बाइबल व्याख्या

2 इतिहास 3

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

सुलैमान यरूशलेम में मोरिय्याह पहाड़ पर, ठीक उसी जगह जो उसके पिता दाऊद ने यबूसी ओर्नान के खलिहान में तैयार की थी, यहोवा का भवन बनाना शुरू करता है। नाप-तोल, देवदार की छत, पर्वेम का सोना, खजूर और साँकलों की नक्काशी, परमपवित्र स्थान में पंख फैलाए दो करूब, नीले-बैंगनी-लाल का पर्दा, और सामने खड़े दो खम्भे जिनके नाम याकीन और बोअज रखे गए। यह अध्याय एक इमारत का विवरण है, लेकिन हर नाप के पीछे एक धर्मशास्त्र छिपा है।

मर्म

पहला वाक्य ही सब कुछ तय कर देता है: भवन कहीं भी नहीं बना, बल्कि "मोरिय्याह नामक पहाड़ पर उसी स्थान में" जहाँ ओर्नान का खलिहान था। खलिहान वह जगह थी जहाँ दाऊद के पाप के कारण आई महामारी रुकी थी; वहीं वेदी बनी, वहीं दया ने न्याय को थाम लिया। मन्दिर इसी बिंदु पर खड़ा है, अनुग्रह की ज़मीन पर। परमेश्वर अपने लिए ऐसा घर चुनते हैं जो क्षमा की स्मृति पर टिका हो। और भीतर, परमपवित्र स्थान में, कोई मूर्ति नहीं, बस दो करूब पंख फैलाए हुए और एक खाली जगह। पवित्रता का अर्थ यह नहीं कि परमेश्वर दूर हैं; अर्थ यह है कि वे अपनी शर्तों पर पास आते हैं।

सूत्र

मोरिय्याह वही पहाड़ है जहाँ अब्राहम ने इसहाक को बाँधा था और परमेश्वर ने कहा था कि वे स्वयं बलि का प्रबंध करेंगे (उत्पत्ति 22)। इतिहासकार इस नाम को बेवजह नहीं उठाता: जहाँ एक पिता का हाथ रोका गया, वहीं अब वह भवन उठता है जिसमें युगों तक लहू बहेगा। और सोने से मढ़ी दीवारों पर खजूर के वृक्ष, अनार, करूब, ये अदन की भाषा है, वही बाग़ जिसके द्वार पर करूब पहरा दे रहे थे। मन्दिर एक छोटा-सा पुनर्निर्मित अदन है, यह घोषणा कि परमेश्वर सृष्टि को छोड़ नहीं रहे। यह पत्थर का वादा था; पूरा उसमें हुआ जिसने अपने शरीर को मन्दिर कहा और जिसकी मृत्यु पर वह "बीचवाला पर्दा" ऊपर से नीचे तक फट गया।

दर्पण

हमें यह पसंद है कि परमेश्वर की उपस्थिति सुविधाजनक हो, हमारे कार्यक्रम के हिसाब से, हमारी शर्तों पर। यह अध्याय उस इच्छा पर हल्का-सा हाथ रखता है। सुलैमान सबसे अच्छा सोना, सबसे महँगी लकड़ी, सबसे कुशल नक्काशी लगाता है, क्योंकि जिसे हम सचमुच अनमोल मानते हैं उस पर हम कंजूसी नहीं करते। अपने खर्च के हिसाब को देखिए, अपने कैलेंडर को देखिए: वहाँ साफ़ लिखा है कि आपके जीवन का परमपवित्र स्थान किसके लिए आरक्षित है। और दूसरी ओर, यदि आप अपने अतीत की किसी "खलिहान" को शर्म के साथ ढके बैठे हैं, तो याद रखिए, परमेश्वर ने अपना घर ठीक उसी तरह की जगह पर बनाया। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर उस एक घटना का नाम लिखिए जिसे आप अपनी सबसे बड़ी हार मानते हैं, और उसके नीचे लिखिए "यहीं परमेश्वर ने दया की", फिर उसे ज़ोर से पढ़िए।

