बाइबल व्याख्या

1 राजाओं 1

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

कहानी एक ठंडे बिस्तर से शुरू होती है। इस्राएल का सबसे बड़ा राजा, गोलियत का वध करने वाला, अब कम्बलों के नीचे काँप रहा है: "यद्यपि उसको कपड़े ओढ़ाए जाते थे, तो भी वह गर्म न होता था।" उस खालीपन में हग्गीत का पुत्र अदोनिय्याह सिर ऊँचा करके घोषणा करता है, "मैं राजा बनूँगा," और योआब तथा एब्यातार याजक को साथ लेकर एनरोगेल में भोज का आयोजन करता है। नातान नबी और बतशेबा मिलकर बूढ़े राजा को जगाते हैं, और दाऊद शपथ खाकर सुलैमान को गद्दी सौंप देता है। गीहोन में सादोक याजक तेल उँड़ेलता है, नरसिंगे फूँके जाते हैं, और अदोनिय्याह का भोज बीच में ही टूट जाता है; वह वेदी के सींगों को पकड़कर जान की भीख माँगता है।

मर्म

इस अध्याय में दो राजा बनते हैं, और उनके बनने का ढंग पूरी धर्मशिक्षा है। अदोनिय्याह अपने आप को ऊँचा करता है: रथ, अंगरक्षक, भोज, समर्थकों की सूची, वह सब कुछ जो सत्ता को सत्ता जैसा दिखाता है। सुलैमान कुछ नहीं करता; उसे खच्चर पर चढ़ाया जाता है, उसे गीहोन ले जाया जाता है, उसका अभिषेक किया जाता है। राज्य छीनी जाने वाली चीज़ नहीं, सौंपी जाने वाली चीज़ है। और परमेश्वर का वचन उस समय भी खड़ा रहता है जब उसे थामने वाला हाथ काँप रहा हो; दाऊद की कमज़ोरी शपथ को रद्द नहीं करती। इसीलिए दाऊद का आभार वेदी पर नहीं, पलंग पर फूटता है: "इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने आज मेरे देखते एक को मेरी गद्दी पर विराजमान किया है।"

सूत्र

गीहोन का दृश्य बाइबल में फिर लौटता है। एक अभिषिक्त राजकुमार, अपने पिता की सवारी पर बैठा, शहर की ओर चढ़ता है, और भीड़ चिल्लाती है "राजा सुलैमान जीवित रहे।" सदियों बाद एक और दाऊद-पुत्र गधे पर बैठकर यरूशलेम में प्रवेश करता है, और भीड़ उसी तरह जय-जयकार करती है। दोनों बार राजा स्वयं को ऊँचा नहीं करता; वह बिठाया जाता है। "अभिषेक" शब्द ही हिब्रू में माशाह है, जिससे "मसीह" बनता है, अर्थात तेल उँड़ेला हुआ व्यक्ति। और अदोनिय्याह, जो वेदी के सींगों को पकड़कर जान माँगता है, हमें उस स्थान की ओर इशारा करता है जहाँ दोषी ठहराए गए लोगों को शरण मिलती है; परन्तु उसकी शरण सशर्त थी, "यदि वह भलमनसी दिखाए," जबकि क्रूस की शरण हमारी भलमनसी पर टिकी नहीं है।

दर्पण

अदोनिय्याह की अतिथि-सूची पर ठहरिए। उसने सब राजकुमारों को बुलाया, सेनापति को बुलाया, याजक को बुलाया, और "अपने भाई सुलैमान को उसने न बुलाया।" हम भी ऐसी सूचियाँ बनाते हैं। दफ़्तर की उस बैठक में, जहाँ वह सहकर्मी जानबूझकर छूट गया जो सवाल पूछता है। परिवार के उस निर्णय में, जहाँ बुज़ुर्ग चाचा को "बाद में बता देंगे" कहकर टाल दिया गया। कलीसिया की उस योजना में, जहाँ केवल सहमत लोग मेज़ पर थे। सूची में जो नाम नहीं है, वह बताता है कि हम क्या छिपा रहे हैं। और आयत 6 चुभती है: दाऊद ने कभी नहीं पूछा, "तूने ऐसा क्यों किया।" जिस बेटे से कभी सवाल नहीं पूछा गया, वह अंत में वेदी पकड़कर काँपता है। प्रेम जो कभी टोकता नहीं, वह प्रेम नहीं, आलस है।

आज ही, दस मिनट के भीतर, उस एक व्यक्ति को संदेश भेजिए जिसे आपने किसी बातचीत या निर्णय से जानबूझकर बाहर रखा था, और उससे पूछिए: "इस बारे में तुम्हारी राय क्या है?"

