बाइबल व्याख्या

2 इतिहास 9

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

शेबा की रानी कठिन प्रश्नों की एक गठरी लेकर हज़ारों मील चलकर यरूशलेम आती है, और सुलैमान के उत्तर सुनकर, उसका भवन, उसकी मेज़, उसके सेवकों के कपड़े और यहोवा के भवन तक जाने वाली चढ़ाई देखकर "चकित हो गई।" वह सोना और मसाले देकर लौट जाती है, और इसके बाद अध्याय एक सूची में बदल जाता है: छः सौ छियासठ किक्कार सोना प्रतिवर्ष, हाथीदाँत का सिंहासन, बारह सिंह, तर्शीश के जहाज़, चार हज़ार घुड़साल। और फिर, बिना किसी तैयारी के, दो पंक्तियाँ: चालीस वर्ष राज्य, दाऊद के नगर में कब्र, और रहूबियाम गद्दी पर।

मूल बात

इस सारे वैभव की व्याख्या एक परदेसी स्त्री के मुँह से निकलती है, और वह सुलैमान की तारीफ़ पर नहीं रुकती: "धन्य है तेरा परमेश्वर यहोवा, जो तुझ से ऐसा प्रसन्न हुआ, कि तुझे अपनी राजगद्दी पर इसलिए विराजमान किया।" ध्यान दें, अपनी राजगद्दी। सिंहासन सुलैमान का नहीं, परमेश्वर का है; सुलैमान उस पर बैठा हुआ किरायेदार है। और उद्देश्य भी बताया गया है: इसलिए नहीं कि सोना जमा हो, बल्कि "न्याय और धार्मिकता करने को।" वैभव यहाँ साधन है, लक्ष्य नहीं। वचन 23 इसी बात को दोहराता है: बुद्धि वह थी "जो परमेश्वर ने उसके मन में उपजाई थीं।" इतिहास की यह पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई जिनके पास न सोना बचा था, न सिंहासन, केवल स्मृति: देखो, जब परमेश्वर राज करते हैं तो कैसा दिखता है।

जोड़ने वाला सूत्र

यहाँ एक चित्र बनता है जो बाइबल में बार-बार लौटता है: जाति-जाति के लोग यरूशलेम की ओर आ रहे हैं, भेंट लिए हुए, बुद्धि सुनने के लिए। इस्राएल को कभी दुनिया पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को खींचने के लिए बुलाया गया था। यीशु ने स्वयं इस रानी की याद दिलाई: वह पृथ्वी के छोर से सुलैमान की बुद्धि सुनने आई, और अब उससे बड़ा एक यहाँ खड़ा है, पर उसके अपने लोग चिह्न मांग रहे हैं (मत्ती 12)। तुलना करें तो अंतर चुभता है: सुलैमान का वैभव कब्र में समाप्त होता है और मूर्ख पुत्र के हाथ में चला जाता है, जबकि मसीह के पास न सोना था न महल, केवल ऐसी बुद्धि जो क्रूस तक ले गई, और ऐसा राज्य जो किसी उत्तराधिकारी के हाथों बिखरता नहीं।

आईना

रानी ने जो सूची गिनाई, वह पढ़िए और अपने आप को पकड़िए: भवन, मेज़ का भोजन, कर्मचारियों का बैठना, टहलुओं के कपड़े। यह वही सूची है जो हम मेहमानों के सामने खोलते हैं। नई रसोई, बच्चे के अंक, पदोन्नति, लिंक्डइन पर वह पोस्ट। हम चाहते हैं कि कोई हमारे बारे में कहे, "तेरी बड़ाई की आधी बात भी मुझे न बताई गई थी।" और अध्याय एक और घाव खोलता है: "सुलैमान के दिनों में चाँदी का कोई मूल्य न था।" चाँदी बदली नहीं थी, बहुतायत ने आँख को सुस्त कर दिया था। यही आपके साथ हुआ है, उस वेतन के साथ जिसके लिए आप एक बार प्रार्थना करते थे, उस जीवनसाथी के साथ, उस कलीसिया के साथ। बहुतायत कृतज्ञता की हत्या धीरे-धीरे करती है।

