13 वर्ष और उससे बड़े किशोर के लिए

जकर्याह 5

किशोर (13 वर्ष और उससे बड़े) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

जकर्याह को लगातार रात के दर्शन मिल रहे हैं, और यह पाँचवाँ और छठा दर्शन एक साथ आते हैं। पहले वे आसमान में एक उड़ता हुआ पत्र देखते हैं, बीस हाथ लंबा और दस हाथ चौड़ा, यानी मंदिर के पवित्रस्थान जितना बड़ा। यह कोई साधारण चिट्ठी नहीं, यह एक श्राप है, जो पूरे देश पर लिखा गया है। एक तरफ चोरों के लिए सज़ा लिखी है, दूसरी तरफ उनके लिए जो झूठी शपथ खाते हैं, यानी परमेश्वर के नाम का इस्तेमाल करके झूठ बोलते हैं। यहोवा कहते हैं कि यह श्राप खुद चोर और झूठा शपथ खानेवाले के घर में घुसेगा और उसे लकड़ी-पत्थर समेत नष्ट कर देगा। यह कोई दूर की धमकी नहीं, यह घर की दीवारों के भीतर तक पहुँचने वाला न्याय है।

इसके तुरंत बाद दूसरा दर्शन आता है। एक एपा, यानी अनाज नापने का बड़ा पात्र, निकलता हुआ दिखाई देता है। दूत कहता है कि यह देश के लोगों का पाप है। फिर सीसे का ढक्कन उठाया जाता है, और अंदर एक स्त्री बैठी दिखती है, जिसे "दुष्टता" कहा जाता है। दूत उसे फिर से दबाकर एपा के भीतर बंद कर देता है, और सीसे का ढक्कन से मुँह बंद कर देता है। फिर दो स्त्रियाँ आती हैं, जिनके पंख सारस जैसे हैं, हवा में फैले हुए, और वे इस एपा को उठाकर आकाश और पृथ्वी के बीच उड़ा ले जाती हैं। उनकी मंज़िल है शिनार देश, यानी बाबेल का इलाका, जहाँ उसके लिए एक मंदिर जैसा भवन बनाया जाएगा और वह वहाँ स्थायी रूप से रखी जाएगी।

What Does This Mean?

यह अध्याय दो चीज़ें एक साथ कहता है जो पहली नज़र में अजीब लगती हैं, मगर गहराई में एक ही सच्चाई को छूती हैं। पहली बात, पाप का हिसाब बाहर नहीं टलता। उड़ता हुआ पत्र किसी अदालत के फैसले जैसा है जो हवा में तय हो चुका है और घर-घर जाकर लागू होगा। चोरी और झूठी शपथ, यानी बेईमानी और परमेश्वर के नाम का दुरुपयोग, ये कोई छोटी बातें नहीं हैं। इनका असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, यह पूरे समाज को खोखला करता है।

दूसरी बात ज़्यादा गहरी है। दुष्टता को एक स्त्री के रूप में दिखाया गया है जिसे ज़बरदस्ती दबाकर बंद किया जाता है। यह दिखाता है कि पाप खुद को छुपाना चाहता है, वह हल्के में निकलना चाहता है, मगर परमेश्वर उसे काबू में रखते हैं। और अंत में वह दूर भेज दिया जाता है, पूरी तरह से, स्थायी रूप से, किसी और जगह जहाँ वह अपने ही "पाए" पर खड़ा किया जाएगा, यानी वहाँ उसकी अपनी पहचान बन जाएगी, लेकिन परमेश्वर के लोगों के बीच से वह हटा दी जाती है। यह सिर्फ सज़ा की बात नहीं, यह शुद्धिकरण की बात है। परमेश्वर अपने लोगों को ऐसे ही गंदगी के साथ नहीं रहने देना चाहते।

The Common Thread

पूरी बाइबल में यह थीम बार-बार आती है, पाप छुपता नहीं, और परमेश्वर उसे हल्के में नहीं लेते। मगर यही बाइबल यह भी कहती है कि परमेश्वर सिर्फ दूर नहीं भेजते, वे खुद उस सज़ा को उठाने के लिए आते हैं। जो उड़ता हुआ पत्र जकर्याह ने देखा, वह याद दिलाता है कि कानून हमेशा हमारे सिर पर लटका रहता, अगर कोई इसे अपने ऊपर नहीं ले लेता। यीशु मसीह के क्रूस पर यही हुआ, उन्होंने उस श्राप को अपने ऊपर लिया जो हमारे लिए लिखा गया था। पौलुस गलातियों में कहते हैं कि मसीह हमारे लिए श्राप बने ताकि हम उस श्राप से छुड़ाए जाएँ।

