बाइबल व्याख्या

1 इतिहास 8

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

बिन्यामीन के वंश की यह लम्बी सूची पहले बेला और उसके भाइयों से शुरू होती है, फिर गेबा, मोआब, लोद, अय्यालोन और गिबोन में बसे परिवारों तक फैलती है, और बार-बार यह दोहराती है कि ये लोग "अपने-अपने पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष" थे। बीच में दो बार बन्धुआई का उल्लेख आता है, फिर यह कहा जाता है कि कुछ घराने यरूशलेम में बसे। और अन्त में, लगभग अचानक, शाऊल का घराना आता है: कीश से शाऊल, शाऊल से योनातान, योनातान से मरीब्बाल, और उसके बाद नौ पीढ़ियाँ, जो ऊलाम के डेढ़ सौ शूरवीर धनुर्धारियों पर समाप्त होती हैं।

मर्म

नामों की यह सूची पढ़ते हुए सबसे पहले जो बात चुभती है वह यह है कि परमेश्वर एक ऐसे गोत्र को भूलते नहीं जिसे इतिहास लगभग मिटा चुका था। बिन्यामीन सबसे छोटा गोत्र था, न्यायियों के समय में अपने ही भाइयों के हाथों लगभग नष्ट हो चुका था, और उसने इस्राएल को वह राजा दिया जिसे परमेश्वर ने अस्वीकार किया। फिर भी यहाँ पीढ़ी दर पीढ़ी गिनती होती है, नाम दर नाम। यह सूची बताती है कि अनुग्रह का काम सार्वजनिक चमत्कारों में ही नहीं, बल्कि परिवारों के चुपचाप टिके रहने में भी होता है। परमेश्वर की वफ़ादारी का प्रमाण कभी-कभी केवल यह होता है कि लोग अब भी जीवित हैं और अब भी गिने जा रहे हैं।

सूत्र

बाइबल की बड़ी कहानी एक वंशावली पर टिकी है: एक स्त्री का वंश, अब्राहम का वंश, दाऊद का वंश। मत्ती अपनी सुसमाचार पुस्तक नामों की सूची से शुरू करता है, क्योंकि यीशु मसीह आकाश से गिरे हुए विचार नहीं, बल्कि एक इतिहास में जन्मे व्यक्ति हैं। इतिहास की पुस्तक का लेखक यही सिखा रहा है: परमेश्वर समय के भीतर, रक्त और विवाह और जन्म के भीतर काम करते हैं। और ध्यान दीजिए कि यहाँ अस्वीकृत राजा के घराने को भी संजोकर रखा गया है। शाऊल की कहानी समाप्त हुई, पर उसके बच्चे बचे रहे। यह उस परमेश्वर का चिह्न है जो पतित घरानों को भी अपनी योजना से बाहर नहीं फेंकते, बल्कि उन्हीं के बीच से एक दिन असली राजा को उठाते हैं।

दर्पण

आप शायद किसी ऐसे परिवार से आते हैं जिसका नाम किसी सूची में नहीं है। आपके पिता शायद कोई "मुख्य पुरुष" नहीं थे; शायद वे शराब, कर्ज़ या चुप्पी छोड़ गए। या आप स्वयं यह सोचते हैं कि आपके जीवन का कुल योग बस इतना होगा कि आपने अपने बच्चों को पाला और अपना काम किया, और कोई याद नहीं रखेगा। यह अध्याय उस डर को सीधे छूता है। यहाँ लिखे अधिकांश नामों के बारे में हम कुछ नहीं जानते, कोई कहानी नहीं, कोई उपलब्धि नहीं, पर वे परमेश्वर के अभिलेख में हैं। आपकी वफ़ादारी गुमनाम हो सकती है, व्यर्थ नहीं।

आज अपने परिवार की तीन पीढ़ियों के नाम कागज़ पर लिखिए, जितने याद हों, और हर नाम पर उँगली रखकर ऊँची आवाज़ में कहिए: "परमेश्वर, आप इन्हें जानते हैं।"