संदर्भ

हम लगभग 970 ईसा पूर्व में हैं, दाऊद के चालीस वर्षों के अंत में। इस्राएल में ज्येष्ठ पुत्र के अधिकार का कोई पक्का राजनियम नहीं था; राजा परमेश्वर के चुनाव और अभिषेक से बनता था, और यही अनिश्चितता दरबार को ख़तरनाक बनाती थी। अबशालोम का विद्रोह अभी ताज़ा घाव है, और अदोनिय्याह उसके बाद जन्मा, अर्थात अब जीवित पुत्रों में सबसे बड़ा। उसके पीछे पुरानी पीढ़ी है: योआब, जिसने दाऊद के लिए ख़ून बहाया, और एब्यातार, जो गुफ़ाओं के दिनों से साथ था। एनरोगेल शहर के नीचे की घाटी में है, गीहोन वह सोता है जिससे यरूशलेम पीता है। बतशेबा का डर वास्तविक है: नए राजा के आते ही पिछली रानी और उसका बेटा "अपराधी गिने जाएँगे," और ऐसे लोग जीवित नहीं छोड़े जाते थे।

एक बारीकी

"मेरे पुत्र सुलैमान को मेरे निज खच्चर पर चढ़ाओ।" एक जानवर, और वही असली राजमुकुट है। अदोनिय्याह के पास रथ थे, पचास दौड़ने वाले अंगरक्षक, बलि का माँस, नारेबाज़ भीड़। सुलैमान के पास केवल दाऊद का अपना खच्चर है। पूर्व के दरबारों में राजा की सवारी पर बैठना उसके अधिकार को पहनना था; वह उधार का सिंहासन था, जिसे कोई ख़ुद नहीं ले सकता, केवल पाया जा सकता है। और सादोक तेल राजमहल के भंडार से नहीं, "यहोवा के तम्बू में से" निकालता है। सत्ता का स्रोत बाहर है, ऊपर है। जो अपने आप को चढ़ाता है, वह गिरता है; जो चढ़ाया जाता है, वह टिकता है।

श्रोता

राजाओं की पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई जिनके पास राजा नहीं बचा था। बाबेल में बैठे बंदी, जिनका मन्दिर जल चुका था और जिनका अंतिम राजा अंधा करके ले जाया गया था, यह पढ़ते हैं कि कैसे गीहोन पर नरसिंगे फूँके गए और "उनकी ध्वनि से पृथ्वी डोल उठी।" यह उनके लिए पुरानी शान की दर्दभरी याद हो सकती थी। परन्तु वे इससे अधिक सुनते हैं: सिंहासन कभी तलवार या भोज से नहीं मिला था, वह सदा वचन और शपथ से मिला था। और वह वचन एक काँपते, ठंडे, भूलने वाले बूढ़े राजा के हाथों भी नहीं टूटा। यदि दाऊद की कमज़ोरी उसे रद्द न कर सकी, तो निर्वासन भी नहीं कर सकता।

चिंतन

जिस सूची से आपने किसी को बाहर रखा है, वह आपके भीतर की किस असुरक्षा को उजागर करती है?

आपके जीवन में कौन-सा स्थान है जहाँ आप स्वयं को "चढ़ा" रहे हैं, और आप उसे परमेश्वर के सौंपने की प्रतीक्षा में कैसे छोड़ सकते हैं?

1 Kings में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Kings: The Wisdom and the Folly

Dale Ralph Davis

From Solomon's glory to Elijah's fire, told with pastoral punch.

The Message of Kings

John Olley

Keeps the many kings straight and the one true King in view.