और वह स्त्री जो एपा में बंद करके दूर भेजी जाती है, यह भी एक तस्वीर है कि परमेश्वर पाप को जड़ से हटाना चाहते हैं, सिर्फ ढकना नहीं। यह प्रकाशितवाक्य की उस तस्वीर से मिलती है जहाँ अंत में हर बुराई को हमेशा के लिए अलग कर दिया जाएगा। जकर्याह का दर्शन उस बड़ी कहानी की एक झलक है, कि परमेश्वर का इतिहास सिर्फ क्षमा की कहानी नहीं, बल्कि सफाई की भी कहानी है।

For You

तुम शायद सोचते हो कि तुम्हारी छोटी बेईमानियाँ, तुम्हारे झूठ, तुम्हारी वे बातें जो तुम सिर्फ स्क्रीन के पीछे करते हो, किसी को नज़र नहीं आतीं। यह अध्याय कहता है कि कुछ भी हवा में अनदेखा नहीं रहता। मगर इसका मतलब डर में जीना नहीं है। इसका मतलब है ईमानदार होना, अपने बारे में भी और परमेश्वर के सामने भी। तुम्हारे अंदर जो छुपाना चाहता है, जो सफाई से बचना चाहता है, उसे सामने लाने की हिम्मत रखो। क्योंकि परमेश्वर का इरादा सिर्फ तुम्हें पकड़ना नहीं, बल्कि तुम्हें साफ करना है। और वह सफाई पहले से यीशु मसीह में हो चुकी है। सवाल यह नहीं कि क्या तुम पूरी तरह निर्दोष हो, सवाल यह है कि क्या तुम उस सफाई को अपनाने के लिए तैयार हो, या अब भी ढक्कन बंद रखना चाहते हो।

Talk About It

क्या कोई ऐसी बात है जिसे तुम अपनी ज़िंदगी में छुपाकर रखते हो, यह सोचकर कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता?

जब तुम सुनते हो कि परमेश्वर पाप को जड़ से हटाना चाहते हैं, क्या यह तुम्हें डराता है या राहत देता है, और क्यों?

Praying Together

प्रभु, आप हमारी हर छुपी हुई बात जानते हैं, फिर भी आप हमें दूर नहीं धकेलते। हमें ईमानदार होने की हिम्मत दीजिए, और हमें याद दिलाइए कि यीशु मसीह ने हमारे लिए वह श्राप अपने ऊपर ले लिया। हमें साफ कीजिए, बाहर से नहीं, भीतर से। आमीन।

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जकर्याह 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

