3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

यहेजकेल 25

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

बहुत समय पहले, परमेश्वर के लोग इस्राएल में रहते थे। उनके पास एक सुंदर मंदिर था। वहाँ वे परमेश्वर की स्तुति गाते थे। वहाँ दीपक जलते थे। वहाँ अच्छी खुशबू आती थी।

पर एक दिन दुश्मन आए। उन्होंने मंदिर तोड़ दिया। उन्होंने घर तोड़ दिए। इस्राएल के लोग बहुत रोए। बहुत, बहुत रोए।

पास में दूसरे देश रहते थे। उनके नाम थे अम्मोन, मोआब, एदोम, और पलिश्ती। जब उन्होंने यह सब देखा, वे हँसे। "आहा, आहा!" वे चिल्लाए। उन्होंने ताली बजाई। उन्होंने नाच किया। वे बहुत खुश हुए, क्योंकि परमेश्वर के लोग दुखी थे।

पर परमेश्वर ने यह सब देखा। एक-एक आँसू परमेश्वर ने देखा। एक-एक हँसी परमेश्वर ने सुनी। कुछ भी परमेश्वर से छिपा नहीं रहा।

तब परमेश्वर यहेजकेल नाम के एक आदमी के पास आए। परमेश्वर ने कहा, "यहेजकेल, उठो। जाओ, इन देशों को मेरी बात सुनाओ।"

इसका क्या मतलब है?

परमेश्वर ने अम्मोन से कहा: "तुमने मेरे लोगों पर हँसी। तुम हँसे, जब वे दुखी थे। इसलिए अब तुम्हारा देश भी उजड़ जाएगा। ऊँट वहाँ बैठेंगे। भेड़ें वहाँ चरेंगी।"

परमेश्वर ने मोआब से कहा, "तुमने भी कहा, 'यहूदा का घराना साधारण हो गया है।' इसलिए तुम भी दण्ड पाओगे।"

परमेश्वर ने एदोम से कहा, "तुमने मेरे लोगों से बदला लिया। इसलिए मैं अपने लोगों के द्वारा तुमसे बदला लूँगा।"

परमेश्वर ने पलिश्तियों से कहा, "तुमने भी बदला लिया, बड़े अभिमान से। इसलिए मैं तुम्हें भी दण्ड दूँगा।"

हर बार परमेश्वर ने यही कहा: "तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।"

परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं भूलते। जब कोई उन्हें दुख देता है, परमेश्वर देखते हैं। परमेश्वर चुप नहीं रहते।

मुख्य सूत्र

परमेश्वर अपने बच्चों से बहुत प्रेम करते हैं। जैसे एक पिता अपने छोटे बच्चे को गोद में उठाता है, वैसे ही परमेश्वर अपने लोगों को थामे रखते हैं। बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु भी दुखी लोगों के पास गए। यीशु रोते हुए लोगों के साथ रोए। यीशु ने कभी किसी के दुख पर हँसी नहीं उड़ाई। यीशु ने सबको प्रेम से अपने पास बुलाया।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी किसी को रोते देखा है? क्या तुमने उस पर हँसा, या उसके पास गए? परमेश्वर चाहते हैं, जब कोई रोए, तुम उसके पास जाओ। उसे गले लगाओ। उसे कहो, "मैं तुम्हारे साथ हूँ।" परमेश्वर खुद भी रोते हुए लोगों के पास आते हैं।

बात करें

जब तुम्हारा दोस्त रोता है, तुम क्या करते हो?

परमेश्वर हमें कब-कब देखते हैं?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप सब कुछ देखते हैं। जब मैं रोता हूँ, आप मुझे देखते हैं। मुझे सिखाइए, किसी के दुख पर कभी न हँसूँ। मुझे प्रेम करना सिखाइए, जैसे यीशु ने सिखाया। आमीन।

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यहेजकेल 25 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहेजकेल 25 किस विषय में है?
बहुत समय पहले, परमेश्वर के लोग इस्राएल में रहते थे। उनके पास एक सुंदर मंदिर था। वहाँ वे परमेश्वर की स्तुति गाते थे। वहाँ दीपक जलते थे। वहाँ अच्छी खुशबू आती थी।
यहेजकेल 25 क्या कहता है?
पर परमेश्वर ने यह सब देखा। एक-एक आँसू परमेश्वर ने देखा। एक-एक हँसी परमेश्वर ने सुनी। कुछ भी परमेश्वर से छिपा नहीं रहा।
यहेजकेल 25 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने मोआब से कहा, "तुमने भी कहा, 'यहूदा का घराना साधारण हो गया है।' इसलिए तुम भी दण्ड पाओगे।"
नन्हे बच्चे यहेजकेल 25 से क्या सीख सकते हैं?
हर बार परमेश्वर ने यही कहा: "तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।"
यहेजकेल 25 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुमने कभी किसी को रोते देखा है? क्या तुमने उस पर हँसा, या उसके पास गए? परमेश्वर चाहते हैं, जब कोई रोए, तुम उसके पास जाओ। उसे गले लगाओ। उसे कहो, "मैं तुम्हारे साथ हूँ।" परमेश्वर खुद भी रोते हुए लोगों के पास आते हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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