बाइबल व्याख्या

1 शमूएल 16:14

बाइबल
यह वचन Hallelujah Village Church Trust द्वारा समर्पित है

पाठ

एक ही वाक्य में दो बातें कही गई हैं, और दोनों ही बेचैन कर देती हैं। पहली: "यहोवा का आत्मा शाऊल पर से उठ गया।" जो आत्मा कभी उस पर उतरा था, जिसने उसे भविष्यद्वाणी करने वालों के बीच खड़ा कर दिया था, वह अब हट गया है। दूसरी: "यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा।" शाऊल खाली नहीं छोड़ा गया; उस खालीपन में कुछ और आ बैठा, और लेखक उसे परमेश्वर से ही जोड़कर बताता है। पिछले पद में दाऊद पर आत्मा "बल से" उतरता है; अगले ही सांस में वही आत्मा शाऊल से उठ जाता है। एक ही श्वास में अभिषेक और अंधकार।

मर्म

यह पद हमें वहाँ खड़ा करता है जहाँ हम खड़े होना नहीं चाहते: परमेश्वर की सर्वसत्ता के उस किनारे पर जहाँ रोशनी कम पड़ जाती है। इस्राएल का लेखक द्वैतवादी नहीं है; वह यह नहीं मानता कि कोई स्वतंत्र अंधेरी शक्ति परमेश्वर की पीठ पीछे काम कर रही है। जो कुछ शाऊल पर आता है, वह भी उसी प्रभु के हाथ के नीचे है जिसने उसे चुना था। पर ध्यान दीजिए, पाठ यह नहीं कहता कि परमेश्वर ने शाऊल से बुराई करवाई; वह कहता है कि परमेश्वर ने अपना आत्मा हटा लिया और शाऊल को उसके अपने चुने हुए रास्ते के परिणामों के हवाले कर दिया। अनुग्रह जबरदस्ती नहीं टिकता। यही इस पद की धार है: बुलाहट कोई ऐसी संपत्ति नहीं जिस पर हम कब्ज़ा जमा लें। और साथ ही यह प्रश्न खुला रह जाता है, जिसे बाइबल बंद नहीं करती: वह अंधकार भी उसी के अधीन क्यों है जो ज्योति है?

सूत्र

शाऊल वही राजा है जिसे इस्राएल ने माँगा था, कद में सबसे ऊँचा, देखने में राजा जैसा। पद 7 में परमेश्वर शमूएल से कहते हैं कि वे रूप और कद पर दृष्टि नहीं करते, और सात पदों बाद हम देखते हैं कि रूप और कद का क्या हश्र होता है जब आत्मा हट जाता है: एक खाली सिंहासन जिस पर कोई अब भी बैठा है। दाऊद के बारे में लिखा है कि आत्मा "उस दिन से लेकर भविष्य को" उस पर बल से उतरता रहा, फिर भी भजन 51 में वही दाऊद काँपते हुए प्रार्थना करता है कि परमेश्वर अपना पवित्र आत्मा उससे न लें। वह इस दृश्य को कभी नहीं भूला। और यहीं से एक रेखा आगे जाती है उस अभिषिक्त तक जिस पर आत्मा उतरा और ठहरा रहा; जो स्वयं त्यागा गया, ताकि जो उसके हैं उन पर से आत्मा कभी न उठे।

दर्पण

यह पद उस डर को छूता है जिसे हम शायद ही ज़ोर से कहते हैं: क्या हो अगर परमेश्वर चुपचाप चले जाएँ और सब कुछ बाहर से वैसा ही चलता रहे? शाऊल का दरबार चलता रहा, सेना चलती रही, आज्ञाएँ मानी जाती रहीं। सबसे डरावनी बात यही है कि कुछ भी नहीं बदला, सिवाय भीतर के। आप अब भी सभा में गाते हैं, अब भी समूह की अगुवाई करते हैं, अब भी बच्चों के साथ प्रार्थना करते हैं, और भीतर एक ऐसा सन्नाटा है जिसे आप किसी को बताते नहीं। शाऊल की त्रासदी अचानक नहीं आई; वह आज्ञा न मानने के छोटे-छोटे समझौतों से बनी, जिन्हें उसने हर बार धार्मिक भाषा में ढाँप लिया। आज रात अकेले बैठकर ज़ोर से यह वाक्य कहिए: "प्रभु, अपना आत्मा मुझसे न लीजिए," और उसके बाद पाँच मिनट चुप बैठे रहिए।

