बाइबल व्याख्या

1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल
यह वचन SATYA KRUPA CHARITABLE MINISTRIES द्वारा समर्पित है

पाठ

पौलुस ने अभी-अभी चेतावनी दी है कि जो अपने आप को स्थिर समझता है वह गिर सकता है, और फिर तुरंत यह वाक्य रखता है: "तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने के बाहर है।" जो दबाव तुम पर है, वह अनोखा नहीं; जंगल में भटकते इस्राएलियों ने भी वही झेला था। और परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं: वे परीक्षा को तुम्हारी सामर्थ्य से बड़ा नहीं होने देंगे, बल्कि उसी परीक्षा के भीतर एक "निकास" भी रखेंगे, ताकि तुम उसे सह सको। ध्यान दीजिए, वचन यह नहीं कहता कि परीक्षा हट जाएगी। यह कहता है कि उसके साथ-साथ एक दरवाज़ा खुला रखा जाएगा, और तुमसे अपेक्षा है कि तुम उसमें से निकलो।

मूल बात

यह आयत आराम देने के लिए नहीं, चौकस करने के लिए लिखी गई है। कुरिन्थ के विश्वासी कह रहे थे, "सब वस्तुएँ मेरे लिये उचित हैं," और मूर्तियों के मंदिरों में भोज खाते हुए सोचते थे कि उनका ज्ञान उन्हें बचा लेगा। पौलुस उनका आत्मविश्वास तोड़ता है और उसकी जगह किसी और चीज़ पर भरोसा रखता है: परमेश्वर की विश्वासयोग्यता। मूल शब्द पेइरास्मोस का अर्थ परीक्षा भी है और परख भी; वही दबाव जो गिरा सकता है, वही आपको गढ़ भी सकता है। अंतर इस बात में है कि आप निकास का दरवाज़ा ढूँढ़ते हैं या उसकी ओर पीठ कर लेते हैं। परमेश्वर की वफ़ादारी आपकी ज़िम्मेदारी को मिटाती नहीं, वह उसे संभव बनाती है। कृपा यहाँ ढाल नहीं, वह पैरों के नीचे ठोस ज़मीन है जिस पर खड़े होकर आप "नहीं" कह सकते हैं।

सामने का सूत्र

यह आयत हवा में नहीं लटकती; वह चट्टान से जुड़ी है। कुछ ही पंक्तियाँ पहले पौलुस कहता है कि इस्राएल "उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उनके साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था।" यानी जंगल में जो गिरे, वे किसी सहायता के बिना नहीं थे। उनके साथ-साथ जल चल रहा था, और फिर भी वे ढेर हो गए। यही इस पूरे अध्याय का तनाव है: उपस्थिति का अर्थ स्वतः सुरक्षा नहीं। मसीह में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता अब और गहरी है, क्योंकि वही मसीह स्वयं जंगल में परखे गए और टूटे नहीं। निकास का दरवाज़ा कोई तकनीक नहीं, वह एक व्यक्ति है जो उस रास्ते से पहले गुज़र चुका है और जानता है कि दबाव के भीतर खड़े रहना कैसा लगता है।

दर्पण

आपकी परीक्षा शायद मूर्ति के मंदिर में भोज नहीं है। वह रात ग्यारह बजे का लैपटॉप है, जब घर सो चुका है। वह वह बिल है जिसमें थोड़ा-सा बढ़ा-चढ़ाकर लिखने से कोई पकड़ेगा नहीं। वह वह बातचीत है जिसमें आप अपने भाई के बारे में एक वाक्य जोड़ते हैं जो सच तो है, पर उसे नीचा दिखाने के लिए कहा गया है। और सबसे पहले एक झूठ आता है: "मेरा मामला अलग है, मेरा दबाव किसी ने नहीं झेला।" पौलुस वह बहाना छीन लेता है। आपकी परीक्षा अनोखी नहीं, और इसीलिए उसका इलाज भी उपलब्ध है। पर ध्यान दीजिए, निकास आमतौर पर पहले सेकंड में खुला होता है, तीसवें मिनट में नहीं। आज रात सोने से पहले उस एक चीज़ को अपने हाथ की पहुँच से हटा दीजिए जो आपकी सबसे पूर्वानुमेय परीक्षा का दरवाज़ा है: फ़ोन दूसरे कमरे में, बोतल बाहर, वह नंबर ब्लॉक।