एक बारीकी

श्लोक 34 का नाम ठहरकर देखने लायक है: "योनातान का पुत्र मरीब्बाल हुआ।" शमूएल की पुस्तकों में यही व्यक्ति मपीबोशेत कहलाता है, वह लँगड़ा पोता जिसे दाऊद ने अपनी मेज़ पर बिठाया। उसके नाम का अर्थ संभवतः "बाल से लड़नेवाला" है, जिसे बाद में अपमानजनक रूप में बदल दिया गया। वह आदमी जीवन भर दो दुनियाओं के बीच लटका रहा: मारे गए राजा का वारिस, और नए राजा के अनुग्रह पर जीनेवाला अपंग। और यहाँ, इस सूची में, उसकी संतान नौ पीढ़ियों तक चलती है। जिस व्यक्ति के पास दावा करने को कुछ नहीं था, केवल किसी और की दया, उसी का वंश बचा रहा। अनुग्रह से जीना मिट जाना नहीं है।

पृष्ठभूमि

इतिहास की पुस्तक बन्धुआई के बाद लिखी गई, जब लौटे हुए लोग खंडहर यरूशलेम में यह पूछ रहे थे कि क्या हम अब भी परमेश्वर की प्रजा हैं। उनके पास न राजा था, न सेना, न पुरानी प्रतिष्ठा; केवल वंशावलियाँ थीं, और वही उनका पहचान-पत्र थीं। इसीलिए श्लोक 6 और 7 में बन्धुआई का उल्लेख बिना किसी नाटक के, लगभग प्रशासनिक लहजे में आता है। इसीलिए श्लोक 28 महत्वपूर्ण है: "ये यरूशलेम में रहते थे।" बिन्यामीन की ज़मीन यहूदा से सटी हुई थी, और लौटनेवालों में यहूदी और बिन्यामीनी साथ-साथ थे। लेखक उन्हें याद दिला रहा है कि जो शहर अब दीवारों के बिना है, उसमें बसना कोई छोटी बात नहीं, वह वादे पर दाँव लगाना है।

मुख्य पात्र

इस अध्याय का असली पात्र वह परमेश्वर है जो गिनती करते हैं। मनुष्य नाम भूलते हैं; हम दूसरी पीढ़ी के बाद अपने पूर्वजों को नहीं जानते। पर यहाँ एक-एक अबीतूब, एलीएल, पनूएल दर्ज है। और अन्त में सूची एक अजीब, कोमल जानकारी पर रुकती है: ऊलाम के पुत्र "शूरवीर और धनुर्धारी हुए, और उनके बहुत बेटे-पोते अर्थात् डेढ़ सौ हुए।" परमेश्वर ने गिनवाया कि डेढ़ सौ। यह उस चरवाहे का स्वभाव है जो निन्यानबे छोड़कर एक को खोजता है, और उसी स्वभाव ने देह धारण की, जब यीशु मसीह ने कहा कि तुम्हारे सिर के बाल भी गिने हुए हैं। वंशावली ठंडी लगती है, पर उसके पीछे की दृष्टि गर्म है।

चिंतन

आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा आपको "गुमनाम सूची" जैसा लगता है, और यदि परमेश्वर वहाँ भी गिनती कर रहे हैं तो वह हिस्सा कैसे बदल जाता है?

मरीब्बाल के पास केवल राजा का अनुग्रह था, कोई अधिकार नहीं। आप अपने जीवन में किस चीज़ को अधिकार समझकर पकड़े हुए हैं, जो वास्तव में अनुग्रह ही है?

1 Chronicles में और गहराई से जानें

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The Message of Chronicles

Michael Wilcock

Shows why the retold history of Chronicles is a book of hope.