संदर्भ

हम लगभग ईसा से एक हज़ार वर्ष पूर्व के इस्राएल में हैं, न्यायियों के युग से राजतंत्र में जाते हुए एक अस्थिर मोड़ पर। शाऊल गिलगाल और अमालेकियों के प्रकरणों के बाद पहले ही ठुकराया जा चुका है, शमूएल उससे अलग हो चुका है और उसके लिए विलाप करता रहा है। फिर भी शाऊल वर्षों तक राजा बना रहेगा। प्राचीन पूर्व में राजा की वैधता उसके देवता की कृपा से बँधी थी; आत्मा का उठ जाना केवल एक मानसिक संकट नहीं, राजगद्दी की जड़ का सूख जाना था। ध्यान दीजिए कि उसके कर्मचारी इसे खुलकर कह पाते हैं, "परमेश्वर की ओर से एक दुष्ट आत्मा तुझे घबराता है।" यह दरबार में इतना दिखने लगा था कि नौकर भी नाम लेकर बोल सकते थे। और उनका समाधान राजनीतिक नहीं, संगीतमय था।

एक बारीकी

"घबराने लगा" वाली क्रिया इब्रानी में अचानक झपट पड़ने का भाव रखती है, जैसे कोई घात लगाकर हमला करे। यह लगातार बनी रहने वाली अवस्था नहीं है; पद 23 इसे स्पष्ट करता है, "जब जब परमेश्वर की ओर से वह आत्मा शाऊल पर चढ़ता था।" यानी लहरें आती हैं और उतरती हैं। इसमें एक कठोर बात है और एक कोमल बात। कठोर यह कि शाऊल कभी नहीं जानता था कि अगली लहर कब आएगी, और यही सबसे थकाने वाला होता है। कोमल यह कि लहरों के बीच अंतराल थे, और उन्हीं अंतरालों में दाऊद वीणा बजाता था और शाऊल "चैन पाकर अच्छा हो जाता था।" परमेश्वर ने अंधकार को हटाया नहीं, पर उसके बीच साँस लेने की जगह रख दी, और वह जगह एक लड़के के हाथों से आई।

पहले श्रोता

जिन इस्राएलियों ने यह कहानी सुनी, वे राजाओं की लंबी विफलता को पीछे मुड़कर देख रहे थे, और कई ने अपनी आँखों से मंदिर को गिरते देखा था। उनके लिए यह वाक्य कोई धर्मशास्त्रीय पहेली नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय स्मृति थी: संस्थाएँ परमेश्वर की उपस्थिति से ज़्यादा जी सकती हैं। भवन खड़ा रह सकता है, अभिषेक का तेल सूख चुका होने पर भी पदवी बनी रह सकती है। यह उन्हें डराता था। पर उन्होंने यह भी सुना कि क्रम क्या है: पहले बैतलहम में तेल उंडेला गया, फिर गिबा में अंधकार उतरा। परमेश्वर का नया काम पुराने के ढहने से पहले ही शुरू हो चुका था। जो लोग खंडहरों में बैठे थे, उनके लिए यह क्रम ही सुसमाचार था।

चिंतन के प्रश्न

आपके जीवन में कौन-सा ढाँचा अब भी खड़ा है जिसमें से उपस्थिति चुपचाप निकल चुकी है, और आप उसे स्वीकार करने से क्यों बच रहे हैं?

अगर परमेश्वर ने अंधकार को हटाया नहीं बल्कि उसके बीच वीणा भेजी, तो आपके अंधकार में आज कौन-सी "वीणा" रखी गई है जिसे आपने अभी तक परमेश्वर का दिया हुआ नहीं माना?

1 Samuel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Samuel: Looking on the Heart

Dale Ralph Davis

Storytelling commentary at its best, from Hannah's prayer to David's rise.

The Message of Samuel

Mary Evans

One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

1 Samuel For You

Tim Chester

Accessible walk through Samuel, Saul and David with constant application.

1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

Joyce Baldwin

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Samuel

Bill Arnold

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1 Samuel 16:14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 शमूएल 16:14 का क्या अर्थ है?
एक ही वाक्य में दो बातें कही गई हैं, और दोनों ही बेचैन कर देती हैं। पहली: "यहोवा का आत्मा शाऊल पर से उठ गया।" जो आत्मा कभी उस पर उतरा था, जिसने उसे भविष्यद्वाणी करने वालों के बीच खड़ा कर दिया था, वह अब हट गया है। दूसरी: "यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा।" शाऊल खाली नहीं छोड़ा गया; उस खालीपन में कुछ और आ बैठा, और लेखक उसे परमेश्वर से ही जोड़कर बताता है। पिछले पद में दाऊद पर आत्मा "बल से" उतरता है; अगले ही सांस में वही आत्मा शाऊल से उठ जाता है। एक ही श्वास में अभिषेक और अंधकार।
1 शमूएल 16:14 किस विषय में है?
शाऊल वही राजा है जिसे इस्राएल ने माँगा था, कद में सबसे ऊँचा, देखने में राजा जैसा। पद 7 में परमेश्वर शमूएल से कहते हैं कि वे रूप और कद पर दृष्टि नहीं करते, और सात पदों बाद हम देखते हैं कि रूप और कद का क्या हश्र होता है जब आत्मा हट जाता है: एक खाली सिंहासन जिस पर कोई अब भी बैठा है। दाऊद के बारे में लिखा है कि आत्मा "उस दिन से लेकर भविष्य को" उस पर बल से उतरता रहा, फिर भी भजन 51 में वही दाऊद काँपते हुए प्रार्थना करता है कि परमेश्वर अपना पवित्र आत्मा उससे न लें। वह इस दृश्य को कभी नहीं भूला। और यहीं से एक रेखा आगे जाती है उस अभिषिक्त तक जिस पर आत्मा उतरा और ठहरा रहा; जो स्वयं त्यागा गया, ताकि जो उसके हैं उन पर से आत्मा कभी न उठे।
1 शमूएल 16:14 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
हम लगभग ईसा से एक हज़ार वर्ष पूर्व के इस्राएल में हैं, न्यायियों के युग से राजतंत्र में जाते हुए एक अस्थिर मोड़ पर। शाऊल गिलगाल और अमालेकियों के प्रकरणों के बाद पहले ही ठुकराया जा चुका है, शमूएल उससे अलग हो चुका है और उसके लिए विलाप करता रहा है। फिर भी शाऊल वर्षों तक राजा बना रहेगा। प्राचीन पूर्व में राजा की वैधता उसके देवता की कृपा से बँधी थी; आत्मा का उठ जाना केवल एक मानसिक संकट नहीं, राजगद्दी की जड़ का सूख जाना था। ध्यान दीजिए कि उसके कर्मचारी इसे खुलकर कह पाते हैं, "परमेश्वर की ओर से एक दुष्ट आत्मा तुझे घबराता है।" यह दरबार में इतना दिखने लगा था कि नौकर भी नाम लेकर बोल सकते थे। और उनका समाधान राजनीतिक नहीं, संगीतमय था।
1 शमूएल 16:14 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
जिन इस्राएलियों ने यह कहानी सुनी, वे राजाओं की लंबी विफलता को पीछे मुड़कर देख रहे थे, और कई ने अपनी आँखों से मंदिर को गिरते देखा था। उनके लिए यह वाक्य कोई धर्मशास्त्रीय पहेली नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय स्मृति थी: संस्थाएँ परमेश्वर की उपस्थिति से ज़्यादा जी सकती हैं। भवन खड़ा रह सकता है, अभिषेक का तेल सूख चुका होने पर भी पदवी बनी रह सकती है। यह उन्हें डराता था। पर उन्होंने यह भी सुना कि क्रम क्या है: पहले बैतलहम में तेल उंडेला गया, फिर गिबा में अंधकार उतरा। परमेश्वर का नया काम पुराने के ढहने से पहले ही शुरू हो चुका था। जो लोग खंडहरों में बैठे थे, उनके लिए यह क्रम ही सुसमाचार था।
1 शमूएल 16:14 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अगर परमेश्वर ने अंधकार को हटाया नहीं बल्कि उसके बीच वीणा भेजी, तो आपके अंधकार में आज कौन-सी "वीणा" रखी गई है जिसे आपने अभी तक परमेश्वर का दिया हुआ नहीं माना?
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1 Samuel 16 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 15

पिता, धन्यवाद कि शाऊल के कर्मचारियों की तरह आपने मेरे पास भी ऐसे लोग रखे हैं जो मेरी बेचैनी भाँप लेते हैं और चुप नहीं रहते, बल्कि उपाय खोजते हैं। धन्यवाद कि जो आत्मा शाऊल को घबराती थी, वह भी आपके अधिकार से बाहर नहीं थी, और मेरा मन भी आपके हाथ में सुरक्षित है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

दाऊद को भोज में बुलाया तक नहीं गया था। सात भाई पंक्ति में खड़े थे, और सबसे छोटा भेड़ों के पीछे खेत में था। पर परमेश्वर की नज़र वहीं टिकी थी। "उठकर इसका अभिषेक कर, क्योंकि यही है।" जहाँ तुझे कोई गिनती में नहीं लेता, वहाँ भी परमेश्वर तुझे जानता है। क्या तू उसकी बुलाहट सुनने को तैयार है?

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