12 वर्ष और उससे अधिक आयु के किशोर के लिए

यहेजकेल 25

किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यहेजकेल 25 एक ऐसा अध्याय है जो पहली नज़र में अजीब लग सकता है। परमेश्वर चार अलग-अलग पड़ोसी देशों के विरुद्ध बोलते हैं: अम्मोनी, मोआब, एदोम, और पलिश्ती। ये सब इस्राएल के आस-पास रहने वाली जातियाँ थीं, जिनका इतिहास इस्राएल के साथ जुड़ा हुआ था, कभी रिश्तेदारी से, कभी युद्धों से।

गौर करने वाली बात यह है कि परमेश्वर इन जातियों को दंड क्यों दे रहे हैं। यह किसी धार्मिक असहमति की बात नहीं है। मामला यह है कि जब यरूशलेम गिरा, जब परमेश्वर का पवित्रस्थान अपवित्र किया गया, जब इस्राएल का देश उजड़ गया और यहूदा के लोग बंधुआई में गए, तब इन पड़ोसियों ने क्या किया। अम्मोनियों ने कहा "अहा, अहा!", यानी उन्होंने ताली बजाकर मज़ा लिया। मोआब और सेईर ने कहा कि अब यहूदा भी बाकी सब जातियों जैसा साधारण हो गया है, उसकी कोई खास पहचान नहीं बची। एदोम ने पलटा लिया और बदला लेने में खुद को दोषी बना लिया। पलिश्तियों ने पुरानी शत्रुता के कारण नाश करने की कोशिश की।

यानी इन चारों जातियों का पाप एक जैसा था: दूसरे के दुख में खुशी मनाना। जब इस्राएल गिरा, टूटा, बरबाद हुआ, तब इन्होंने संवेदना नहीं दिखाई, बल्कि तालियाँ बजाईं और अभिमान से आनन्द मनाया। परमेश्वर कहते हैं कि इसका हिसाब होगा। हर जाति के लिए एक ही पंक्ति बार-बार आती है: "तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।" यह सज़ा बिना मकसद की नहीं है, इसका एक लक्ष्य है, कि ये जातियाँ पहचानें कि इतिहास किसी अंधे संयोग से नहीं चलता, बल्कि परमेश्वर के हाथ में है।

इसका क्या मतलब है?

यह अध्याय हमें एक असहज सच्चाई से रूबरू कराता है: परमेश्वर को न्याय की परवाह है, और वह परवाह सिर्फ इस्राएल तक सीमित नहीं है। परमेश्वर अपने लोगों के दुख को नज़रअंदाज़ नहीं करते, और वह उन लोगों को भी नहीं भूलते जिन्होंने उस दुख का मज़ाक उड़ाया। यह किसी छोटे बच्चे की कहानी नहीं है जहाँ बुरे लोग बस "बुरे" होते हैं। यहाँ असली इंसानी बुराई का चित्रण है, वह बुराई जो दूसरे की तबाही में तमाशा देखती है।

आज की भाषा में कहें तो यह वही मानसिकता है जो किसी की असफलता, किसी की हार, किसी के टूटने पर मीम बनाती है, हँसती है, ताली बजाती है। सोशल मीडिया की दुनिया में यह प्रवृत्ति और भी आम हो गई है, किसी और के दर्द को मनोरंजन बना देना। यहेजकेल 25 हमें बताता है कि परमेश्वर की नज़र में यह छोटी बात नहीं है। यह गंभीर पाप है, क्योंकि यह इंसान की गरिमा को कुचलता है और परमेश्वर की करुणा के खिलाफ जाता है।

साथ ही यह अध्याय हमें यह भी दिखाता है कि परमेश्वर अपने वादों के प्रति वफादार हैं। जब यहूदा के लोग बंधुआई में गए, तब लग सकता था कि परमेश्वर ने उन्हें भूल दिया है। पर यहाँ परमेश्वर स्पष्ट कहते हैं कि वे इस्राएल के दुश्मनों से हिसाब लेंगे। परमेश्वर का चुप रहना उसका न होना नहीं है।

समान सूत्र

यहेजकेल 25 अपने आप में कठोर लगता है, पर यह बाइबल की बड़ी कहानी का हिस्सा है, जहाँ परमेश्वर न्याय और दया दोनों को साथ लेकर चलते हैं। यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि पाप के परिणाम होते हैं, और यही सच्चाई क्रूस पर पूरी तरह प्रकट होती है। वहाँ यीशु मसीह ने वह न्याय अपने ऊपर लिया जो हम पर पड़ना चाहिए था। एदोम, मोआब, अम्मोन, पलिश्ती, इन सबका हिसाब परमेश्वर ने अपने समय पर लिया, पर हमारे पापों का हिसाब यीशु मसीह ने क्रूस पर अपने शरीर में उठाया।

यह अध्याय हमें यह भी सिखाता है कि जिस परमेश्वर से हम प्रेम और अनुग्रह की उम्मीद करते हैं, वही परमेश्वर न्यायी भी हैं। ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही चरित्र के दो पहलू हैं। यीशु मसीह ने क्रूस पर दोनों को एक साथ दिखाया, न्याय पूरा हुआ और प्रेम प्रकट हुआ।

