1 शमूएल 3:10
पाठ
चौथी बार परमेश्वर पुकारते हैं, पर इस बार कुछ बदल जाता है: वे केवल दूर से आवाज़ नहीं देते, वे "आ खड़ा हुआ" और नाम दोहराकर पुकारते हैं, "शमूएल! शमूएल!" और वह बालक, जो तीन बार गलत दरवाज़े पर दौड़ चुका था, अब लेटा-लेटा उत्तर देता है, "कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।" पहली बार उसकी आवाज़ एली की ओर नहीं, बल्कि परमेश्वर की ओर मुड़ती है। यह पद पूरे अध्याय का मोड़ है: यहीं से एक नबी का जन्म होता है, और यहीं से इस्राएल पर वह न्याय की बात कही जाएगी जिससे "सब सुननेवालों पर बड़ा सन्नाटा छा जाएगा।"
मर्म
ध्यान दीजिए कि इस पद में सक्रिय कौन है। शमूएल खोज नहीं रहा, प्रार्थना नहीं कर रहा, वह तो सो रहा है। परमेश्वर आते हैं, खड़े होते हैं, पुकारते हैं। यही प्रकाशन का स्वभाव है: परमेश्वर छिपे हुए नहीं रहते, वे अपने वचन से अपने आपको प्रगट करते हैं, और वह भी तब जब "यहोवा का वचन दुर्लभ था; और दर्शन कम मिलता था।" यह अनुग्रह है, कमाई हुई पात्रता नहीं। साथ ही यह वाचा की सच्चाई है: परमेश्वर ने इस्राएल से बोलना बंद नहीं किया, चाहे शीलो का याजक-घराना भ्रष्ट हो चुका था। और नाम से दो बार पुकारना बताता है कि यह परमेश्वर किसी अनजान शक्ति की तरह नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से, आमने-सामने बोलते हैं। सुनना, न कि पहले बोलना, विश्वास की पहली मुद्रा है।
जोड़नेवाला सूत्र
शीलो में उस रात जो शुरू होता है, वह इस्राएल के इतिहास की एक नई धारा है। पुरोहिती व्यवस्था सड़ चुकी है, होप्नी और पीनहास बलिदान की चर्बी लूट रहे हैं, और परमेश्वर उस ढाँचे को बचाने की जगह एक नया माध्यम खड़ा करते हैं: वचन का सेवक, नबी। यहीं से वह रेखा खिंचती है जो नातान, एलिय्याह, यशायाह और यिर्मयाह से होकर उस एक तक जाती है जिसके विषय मूसा ने कहा था कि परमेश्वर तेरे भाइयों में से तेरे लिये एक नबी खड़ा करेंगे। शमूएल पुकारे जाने पर उत्तर देता है; मसीह पिता के पास से भेजे जाकर आते हैं और कहते हैं कि उन्होंने अपनी ओर से कुछ नहीं कहा। और शमूएल ही वह हाथ होगा जो दाऊद के सिर पर तेल उँडेलेगा, उस वंश पर जिससे राजा आएगा। सुनने से शुरू होकर राज्य तक पहुँचनेवाली एक कड़ी।
दर्पण
हम आम तौर पर तीन बार एली के पास दौड़ते हैं इससे पहले कि परमेश्वर की ओर मुड़ें। समस्या यह नहीं कि हम धार्मिक नहीं हैं; शमूएल तो मन्दिर में ही सो रहा था। समस्या यह है कि हम आवाज़ को हमेशा किसी परिचित मानवीय स्रोत में ढूँढ़ते हैं: बॉस की राय, माता-पिता की अपेक्षा, समूह की सहमति, बैंक बैलेंस की चेतावनी। और जब परमेश्वर बोलते हैं तो हम अक्सर वही करते हैं जो शमूएल ने किया, दौड़कर किसी और से पूछते हैं कि इसका क्या मतलब है। ध्यान दीजिए, शमूएल उत्तर देता है इससे पहले कि जाने संदेश क्या है। यह खतरनाक आज्ञाकारिता है, बिना शर्त की। आज एक काम कीजिए: दिन के किसी शांत क्षण में, दस मिनट फोन बंद करके बैठिए और ज़ोर से कहिए, "कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है", और फिर चुप रहिए, कोई माँग रखे बिना।
मुख्य पात्र
