2 शमूएल 3
पाठ
हेब्रोन में दाऊद का घराना बढ़ता जाता है, बेटे पैदा होते हैं, और उत्तर में शाऊल का घराना भीतर से टूटने लगता है। अब्नेर, जो ईशबोशेत का असली सहारा था, एक ताने पर भड़क उठता है और दाऊद से वाचा बाँधने चल पड़ता है; रास्ते में मीकल अपने रोते हुए पति से छीन ली जाती है। हेब्रोन में भोज होता है, शांति बनती दिखती है, और फिर योआब फाटक के भीतर एकांत में अब्नेर के पेट में छुरा उतार देता है। दाऊद टाट पहनकर अर्थी के पीछे चलता है, फूट फूटकर रोता है, और कहता है कि आज वह अभिषिक्त होकर भी निर्बल है।
मर्म
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर का वादा पूरा तो होता है, पर इंसानी हाथों से होकर, और वे हाथ गंदे हैं। दाऊद का राज्य बढ़ता है, मगर उस बढ़त की सीढ़ियाँ एक रखैल पर हुआ झगड़ा, एक सेनापति की नाराज़ अहंकार, और एक फाटक के भीतर हुआ खून हैं। पद 18 में अब्नेर खुद यहोवा की प्रतिज्ञा दोहराता है, पर वह उसे आज्ञा की तरह नहीं, सौदेबाज़ी के पत्ते की तरह इस्तेमाल करता है। परमेश्वर ऐसे लोगों के बीच से भी अपना उद्देश्य निकाल लाते हैं, बिना उनके पापों को मंज़ूरी दिए। यही इस कहानी की बेचैन करने वाली कृपा है: इतिहास परमेश्वर के हाथ में है, पर इतिहास बनाने वाले उसके लिए जवाबदेह भी हैं।
सूत्र
दाऊद यहाँ राजा तो है, मगर ऐसा राजा जो अपने ही आदमियों को रोक नहीं सकता। "मैं अभिषिक्त राजा हूँ तो भी आज निर्बल हूँ" यह वाक्य पूरे पुराने नियम की राजसत्ता पर पड़ी दरार है। अभिषेक है, अधिकार है, पर ताक़त नहीं; न्याय की चाह है, पर न्याय करने का हौसला नहीं। इसी खाली जगह में आगे चलकर वह राजा आता है जो अभिषिक्त होकर भी कमज़ोर दिखता है, पर उसकी कमज़ोरी हार नहीं, चुनाव है। दाऊद अब्नेर की कब्र पर रोता है; यीशु मसीह अपने दुश्मनों के लिए रोते हैं और फिर उनके लिए मरते हैं। दाऊद कहता है, यहोवा बुराई करने वाले को बदला दे; मसीह वह बदला अपने ऊपर ले लेते हैं।
दर्पण
आपके जीवन में भी शायद कोई योआब है: वह आदमी या वह व्यवस्था जिसे आप नैतिक रूप से गलत मानते हैं, पर जिससे आप भिड़ नहीं सकते, क्योंकि वह बहुत उपयोगी है, बहुत ताकतवर है, या बहुत करीबी है। दफ्तर में वह सहकर्मी जिसका रवैया ज़हरीला है पर नतीजे शानदार; परिवार में वह रिश्तेदार जिसकी ज़बान सबको काटती है पर जिसके सामने सब चुप रहते हैं; कलीसिया में वह सेवक जिसे हटाना मुमकिन नहीं लगता। दाऊद ने रोना चुना, विलाप चुना, सार्वजनिक सच बोलना चुना, पर तलवार नहीं उठाई, और यह आधी ईमानदारी है, पूरी नहीं। आज, दस मिनट में: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसके गलत व्यवहार को आप सुविधा के कारण चुपचाप सह रहे हैं, और उस नाम के नीचे लिखिए कि अगला सच्चा शब्द आप कब और किससे कहेंगे।
एक बारीकी