जकर्याह 5 किस विषय में है?
जकर्याह को लगातार रात के दर्शन मिल रहे हैं, और यह पाँचवाँ और छठा दर्शन एक साथ आते हैं। पहले वे आसमान में एक उड़ता हुआ पत्र देखते हैं, बीस हाथ लंबा और दस हाथ चौड़ा, यानी मंदिर के पवित्रस्थान जितना बड़ा। यह कोई साधारण चिट्ठी नहीं, यह एक श्राप है, जो पूरे देश पर लिखा गया है। एक तरफ चोरों के लिए सज़ा लिखी है, दूसरी तरफ उनके लिए जो झूठी शपथ खाते हैं, यानी परमेश्वर के नाम का इस्तेमाल करके झूठ बोलते हैं। यहोवा कहते हैं कि यह श्राप खुद चोर और झूठा शपथ खानेवाले के घर में घुसेगा और उसे लकड़ी-पत्थर समेत नष्ट कर देगा। यह कोई दूर की धमकी नहीं, यह घर की दीवारों के भीतर तक पहुँचने वाला न्याय है।
जकर्याह 5 क्या कहता है?
यह अध्याय दो चीज़ें एक साथ कहता है जो पहली नज़र में अजीब लगती हैं, मगर गहराई में एक ही सच्चाई को छूती हैं। पहली बात, पाप का हिसाब बाहर नहीं टलता। उड़ता हुआ पत्र किसी अदालत के फैसले जैसा है जो हवा में तय हो चुका है और घर-घर जाकर लागू होगा। चोरी और झूठी शपथ, यानी बेईमानी और परमेश्वर के नाम का दुरुपयोग, ये कोई छोटी बातें नहीं हैं। इनका असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, यह पूरे समाज को खोखला करता है।
जकर्याह 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पूरी बाइबल में यह थीम बार-बार आती है, पाप छुपता नहीं, और परमेश्वर उसे हल्के में नहीं लेते। मगर यही बाइबल यह भी कहती है कि परमेश्वर सिर्फ दूर नहीं भेजते, वे खुद उस सज़ा को उठाने के लिए आते हैं। जो उड़ता हुआ पत्र जकर्याह ने देखा, वह याद दिलाता है कि कानून हमेशा हमारे सिर पर लटका रहता, अगर कोई इसे अपने ऊपर नहीं ले लेता। यीशु मसीह के क्रूस पर यही हुआ, उन्होंने उस श्राप को अपने ऊपर लिया जो हमारे लिए लिखा गया था। पौलुस गलातियों में कहते हैं कि मसीह हमारे लिए श्राप बने ताकि हम उस श्राप से छुड़ाए जाएँ।
किशोर जकर्याह 5 से क्या सीख सकते हैं?
तुम शायद सोचते हो कि तुम्हारी छोटी बेईमानियाँ, तुम्हारे झूठ, तुम्हारी वे बातें जो तुम सिर्फ स्क्रीन के पीछे करते हो, किसी को नज़र नहीं आतीं। यह अध्याय कहता है कि कुछ भी हवा में अनदेखा नहीं रहता। मगर इसका मतलब डर में जीना नहीं है। इसका मतलब है ईमानदार होना, अपने बारे में भी और परमेश्वर के सामने भी। तुम्हारे अंदर जो छुपाना चाहता है, जो सफाई से बचना चाहता है, उसे सामने लाने की हिम्मत रखो। क्योंकि परमेश्वर का इरादा सिर्फ तुम्हें पकड़ना नहीं, बल्कि तुम्हें साफ करना है। और वह सफाई पहले से यीशु मसीह में हो चुकी है। सवाल यह नहीं कि क्या तुम पूरी तरह निर्दोष हो, सवाल यह है कि क्या तुम उस सफाई को अपनाने के लिए तैयार हो, या अब भी ढक्कन बंद रखना चाहते हो।
जकर्याह 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम सुनते हो कि परमेश्वर पाप को जड़ से हटाना चाहते हैं, क्या यह तुम्हें डराता है या राहत देता है, और क्यों?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

दुष्टता को एपा में बंद करके परमेश्वर ने उसे देश से दूर भेज दिया, पर ध्यान दीजिए कहाँ: "शिनार देश में उसके लिये भवन बनाने को।" पाप को घर मिलता है, वहीं जहाँ उसका स्वागत होता है। आपके मन में क्या ऐसी कोई आदत है जिसे आपने निकाला नहीं, बस एक आरामदेह कोना दे दिया है? परमेश्वर चाहता है कि वह बाहर जाए, आपके भीतर बसे नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

स्वर्गदूत पूछता है, "तुझे क्या दिखाई देता है?" और जकर्याह को एक उड़ता हुआ पत्र दिखता है, खुला हुआ, दिनदहाड़े आकाश में। पाप के बारे में परमेश्वर का वचन कानाफूसी में नहीं कहा जाता। जो तूने अँधेरे में किया, वह उस खुले पन्ने पर लिखा है। पर वही लिखत मसीह के क्रूस पर कीलों से ठोंक दी गई।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

दो स्त्रियाँ, सारस जैसे पंख, और हवा उनके पंखों में भरी हुई। परमेश्वर उस टोकरी को उठाकर दूर शिनार ले जाता है, जहाँ दुष्टता के लिए घर बनाया जाएगा। बुराई कहीं न कहीं बसने की जगह ढूँढ़ती ही है। सवाल यह है कि क्या तूने अपने भीतर उसके लिए कोई कमरा खाली छोड़ रखा है? परमेश्वर उसे तेरी देश सीमा से निकाल देना चाहता है, छिपाना नहीं।

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