जकर्याह 13
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
जकर्याह 13 एक ऐसा अध्याय है जिसमें दर्द और आशा साथ-साथ चलते हैं। यह पिछले अध्याय की सीधी अगली कड़ी है, जहाँ यरूशलेम के लोग उस पर विलाप करते हैं जिसे उन्होंने बेधा था। अब यहाँ परमेश्वर कहते हैं कि उसी दिन दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों के पाप और मलिनता धोने के लिए एक बहता हुआ सोता फूटेगा, यानी शुद्धिकरण का एक स्रोत खुलेगा जो गंदगी को सचमुच धो देगा।
इसके बाद परमेश्वर तीन चीज़ों को जड़ से मिटाने की बात करते हैं, मूरतों के नाम, झूठे भविष्यद्वक्ता, और अशुद्ध आत्मा। यह इतना गंभीर मामला है कि यदि कोई फिर से झूठी भविष्यद्वाणी करे, तो उसके अपने माता-पिता ही उसे बेध डालेंगे। यह सुनने में कठोर लगता है, पर यह दिखाता है कि झूठ बोलकर परमेश्वर का नाम लेना कितना भयानक अपराध माना जाता था। उस दिन हर झूठा भविष्यद्वक्ता अपनी बात से शर्मिंदा होगा, वह छिपने की कोशिश करेगा, यह कहते हुए कि मैं तो किसान हूँ, भविष्यद्वक्ता नहीं। जब उससे पूछा जाएगा कि उसकी छाती पर घाव कैसे हैं, तो वह झूठ बोलेगा कि ये घाव उसके प्रेमियों के घर में लगे, जबकि असल में ये झूठे धार्मिक रीति-रिवाजों में अपने शरीर को घायल करने के निशान थे।
फिर अचानक स्वर बदल जाता है। परमेश्वर तलवार को आज्ञा देते हैं कि वह उनके ठहराए हुए चरवाहे पर वार करे, उस पुरुष पर जो परमेश्वर का निकटतम साथी है। जब चरवाहा मारा जाएगा, तो भेड़-बकरियाँ तितर-बितर हो जाएँगी। इस बिखराव के बाद परमेश्वर अपना हाथ छोटों पर, यानी बचे हुए लोगों पर बढ़ाएँगे। देश के दो तिहाई लोग मारे जाएँगे, पर एक तिहाई बचेगी। और उस बची हुई तिहाई को परमेश्वर आग में डालकर वैसे ही निर्मल करेंगे जैसे चाँदी और सोना जांचा और शुद्ध किया जाता है। अंत में एक गहरा वादा है, वे मुझसे प्रार्थना करेंगे और मैं उनकी सुनूँगा, वे मेरी प्रजा होंगे और मैं उनका परमेश्वर।
What Does This Mean?
यह अध्याय हमें बताता है कि परमेश्वर पाप के प्रति उदासीन नहीं हैं। वे झूठ, मूर्तिपूजा और धोखे को हल्के में नहीं लेते, चाहे वह धार्मिक भेष में ही क्यों न आए। पर साथ ही यह अध्याय दिखाता है कि शुद्धिकरण का रास्ता आसान नहीं होता। यह आग से होकर गुजरता है, यह किसी की मृत्यु से जुड़ा है, यह बिखराव और नुकसान से होकर आता है। परमेश्वर वादा नहीं करते कि रास्ता सुंदर होगा, वे वादा करते हैं कि अंत में रिश्ता बहाल होगा, वे हमारे परमेश्वर होंगे और हम उनकी प्रजा।
The Common Thread
यह अध्याय अकेला खड़ा नहीं रह सकता, इसे बाकी बाइबल से अलग करके पढ़ना असंभव है। यीशु मसीह ने खुद अपनी गिरफ्तारी की रात, अपने चेलों के साथ पहाड़ पर जाते हुए, इसी वचन का हवाला दिया कि चरवाहे को मारा जाएगा और भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी। वे जानते थे कि वे ही वह चरवाहा हैं जिस पर तलवार गिरने वाली है। सूली पर उनकी मृत्यु ठीक वही घटना है जो यहाँ इतने पहले लिखी गई थी। और चौंकाने वाली बात यह है कि यह चरवाहे का मरना ही वह क्षण बना जब सोता फूटा, जिस सोते की बात पहली आयत में की गई है। मसीह का लहू ही वह बहता हुआ जल है जो पाप और मलिनता को सदा के लिए धो देता है। जो आग की बात यहाँ की गई है, वह भी नई नहीं है, प्रेरित पतरस बाद में लिखता है कि विश्वास की परख आग से जाँचे गए सोने के समान होती है। परमेश्वर अपने लोगों को अलग नहीं छोड़ते, वे उन्हें शुद्ध करने के लिए काम करते हैं, चाहे वह काम कितना भी कठिन क्यों न लगे।