रानी ने जो किया, वह आज कीजिए: जिस एक व्यक्ति की सफलता से आपके भीतर जलन उठती है, उसे अभी संदेश भेजिए और उसमें साफ़ शब्दों में लिखिए कि परमेश्वर ने उसे जो दिया है, उसके लिए आप उनका धन्यवाद करते हैं।

मुख्य पात्र

रानी "परीक्षा करने के लिये" आई थी, श्रद्धा से नहीं। और वह ईमानदारी से अपना संदेह कबूल करती है: "जब तक मैंने आप ही आकर अपनी आँखों से यह न देखा, तब तक मैंने उन पर विश्वास न किया।" यह वह स्त्री है जिसने अफ़वाह पर भरोसा करने से इनकार किया और खर्च उठाकर जाँचने निकल पड़ी। ऊँटों का काफ़िला, महीनों का सफ़र, और एक राजा के सामने अपनी अज्ञानता खोलकर रख देना, यह सब सस्ता नहीं था। उसका सफ़र इस बात की गवाही है कि जो संदेह चलता है वह उस विश्वास से भला है जो आराम से बैठा रहता है। और जब वह देखती है, तो उसकी प्रतिक्रिया ईर्ष्या नहीं होती: "धन्य हैं तेरे ये सेवक।" वह दूसरे की समृद्धि में परमेश्वर को पहचानकर घर लौट जाती है। वह रुकी नहीं; उसे रुकने की ज़रूरत नहीं थी।

कठिन प्रश्न

इस अध्याय में एक बात गायब है, और वह चीखती है। सुलैमान की कहानी का दूसरा आधा हिस्सा, विदेशी रानियाँ, पहाड़ियों पर मूर्तियाँ, परमेश्वर का क्रोध (1 राजा 11), यहाँ बिल्कुल नहीं है। इतिहास की पुस्तक सोना गिनती है और सीधे कब्र पर पहुँच जाती है। क्या यह सच्चाई छिपाना है? मैं इसे चिकना नहीं करूँगा। लेखक निर्वासन से लौटे टूटे लोगों को उपदेश दे रहा है, और उसने जानबूझकर चुना कि क्या दिखाए। फिर भी चुप्पी असहज है, क्योंकि अगला ही अध्याय राज्य के दो टुकड़े होते हुए दिखाता है, और वह दरार उसी पाप से आई जिसका ज़िक्र यहाँ नहीं है। पवित्र शास्त्र हमें दो आवाज़ें देता है और उन्हें जोड़ने का काम हमारे ऊपर छोड़ देता है। इतना तो साफ़ है: जिस सोने का बखान चौबीस वचनों में हुआ, वह चालीस साल भी सुरक्षित नहीं रह सका।

एक बारीक बात

रानी की सूची में एक चीज़ बेमेल लगती है: "वह कैसी चढ़ाई है जिससे वह यहोवा के भवन को जाया करता है।" सोने के पात्रों और कपड़ों के बीच वह राजा का उपासना-मार्ग गिनती है, वह रास्ता जिससे वह ऊपर चढ़कर परमेश्वर के भवन में जाता था। दुनिया के सबसे धनी राजा के बारे में एक परदेसी ने जो सबसे गहरी बात देखी, वह यह थी कि यह आदमी नियमित रूप से किसी के सामने झुकने जाता है। चढ़ाई का अर्थ है कि सिंहासन नीचे है और भवन ऊपर। आपके जीवन में भी कोई आपकी सफलता की सूची बना सकता है; सवाल यह है कि उसमें आपकी चढ़ाई दिखाई देगी या नहीं।

मनन के प्रश्न

आपके पास कौन सी चाँदी है जो बहुतायत के कारण आपकी नज़र में पत्थर जैसी हो गई है?

यदि कोई आपके घर तीन दिन रहकर लौटे, तो वह आपके बारे में किस परमेश्वर को धन्य कहेगा?