अन्तर्पाठ

उत्पत्ति 22 में इसहाक पूछता है कि होमबलि का मेम्ना कहाँ है, और अब्राहम उत्तर देता है कि परमेश्वर प्रबंध करेंगे; मोरिय्याह पर बना मन्दिर सदियों तक उस अनुत्तरित प्रश्न को जीवित रखता है। इसलिए जब सुसमाचार बताते हैं कि मसीह की मृत्यु के क्षण में मन्दिर का पर्दा फटा, तो वह उत्तर आख़िरकार आ जाता है: प्रबंध हो गया, और जो पर्दा "नीले, बैंगनी और लाल रंग के सन के कपड़े का" था, उसका काम पूरा हुआ। इस पाठ के शब्द इसी दिशा में इशारा करते हैं, भले सुलैमान इतना न जानता था। पुराना नियम प्रश्न खड़ा करता है, नया नियम उसे बंद नहीं करता बल्कि पूरा करता है।

श्रोता

इतिहास की ये पुस्तकें उन लोगों के लिए लिखी गईं जो बंधुआई से लौटे थे और जिनका मन्दिर छोटा, गरीब, बिना सोने का था। उनके लिए ये नाप और छः सौ किक्कार सोने का ज़िक्र गर्व का विषय नहीं था, बल्कि एक चुभती याद और एक उम्मीद। लेखक उन्हें बता रहा है: तुम्हारी नींव बदली नहीं है, वही मोरिय्याह है, वही क्षमा का स्थान है, वही परमेश्वर है। और खम्भों के नाम, याकीन और बोअज, उन्हें कुछ ऐसा कहते हैं जो उनके कमज़ोर हाथों को थामे: वह स्थिर करेंगे, उसी में बल है। वैभव चला गया, वाचा नहीं।

मुख्य पात्र

सुलैमान अध्याय में सक्रिय है, पर केन्द्र में परमेश्वर हैं, और उनका चरित्र इन ब्योरों से झलकता है। वे सुन्दरता चाहते हैं, केवल उपयोगिता नहीं; अनार, खजूर, साँकलें, ये कोई काम नहीं करते, ये आनन्द के लिए हैं। वे निकटता चाहते हैं, इसलिए घर बनवाते हैं; और वे अपनी पवित्रता को सस्ता नहीं करते, इसलिए पर्दा भी रखते हैं। करूबों के मुख "भीतर की ओर" हैं, जैसे वे उस खाली स्थान की ओर देखते हुए ठहरे हों जिसे कोई आँख देख नहीं सकती। यही परमेश्वर हैं: पास आने को तैयार, पर घटाए जाने को नहीं। सुलैमान की भूमिका छोटी है, उसका काम वही जगह सजाना है जो उसे पहले से दी गई थी।

चिन्तन

आपके जीवन का कौन-सा "ओर्नान का खलिहान" है, वह जगह जहाँ न्याय रुका और दया मिली, और क्या आप उसे शर्म का स्मारक मानते हैं या अनुग्रह का?

याकीन और बोअज खम्भे मन्दिर के बाहर, सबके सामने खड़े थे। आपके जीवन में कौन-सी बात बाहर से दिखती है और गवाही देती है कि आपका बल परमेश्वर में है?

2 Chronicles में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Chronicles

Michael Wilcock

Shows why the retold history of Chronicles is a book of hope.

2 Chronicles: An Introduction and Commentary

Martin Selman

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Chronicles

Andrew Hill

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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2 Chronicles 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