इस दृश्य के केंद्र में परमेश्वर हैं, और जो सबसे चौंकाता है वह उनकी निकटता है: "तब यहोवा आ खड़ा हुआ।" यह वही परमेश्वर हैं जिनका सन्दूक उसी कमरे में है, जिनकी पवित्रता के कारण कोई उन्हें छू नहीं सकता, पर वे एक सोए हुए बालक के पास आकर खड़े होते हैं। वे धीरज रखते हैं, तीन गलत जवाबों के बाद भी चौथी बार पुकारते हैं, और शमूएल की समझ के परिपक्व होने का इंतज़ार करते हैं। पर यह कोमलता नरमी नहीं है: अगले ही वाक्य में वे एली के घराने पर ऐसा न्याय सुनाते हैं जिसका प्रायश्चित किसी बलिदान से नहीं होगा। पवित्रता और अनुग्रह यहाँ एक ही स्वर में बोलते हैं, और वह स्वर एक नाम पुकारता है।
कठिन प्रश्न
परमेश्वर ने वह भारी संदेश एली को सीधे क्यों नहीं दिया? वे तो महायाजक थे, वे ही अपने बेटों के दोषी थे, और उन्हीं की आँखें "धुँधली होने लगी थीं"। इसके बजाय परमेश्वर एक बच्चे को चुनते हैं और उस बच्चे को अपने ही गुरु के विरुद्ध बोलना पड़ता है। इसमें कुछ निर्दयी सा लगता है। पर शायद यही बात है: एली ने चेतावनी पहले ही सुन ली थी, "मैं तो उसको यह कहकर जता चुका हूँ", और उसने कुछ नहीं किया। जब कोई बार-बार सुनकर नहीं सुनता, तो परमेश्वर बोलना बंद नहीं करते, वे बोलनेवाला बदल देते हैं। यह राहत नहीं देता। यह चेतावनी देता है कि सुनने का अवसर हमेशा खुला नहीं रहता।
एक बारीकी
"तेरा दास सुन रहा है" में शमूएल एली की सिखाई पंक्ति से एक शब्द छोड़ देता है: "यहोवा"। एली ने कहा था, "हे यहोवा, कह", पर बालक केवल "कह" कहता है। कुछ लोग इसमें डर देखते हैं, और सही ही; उस नाम को अपने मुँह में लेना छोटी बात नहीं थी। पर इससे एक और बात खुलती है। शमूएल अभी उस नाम को नहीं जानता, वह अभी केवल उस आवाज़ को जानता है जो उसके अपने नाम को दो बार पुकारती है। पहचान बाद में आएगी, पद इक्कीस में, जब यहोवा "अपने वचन के द्वारा" स्वयं को प्रगट करेंगे। परमेश्वर पूरी समझ की माँग नहीं करते; वे खुली कान की माँग करते हैं।
चिंतन
आपके जीवन में वे कौन सी "एली" जैसी परिचित आवाज़ें हैं जिनके पास आप दौड़ते हैं इससे पहले कि परमेश्वर की ओर मुड़ें?
क्या आप संदेश जाने बिना "तेरा दास सुन रहा है" कहने को तैयार हैं, या आप पहले जानना चाहते हैं कि परमेश्वर क्या माँगेंगे?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।
अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।
नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।
प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।
1 Samuel 3:10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
1 शमूएल 3:10 का क्या अर्थ है?
1 शमूएल 3:10 किस विषय में है?
1 शमूएल 3:10 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
1 शमूएल 3:10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
1 शमूएल 3:10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
1 Samuel 3 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, मैं अक्सर शोर में इतना उलझा रहता हूँ कि तेरी आवाज़ पहचान नहीं पाता। मुझे शांत रहना सिखा, और सुनने का मन दे। जब तू पुकारे, मैं कहूँ कि बोल, तेरा सेवक सुन रहा है। मेरे कान और दिल तेरे लिए खुले रहें।
पिता, धन्यवाद कि उस अंधियारे समय में भी तेरा दीपक बुझा नहीं था। आज भी तेरी ज्योति मेरे मन में जल रही है। धन्यवाद कि तूने मुझे भी अपने सन्दूक के पास, अपनी उपस्थिति में विश्राम करने की जगह दी है, और वहीं तू मुझसे बात करता है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें