लूका 22:19
पाठ
खाने के दौरान यीशु रोटी उठाते हैं, परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं, उसे अपने हाथों से तोड़ते हैं और चेलों को बाँट देते हैं। बाँटते हुए वे कहते हैं, "यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।" तीन क्रियाएँ, एक वाक्य, और उसके भीतर एक आज्ञा छिपी है। यह कोई भावुक विदाई-भाषण नहीं है, बल्कि एक निर्देश है जो उन्हीं लोगों को दिया जा रहा है जिनमें से एक उन्हें बेच चुका है, एक उन्हें नकारने वाला है, और बाकी कुछ ही पलों में इस बहस में उलझ जाएँगे कि "हम में से कौन बड़ा समझा जाता है?" रोटी उन हाथों में रखी जाती है जो थामने के लायक नहीं हैं।
मूल बात
यहाँ परमेश्वर की देह भोजन बन जाती है। यही इस वचन का धक्का है: मसीह अपने विषय में कोई सिद्धांत नहीं सौंपते, वे स्वयं को सौंपते हैं, और वह भी टूटे हुए रूप में। "जो तुम्हारे लिये दी जाती है" में क्रिया वर्तमान काल में है, जैसे क्रूस अभी घट ही रहा है, और चेले उसके लाभार्थी बनकर बैठे हैं, योगदान देने वाले नहीं। अनुग्रह का अर्थ यहाँ ठोस हो जाता है: आपको कुछ चबाकर निगलना है जो आपने नहीं कमाया। और साथ ही एक आज्ञा आती है, "यही किया करो", जो केवल स्मरण की नहीं बल्कि अनुकरण की माँग है। जिसने टूटी रोटी खाई है, उसका जीवन भी तोड़े जाने के लिए उपलब्ध हो जाता है, नौकरी में, घर में, बजट में।
सूत्र
लूका ने पहले ही सातवें पद में इशारा कर दिया है: यह वह दिन था "जिसमें फसह का मेम्ना बलि करना अवश्य था।" मेज़ पर जो रोटी है, वह मिस्र से निकलने की रात की याद है, उस लहू की याद जो चौखट पर लगाया गया था ताकि परिवार जीवित रहे। अब वही परंपरा एक व्यक्ति की देह की ओर मुड़ जाती है। मेम्ना अब मेज़ पर परोसा नहीं जाता, मेम्ना मेज़ पर बैठकर स्वयं को परोसता है। और छुटकारे का सूत्र यहीं दिखता है: परमेश्वर अपने लोगों को हमेशा किसी और की कीमत पर छुड़ाते हैं, और अंत में वह "कोई और" वे स्वयं निकलते हैं। इसलिए यह वचन इतिहास का अंत नहीं, उसका केंद्र है।
आईना
"जो तुम्हारे लिये दी जाती है" पर आपका अपना जीवन नाप लीजिए। दफ़्तर में जब श्रेय बँटता है, आप देते हैं या लेते हैं? घर में जब थकान चरम पर होती है, आपकी देह किसके लिए उपलब्ध है, या आप हिसाब रखने लगते हैं कि किसने कितना किया? पैसे के मामले में सबसे ईमानदार सवाल यह है: आपके बजट में कोई ऐसी पंक्ति है जो आपको किसी भी तरह लौटकर नहीं मिलेगी? यह वचन हमारी उस चालाकी को नंगा कर देता है जिसमें हम अनुग्रह मुफ़्त लेते हैं और अपना जीवन कड़े मोल-भाव पर बेचते हैं। पतरस की तरह हम भी कहते हैं, "मैं तेरे साथ बन्दीगृह जाने, वरन् मरने को भी तैयार हूँ," और आँगन की आग तक ही पहुँचते हैं।
आज रात भोजन से पहले रोटी हाथ में लें, उसे धीरे से तोड़ें और ऊँची आवाज़ में कहें: "यह मेरे लिये दी गई।" फिर उस एक व्यक्ति का नाम बोलिए जिसके लिए इस हफ़्ते आपको तोड़े जाने की ज़रूरत है।
बारीकी
