बाइबल व्याख्या

2 कुरिन्थियों 2:16

बाइबल
यह वचन Church of the living God ministries द्वारा समर्पित है

पाठ

पौलुस अभी-अभी विजय-जुलूस की तस्वीर खींच चुका है: परमेश्वर मसीह में हमें सदा जय के उत्सव में लिये फिरते हैं, और उस जुलूस में जलते धूप की तरह मसीह की पहचान की सुगन्ध हमारे द्वारा फैलती है। अब वह उस तस्वीर का काँटा दिखाता है। वही एक गन्ध दो बिलकुल अलग नतीजे पैदा करती है: "कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्ध।" और फिर वह वाक्य जो सारे उत्सव को ठहरा देता है, एक सवाल के रूप में: "और इन बातों के योग्य कौन है?" कोई जवाब नहीं दिया जाता। सिर्फ़ सवाल छोड़ दिया जाता है, खुला, हवा में लटकता हुआ।

मूल बात

यह पद कहता है कि सुसमाचार तटस्थ नहीं है, और उसे सुनाने वाला भी तटस्थ नहीं रह सकता। एक ही मसीह, एक ही खुशख़बरी, और फिर भी दो रास्ते। यह हमें असहज करता है, क्योंकि हम चाहते हैं कि हमारी गवाही सबके लिये सुखद हो, हर बातचीत में सब मुस्कुराकर उठें। पौलुस ऐसा वादा नहीं करता। जीवित परमेश्वर के सामने खड़ा होना किसी के लिये जीवन है और किसी के लिये न्याय, और यह फ़ैसला हमारे हाथ में नहीं। इसीलिये वह अन्तिम प्रश्न आता है: कौन इस काम के योग्य है? यह विनम्रता की अदा नहीं, ईमानदार घबराहट है। जो आदमी सचमुच समझता है कि उसके शब्दों का वज़न कितना है, वह अपनी क्षमता पर भरोसा करना छोड़ देता है, और यही छोड़ना ही अनुग्रह की शुरुआत है।

सूत्र

गन्ध की यह भाषा अचानक नहीं आती। पुराने नियम में बलि की सुगन्ध वह चीज़ है जो परमेश्वर तक पहुँचती है, मेल का चिह्न, इस बात का संकेत कि परमेश्वर ने अपने लोगों को स्वीकार किया। नये नियम में वह सुगन्ध एक व्यक्ति में सिमट जाती है: मसीह ने अपने आप को हमारे लिये चढ़ा दिया, और वही सुगन्ध बन गये। पौलुस अब कहता है कि यह गन्ध चर्च से होकर दुनिया में फैलती है। यही सूत्र है: जो कुछ इस्राएल की वेदी पर धुएँ की तरह उठता था, वह गोलगोथा में पूरा हुआ, और अब आपके दफ़्तर की चाय की मेज़ पर, आपके पड़ोस में, आपके बोलने और चुप रहने के ढंग में उठ रहा है। पर वही क्रूस जो जीवन देता है, ठोकर भी बनता है। सुगन्ध बदलती नहीं; नाक बदलती है।

दर्पण

यहीं यह पद चुभता है। हम में से ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि हमारा विश्वास किसी को असहज न करे। इसलिये हम दफ़्तर में मसीह का नाम टाल जाते हैं, परिवार के उस रिश्तेदार के सामने अपनी बात नरम कर देते हैं जो हर बार व्यंग्य करता है, और पैसे या समय के जिस फ़ैसले में हमारा विश्वास दिखना चाहिये था, वहाँ हम "व्यावहारिक" हो जाते हैं। पौलुस इसी को अगले ही पद में नाम देता है: कुछ लोग "परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं।" मिलावट हमेशा झूठ बोलना नहीं होती; अक्सर वह सिर्फ़ मीठा कर देना होती है, ताकि किसी को कड़वा न लगे। और दूसरी तरफ़ का ख़तरा भी असली है: कुछ लोग बदबू इसलिये फैलाते हैं कि वे कठोर हैं, मसीह के कारण नहीं। आज आप जिस एक व्यक्ति से मिलेंगे या बात करेंगे, उसका नाम काग़ज़ पर लिखिए, और उस नाम के ऊपर ज़ोर से कहिए: "प्रभु, इन बातों के योग्य मैं नहीं हूँ, आप इसके योग्य हैं।"