1 Chronicles: An Introduction and Commentary

Martin Selman

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Chronicles

Andrew Hill

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1 Chronicles 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 इतिहास 8 का क्या अर्थ है?
बिन्यामीन के वंश की यह लम्बी सूची पहले बेला और उसके भाइयों से शुरू होती है, फिर गेबा, मोआब, लोद, अय्यालोन और गिबोन में बसे परिवारों तक फैलती है, और बार-बार यह दोहराती है कि ये लोग "अपने-अपने पितरों के घरानों में मुख्य पुरुष" थे। बीच में दो बार बन्धुआई का उल्लेख आता है, फिर यह कहा जाता है कि कुछ घराने यरूशलेम में बसे। और अन्त में, लगभग अचानक, शाऊल का घराना आता है: कीश से शाऊल, शाऊल से योनातान, योनातान से मरीब्बाल, और उसके बाद नौ पीढ़ियाँ, जो ऊलाम के डेढ़ सौ शूरवीर धनुर्धारियों पर समाप्त होती हैं।
1 इतिहास 8 किस विषय में है?
बाइबल की बड़ी कहानी एक वंशावली पर टिकी है: एक स्त्री का वंश, अब्राहम का वंश, दाऊद का वंश। मत्ती अपनी सुसमाचार पुस्तक नामों की सूची से शुरू करता है, क्योंकि यीशु मसीह आकाश से गिरे हुए विचार नहीं, बल्कि एक इतिहास में जन्मे व्यक्ति हैं। इतिहास की पुस्तक का लेखक यही सिखा रहा है: परमेश्वर समय के भीतर, रक्त और विवाह और जन्म के भीतर काम करते हैं। और ध्यान दीजिए कि यहाँ अस्वीकृत राजा के घराने को भी संजोकर रखा गया है। शाऊल की कहानी समाप्त हुई, पर उसके बच्चे बचे रहे। यह उस परमेश्वर का चिह्न है जो पतित घरानों को भी अपनी योजना से बाहर नहीं फेंकते, बल्कि उन्हीं के बीच से एक दिन असली राजा को उठाते हैं।
1 इतिहास 8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज अपने परिवार की तीन पीढ़ियों के नाम कागज़ पर लिखिए, जितने याद हों, और हर नाम पर उँगली रखकर ऊँची आवाज़ में कहिए: "परमेश्वर, आप इन्हें जानते हैं।"
1 इतिहास 8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इतिहास की पुस्तक बन्धुआई के बाद लिखी गई, जब लौटे हुए लोग खंडहर यरूशलेम में यह पूछ रहे थे कि क्या हम अब भी परमेश्वर की प्रजा हैं। उनके पास न राजा था, न सेना, न पुरानी प्रतिष्ठा; केवल वंशावलियाँ थीं, और वही उनका पहचान-पत्र थीं। इसीलिए श्लोक 6 और 7 में बन्धुआई का उल्लेख बिना किसी नाटक के, लगभग प्रशासनिक लहजे में आता है। इसीलिए श्लोक 28 महत्वपूर्ण है: "ये यरूशलेम में रहते थे।" बिन्यामीन की ज़मीन यहूदा से सटी हुई थी, और लौटनेवालों में यहूदी और बिन्यामीनी साथ-साथ थे। लेखक उन्हें याद दिला रहा है कि जो शहर अब दीवारों के बिना है, उसमें बसना कोई छोटी बात नहीं, वह वादे पर दाँव लगाना है।
1 इतिहास 8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा आपको "गुमनाम सूची" जैसा लगता है, और यदि परमेश्वर वहाँ भी गिनती कर रहे हैं तो वह हिस्सा कैसे बदल जाता है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Chronicles 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

जबद्याह, अराद, एदेर," बस तीन नाम, और कुछ नहीं। न कोई कहानी, न कोई बड़ा काम। फिर भी परमेश्वर ने इन्हें अपनी पुस्तक में लिखवा रखा। तुम्हें लगता है तुम्हारा जीवन किसी को याद नहीं रहेगा? जो नाम आदमी भूल जाते हैं, वे परमेश्वर के हाथ में सुरक्षित हैं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, जो नाम भुला दिए जाते हैं, वे भी आपकी नज़र में दर्ज हैं। किसी ने शहर बसाए, गाँव खड़े किए, और आपने वह याद रखा। मैं भी जो छोटा सा काम रोज़ करता हूँ, उसे आप देख रहे हैं। मुझे ऐसा कुछ बनाने दें जो मेरे बाद भी किसी के काम आए।

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