आमोस 6
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
आमोस भविष्यवक्ता एक कठिन शब्द के साथ आता है। वे उन लोगों के बारे में बात करते हैं जो सिय्योन और सामरिया में आराम से रहते हैं, जिनके पास इस्राएल के लोग सलाह के लिए आते हैं। सुनने में यह अच्छा लगता है, पर परमेश्वर देखते हैं कि उनके दिल में क्या है।
ये लोग हाथी दाँत के सुन्दर पलंगों पर लेटते हैं, अच्छा खाना खाते हैं, संगीत सुनते हैं, बढ़िया दाखमधु पीते हैं और उत्तम तेल लगाते हैं। सब कुछ आराम से भरा है। पर आमोस एक बात कहते हैं जो चुभती है, वे "यूसुफ पर आनेवाली विपत्ति का हाल सुनकर शोकित नहीं होते।" यूसुफ यहाँ इस्राएल के लोगों के लिए एक नाम है। मतलब, आसपास के लोग दुख में हैं, गरीब हैं, अन्याय झेल रहे हैं, और जो अमीर हैं वे उस दुख को देखते ही नहीं। वे अपने ही आराम में खोए हैं।
परमेश्वर कहते हैं कि इस कारण ये लोग बँधुआई में जाएँगे, यानी दुश्मन उन्हें बंदी बनाकर ले जाएगा। उनका सारा विलासी जीवन खत्म हो जाएगा। परमेश्वर स्वयं अपनी शपथ खाकर कहते हैं कि उन्हें याकूब के घमण्ड से घृणा है।
फिर एक भयानक दृश्य आता है, एक घर में मरे हुए लोगों को जलाने की बात होती है, और डर इतना बढ़ जाता है कि लोग परमेश्वर का नाम लेने से भी डरते हैं। यह सुनना कठिन है, पर आमोस झूठी उम्मीद नहीं देते।
आखिर में परमेश्वर एक तीखा सवाल पूछते हैं, क्या घोड़े चट्टान पर दौड़ सकते हैं? यानी कुछ बातें स्वाभाविक रूप से गलत हैं। इस्राएल के लोगों ने न्याय को जहर में बदल दिया है, और धार्मिकता, यानी सही तरीके से जीने को, कड़वे फल में बदल दिया है। वे अपनी सफलता पर घमण्ड करते हैं और कहते हैं कि यह सब उन्होंने अपनी ही ताकत से पाया है। इसलिए परमेश्वर कहते हैं कि वे एक दूसरी जाति को उठाएँगे जो उन्हें संकट में डालेगी।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय हमें एक कठिन सच बताता है, आराम और भलाई एक जैसी बात नहीं है। ये लोग बाहर से देखने में सफल और आशीषित लगते थे। संगीत, अच्छा खाना, सुन्दर घर, सब कुछ था। पर परमेश्वर उनके अंदर देखते हैं और पाते हैं कि वे अपने भाई-बहनों के दुख से बेखबर हैं। वे सोचते हैं कि उनकी सुरक्षा उनकी अपनी काबिलियत से आई है, परमेश्वर से नहीं।
यह डरावना है कि परमेश्वर इतने कठोर शब्द बोलते हैं। पर यह इसलिए है क्योंकि वे न्याय से प्यार करते हैं। जब कोई ताकतवर लोग कमजोर लोगों को भूल जाते हैं, तो परमेश्वर चुप नहीं रहते। यही कारण है कि आमोस को यह कठिन संदेश देना पड़ता है।
बड़ी कहानी से संबंध
पूरी बाइबल में परमेश्वर एक ऐसा राजा चाहते हैं जो न्याय से प्रेम करे और गरीबों को याद रखे। इस्राएल के राजा और अमीर लोग यह भूल गए। पर यीशु मसीह वैसे नहीं थे। वे गरीबों के पास गए, बीमारों को छुआ, और उन लोगों की परवाह की जिन्हें समाज भूल गया था। जहाँ इस्राएल के लोग आराम में डूबकर दूसरों का दुख नहीं देख पाए, वहाँ यीशु मसीह ने हमारे दुख को अपने ऊपर ले लिया। वे खुद दुख में उतरे ताकि हमें बचाया जा सके। यह आमोस के संदेश का जवाब है, परमेश्वर सिर्फ न्याय की माँग नहीं करते, वे स्वयं न्याय और दया को पूरा करने आते हैं।
तुम्हारे लिए
तुम्हारे घर में शायद बहुत आराम है, अच्छा खाना, अच्छी चीज़ें। इसमें कुछ गलत नहीं है। पर सवाल यह है, क्या तुम अपने आसपास किसी के दुख को देख पाते हो? कोई सहपाठी जिसे चिढ़ाया जाता है, कोई जिसके पास कम है। क्या तुम्हारी आँखें उसकी तरफ खुली हैं, या सिर्फ अपने आराम पर टिकी हैं?
बात करें
यह कहानी कहती है कि लोग "यूसुफ पर आनेवाली विपत्ति" से बेखबर थे। तुम्हारे आसपास कौन ऐसा हो सकता है जिसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता?
परमेश्वर इस्राएल के लोगों के घमण्ड से घृणा करते हैं। घमण्ड और आत्मविश्वास में क्या अंतर है, इस बारे में तुम क्या सोचते हो?
प्रार्थना साथ में
प्रभु परमेश्वर, हमें माफ़ करें जब हम अपने ही आराम में इतने डूब जाते हैं कि दूसरों का दुख हमें दिखता ही नहीं। हमारी आँखें खोलें ताकि हम उन्हें देख सकें जो कठिनाई में हैं। हमें सिखाएँ कि सच्चा न्याय और सच्ची दया क्या है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
आमोस 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
आमोस 6 किस विषय में है?
आमोस 6 क्या कहता है?
आमोस 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे आमोस 6 से क्या सीख सकते हैं?
आमोस 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तुम हाथीदाँत के पलंगों पर लेटे हो और अपने बिछौनों पर पाँव फैलाए हुए हो," आमोस यह नहीं कह रहा कि आराम पाप है। दुख यह है कि उसी शहर में लोग टूट रहे थे, और इन लोगों की नींद ज़रा भी नहीं उखड़ी। सुख हमें सुला देता है। ज़रा सोचो, तुम्हारे आराम ने तुम्हें किसकी पीड़ा के प्रति बहरा बना दिया है?
हे बुरे दिन को दूर बतानेवालो, और उपद्रव की गद्दी को निकट लानेवालो!" आमोस उन लोगों से बोल रहा है जो हाथीदाँत के पलंगों पर लेटे थे और सोचते थे कि हिसाब का दिन कभी नहीं आएगा। पर सच यह है, जिस दिन को तू टालता है वह टलता नहीं, बस तेरी आँखों से ओझल होता है। और इस बीच अन्याय पास खिसक आता है। तू आज किस बात को "बाद में देखेंगे" कहकर टाल रहा है?
जो सारंगी के साथ गाते गाते बकवास करते हो, और दाऊद के समान अपने लिये बाजे बनाते हो।" दाऊद ने बाजे परमेश्वर के लिये बनाए थे, ये लोग अपने लिये बना रहे हैं। वही सुर, वही धुन, पर दिशा बदल गई। और उसी सांस में आमोस कहता है कि यूसुफ के दुःख पर वे शोकित नहीं होते। तेरा गीत तुझे टूटे हुए लोगों के पास ले जाता है, या उनसे दूर?
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