2 कुरिन्थियों 6
पाठ
पौलुस कुरिन्थ की कलीसिया से विनती करता है कि वे परमेश्वर के अनुग्रह को व्यर्थ न जाने दें, क्योंकि "अभी उद्धार का दिन है।" फिर वह अपनी सेवकाई का लम्बा ब्यौरा देता है, क्लेश, कोड़े, कैद, उपवास, और साथ ही पवित्रता, प्रेम, धैर्य, ताकि उसकी सेवा पर दोष न आए। अन्त में वह एक तीखी चेतावनी देता है, अविश्वासियों के साथ असमान जूए में न जुतो, क्योंकि विश्वासी स्वयं जीवित परमेश्वर का मन्दिर हैं।
मूल बात
यह अध्याय दो ध्रुवों के बीच खिंचा हुआ है, अनुग्रह और अलगाव। पौलुस पहले कहता है कि परमेश्वर का अनुग्रह मुफ्त में मिला है, फिर तुरंत कहता है कि इस अनुग्रह की एक कीमत है, एक अलग जीवन। यह सस्ता सुसमाचार नहीं है। "अभी उद्धार का दिन है" का मतलब है कि कृपा का समय अनन्त नहीं, तात्कालिक है। परमेश्वर स्वयं आकर अपने लोगों में "बसने" और "चलने-फिरने" की बात करता है, और यह वादा माँग करता है कि उसके लोग किसी और स्वामी के साथ जुए में न बँधे रहें। अनुग्रह मुक्त है, पर वह चरागाह में छोड़ी हुई भेड़ नहीं छोड़ता।
सामान्य सूत्र
पौलुस जब कहता है "मैं उनमें बसूँगा और उनमें चला फिरा करूँगा," तो वह अदन की उस स्मृति को छू रहा है जब परमेश्वर वाटिका में "फिरता" था (उत्पत्ति 3:8)। वही परमेश्वर जो मनुष्य के साथ चलता था, अब कलीसिया के भीतर चलता है। लैव्यव्यवस्था 26 का यह वचन इस्राएल के डेरे से जुड़ा था; अब पौलुस उसे कलीसिया पर लागू करता है। यशायाह 49:8 का हवाला और भी गहरा है, वहाँ वह "उद्धार का दिन" मसीहा के आगमन से जुड़ा था। पौलुस कहता है, वह दिन अब है। मसीह के क्रूस और पुनरुत्थान के बाद पुराने नियम के हर वादे को एक नई तात्कालिकता मिल गई है। बाबुल से निकलने का बुलावा (यशायाह 52:11) अब मूर्तिपूजक समाज से आत्मिक अलगाव का बुलावा बन जाता है।
आईना
"अविश्वासियों के साथ असमान जूए में न जुतो" इस वचन को अक्सर केवल विवाह पर लागू किया जाता है, पर पौलुस इससे कहीं बड़ा जाल फेंकता है। जूआ वह लकड़ी है जो दो जानवरों को एक ही दिशा में खींचने के लिए बाँधती है। सवाल यह है, आप अपनी ज़िन्दगी में किसके साथ एक ही दिशा में खिंच रहे हैं? व्यापार की साझेदारी, दोस्ती जो आपके निर्णयों को आकार देती है, वह विचारधारा जिसे आप बिना जाँचे अपनाते हैं, यहाँ तक कि आपके सप्ताह की लय, यह सब जूए हैं। सवाल यह नहीं कि अविश्वासियों से दूर भागना है, पौलुस तो स्वयं उनके बीच रहता था, बल्कि यह कि आपको कौन खींच रहा है। और अगर आप ईमानदार हैं, तो जवाब असहज होगा।
विवरण