For You
तुम्हारी ज़िंदगी में भी शायद ऐसे पल आते हैं जब सच बोलना महंगा पड़ता है, जब भीड़ के साथ चलना आसान होता और सच पर टिके रहना अकेला कर देता है। यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर झूठ से समझौता नहीं करते, चाहे वह कितना भी धार्मिक या स्वीकार्य क्यों न लगे। पर यह भी दिखाता है कि तुम्हारी अपनी कमजोरी, तुम्हारा टूटना, तुम्हारा बिखर जाना अंतिम शब्द नहीं है। परमेश्वर आग से होकर तुम्हें निकालने का वादा करते हैं, न कि तुम्हें आग में छोड़ने का। जब तुम्हारी ज़िंदगी में कुछ टूटता है, रिश्ता, विश्वास, कोई सपना, तो याद रखना कि एक चरवाहा पहले ही मारा जा चुका है ताकि तुम बिखरने के बाद भी अकेले न रहो। सवाल यह नहीं कि तुम कभी असफल नहीं होगे, सवाल यह है कि क्या तुम उस सोते की ओर लौटोगे जो अब भी बहता है।
Talk About It
अगर परमेश्वर झूठे भविष्यद्वक्ताओं के प्रति इतने गंभीर हैं, तो आज के समय में झूठ और सच के बीच फर्क पहचानना तुम्हारे लिए कैसे मुश्किल होता है?
जब यीशु ने खुद कहा कि यह चरवाहे वाली भविष्यद्वाणी उन्हीं पर पूरी होगी, तो इससे उनकी मृत्यु के बारे में तुम्हारी समझ पर क्या असर पड़ता है?
Praying Together
प्रभु, आप जानते हैं कि हमारा दिल कितनी बार भटकता है और झूठ को सच समझ बैठता है। धन्यवाद कि आपने अपने चरवाहे को हमारे लिए बेधे जाने दिया, ताकि हमारे लिए एक सोता खुल सके। हमें आग से डरने न दें, बल्कि विश्वास दें कि आप हमें शुद्ध करके अपनी प्रजा बनाना चाहते हैं। आमीन।
जकर्याह 13 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
जकर्याह 13 किस विषय में है?
जकर्याह 13 क्या कहता है?
जकर्याह 13 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर जकर्याह 13 से क्या सीख सकते हैं?
जकर्याह 13 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मैं इस देश में से मूरतों के नाम मिटा डालूँगा, और वे फिर स्मरण में न रहेंगी।" परमेश्वर सिर्फ मूरत नहीं तोड़ता, उसका नाम तक मिटा देता है, ताकि मन में उसकी याद भी न बचे। तेरे भीतर भी कोई ऐसी चीज़ है जिसे तूने छोड़ तो दिया, पर उसका नाम अब भी मन में मीठा लगता है? उसी जड़ तक परमेश्वर हाथ डालना चाहता है।
झूठे भविष्यद्वक्ता का कम्बल का वस्त्र असली पहचान नहीं, वेशभूषा थी। एलिय्याह जैसा दिखने की कोशिश, ताकि लोग भरोसा करें। पर परमेश्वर के शुद्ध करने के दिन वे "धोखा देने के लिये कम्बल का वस्त्र न पहनेंगे।" सोचो, तुम्हारा कौन सा वस्त्र है? वह भाषा, वह चेहरा, वह गंभीरता जो लोगों के सामने ओढ़ ली जाती है। उतार दो। परमेश्वर को असली तुम चाहिए।
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