इफिसियों 1
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस यह पत्र इफिसुस की कलीसिया को लिखता है, ऐसे लोगों को जिन्होंने यीशु मसीह पर विश्वास किया है। शुरुआत में वह सामान्य अभिवादन करता है, लेकिन फिर एक ऐसा वाक्य शुरू होता है जो हिंदी अनुवाद में भी लगभग बिना रुके ग्यारह आयतों तक चलता है। यह कोई गलती नहीं है, यह उमंग है। पौलुस परमेश्वर के धन्यवाद में इतना डूब जाता है कि वह वाक्य को तोड़ना ही नहीं चाहता।
वह कहता है कि परमेश्वर ने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले ही मसीह में चुन लिया था। इससे पहले कि पृथ्वी बनी, इससे पहले कि हम पैदा हुए, हमारा नाम पहले से परमेश्वर के मन में था। उसने हमें अपने लेपालक पुत्र बनाने का निश्चय किया, यीशु मसीह के द्वारा। यह गोद लेना प्रेम से हुआ, किसी मजबूरी से नहीं। मसीह के लहू के द्वारा हमें छुटकारा और अपराधों की क्षमा मिली, और यह परमेश्वर के अनुग्रह के धन के अनुसार हुआ, न कि हमारी योग्यता के अनुसार।
फिर पौलुस एक बड़ी बात कहता है, कि परमेश्वर की योजना यह है कि समय पूरा होने पर स्वर्ग और पृथ्वी की सब चीज़ें मसीह में एकत्र हो जाएँ। सब कुछ, टूटी हुई सृष्टि, बिखरा हुआ इतिहास, अलग-अलग लोग, सब मसीह के अधीन इकट्ठे किए जाएँगे। जिन लोगों ने यह सुनकर विश्वास किया, उन पर पवित्र आत्मा की छाप लगी, जो हमारी विरासत का बयाना है, यानी एक निश्चयपूर्ण वचन कि पूरा उद्धार अभी आना बाकी है।
पत्र के दूसरे भाग में पौलुस प्रार्थना करता है कि इफिसुस के विश्वासियों की आँखें खुल जाएँ, कि वे समझें कि उनकी बुलाहट की आशा कितनी बड़ी है। और अंत में वह मसीह की महिमा का वर्णन करता है, कि परमेश्वर ने उन्हें मरे हुओं में से जिलाया, स्वर्गीय स्थानों में अपनी दाहिनी ओर बैठाया, हर अधिकार और सामर्थ्य से ऊपर रखा, और उन्हें कलीसिया का शिरोमणि बनाया। कलीसिया मसीह की देह है, उसकी परिपूर्णता।
What Does This Mean?
यह अध्याय तुमसे कुछ ऐसा कहता है जो तुम्हारी उम्र में सुनना ज़रूरी है, तुम्हारी पहचान तुमसे शुरू नहीं होती। तुम्हारे स्कूल के नंबर, तुम्हारे इंस्टाग्राम पर लाइक्स, तुम्हारे दोस्तों की राय, इनमें से कुछ भी वह जगह नहीं है जहाँ से तुम्हारी असली पहचान आती है। पौलुस कहता है कि तुम्हारा नाम परमेश्वर के मन में जगत की उत्पत्ति से पहले था। इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हें कुछ नहीं करना है, बल्कि यह कि तुम्हारा मूल्य तुम्हारे प्रदर्शन पर टिका नहीं है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह चुनाव प्रेम में हुआ, कोई ठंडा फैसला नहीं। और यह उद्धार मूल्य चुकाकर आया, मसीह के लहू से। यह सस्ता नहीं था। जब पौलुस "अनुग्रह" शब्द बार-बार दोहराता है, तो वह यह कह रहा है कि यह सब कुछ उपहार है, न कि कमाई हुई चीज़।
The Common Thread
इस पूरे अध्याय का केंद्र मसीह है। "मसीह में" यह शब्द इतनी बार आता है कि इसे गिनना मुश्किल है। हर आशीष, हर चुनाव, हर विरासत, यह सब मसीह में मिलता है, उससे बाहर नहीं। और आयत 10 में जो कहा गया है वह पूरी बाइबल की कहानी का सारांश है, परमेश्वर की योजना यह है कि टूटी हुई सृष्टि को मसीह में फिर से इकट्ठा किया जाए। उत्पत्ति में मनुष्य ने परमेश्वर से रिश्ता तोड़ा, और तब से इतिहास बिखरता चला गया, राष्ट्र, रिश्ते, दिल। मसीह का क्रूस और उसका जी उठना वह बिंदु है जहाँ से यह बिखराव फिर से जोड़ा जाना शुरू होता है। तुम, जो यह पढ़ रहे हो, इस बड़ी कहानी के भीतर खड़े हो।
