बाइबल व्याख्या

1 शमूएल 3

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

शीलो में रात है। बूढ़े याजक एली की आँखें धुँधली पड़ चुकी हैं, मन्दिर का दीपक अभी बुझा नहीं है, और सन्दूक के पास एक बालक लेटा हुआ है। उसी अँधेरे में एक आवाज़ उसका नाम पुकारती है, और वह तीन बार गलत दरवाज़े पर दौड़ जाता है, जब तक एली समझ नहीं लेता कि पुकारने वाला कौन है। जब शमूएल अन्ततः सुनता है, तो जो सन्देश उसे मिलता है वह मीठा नहीं है: एली के घराने पर वह न्याय आ रहा है जिसका प्रायश्चित किसी बलि से नहीं होगा। सुबह लड़का दरवाज़े खोलता है और डरता है कि बताए कैसे।

मर्म

अध्याय की पहली पंक्ति ही सबसे भारी है: "उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था; और दर्शन कम मिलता था।" परमेश्वर की चुप्पी कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, वह एक स्थिति थी, एक ऐसे समय का चेहरा जिसमें पूजा-पाठ चलता रहा पर आवाज़ थम गई। और फिर, बिना किसी माँग के, बिना किसी अनुष्ठान के, वह आवाज़ लौटती है, और वह भी उस जगह नहीं जहाँ अधिकार बैठा है बल्कि उस बच्चे के पास जो अभी परमेश्वर को "नहीं पहचानता था"। यही इस पाठ का मर्म है: परमेश्वर बोलने के लिए बाध्य नहीं हैं, पर जब वे बोलते हैं, तो वे अपनी शर्तों पर बोलते हैं, और उनकी शर्तें अक्सर हमारे पदानुक्रम को उलट देती हैं।

मुख्य सूत्र

बाइबल की बड़ी कहानी में यह रात एक मोड़ है। शासन याजकों के भ्रष्ट घराने से हटकर नबी के मुँह में जा रहा है, और नबी वह है जो केवल सुनता है और दोहराता है। शमूएल के साथ वह लम्बी कड़ी शुरू होती है जो अन्ततः उस एक तक पहुँचती है जो न केवल वचन सुनाते हैं बल्कि स्वयं वचन हैं। और ध्यान दीजिए, वचन 14 कहता है कि एली के घराने के अधर्म का प्रायश्चित न मेलबलि से होगा न अन्नबलि से। यह वाक्य एक खाई खोदता है जिसे पुराना नियम भर नहीं सकता। क्रूस पर ही वह खाई भरी जाती है, वहाँ जहाँ एक बलि अन्ततः पर्याप्त होती है।

दर्पण

हम अक्सर सोचते हैं कि हम परमेश्वर की चुप्पी से परेशान हैं, जबकि सच यह है कि हम उनकी आवाज़ को पहचानना नहीं जानते। शमूएल तीन बार उठा, तीन बार दौड़ा, तीन बार गलत जगह पहुँचा। सुनने की क्षमता जन्मजात नहीं होती, वह सिखाई जाती है, धीरे-धीरे, और आम तौर पर किसी बड़े के द्वारा जो स्वयं आधा टूटा हुआ हो। दूसरी बात और चुभती है: शमूएल डरा कि एली को बताए। हममें से कितने लोग सच जानते हैं, दफ्तर में, परिवार में, कलीसिया की समिति में, और सुबह के दरवाज़े खोलकर चुप रह जाते हैं क्योंकि सच बोलना रिश्ता तोड़ सकता है? यह पाठ उस चुप्पी को आराम नहीं देता।