क्रम पर ध्यान दें: "धन्यवाद करके तोड़ी।" धन्यवाद तोड़ने से पहले आता है, तोड़ने के बावजूद नहीं, बल्कि उसी टूटन के ऊपर। यीशु उस रोटी के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं जो उनकी अपनी देह का चिह्न है, और वे यह उस रात करते हैं जब उनका पसीना लहू जैसा गिरने वाला है। यह हमारी आदत के उलट है; हम धन्यवाद तब देते हैं जब चीज़ें जुड़ चुकी होती हैं, चंगाई मिल चुकी होती है, नौकरी बच चुकी होती है। यहाँ धन्यवाद उस चीज़ को सौंपने का तरीका है जो अभी हाथ से जा रही है। जो टूटने से पहले धन्यवाद कर सकता है, वह टूटन का शिकार नहीं, उसका दाता बन जाता है।
प्रश्न
अगले ही पद में यीशु कहते हैं, "मेरे पकड़वानेवाले का हाथ मेरे साथ मेज पर है।" लूका के क्रम में यहूदा ने वह रोटी खाई। तो क्या इस मेज़ पर बैठना, यह रोटी लेना, किसी बात की गारंटी नहीं देता? स्पष्ट उत्तर यह है: नहीं। अनुग्रह जबरन काम नहीं करता, और परमेश्वर की उपस्थिति में बैठा व्यक्ति भी अंधकार को चुन सकता है। यह डरावना है, और मैं इसे मीठा नहीं करूँगा। पर उसी मेज़ पर पतरस भी था, जो नकारेगा और लौटेगा। दोनों ने वही रोटी खाई; अंतर इसमें नहीं था कि किसे रोटी मिली, बल्कि इसमें कि कौन टूटकर वापस आया। यह रहस्य हमें बेफ़िक्र नहीं, सजग बनाता है।
अंतर्पाठ
निर्गमन 12 में हर घर को मेम्ना खाना था, केवल उसे देखना काफ़ी नहीं था; छुटकारा भीतर लेना पड़ता था। यही तर्क यहाँ है। और पौलुस 1 कुरिन्थियों 11 में इसी वचन को उन लोगों के सामने रखते हैं जो प्रभु-भोज पर आकर ग़रीब भाइयों को शर्मिंदा कर रहे थे: जिस मेज़ पर मसीह की देह बाँटी जाती है, वहाँ कलीसिया की देह को बाँटा नहीं जा सकता। यह जोड़ इस वचन की नैतिक धार दिखाता है। "मेरे स्मरण के लिये यही किया करो" का अर्थ केवल रविवार की विधि नहीं, बल्कि यह भी है कि मेज़ पर किसे जगह मिलती है और किसकी भूख आपकी थाली से पहले आती है।
मनन
इस हफ़्ते किस एक जगह पर मैंने अपने आराम की रक्षा की, जहाँ मसीह की तरह उपलब्ध होना ज़्यादा सही था?
मेरे भोजन की मेज़ पर, और मेरे समय की मेज़ पर, कौन बैठता है, और मैं किसे चुपचाप बाहर रखता हूँ?
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Luke 22:19 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Luke 22 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
वह कह ही रहा था कि तुरन्त मुर्गे ने बाँग दी।" पतरस का वाक्य पूरा भी नहीं हुआ था। इनकार शब्दों के बीच में ही पकड़ा गया। कितनी बार हम भी अपनी सफाई गढ़ते रह जाते हैं और भीतर कुछ बाँग देकर सच बोल देता है। वह आवाज़ सज़ा नहीं थी, बुलाहट थी। तुम्हारे जीवन में आज कौन सी बाँग सुनाई दे रही है, जिसे तुम अनसुना कर रहे हो?
पिता, यह जानकर मन को चैन मिलता है कि जब मैं डगमगाता हूँ, तब भी कोई मेरे लिए प्रार्थना कर रहा है। मेरा विश्वास टूटने न देना। और जब मैं लौटूँ, तो मुझे ऐसा बना कि मैं अपने साथ चलने वालों को थाम सकूँ।
अंतिम भोज की मेज़ पर, जब यीशु अपनी मृत्यु की बात कर रहे थे, चेले इस पर झगड़ रहे थे कि बड़ा कौन है। तब यीशु ने कहा, "अन्यजातियों के राजा उन पर प्रभुता करते हैं; और जो उन पर अधिकार रखते हैं, वे उपकारक कहलाते हैं।" ध्यान दे, वे दबाते हैं, फिर भी "उपकारक" कहलाते हैं। सेवा का नाम, और भीतर अपना बड़प्पन। तेरे घर में, कलीसिया में, तेरी सेवा किसका नाम बड़ा कर रही है?
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