अंतर्पाठ

इसी अध्याय में पौलुस इब्रानियों 3 जैसी ही बात करता है: जंगल की पीढ़ी हमारे लिए आईना है, क्योंकि उन्होंने सब कुछ देखा और फिर भी अविश्वास में गिरे। वह याद दिलाना इसलिए ज़रूरी है कि हम "परीक्षा" को केवल भीतर की हलचल न समझें; वह एक सामूहिक, ऐतिहासिक, मांस-और-हड्डी वाली चीज़ है जो पूरी मंडली को ढेर कर सकती है। दूसरी ओर पतरस की दूसरी पत्री में वही आश्वासन दूसरे शब्दों में आता है: प्रभु जानते हैं कि भक्तों को परीक्षा में से कैसे निकालें। दोनों को साथ रखिए और संतुलन मिलता है। चेतावनी के बिना आश्वासन लापरवाही बनता है; आश्वासन के बिना चेतावनी आतंक बनती है। पौलुस आयत 13 में दोनों को एक ही साँस में बोलता है।

प्रश्न

तो जो गिर गया, क्या वह बहाना नहीं बना सकता? और क्या इसका मतलब यह है कि हर टूटा हुआ व्यक्ति दोषी है? यहाँ ईमानदार रहना ज़रूरी है। पौलुस यहाँ पाप की ओर खींचने वाले दबाव की बात कर रहा है, हर प्रकार के दुख की नहीं। यह आयत उस माँ के हाथ में थमाने की चीज़ नहीं है जिसका बच्चा मर गया, जैसे कि परमेश्वर ने उसकी सहनशक्ति नाप-तौल कर बोझ रखा हो। और फिर भी वचन कठोर बना रहता है: गिरना अपरिहार्य नहीं था। दोनों बातें साथ खड़ी हैं और मैं उन्हें सुलझा नहीं सकता। जो मैं जानता हूँ वह यह है कि यह आयत पहले मुझ पर लागू होती है, दूसरों पर बाद में। दूसरे की क्षमता नापना मेरा काम नहीं; अपने दरवाज़े से निकलना मेरा काम है।

एक बारीकी

"निकास" शब्द पर रुकिए। यूनानी में एकबासिस, पहाड़ी घाटी से बाहर निकलने का दर्रा, वह सँकरा रास्ता जिससे फँसी हुई सेना बच निकलती है। वह आकाश में उड़कर भाग जाना नहीं है; वह ज़मीन पर चलकर पार होना है। और वाक्य का अंत सब कुछ खोल देता है: निकास इसलिए दिया जाता है "कि तुम सह सको।" यानी दरवाज़ा दबाव से बाहर नहीं, दबाव के आर-पार ले जाता है। परमेश्वर परीक्षा हटाने का वादा नहीं करते, वे आपको उसके भीतर खड़ा रखने का वादा करते हैं। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि आप अपनी परिस्थिति बदले बिना भी वफ़ादार रह सकते हैं। वह कठिन नौकरी, वह कठिन विवाह, वह कठिन शरीर: दर्रा उसी घाटी के भीतर से होकर जाता है।

चिंतन

पिछली बार जब आप गिरे, तो निकास का दरवाज़ा किस क्षण खुला था, और आपने उसे किस बहाने से बंद होने दिया?

आपके जीवन में कौन-सा दबाव है जिसके बारे में आप चुपचाप मानते हैं कि "यह तो सहने के बाहर है"? आज पौलुस के वाक्य को उस पर रखकर देखिए: क्या बदलता है?

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The Message of 1 Corinthians