For You
यह अध्याय तुमसे यह पूछता है कि तुम अपनी पहचान कहाँ से खोज रहे हो। क्या तुम अपनी कीमत हर हफ्ते दोबारा साबित करने की कोशिश में थके हुए हो, चाहे स्कूल में हो, दोस्ती में हो, या ऑनलाइन दुनिया में? पौलुस कहता है कि इसकी ज़रूरत नहीं है। तुम पहले से चुने गए हो, प्रेम से, मसीह में। इसे मान लेना आसान नहीं है, खासकर जब ज़िंदगी मुश्किल लगे या विश्वास कमज़ोर पड़े। लेकिन ध्यान दो कि पौलुस भी सिर्फ जानकारी नहीं दे रहा, वह प्रार्थना कर रहा है कि विश्वासियों की "मन की आँखें" खुल जाएँ। यह समझ सीधे दिमाग से नहीं आती, यह परमेश्वर से मांगी जाती है। तो अगर यह सब अभी तुम्हें दूर या अस्पष्ट लगता है, तो यही करने लायक बात है, इसे मानो मत, बस मांगो।
Talk About It
अगर तुम्हारी पहचान परमेश्वर के चुनाव पर आधारित है और तुम्हारे प्रदर्शन पर नहीं, तो इससे तुम्हारे रोज़मर्रा के डर और दबाव पर क्या फर्क पड़ता है?
पौलुस कहता है कि परमेश्वर सब कुछ, स्वर्ग और पृथ्वी की हर चीज़, मसीह में इकट्ठा करने वाले हैं। तुम्हारी अपनी बिखरी हुई ज़िंदगी में इसका क्या मतलब हो सकता है?
Praying Together
परमेश्वर, आप ने हमें जगत की उत्पत्ति से पहले ही जाना और चुना, यह समझना कठिन है पर यह सच्चाई हमें थामे रहे। जब हम अपनी कीमत खुद साबित करने की थकान में हों, तो हमें याद दिलाइए कि यह पहले से आपके प्रेम में तय है। हमारी मन की आँखें खोलिए, कि हम अपनी बुलाहट की आशा को पहचानें, और यीशु मसीह में भरोसा रखें। आमीन।
इफिसियों 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
इफिसियों 1 किस विषय में है?
इफिसियों 1 क्या कहता है?
इफिसियों 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर इफिसियों 1 से क्या सीख सकते हैं?
इफिसियों 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
उसने अपनी इच्छा का भेद हमें बताया," यह वचन कहता है। भेद वही बताया जाता है जिस पर भरोसा हो, जो अपना हो। परमेश्वर ने तुझे दूर खड़ा दर्शक नहीं रखा, उसने अपने मन की बात तुझे बताई, मसीह में। सोच, तेरी प्रार्थनाओं का उत्तर कभी देर से आए, फिर भी उसकी योजना तुझसे छिपी नहीं। तू उसके विश्वास के घेरे में है।
पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, उन पवित्र लोगों के नाम जो इफिसुस में हैं।" ध्यान दे, पौलुस उन्हें "पवित्र लोग" कहता है, जबकि वे एक मूर्तिपूजक शहर के साधारण लोग थे। तेरी पहचान तेरे शहर या तेरे अतीत से नहीं, परमेश्वर की इच्छा से तय होती है। क्या तू खुद को इसी नाम से देखता है?
अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिए पहले से ठहराया कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों।"
गोद लेना कभी दुर्घटना से नहीं होता। बच्चा जन्म से मिल जाता है, पर गोद लिया बेटा चुना जाता है, कागज़ पर नाम लिखा जाता है, कीमत चुकाई जाती है। परमेश्वर ने तुम्हें मजबूरी में नहीं, खुशी से चुना। तुम उसकी योजना में बाद में जोड़े गए नाम नहीं हो।
कि हम जो पहले से मसीह में आशा रखते आए हैं, उसकी महिमा की स्तुति का कारण हों।"
ध्यान दे, पौलुस यह नहीं कहता कि हम स्तुति करें, बल्कि यह कि हम स्तुति का कारण बनें। तेरा जीवन एक वजह है जिससे कोई और परमेश्वर की बड़ाई करे। आज किसी ने तुझे देखकर उसकी महिमा की? यही तो तेरे बचाए जाने का मकसद है।
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