तुम्हारे लिए

इस अध्याय को पढ़ते हुए अपने आप से ईमानदारी से पूछो: क्या तुम कभी किसी और के गिरने पर, किसी और की असफलता या शर्मिंदगी पर, भीतर ही भीतर खुश हुए हो। स्कूल में, दोस्ती में, सोशल मीडिया पर, यह प्रवृत्ति हम सबमें कहीं न कहीं छिपी होती है। यहेजकेल 25 हमें बताता है कि परमेश्वर की नज़र यह सब देखती है, और यह उन्हें दुखी करता है।

साथ ही यह अध्याय उन लोगों के लिए भी एक तसल्ली है जिन्होंने कभी महसूस किया कि उनके दुख का किसी ने मज़ाक उड़ाया, कि उनकी टूटन किसी के लिए मनोरंजन बन गई। परमेश्वर वह सब देखते हैं और भूलते नहीं। तुम्हें बदला लेने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि न्याय परमेश्वर के हाथ में सुरक्षित है।

बात करें

क्या तुम्हें याद है कि कभी तुमने किसी और की असफलता या शर्मिंदगी पर भीतर ही भीतर खुशी महसूस की हो? उस समय तुम्हारे दिल में क्या चल रहा था?

अगर परमेश्वर न्याय और दया दोनों में पूरी तरह सच्चे हैं, तो इससे तुम्हारी समझ बदलती है कि परमेश्वर कैसे हैं?

साथ में प्रार्थना

प्रभु, हमें माफ कीजिए जब हमने किसी और के दुख में खुशी महसूस की है। हमें ऐसा दिल दीजिए जो दूसरों के दर्द को समझे, न कि उसका मज़ाक उड़ाए। धन्यवाद कि आप न्यायी हैं और हमारी टूटन को भी याद रखते हैं। हमें सिखाइए कि बदला लेना आपके हाथ में छोड़ना सीखें। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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यहेजकेल 25 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहेजकेल 25 किस विषय में है?
यहेजकेल 25 एक ऐसा अध्याय है जो पहली नज़र में अजीब लग सकता है। परमेश्वर चार अलग-अलग पड़ोसी देशों के विरुद्ध बोलते हैं: अम्मोनी, मोआब, एदोम, और पलिश्ती। ये सब इस्राएल के आस-पास रहने वाली जातियाँ थीं, जिनका इतिहास इस्राएल के साथ जुड़ा हुआ था, कभी रिश्तेदारी से, कभी युद्धों से।
यहेजकेल 25 क्या कहता है?
यह अध्याय हमें एक असहज सच्चाई से रूबरू कराता है: परमेश्वर को न्याय की परवाह है, और वह परवाह सिर्फ इस्राएल तक सीमित नहीं है। परमेश्वर अपने लोगों के दुख को नज़रअंदाज़ नहीं करते, और वह उन लोगों को भी नहीं भूलते जिन्होंने उस दुख का मज़ाक उड़ाया। यह किसी छोटे बच्चे की कहानी नहीं है जहाँ बुरे लोग बस "बुरे" होते हैं। यहाँ असली इंसानी बुराई का चित्रण है, वह बुराई जो दूसरे की तबाही में तमाशा देखती है।
यहेजकेल 25 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यहेजकेल 25 अपने आप में कठोर लगता है, पर यह बाइबल की बड़ी कहानी का हिस्सा है, जहाँ परमेश्वर न्याय और दया दोनों को साथ लेकर चलते हैं। यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि पाप के परिणाम होते हैं, और यही सच्चाई क्रूस पर पूरी तरह प्रकट होती है। वहाँ यीशु मसीह ने वह न्याय अपने ऊपर लिया जो हम पर पड़ना चाहिए था। एदोम, मोआब, अम्मोन, पलिश्ती, इन सबका हिसाब परमेश्वर ने अपने समय पर लिया, पर हमारे पापों का हिसाब यीशु मसीह ने क्रूस पर अपने शरीर में उठाया।
किशोर यहेजकेल 25 से क्या सीख सकते हैं?
साथ ही यह अध्याय उन लोगों के लिए भी एक तसल्ली है जिन्होंने कभी महसूस किया कि उनके दुख का किसी ने मज़ाक उड़ाया, कि उनकी टूटन किसी के लिए मनोरंजन बन गई। परमेश्वर वह सब देखते हैं और भूलते नहीं। तुम्हें बदला लेने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि न्याय परमेश्वर के हाथ में सुरक्षित है।
यहेजकेल 25 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रभु, हमें माफ कीजिए जब हमने किसी और के दुख में खुशी महसूस की है। हमें ऐसा दिल दीजिए जो दूसरों के दर्द को समझे, न कि उसका मज़ाक उड़ाए। धन्यवाद कि आप न्यायी हैं और हमारी टूटन को भी याद रखते हैं। हमें सिखाइए कि बदला लेना आपके हाथ में छोड़ना सीखें। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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