1 शमूएल 23
पाठ
दाऊद सुनता है कि पलिश्ती कीला के खलिहान लूट रहे हैं। वह यहोवा से पूछता है, दो बार, क्योंकि उसके डरे हुए साथी जाना नहीं चाहते; फिर वह जाकर नगर को बचाता है। पर बचाया हुआ नगर ही उसके लिए फंदा बन जाता है: शाऊल कहता है, "परमेश्वर ने उसे मेरे हाथ में कर दिया है," और दाऊद एपोद के द्वारा पूछकर जान लेता है कि कीला के लोग उसे पकड़वा देंगे। छह सौ लोगों के साथ वह निकल भागता है और जीप, होरेश, माओन के जंगलों में मारा-मारा फिरता है। बीच में योनातान आकर उसे "परमेश्वर की चर्चा करके" ढाढ़स देता है। अंत में जब शाऊल का घेरा लगभग पूरा हो चुका है, एक दूत की खबर उसे लौटा ले जाती है, और दाऊद बच निकलता है।
मूल बात
यह अध्याय एक असहज सच्चाई पर टिका है: परमेश्वर का अभिषिक्त जन उन्हीं को बचाता है जो उसे सौंप देने को तैयार हैं। दाऊद कीला के लिए अपनी जान जोखिम में डालता है, और कीला उसके बदले में कृतज्ञता नहीं, विश्वासघात रखता है। परमेश्वर यह बात दाऊद को पहले ही बता देते हैं, और फिर भी उद्धार का काम पहले हो चुका है, वापस नहीं लिया जाता। यहाँ परमेश्वर की सुरक्षा भी दिखती है, पर वैसी नहीं जैसी हम चाहते हैं: शाऊल "प्रतिदिन ढूँढ़ता रहा, परन्तु परमेश्वर ने उसे उसके हाथ में न पड़ने दिया।" खतरा हटाया नहीं गया, उसके भीतर से बचाव दिया गया। राजा बनने का वादा जंगल की गुफाओं से होकर पूरा होता है, और यही परमेश्वर के राज्य का ढंग है।
जुड़ा हुआ धागा
कीला की कहानी एक ढाँचा बनाती है जो बाइबिल में बार-बार लौटता है: अभिषिक्त जन आता है, बचाता है, और जिन्हें उसने बचाया वही उसे सौंपने की तैयारी करते हैं। यूहन्ना अपने सुसमाचार की शुरुआत में यही कहता है, कि वह अपनों के पास आया और अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। पर यहाँ अंतर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दाऊद पूछता है, उत्तर पाता है, और निकल भागता है, क्योंकि उसका समय अभी नहीं आया। यीशु भी बार-बार भीड़ के हाथ से निकल जाते हैं, जब तक कि घड़ी नहीं आती; और तब वे नहीं भागते। गतसमनी में वही सवाल सामने आता है जो कीला में था, क्या नगर अपने उद्धारकर्ता को पकड़वा देगा, और उत्तर वही है, हाँ, वे कर देंगे। फर्क यह कि दूसरा दाऊद उस "हाँ" को जानते हुए रुक जाते हैं।
दर्पण
यह अध्याय उस घाव पर उँगली रखता है जिसे हम धार्मिक भाषा से ढक देते हैं: भलाई करने पर भी लोग आपके साथ खड़े नहीं होंगे। आपने विभाग को संकट से निकाला, और छँटनी की सूची में आपका नाम है। आपने वर्षों परिवार को सँभाला, और बँटवारे के समय कोई आपका पक्ष नहीं लेता। मंडली में आपने काम किया, और अफवाह आपके ही बारे में चलती है। दाऊद को यह पहले से बता दिया जाता है, और वह फिर भी कीला को बचाता है; पश्चात्ताप नहीं करता कि मैंने क्यों बचाया। साथ ही यह देखिए कि परमेश्वर ने उसे अकेला नहीं छोड़ा: योनातान जंगल तक चलकर आया और "परमेश्वर की चर्चा करके उसको ढाढ़स दिलाया।" आज यही कीजिए: उस एक व्यक्ति को अभी फोन या संदेश कीजिए जो इस समय अपने जंगल में छिपा है, और बातचीत में मौसम नहीं, परमेश्वर की एक बात कहिए।
एक बारीकी