2 इतिहास 3 का क्या अर्थ है?
सुलैमान यरूशलेम में मोरिय्याह पहाड़ पर, ठीक उसी जगह जो उसके पिता दाऊद ने यबूसी ओर्नान के खलिहान में तैयार की थी, यहोवा का भवन बनाना शुरू करता है। नाप-तोल, देवदार की छत, पर्वेम का सोना, खजूर और साँकलों की नक्काशी, परमपवित्र स्थान में पंख फैलाए दो करूब, नीले-बैंगनी-लाल का पर्दा, और सामने खड़े दो खम्भे जिनके नाम याकीन और बोअज रखे गए। यह अध्याय एक इमारत का विवरण है, लेकिन हर नाप के पीछे एक धर्मशास्त्र छिपा है।
2 इतिहास 3 किस विषय में है?
मोरिय्याह वही पहाड़ है जहाँ अब्राहम ने इसहाक को बाँधा था और परमेश्वर ने कहा था कि वे स्वयं बलि का प्रबंध करेंगे (उत्पत्ति 22)। इतिहासकार इस नाम को बेवजह नहीं उठाता: जहाँ एक पिता का हाथ रोका गया, वहीं अब वह भवन उठता है जिसमें युगों तक लहू बहेगा। और सोने से मढ़ी दीवारों पर खजूर के वृक्ष, अनार, करूब, ये अदन की भाषा है, वही बाग़ जिसके द्वार पर करूब पहरा दे रहे थे। मन्दिर एक छोटा-सा पुनर्निर्मित अदन है, यह घोषणा कि परमेश्वर सृष्टि को छोड़ नहीं रहे। यह पत्थर का वादा था; पूरा उसमें हुआ जिसने अपने शरीर को मन्दिर कहा और जिसकी मृत्यु पर वह "बीचवाला पर्दा" ऊपर से नीचे तक फट गया।
2 इतिहास 3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
उत्पत्ति 22 में इसहाक पूछता है कि होमबलि का मेम्ना कहाँ है, और अब्राहम उत्तर देता है कि परमेश्वर प्रबंध करेंगे; मोरिय्याह पर बना मन्दिर सदियों तक उस अनुत्तरित प्रश्न को जीवित रखता है। इसलिए जब सुसमाचार बताते हैं कि मसीह की मृत्यु के क्षण में मन्दिर का पर्दा फटा, तो वह उत्तर आख़िरकार आ जाता है: प्रबंध हो गया, और जो पर्दा "नीले, बैंगनी और लाल रंग के सन के कपड़े का" था, उसका काम पूरा हुआ। इस पाठ के शब्द इसी दिशा में इशारा करते हैं, भले सुलैमान इतना न जानता था। पुराना नियम प्रश्न खड़ा करता है, नया नियम उसे बंद नहीं करता बल्कि पूरा करता है।
2 इतिहास 3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
सुलैमान अध्याय में सक्रिय है, पर केन्द्र में परमेश्वर हैं, और उनका चरित्र इन ब्योरों से झलकता है। वे सुन्दरता चाहते हैं, केवल उपयोगिता नहीं; अनार, खजूर, साँकलें, ये कोई काम नहीं करते, ये आनन्द के लिए हैं। वे निकटता चाहते हैं, इसलिए घर बनवाते हैं; और वे अपनी पवित्रता को सस्ता नहीं करते, इसलिए पर्दा भी रखते हैं। करूबों के मुख "भीतर की ओर" हैं, जैसे वे उस खाली स्थान की ओर देखते हुए ठहरे हों जिसे कोई आँख देख नहीं सकती। यही परमेश्वर हैं: पास आने को तैयार, पर घटाए जाने को नहीं। सुलैमान की भूमिका छोटी है, उसका काम वही जगह सजाना है जो उसे पहले से दी गई थी।
2 इतिहास 3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
याकीन और बोअज खम्भे मन्दिर के बाहर, सबके सामने खड़े थे। आपके जीवन में कौन-सी बात बाहर से दिखती है और गवाही देती है कि आपका बल परमेश्वर में है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

2 Chronicles 3 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

मंदिर के सबसे भीतरी कमरे में खड़े वे दो करूब भीतर की ओर नहीं, बल्कि भवन की ओर मुँह किए खड़े थे। यानी उनकी दृष्टि उस जगह पर थी जहाँ लोग आते थे। पवित्रता अपने आप में सिमटी नहीं रहती, वह बाहर की ओर देखती है। और वे "अपने अपने पाँवों के बल खड़े थे", बैठे नहीं, सेवा के लिए तैयार। क्या तुम्हारा मुँह भी लोगों की ओर है?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 5

पिता, धन्यवाद कि आप ऐसे परमेश्वर हैं जिनके लिए सनोवर की लकड़ी पर उत्तम सोना मढ़ना और खजूर के पेड़ खुदवाना व्यर्थ नहीं था। आपकी उपस्थिति के योग्य सबसे सुंदर ही है। धन्यवाद कि छोटी से छोटी नक्काशी भी आपकी नज़र में कीमती है, और मेरा दिया हुआ सर्वोत्तम भी।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

मंदिर की कीलें भी सोने की थीं, "सोने की कीलों का तौल पचास शेकेल था।" कीलें कौन देखता है? वे तो लकड़ी में गड़ जाती हैं, छिप जाती हैं। फिर भी सुलैमान ने उन पर भी सोना लगाया। परमेश्वर के लिए जो किया जाता है, उसका छोटा और छिपा हुआ हिस्सा भी कीमती होता है। तेरी वह सेवा जिसे कोई नहीं गिनता, वह उसकी नज़र में सोने की है।

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