पद 10 का यह विरोधाभास ध्यान माँगता है, "कंगालों के समान हैं, परन्तु बहुतों को धनवान बना देते हैं।" पौलुस अपनी सेवकाई को इन उलटी जोड़ियों में परिभाषित करता है। यह केवल काव्य नहीं है; यह मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान का पैटर्न है, जो उसके सेवकों में दोहराया जाता है। जो दिखने में हारा हुआ है, वह असल में जीता हुआ है। यह उन कुरिन्थियों के लिए तीखा उत्तर था जो एक चमकदार, विजयी प्रेरित चाहते थे। पौलुस कहता है, मसीह का सेवक वैसा नहीं दिखता। वह भजन 118:18 की गूँज सुनाता है, "यहोवा ने मुझे कठिन ताड़ना तो दी, परन्तु मृत्यु के वश में नहीं किया।" ताड़ना असली है, पर आखिरी शब्द नहीं।
प्रोफ़ाइल
कुरिन्थ एक बंदरगाह-शहर था, समृद्ध, व्यापारिक, धार्मिक रूप से बहुरंगी। अफ्रोदिती का मन्दिर, यूनानी दर्शन, रोमी शक्ति, यहूदी सभा-घर, सब एक साथ। कलीसिया के लोग हर दिन मूर्तिपूजक भोज, व्यापारिक संघों, और सामाजिक रीतियों के बीच निर्णय ले रहे थे। "मूरतों के साथ परमेश्वर के मन्दिर का क्या सम्बंध?" यह उनके लिए अकादमिक प्रश्न नहीं था। यह उस मित्र के जन्मदिन का सवाल था जहाँ बलि का मांस परोसा जाता था, उस व्यापारिक संघ का सवाल था जिसकी सभाएँ मंदिर में होती थीं। पौलुस उनकी असली दुनिया में बोल रहा है, कोई मठवासी आदर्श नहीं थोप रहा।
संदर्भ
यह पत्र पौलुस और कुरिन्थ की कलीसिया के बीच एक तनावपूर्ण रिश्ते के बीच लिखा गया। कुछ लोग उसकी प्रेरिताई पर सवाल उठा रहे थे, "असली" प्रेरितों की तुलना में वह कमज़ोर लगता था। इसीलिए पद 11-13 में वह अचानक भावुक हो जाता है, "हे कुरिन्थियों, हमने खुलकर तुम से बातें की हैं, हमारा हृदय तुम्हारी ओर खुला हुआ है।" यह पिता का दिल है जो बच्चे से कहता है, मैंने तुम्हारे लिए दरवाज़ा बंद नहीं किया, तुमने किया है। और फिर वह अलगाव का बुलावा देता है, इस भावनात्मक खुलेपन के तुरंत बाद, ताकि वे समझें कि यह बुलावा प्रेम से आ रहा है, दूरी से नहीं।
चिंतन
आपके जीवन में कौन-सा "जूआ" है जिसे आपने अब तक जाँचा नहीं है, क्योंकि उसे तोड़ना बहुत महँगा लगता है?
*पौलुस अपनी सेवका
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2 Corinthians 6 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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2 कुरिन्थियों 6 का क्या अर्थ है?
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2 Corinthians 6 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पौलुस अपनी सेवा का ब्यौरा देते हुए लिखता है, "आदर और निरादर से, दुर्नाम और सुनाम से; धोखा देनेवालों के सदृश हैं, फिर भी सच्चे हैं।" ध्यान दे, वह लोगों की राय बदलने की कोशिश नहीं करता। उसे तारीफ मिले या बदनामी, वह वही आदमी रहता है। तेरे बारे में लोग क्या कहते हैं, यह तेरी पहचान तय करे या परमेश्वर की नज़र?
हे प्रभु, मेरी ज़िंदगी को ऐसा बना कि मेरे कारण किसी को ठोकर न लगे। मेरे शब्द, मेरा व्यवहार, मेरी नीयत, सब कुछ ऐसा हो कि तेरी सेवा पर कोई दोष न आए। मुझे संभालकर चला, ताकि लोग मुझमें तुझे देख सकें।
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