शाऊल का वाक्य सबसे डरावना है: "परमेश्वर ने उसे मेरे हाथ में कर दिया है।" वह भक्ति की भाषा में हत्या की योजना बना रहा है। कुछ ही समय पहले उसने नोब के याजकों को कटवाया था, और अब वह परमेश्वर की सहायता की गवाही दे रहा है। बाद में वह जीपियों से कहता है, "यहोवा की आशीष तुम पर हो," मानो विश्वासघात कोई पुण्य का काम हो। यही वह जगह है जहाँ यह पाठ हमें चुभता है, क्योंकि शाऊल झूठ नहीं बोल रहा, वह सचमुच मानता है। परिस्थितियों का अनुकूल होना परमेश्वर की स्वीकृति का प्रमाण नहीं है। दाऊद के पास एपोद है और वह पूछता है; शाऊल के पास सिर्फ अपनी व्याख्या है और वह घोषणा करता है। दोनों के बीच का फर्क प्रार्थना और आत्म-भ्रम का फर्क है।
संदर्भ
यह घटना शाऊल के राज्य के आखिरी, सड़ते हुए वर्षों की है। कीला यहूदा की पश्चिमी सीमा पर, पलिश्ती इलाके के पास बसा किलेबंद कस्बा था; खलिहानों का लूटा जाना मतलब पूरे साल का अनाज छिन जाना, यानी भुखमरी। दाऊद के पास कोई सेना नहीं, छह सौ आदमी हैं, जिनमें से कई कर्ज और असंतोष से भागे हुए लोग थे। एब्यातार नोब के नरसंहार का इकलौता बचा हुआ याजक है, और वह एपोद लेकर आया है: इसका अर्थ यह कि परमेश्वर से पूछने का रास्ता अब राजा के दरबार में नहीं, जंगल में है। और जीपी लोग विदेशी नहीं, दाऊद के अपने यहूदा गोत्र के हैं। वे राजा की कृपा पाने के लिए अपने ही आदमी का पता बेच देते हैं। यही राजनीति का रोज़मर्रा का व्याकरण था।
अंतर्पाठ
भजन 54 का शीर्षक सीधे इसी क्षण को पकड़ता है, जब जीपियों ने शाऊल को दाऊद का ठिकाना बताया था। वहाँ दाऊद शिकायत नहीं गिनाता, वह परमेश्वर के नाम से बचाए जाने की दुहाई देता है; जंगल की भगदड़ के नीचे एक गाया हुआ भरोसा बह रहा था। दूसरी ओर, महायाजक कैफा की वह ठंडी गणना याद कीजिए कि पूरी जाति के नाश से बेहतर है कि एक मनुष्य मर जाए। कीला के लोग भी यही सोचते: एक भगोड़े के कारण पूरा नगर क्यों जले? तर्क समझ में आता है, और ठीक इसी तर्क पर मसीह को सौंपा गया। पर परमेश्वर ने उस सौदे को उलट दिया: जिसे नगर बचाने के लिए सौंपा गया, उसी के द्वारा नगर बचा।
चिंतन
कहाँ मैंने अपनी सुविधा की व्याख्या को "परमेश्वर ने ऐसा कर दिया है" कहकर पवित्र बना लिया है, बिना पूछे?
जिन्हें मैंने सेवा दी और जिनसे कुछ वापस नहीं मिला, क्या मैं उनके लिए वैसा ही करूँगा जैसा दाऊद ने कीला के लिए किया, यह जानते हुए भी कि वे साथ नहीं देंगे?
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1 Samuel 23 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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1 शमूएल 23 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
1 शमूएल 23 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
1 Samuel 23 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पहाड़ के एक ओर शाऊल, दूसरी ओर दाऊद, और बीच में सिर्फ पत्थर की एक दीवार। "दाऊद शाऊल के डर के मारे जल्दी करके चला जा रहा था।" घेरा लगभग पूरा हो चुका था। परमेश्वर ने उसे पहले नहीं छुड़ाया, ठीक उस पल छुड़ाया जब भागने की जगह खत्म हो गई थी। तेरी घड़ी भी ऐसी ही लग रही हो, तो याद रख, वह देर से आता दिखता है, पर कभी चूकता नहीं।
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