सवाल

अगर एक ही सुसमाचार किसी के लिये जीवन और किसी के लिये मृत्यु बनता है, तो क्या परमेश्वर ही यह अन्तर तय करते हैं? पौलुस यहाँ जवाब नहीं देता, और मैं उससे ज़्यादा नहीं जानता। मुझे इस पद में सबसे ज़्यादा यह बात परेशान करती है कि नतीजा मेरे बोलने के कौशल पर नहीं टिकता। मैं बेहतर उदाहरण दे सकता हूँ, बेहतर लहजा रख सकता हूँ, और फिर भी वह आदमी दूर हो सकता है। यह मुझे ज़िम्मेदारी से आज़ाद नहीं करता, पर मुझे उस बोझ से आज़ाद ज़रूर करता है जो कभी मेरा था ही नहीं। बाकी अन्धकार में रहता है। पौलुस उसे अन्धकार में रहने देता है, और सवाल के साथ आगे बढ़ जाता है, आँसुओं के साथ, हार मानकर नहीं।

पाठक

कुरिन्थ के लोग रोमी विजय-जुलूस जानते थे। सेनापति आगे, पीछे बँधे हुए बन्दी, और रास्ते भर धूप का धुआँ। विजेताओं के लिये वह गन्ध घर लौटने की थी; बन्दियों के लिये वही गन्ध फाँसी की ओर बढ़ते क़दमों की। पौलुस ख़ुद को सेनापति नहीं, जुलूस में घसीटे जाते हुए आदमी की जगह रखता है, और यह कुरिन्थ की उस कलीसिया के मुँह पर तमाचा है जो चाहती थी कि उसका प्रेरित प्रभावशाली, चमकदार, ताक़तवर हो। वे शिकायत करते थे कि पौलुस कमज़ोर दिखता है, उसकी बोली साधारण है। वह जवाब देता है कि कमज़ोरी ही जुलूस का हिस्सा है, और योग्यता किसी में नहीं।

अन्तर्पाठ

शिमोन ने मन्दिर में शिशु यीशु को गोद में लेकर कहा था कि यह बालक इस्राएल में बहुतों के गिरने और उठने के लिये ठहराया गया है। वही दोहरा असर, जन्म से ही। और इफिसियों में पौलुस मसीह के आत्मदान को परमेश्वर के सामने सुखदायक सुगन्ध कहता है; यानी जो गन्ध हम फैलाते हैं वह हमारी नहीं, उसी बलिदान की है। इन दोनों को साथ रखिए तो 2 कुरिन्थियों 2:16 अपनी जगह पा जाता है: हम कोई नयी गन्ध नहीं बनाते, हम सिर्फ़ उसे ले चलते हैं, और उसका विभाजनकारी असर मसीह के आने जितना ही पुराना है।

चिन्तन

आपने पिछली बार कब अपने विश्वास की बात को इसलिये मीठा किया कि सामने वाला असहज न हो, और उसमें आपका डर क्या था?

अगर आज ही किसी से यह पूछा जाए कि आपकी उपस्थिति से उसे क्या "गन्ध" आती है, तो आप किसका नाम लेने से डरेंगे?

2 Corinthians में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of 2 Corinthians

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Power in weakness: Paul's most personal letter carefully unpacked.

Paul For Everyone: 2 Corinthians

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Short readings on ministry, suffering and generous grace.

2 Corinthians: An Introduction and Commentary

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2 Corinthians

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2 Corinthians 2:16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