मुख्य पात्र

शमूएल इस अध्याय में कुछ भी हासिल नहीं करता। वह न प्रार्थना करता है, न खोजता है, न योग्य ठहरता है। वह बस वहाँ लेटा है, दीपक के पास, और पुकारा जाता है। उसका पूरा चरित्र इस एक वाक्य में है: "कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।" पर ध्यान दीजिए, उसने वह वाक्य खुद नहीं गढ़ा; एली ने उसे सिखाया। और फिर सुबह वह डरता है। यह डर उसे छोटा नहीं करता, वह उसे मनुष्य बनाता है। तेरह वचन बाद हम पढ़ते हैं कि "उसने शमूएल की कोई भी बात निष्फल होने नहीं दी।" जो बालक बोलने से काँपता था, उसका एक शब्द भी ज़मीन पर नहीं गिरा। यह उसकी उपलब्धि नहीं, परमेश्वर की संगति का फल है।

अंतर-पाठ

पिछला अध्याय पहले ही एक अनजान भविष्यद्वक्ता के मुँह से एली के घराने पर दण्ड सुना चुका है (1 शमूएल 2)। यानी शमूएल को कोई नई खबर नहीं मिली, केवल पुष्टि। परमेश्वर पहले चेतावनी देते हैं, फिर दोहराते हैं, और तब कार्य करते हैं; न्याय कभी अचानक नहीं आता। दूसरी ओर, यूहन्ना 10 में यीशु कहते हैं कि उनकी भेड़ें उनका शब्द पहचानती हैं और नाम से बुलाई जाती हैं। शमूएल की रात उस वचन का पुराना नियम वाला रूप है: चरवाहा नाम लेकर पुकारता है, और पहचान अभ्यास से आती है, तुरंत नहीं।

एक बारीकी

"परमेश्वर का दीपक अब तक बुझा नहीं था।" यह छोटा-सा वाक्य समय बताने के लिए है, भोर से ठीक पहले का पहर, पर वह इससे कहीं ज़्यादा कहता है। एली की आँखें बुझ रही हैं, उसके बेटे भ्रष्ट हैं, वचन दुर्लभ है, फिर भी दीपक जल रहा है। कमज़ोर, टिमटिमाता, पर बुझा नहीं। यह इस्राएल की उस रात की सटीक तस्वीर है, और शायद हमारी भी। परमेश्वर की उपस्थिति उन घरों और कलीसियाओं से भी पूरी तरह नहीं हटती जहाँ बहुत कुछ सड़ चुका है। लौ छोटी हो सकती है। पर जब तक वह जल रही है, आवाज़ लौट सकती है, और आम तौर पर वह उसी को पुकारती है जो पास ही सो रहा है।

मनन

आपके जीवन में इस समय कौन-सा "दीपक" टिमटिमा रहा है, और क्या आप उसे बुझा मान चुके हैं?

शमूएल ने एली से कुछ भी नहीं छिपाया। कौन-सा सच है जो आप जानते हैं और बताने से डरते हैं, और उस डर के नीचे असल में क्या है?

1 Samuel में और गहराई से जानें

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1 Samuel: Looking on the Heart

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The Message of Samuel

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One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

1 Samuel For You

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1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

