बाइबल व्याख्या

1 शमूएल 20

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

दाऊद भागकर योनातान के पास आता है और एक ही सवाल बार-बार दोहराता है: मैंने क्या किया, मुझसे क्या पाप हुआ कि तेरा पिता मेरे प्राण की खोज में है? योनातान पहले विश्वास नहीं करता, फिर दोनों मिलकर एक परीक्षा ठहराते हैं: नये चाँद के भोज में दाऊद की कुर्सी खाली रहेगी, और शाऊल की प्रतिक्रिया से सच सामने आ जाएगा। शाऊल का क्रोध अपने ही बेटे पर भाला चलाने तक जाता है, और योनातान समझ जाता है कि निर्णय हो चुका है। अगली सुबह वह मैदान में तीर चलाकर दाऊद को चुपचाप संकेत देता है, और दोनों मित्र गले मिलकर, रोते हुए, यहोवा के नाम की वाचा दोहराते हुए अलग होते हैं।

मर्म

इस अध्याय का धड़कता हुआ शब्द है हेसेद, यानी वह वफादार कृपा जो वाचा से बँधी होती है; दाऊद कहता है, "तू अपने दास से कृपा का व्यवहार करना, क्योंकि तूने यहोवा की शपथ खिलाकर अपने दास को अपने साथ वाचा बँधाई है।" यह दोस्ती भावनाओं का मामला नहीं, कानूनी और पवित्र बंधन है। और ध्यान दीजिए कि कौन किसे बचा रहा है: सिंहासन का असली उत्तराधिकारी उस व्यक्ति की रक्षा कर रहा है जो उसका ताज ले लेगा। शाऊल यह ठीक समझता है, "जब तक यिशै का पुत्र भूमि पर जीवित रहेगा, तब तक न तो तू और न तेरा राज्य स्थिर रहेगा।" परमेश्वर का राज्य पकड़ने से नहीं, छोड़ने से आगे बढ़ता है, और निर्दोष के विरुद्ध भड़का क्रोध उसे रोक नहीं पाता।

सूत्र

इस अध्याय में एक खाली कुर्सी सबसे ज़ोर से बोलती है। परमेश्वर का अभिषिक्त राजा अपने ही राजा की मेज़ से अनुपस्थित है, मैदान में पत्थर के पीछे छिपा हुआ, क्योंकि जिस घर की उसे सेवा करनी थी वही उसकी जान का प्यासा है। दाऊद का यह रास्ता, अभिषेक से पहले निर्वासन, सिंहासन से पहले भागना, वही आकार है जो बाद में दाऊद के पुत्र में पूरा होता है: अपनों के बीच आया, और अपनों ने ग्रहण नहीं किया। योनातान का वह प्रश्न, "वह क्यों मारा जाए? उसने क्या किया है?" पीलातुस के आँगन तक गूँजता है, पर वहाँ कोई योनातान बीच में खड़ा नहीं होता। और योनातान की माँग, कि उसके घराने पर कृपादृष्टि कभी न हटे, वही वाचा-आधारित अनुग्रह है जिसके सहारे बाद में लँगड़ा मपीबोशेत राजा की मेज़ पर बैठता है, योग्यता से नहीं, किसी और की वफ़ादारी के कारण। हम भी उसी मेज़ पर उसी आधार पर बैठते हैं।

दर्पण

यह अध्याय उस दर्द को नाम देता है जिसे हम अक्सर छिपा लेते हैं: जब चोट उस जगह से आती है जहाँ से सुरक्षा मिलनी चाहिए थी। शाऊल पिता है, ससुर है, राजा है, और भाला चलाता है। शायद आप भी किसी परिवार, किसी कलीसिया, किसी दफ़्तर में यह जान चुके हैं कि "मेरे और मृत्यु के बीच डग ही भर का अन्तर है" कैसा महसूस होता है। पर ध्यान दीजिए कि योनातान क्या करता है: वह तटस्थ नहीं रहता। वह अपने पिता की मेज़ पर, सबके सामने, अनुपस्थित मित्र के लिए मुँह खोलता है, और उसकी कीमत चुकाता है। वफ़ादारी तब तक सस्ती है जब तक उसका कुछ खर्च न हो।

आज ही, जिस बातचीत या चैट में किसी अनुपस्थित व्यक्ति की मिट्टी पलीद हो रही है, वहाँ एक वाक्य लिखिए या बोलिए जो उसका बचाव करे, भले ही माहौल ठंडा पड़ जाए।

चिंतन

आपके जीवन में इस समय कौन-सी "खाली कुर्सी" है, यानी वह व्यक्ति जिसकी अनुपस्थिति पर सब चुप हैं, और क्या आप योनातान की तरह उसके लिए बोलने को तैयार हैं?

1 Samuel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Samuel: Looking on the Heart

Dale Ralph Davis

Storytelling commentary at its best, from Hannah's prayer to David's rise.

The Message of Samuel

Mary Evans

One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

1 Samuel For You

Tim Chester

Accessible walk through Samuel, Saul and David with constant application.