1 and 2 Kings: An Introduction and Commentary

Donald Wiseman

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Kings

August Konkel

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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1 Kings 1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 राजाओं 1 का क्या अर्थ है?
कहानी एक ठंडे बिस्तर से शुरू होती है। इस्राएल का सबसे बड़ा राजा, गोलियत का वध करने वाला, अब कम्बलों के नीचे काँप रहा है: "यद्यपि उसको कपड़े ओढ़ाए जाते थे, तो भी वह गर्म न होता था।" उस खालीपन में हग्गीत का पुत्र अदोनिय्याह सिर ऊँचा करके घोषणा करता है, "मैं राजा बनूँगा," और योआब तथा एब्यातार याजक को साथ लेकर एनरोगेल में भोज का आयोजन करता है। नातान नबी और बतशेबा मिलकर बूढ़े राजा को जगाते हैं, और दाऊद शपथ खाकर सुलैमान को गद्दी सौंप देता है। गीहोन में सादोक याजक तेल उँड़ेलता है, नरसिंगे फूँके जाते हैं, और अदोनिय्याह का भोज बीच में ही टूट जाता है; वह वेदी के सींगों को पकड़कर जान की भीख माँगता है।
1 राजाओं 1 किस विषय में है?
गीहोन का दृश्य बाइबल में फिर लौटता है। एक अभिषिक्त राजकुमार, अपने पिता की सवारी पर बैठा, शहर की ओर चढ़ता है, और भीड़ चिल्लाती है "राजा सुलैमान जीवित रहे।" सदियों बाद एक और दाऊद-पुत्र गधे पर बैठकर यरूशलेम में प्रवेश करता है, और भीड़ उसी तरह जय-जयकार करती है। दोनों बार राजा स्वयं को ऊँचा नहीं करता; वह बिठाया जाता है। "अभिषेक" शब्द ही हिब्रू में माशाह है, जिससे "मसीह" बनता है, अर्थात तेल उँड़ेला हुआ व्यक्ति। और अदोनिय्याह, जो वेदी के सींगों को पकड़कर जान माँगता है, हमें उस स्थान की ओर इशारा करता है जहाँ दोषी ठहराए गए लोगों को शरण मिलती है; परन्तु उसकी शरण सशर्त थी, "यदि वह भलमनसी दिखाए," जबकि क्रूस की शरण हमारी भलमनसी पर टिकी नहीं है।
1 राजाओं 1 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही, दस मिनट के भीतर, उस एक व्यक्ति को संदेश भेजिए जिसे आपने किसी बातचीत या निर्णय से जानबूझकर बाहर रखा था, और उससे पूछिए: "इस बारे में तुम्हारी राय क्या है?"
1 राजाओं 1 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"मेरे पुत्र सुलैमान को मेरे निज खच्चर पर चढ़ाओ।" एक जानवर, और वही असली राजमुकुट है। अदोनिय्याह के पास रथ थे, पचास दौड़ने वाले अंगरक्षक, बलि का माँस, नारेबाज़ भीड़। सुलैमान के पास केवल दाऊद का अपना खच्चर है। पूर्व के दरबारों में राजा की सवारी पर बैठना उसके अधिकार को पहनना था; वह उधार का सिंहासन था, जिसे कोई ख़ुद नहीं ले सकता, केवल पाया जा सकता है। और सादोक तेल राजमहल के भंडार से नहीं, "यहोवा के तम्बू में से" निकालता है। सत्ता का स्रोत बाहर है, ऊपर है। जो अपने आप को चढ़ाता है, वह गिरता है; जो चढ़ाया जाता है, वह टिकता है।
1 राजाओं 1 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जिस सूची से आपने किसी को बाहर रखा है, वह आपके भीतर की किस असुरक्षा को उजागर करती है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Kings 1 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 39

सादोक तेल का सींग कहीं और से नहीं, "तम्बू में से" लाया। अदोनिय्याह के पास भोज था, रथ थे, जयजयकार करने वाले लोग थे, पर परमेश्वर की उपस्थिति के स्थान से आया वह तेल नहीं था। आज भी भीड़ जुटाना आसान है, अभिषेक पाना नहीं। सोचो, तुम्हारी सेवा का तेल कहाँ से आ रहा है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 17

पिता, बतशेबा की तरह मैं भी आपके सामने आपका दिया हुआ वचन लेकर खड़ा हूँ। जब सब कुछ अनिश्चित लगता है, तब याद दिलाइए कि आपने जो कहा है वह पूरा होकर रहेगा। मेरे डर को अपनी सच्चाई से शांत कीजिए, और मुझे धीरज से प्रतीक्षा करना सिखाइए।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 52

पिता, धन्यवाद कि आप दोषी को भी दूसरा अवसर देते हैं। जैसे सुलैमान ने कहा, "यदि वह भलमनसी दिखाए तो उसका एक बाल भी भूमि पर गिरने न पाएगा," वैसे ही आपकी दया ने मुझे भी बचाया। मैं दण्ड के योग्य था, पर आपने जीवन दिया। इस अनुग्रह के लिए मेरा हृदय आभारी है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

नातान बतशेबा से कहता है, "क्या तूने नहीं सुना कि हग्गीत का पुत्र अदोनियाह राजा बन बैठा है और हमारे प्रभु दाऊद को इसका पता ही नहीं?" सोच, दाऊद के ही घर में सब कुछ बदल गया और उसे खबर तक नहीं। बूढ़ा होना यही है, धीरे धीरे अपने ही आँगन से अनजान हो जाना। तेरे घर में क्या चल रहा है, तू जानता है? और किसी बुज़ुर्ग को खबर पहुँचाने वाला नातान तू बन सकता है क्या?

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