2 कुरिन्थियों 2:16 का क्या अर्थ है?
पौलुस अभी-अभी विजय-जुलूस की तस्वीर खींच चुका है: परमेश्वर मसीह में हमें सदा जय के उत्सव में लिये फिरते हैं, और उस जुलूस में जलते धूप की तरह मसीह की पहचान की सुगन्ध हमारे द्वारा फैलती है। अब वह उस तस्वीर का काँटा दिखाता है। वही एक गन्ध दो बिलकुल अलग नतीजे पैदा करती है: "कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्ध।" और फिर वह वाक्य जो सारे उत्सव को ठहरा द
2 कुरिन्थियों 2:16 किस विषय में है?
गन्ध की यह भाषा अचानक नहीं आती। पुराने नियम में बलि की सुगन्ध वह चीज़ है जो परमेश्वर तक पहुँचती है, मेल का चिह्न, इस बात का संकेत कि परमेश्वर ने अपने लोगों को स्वीकार किया। नये नियम में वह सुगन्ध एक व्यक्ति में सिमट जाती है: मसीह ने अपने आप को हमारे लिये चढ़ा दिया, और वही सुगन्ध बन गये। पौलुस अब कहता है कि यह गन्ध चर्च से होकर दुनिया में फैलती है। यही सूत्र है: जो कुछ इस्राएल की वेदी पर धुएँ की तरह उठता था, वह गोलगोथा में पूरा हुआ, और अब आपके दफ़्तर की चाय की मेज़ पर, आपके पड़ोस में, आपके बोलने और चुप रहने के ढंग में उठ रहा है। पर वही क्रूस जो जीवन देता है, ठोकर भी बनता है। सुगन्ध बदलती नहीं; नाक बदलती है।
2 कुरिन्थियों 2:16 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
अगर एक ही सुसमाचार किसी के लिये जीवन और किसी के लिये मृत्यु बनता है, तो क्या परमेश्वर ही यह अन्तर तय करते हैं? पौलुस यहाँ जवाब नहीं देता, और मैं उससे ज़्यादा नहीं जानता। मुझे इस पद में सबसे ज़्यादा यह बात परेशान करती है कि नतीजा मेरे बोलने के कौशल पर नहीं टिकता। मैं बेहतर उदाहरण दे सकता हूँ, बेहतर लहजा रख सकता हूँ, और फिर भी वह आदमी दूर हो सकता है। यह मुझे ज़िम्मेदारी से आज़ाद नहीं करता, पर मुझे उस बोझ से आज़ाद ज़रूर करता है जो कभी मेरा था ही नहीं। बाकी अन्धकार में रहता है। पौलुस उसे अन्धकार में रहने देता है, और सवाल के साथ आगे बढ़ जाता है, आँसुओं के साथ, हार मानकर नहीं।
2 कुरिन्थियों 2:16 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
शिमोन ने मन्दिर में शिशु यीशु को गोद में लेकर कहा था कि यह बालक इस्राएल में बहुतों के गिरने और उठने के लिये ठहराया गया है। वही दोहरा असर, जन्म से ही। और इफिसियों में पौलुस मसीह के आत्मदान को परमेश्वर के सामने सुखदायक सुगन्ध कहता है; यानी जो गन्ध हम फैलाते हैं वह हमारी नहीं, उसी बलिदान की है। इन दोनों को साथ रखिए तो 2 कुरिन्थियों 2:16 अपनी जगह पा जाता है: हम कोई नयी गन्ध नहीं बनाते, हम सिर्फ़ उसे ले चलते हैं, और उसका विभाजनकारी असर मसीह के आने जितना ही पुराना है।
2 कुरिन्थियों 2:16 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अगर आज ही किसी से यह पूछा जाए कि आपकी उपस्थिति से उसे क्या "गन्ध" आती है, तो आप किसका नाम लेने से डरेंगे?
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2 Corinthians 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

पौलुस उस आदमी को क्षमा करता है जिसने कलीसिया को दुःख दिया था, और लिखता है: "मैंने भी जो कुछ क्षमा किया है, यदि किया हो, तो तुम्हारे कारण मसीह की उपस्थिति में क्षमा किया है।" ध्यान दो, क्षमा अकेले में की गई कोई कमज़ोर सी बात नहीं थी। वह मसीह के सामने खड़े होकर की गई। जिस व्यक्ति को तुम माफ़ नहीं कर पा रहे, क्या उसका नाम तुम प्रभु के सामने ले सकते हो?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पौलुस के सामने त्रोआस में प्रभु ने द्वार खोला था, फिर भी वह लिखता है, "तब मेरे मन में चैन न मिला, क्योंकि मैंने अपने भाई तीतुस को न पाया।" सेवा का अवसर था, पर एक भाई की खबर न मिलने से दिल बेचैन रहा। कितना अच्छा है कि प्रेरित भी अपनी बेचैनी छिपाता नहीं। क्या तुम्हारा दिल किसी के लिए ऐसे धड़कता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

पौलुस कहता है, "क्योंकि यदि मैं तुम्हें उदास करूँ, तो मुझे आनन्द देनेवाला कौन होगा, उसे छोड़ जिसको मैंने उदास किया?" वह उन्हीं लोगों से खुशी पाता है जिन्हें उसने डाँटा था। सोच, तेरा आनन्द किससे बँधा है? जिसे तू ठेस पहुँचाता है, कहीं वही तेरी खुशी का सोता न हो। रिश्तों में जीतने से पहले यह पूछना पड़ता है कि जीत के बाद साथ कौन बचेगा।

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