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1 and 2 Samuel

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1 Samuel 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 शमूएल 3 का क्या अर्थ है?
शीलो में रात है। बूढ़े याजक एली की आँखें धुँधली पड़ चुकी हैं, मन्दिर का दीपक अभी बुझा नहीं है, और सन्दूक के पास एक बालक लेटा हुआ है। उसी अँधेरे में एक आवाज़ उसका नाम पुकारती है, और वह तीन बार गलत दरवाज़े पर दौड़ जाता है, जब तक एली समझ नहीं लेता कि पुकारने वाला कौन है। जब शमूएल अन्ततः सुनता है, तो जो सन्देश उसे मिलता है वह मीठा नहीं है: एली के घराने पर वह न्याय आ रहा है जिसका प्रायश्चित किसी बलि से नहीं होगा। सुबह लड़का दरवाज़े खोलता है और डरता है कि बताए कैसे।
1 शमूएल 3 किस विषय में है?
बाइबल की बड़ी कहानी में यह रात एक मोड़ है। शासन याजकों के भ्रष्ट घराने से हटकर नबी के मुँह में जा रहा है, और नबी वह है जो केवल सुनता है और दोहराता है। शमूएल के साथ वह लम्बी कड़ी शुरू होती है जो अन्ततः उस एक तक पहुँचती है जो न केवल वचन सुनाते हैं बल्कि स्वयं वचन हैं। और ध्यान दीजिए, वचन 14 कहता है कि एली के घराने के अधर्म का प्रायश्चित न मेलबलि से होगा न अन्नबलि से। यह वाक्य एक खाई खोदता है जिसे पुराना नियम भर नहीं सकता। क्रूस पर ही वह खाई भरी जाती है, वहाँ जहाँ एक बलि अन्ततः पर्याप्त होती है।
1 शमूएल 3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
शमूएल इस अध्याय में कुछ भी हासिल नहीं करता। वह न प्रार्थना करता है, न खोजता है, न योग्य ठहरता है। वह बस वहाँ लेटा है, दीपक के पास, और पुकारा जाता है। उसका पूरा चरित्र इस एक वाक्य में है: "कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है।" पर ध्यान दीजिए, उसने वह वाक्य खुद नहीं गढ़ा; एली ने उसे सिखाया। और फिर सुबह वह डरता है। यह डर उसे छोटा नहीं करता, वह उसे मनुष्य बनाता है। तेरह वचन बाद हम पढ़ते हैं कि "उसने शमूएल की कोई भी बात निष्फल होने नहीं दी।" जो बालक बोलने से काँपता था, उसका एक शब्द भी ज़मीन पर नहीं गिरा। यह उसकी उपलब्धि नहीं, परमेश्वर की संगति का फल है।
1 शमूएल 3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"परमेश्वर का दीपक अब तक बुझा नहीं था।" यह छोटा-सा वाक्य समय बताने के लिए है, भोर से ठीक पहले का पहर, पर वह इससे कहीं ज़्यादा कहता है। एली की आँखें बुझ रही हैं, उसके बेटे भ्रष्ट हैं, वचन दुर्लभ है, फिर भी दीपक जल रहा है। कमज़ोर, टिमटिमाता, पर बुझा नहीं। यह इस्राएल की उस रात की सटीक तस्वीर है, और शायद हमारी भी। परमेश्वर की उपस्थिति उन घरों और कलीसियाओं से भी पूरी तरह नहीं हटती जहाँ बहुत कुछ सड़ चुका है। लौ छोटी हो सकती है। पर जब तक वह जल रही है, आवाज़ लौट सकती है, और आम तौर पर वह उसी को पुकारती है जो पास ही सो रहा है।
1 शमूएल 3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
शमूएल ने एली से कुछ भी नहीं छिपाया। कौन-सा सच है जो आप जानते हैं और बताने से डरते हैं, और उस डर के नीचे असल में क्या है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Samuel 3 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 20

प्रभु, जैसे आपने शमूएल को धीरे धीरे स्थिर किया और सबने जान लिया कि उसकी बातें आपसे आती हैं, वैसे ही मुझे भी सच्चा बनाइए। मेरे शब्द और मेरा जीवन एक जैसे हों, ताकि लोग मुझमें नहीं, आपमें भरोसा करें।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 9

पिता, मैं अक्सर शोर में इतना उलझा रहता हूँ कि तेरी आवाज़ पहचान नहीं पाता। मुझे शांत रहना सिखा, और सुनने का मन दे। जब तू पुकारे, मैं कहूँ कि बोल, तेरा सेवक सुन रहा है। मेरे कान और दिल तेरे लिए खुले रहें।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 3

पिता, धन्यवाद कि उस अंधियारे समय में भी तेरा दीपक बुझा नहीं था। आज भी तेरी ज्योति मेरे मन में जल रही है। धन्यवाद कि तूने मुझे भी अपने सन्दूक के पास, अपनी उपस्थिति में विश्राम करने की जगह दी है, और वहीं तू मुझसे बात करता है।

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