शहर में लोग टूट रहे थे, और इन लोगों की नींद ज़रा भी नहीं उखड़ी। सुख हमें सुला देता है। ज़रा सोचो, तुम्हारे आराम ने तुम्हें किसकी पीड़ा के प्रति बहरा बना दिया है?
हे बुरे दिन को दूर बतानेवालो, और उपद्रव की गद्दी को निकट लानेवालो!" आमोस उन लोगों से बोल रहा है जो हाथीदाँत के पलंगों पर लेटे थे और सोचते थे कि हिसाब का दिन कभी नहीं आएगा। पर सच यह है, जिस दिन को तू टालता है वह टलता नहीं, बस तेरी आँखों से ओझल होता है। और इस बीच अन्याय पास खिसक आता है। तू आज किस बात को "बाद में देखेंगे" कहकर टाल रहा है?
जो सारंगी के साथ गाते गाते बकवास करते हो, और दाऊद के समान अपने लिये बाजे बनाते हो।" दाऊद ने बाजे परमेश्वर के लिये बनाए थे, ये लोग अपने लिये बना रहे हैं। वही सुर, वही धुन, पर दिशा बदल गई। और उसी सांस में आमोस कहता है कि यूसुफ के दुःख पर वे शोकित नहीं होते। तेरा गीत तुझे टूटे हुए लोगों के पास ले जाता है, या उनसे दूर?
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