1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

Joyce Baldwin

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Samuel

Bill Arnold

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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1 Samuel 20 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 शमूएल 20 का क्या अर्थ है?
दाऊद भागकर योनातान के पास आता है और एक ही सवाल बार-बार दोहराता है: मैंने क्या किया, मुझसे क्या पाप हुआ कि तेरा पिता मेरे प्राण की खोज में है? योनातान पहले विश्वास नहीं करता, फिर दोनों मिलकर एक परीक्षा ठहराते हैं: नये चाँद के भोज में दाऊद की कुर्सी खाली रहेगी, और शाऊल की प्रतिक्रिया से सच सामने आ जाएगा। शाऊल का क्रोध अपने ही बेटे पर भाला चलाने तक जाता है, और योनातान समझ जाता है कि निर्णय हो चुका है। अगली सुबह वह मैदान में तीर चलाकर दाऊद को चुपचाप संकेत देता है, और दोनों मित्र गले मिलकर, रोते हुए, यहोवा के नाम की वाचा दोहराते हुए अलग होते हैं।
1 शमूएल 20 किस विषय में है?
इस अध्याय का धड़कता हुआ शब्द है हेसेद, यानी वह वफादार कृपा जो वाचा से बँधी होती है; दाऊद कहता है, "तू अपने दास से कृपा का व्यवहार करना, क्योंकि तूने यहोवा की शपथ खिलाकर अपने दास को अपने साथ वाचा बँधाई है।" यह दोस्ती भावनाओं का मामला नहीं, कानूनी और पवित्र बंधन है। और ध्यान दीजिए कि कौन किसे बचा रहा है: सिंहासन का असली उत्तराधिकारी उस व्यक्ति की रक्षा कर रहा है जो उसका ताज ले लेगा। शाऊल यह ठीक समझता है, "जब तक यिशै का पुत्र भूमि पर जीवित रहेगा, तब तक न तो तू और न तेरा राज्य स्थिर रहेगा।" परमेश्वर का राज्य पकड़ने से नहीं, छोड़ने से आगे बढ़ता है, और निर्दोष के विरुद्ध भड़का क्रोध उसे रोक नहीं पाता।
1 शमूएल 20 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इस अध्याय में एक खाली कुर्सी सबसे ज़ोर से बोलती है। परमेश्वर का अभिषिक्त राजा अपने ही राजा की मेज़ से अनुपस्थित है, मैदान में पत्थर के पीछे छिपा हुआ, क्योंकि जिस घर की उसे सेवा करनी थी वही उसकी जान का प्यासा है। दाऊद का यह रास्ता, अभिषेक से पहले निर्वासन, सिंहासन से पहले भागना, वही आकार है जो बाद में दाऊद के पुत्र में पूरा होता है: अपनों के बीच आया, और अपनों ने ग्रहण नहीं किया। योनातान का वह प्रश्न, "वह क्यों मा
1 शमूएल 20 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय उस दर्द को नाम देता है जिसे हम अक्सर छिपा लेते हैं: जब चोट उस जगह से आती है जहाँ से सुरक्षा मिलनी चाहिए थी। शाऊल पिता है, ससुर है, राजा है, और भाला चलाता है। शायद आप भी किसी परिवार, किसी कलीसिया, किसी दफ़्तर में यह जान चुके हैं कि "मेरे और मृत्यु के बीच डग ही भर का अन्तर है" कैसा महसूस होता है। पर ध्यान दीजिए कि योनातान क्या करता है: वह तटस्थ नहीं रहता। वह अपने पिता की मेज़ पर, सबके सामने, अनुपस्थित मित्र के लिए मुँह खोलता है, और उसकी कीमत चुकाता है। वफ़ादारी तब तक सस्ती है जब तक उसका कुछ खर्च न हो।
1 शमूएल 20 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आज ही, जिस बातचीत या चैट में किसी अनुपस्थित व्यक्ति की मिट्टी पलीद हो रही है, वहाँ एक वाक्य लिखिए या बोलिए जो उसका बचाव करे, भले ही माहौल ठंडा पड़ जाए।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Samuel 20 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, योनातान की तरह मुझे भी ऐसा दोस्त बना जो अपनी बात पर टिका रहे। तू मेरे वादों का गवाह है, इसलिए मैं हल्के मन से कुछ न कहूँ। जहाँ सच बोलना मुश्किल हो, वहाँ हिम्मत दे, और जिनसे मैंने वादा किया है, उनके लिए मुझे भरोसेमंद बना।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 34

पिता, कभी किसी अपने के साथ हुआ अन्याय देखकर मन जल उठता है और खाना भी गले से नहीं उतरता। उस गुस्से और दर्द को मैं तेरे सामने रखता हूँ। मुझे ऐसा दोस्त बना जो किसी के दुख में सच्चाई के साथ खड़ा रहे, और तू मेरे भीतर की कड़वाहट को सँभाल ले।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 20

योनातान के हाथ में वही धनुष था जिससे युद्ध लड़े जाते थे, पर उस दिन उसने तीर दुश्मन पर नहीं, अपने मित्र को बचाने के लिए चलाए। "मैं तीन तीर उस ओर चलाऊँगा, जैसे किसी निशाने पर चलाता हूँ।" प्रेम अपनी भाषा गढ़ लेता है, जब बोलना खतरनाक हो जाए। सोचो, तुम्हारे हाथ में जो है, वह किसे बचाने के काम आ रहा है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 26

हे प्रभु, कभी कभी मैं भी चुप रह जाता हूँ और मन ही मन दूसरों के बारे में अपनी कहानियाँ गढ़ लेता हूँ। मुझे सिखा कि अनुमान लगाने से पहले पूछूँ, और शक करने से पहले भरोसा करूँ। जो जगह मेरी मेज़ पर खाली है, उसे प्यार से याद रखूँ, कड़वाहट से नहीं।

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