2 Chronicles में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Chronicles

Michael Wilcock

Shows why the retold history of Chronicles is a book of hope.

2 Chronicles: An Introduction and Commentary

Martin Selman

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Chronicles

Andrew Hill

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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2 Chronicles 9 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

2 इतिहास 9 का क्या अर्थ है?
शेबा की रानी कठिन प्रश्नों की एक गठरी लेकर हज़ारों मील चलकर यरूशलेम आती है, और सुलैमान के उत्तर सुनकर, उसका भवन, उसकी मेज़, उसके सेवकों के कपड़े और यहोवा के भवन तक जाने वाली चढ़ाई देखकर "चकित हो गई।" वह सोना और मसाले देकर लौट जाती है, और इसके बाद अध्याय एक सूची में बदल जाता है: छः सौ छियासठ किक्कार सोना प्रतिवर्ष, हाथीदाँत का सिंहासन, बारह सिंह, तर्शीश के जहाज़, चार हज़ार घुड़साल। और फिर, बिना किसी तैयारी के, दो पंक्तियाँ: चालीस वर्ष राज्य, दाऊद के नगर में कब्र, और रहूबियाम गद्दी पर।
2 इतिहास 9 किस विषय में है?
यहाँ एक चित्र बनता है जो बाइबल में बार-बार लौटता है: जाति-जाति के लोग यरूशलेम की ओर आ रहे हैं, भेंट लिए हुए, बुद्धि सुनने के लिए। इस्राएल को कभी दुनिया पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को खींचने के लिए बुलाया गया था। यीशु ने स्वयं इस रानी की याद दिलाई: वह पृथ्वी के छोर से सुलैमान की बुद्धि सुनने आई, और अब उससे बड़ा एक यहाँ खड़ा है, पर उसके अपने लोग चिह्न मांग रहे हैं (मत्ती 12)। तुलना करें तो अंतर चुभता है: सुलैमान का वैभव कब्र में समाप्त होता है और मूर्ख पुत्र के हाथ में चला जाता है, जबकि मसीह के पास न सोना था न महल, केवल ऐसी बुद्धि जो क्रूस तक ले गई, और ऐसा राज्य जो किसी उत्तराधिकारी के हाथों बिखरता नहीं।
2 इतिहास 9 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
रानी ने जो किया, वह आज कीजिए: जिस एक व्यक्ति की सफलता से आपके भीतर जलन उठती है, उसे अभी संदेश भेजिए और उसमें साफ़ शब्दों में लिखिए कि परमेश्वर ने उसे जो दिया है, उसके लिए आप उनका धन्यवाद करते हैं।
2 इतिहास 9 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इस अध्याय में एक बात गायब है, और वह चीखती है। सुलैमान की कहानी का दूसरा आधा हिस्सा, विदेशी रानियाँ, पहाड़ियों पर मूर्तियाँ, परमेश्वर का क्रोध (1 राजा 11), यहाँ बिल्कुल नहीं है। इतिहास की पुस्तक सोना गिनती है और सीधे कब्र पर पहुँच जाती है। क्या यह सच्चाई छिपाना है? मैं इसे चिकना नहीं करूँगा। लेखक निर्वासन से लौटे टूटे लोगों को उपदेश दे रहा है, और उसने जानबूझकर चुना कि क्या दिखाए। फिर भी चुप्पी असहज है, क्योंकि अगला ही अध्याय राज्य के दो टुकड़े होते हुए दिखाता है, और वह दरार उसी पाप से आई जिसका ज़िक्र यहाँ नहीं है। पवित्र शास्त्र हमें दो आवाज़ें देता है और उन्हें जोड़ने का काम हमारे ऊपर छोड़ देता है। इतना तो साफ़ है: जिस सोने का बखान चौबीस वचनों में हुआ, वह चालीस साल भी सुरक्षित नहीं रह सका।
2 इतिहास 9 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके पास कौन सी चाँदी है जो बहुतायत के कारण आपकी नज़र में पत्थर जैसी हो गई है?

2 Chronicles 9 में आपको क्या स्पर्श करता है?

इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।

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