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1 Corinthians 10:13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 कुरिन्थियों 10:13 का क्या अर्थ है?
पौलुस ने अभी-अभी चेतावनी दी है कि जो अपने आप को स्थिर समझता है वह गिर सकता है, और फिर तुरंत यह वाक्य रखता है: "तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने के बाहर है।" जो दबाव तुम पर है, वह अनोखा नहीं; जंगल में भटकते इस्राएलियों ने भी वही झेला था। और परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं: वे परीक्षा को तुम्हारी सामर्थ्य से बड़ा नहीं होने देंगे, बल्कि उसी परीक्षा के भीतर एक "निकास" भी रखेंगे, ताकि तुम उसे सह सको। ध्यान दीजिए, वचन यह नहीं कहता कि परीक्षा हट जाएगी। यह कहता है कि उसके साथ-साथ एक दरवाज़ा खुला रखा जाएगा, और तुमसे अपेक्षा है कि तुम उसमें से निकलो।
1 कुरिन्थियों 10:13 किस विषय में है?
यह आयत हवा में नहीं लटकती; वह चट्टान से जुड़ी है। कुछ ही पंक्तियाँ पहले पौलुस कहता है कि इस्राएल "उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उनके साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था।" यानी जंगल में जो गिरे, वे किसी सहायता के बिना नहीं थे। उनके साथ-साथ जल चल रहा था, और फिर भी वे ढेर हो गए। यही इस पूरे अध्याय का तनाव है: उपस्थिति का अर्थ स्वतः सुरक्षा नहीं। मसीह में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता अब और गहरी है, क्योंकि वही मसीह स्वयं जंगल में परखे गए और टूटे नहीं। निकास का दरवाज़ा कोई तकनीक नहीं, वह एक व्यक्ति है जो उस रास्ते से पहले गुज़र चुका है और जानता है कि दबाव के भीतर खड़े रहना कैसा लगता है।
1 कुरिन्थियों 10:13 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इसी अध्याय में पौलुस इब्रानियों 3 जैसी ही बात करता है: जंगल की पीढ़ी हमारे लिए आईना है, क्योंकि उन्होंने सब कुछ देखा और फिर भी अविश्वास में गिरे। वह याद दिलाना इसलिए ज़रूरी है कि हम "परीक्षा" को केवल भीतर की हलचल न समझें; वह एक सामूहिक, ऐतिहासिक, मांस-और-हड्डी वाली चीज़ है जो पूरी मंडली को ढेर कर सकती है। दूसरी ओर पतरस की दूसरी पत्री में वही आश्वासन दूसरे शब्दों में आता है: प्रभु जानते हैं कि भक्तों को परीक्षा में से कैसे निकालें। दोनों को साथ रखिए और संतुलन मिलता है। चेतावनी के बिना आश्वासन लापरवाही बनता है; आश्वासन के बिना चेतावनी आतंक बनती है। पौलुस आयत 13 में दोनों को एक ही साँस में बोलता है।
1 कुरिन्थियों 10:13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"निकास" शब्द पर रुकिए। यूनानी में एकबासिस, पहाड़ी घाटी से बाहर निकलने का दर्रा, वह सँकरा रास्ता जिससे फँसी हुई सेना बच निकलती है। वह आकाश में उड़कर भाग जाना नहीं है; वह ज़मीन पर चलकर पार होना है। और वाक्य का अंत सब कुछ खोल देता है: निकास इसलिए दिया जाता है "कि तुम सह सको।" यानी दरवाज़ा दबाव से बाहर नहीं, दबाव के आर-पार ले जाता है। परमेश्वर परीक्षा हटाने का वादा नहीं करते, वे आपको उसके भीतर खड़ा रखने का वादा करते हैं। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि आप अपनी परिस्थिति बदले बिना भी वफ़ादार रह सकते हैं। वह कठिन नौकरी, वह कठिन विवाह, वह कठिन शरीर: दर्रा उसी घाटी के भीतर से होकर जाता है।
1 कुरिन्थियों 10:13 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन में कौन-सा दबाव है जिसके बारे में आप चुपचाप मानते हैं कि "यह तो सहने के बाहर है"? आज पौलुस के वाक्य को उस पर रखकर देखिए: क्या बदलता है?
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1 Corinthians 10 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 32

पौलुस मूरतों के सामने चढ़ाए माँस की बहस के बीच यह कहता है: "तुम न यहूदियों, न यूनानियों, और न परमेश्वर की कलीसिया के लिये ठोकर के कारण बनो।" यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि मुझे छूट है या नहीं, बल्कि यह कि मेरी छूट किसी के पाँव में पत्थर तो नहीं बन रही। आज अपने से पूछ: मेरे सही होने से कौन लड़खड़ा रहा है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 14

पिता, मेरे मन में कई चीज़ें आपकी जगह लेने की कोशिश करती हैं। पैसा, नाम, लोगों की वाहवाही। मुझे ताकत दीजिए कि मैं उनसे दूर भागूँ, न कि उनके साथ समझौता करूँ। मेरा दिल सिर्फ आपका रहे, क्योंकि आप ही मेरे सच्चे परमेश्वर हैं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 24

पिता, मैं अक्सर पहले अपना ही फायदा देखता हूँ। मेरी सोच को थोड़ा चौड़ा कर दे, ताकि मैं दूसरों की भलाई भी ढूँढ़ूँ। आज किसी एक व्यक्ति के लिए मुझे कुछ छोड़ने का साहस दे, और उसमें तेरी खुशी हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

इस्राएल के पास मन्ना था, हर सुबह ताज़ा, फिर भी उनका मन मिस्र के मांस पर लगा रहा। कमी नहीं थी, भूख गलत थी। पौलुस कहता है, "ये बातें उनके लिए दृष्टान्त ठहरीं और हमारी चेतावनी के लिए लिखी गईं कि हम उनके समान बुरी वस्तुओं की लालसा न करें।"

सोचो, आज तुम्हारी थाली में परमेश्वर ने जो रखा है, उसे धन्यवाद के साथ खाते हो, या आँखें किसी और की थाली में हैं? उनकी कहानी हमारे लिए आईना बन गई।

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