पद 16 पर रुकिए। मीकल को ले जाया जा रहा है, और "उसका पति उसके साथ चला, और बहूरीम तक उसके पीछे रोता हुआ चला गया।" पलतीएल का नाम इस पूरे अध्याय में बस यहीं है। वह न सेनापति है, न राजा, न षड्यंत्रकारी। वह सिर्फ एक आदमी है जो अपनी पत्नी के पीछे रोता हुआ चलता है, जब तक अब्नेर झिड़ककर नहीं कहता, "लौट जा।" और वह लौट जाता है। बस। कथा उसे वापस कभी नहीं उठाती। राजनीति की हर बड़ी चाल के किनारे ऐसे ही लोग होते हैं जिनका दुःख आँकड़ों में नहीं आता। बाइबल उस दुःख को छिपाती नहीं; वह उसे एक वाक्य में दर्ज करके हमें असहज छोड़ देती है।
केंद्रीय पात्र
अब्नेर इस अध्याय का धड़कता हुआ दिल है। बरसों तक उसने शाऊल के घराने को अपने कंधों पर उठाए रखा, और इनाम में उसे एक शक मिला। उसका जवाब सुनिए: "क्या मैं यहूदा के कुत्ते का सिर हूँ?" यह चोट खाए हुए आत्मसम्मान की चीख है। और अगले ही साँस में वह परमेश्वर की शपथ का हवाला देकर राज्य पलट देने की धमकी देता है। यानी वह सालों से जानता था कि यहोवा ने क्या कहा है, और सालों से उसके खिलाफ लड़ता रहा। जब वह पक्ष बदलता है, तो विश्वास से नहीं, अपमान से। ऐसा आदमी सही काम गलत कारण से करता है, और इतिहास उसे सही पक्ष पर खड़ा पाता है, पर फाटक के भीतर मरा हुआ।
श्रोता
पहले सुनने वालों के लिए यह कहानी एक सफाई थी। दाऊद के वंश की गद्दी पर सवाल उठते रहे होंगे: क्या यह राजा शाऊल के घराने के खून पर बैठा है? इसलिए कथा बार-बार दोहराती है कि अब्नेर "कुशल से चला गया" था, कि दाऊद को "इस बात का पता न था," और कि "समस्त इस्राएल ने भी, उसी दिन जान लिया" कि यह राजा का काम नहीं था। उत्तर के गोत्रों के लिए यह भरोसा दिलाने वाली बात थी कि उनका अपना नायक सम्मान से दफ़नाया गया और राजा स्वयं अर्थी के पीछे चला। सत्ता के दावे तब भी खून से तौले जाते थे, और यहाँ एक राजा सार्वजनिक रूप से उपवास करके कहता है: यह खून मेरा नहीं है।
चिंतन
आपकी किस "कुशल से चला गया" जैसी शांति के नीचे कोई अनसुलझा हिसाब दबा पड़ा है, जो किसी दिन फाटक के भीतर फूट सकता है?
दाऊद की तरह कहाँ आप अभिषिक्त होकर भी निर्बल हैं, और क्या वह निर्बलता सचमुच मजबूरी है या सुविधा?
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2 Samuel 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
2 शमूएल 3 का क्या अर्थ है?
2 शमूएल 3 किस विषय में है?
2 शमूएल 3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
2 शमूएल 3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
2 शमूएल 3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Samuel 3 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
अब्नेर जानता था कि परमेश्वर ने दाऊद से क्या कहा था। फिर भी वर्षों तक वह उसके विरुद्ध लड़ता रहा। और जब अपनी इज़्ज़त पर चोट लगी, तभी उसने कहा, "देश किस का है?" सच पहले से मालूम था, पर मन तब झुका जब अपना नुकसान हुआ। तुम्हारे जीवन में भी कोई ऐसी बात है जिसे तुम सही जानते हो, पर अब तक टालते आए हो?
पिता, मैं भीतर से कमज़ोर महसूस करता हूँ, भले ही बाहर से सब ठीक दिखता हो। जो लोग मुझसे कठोर हैं, उनके सामने मैं टिक नहीं पाता। बदला लेने का बोझ मैं अपने कंधों पर नहीं उठाऊँगा, वह तेरे हाथ में छोड़ता हूँ। तू ही मेरी कमज़ोरी में मुझे थाम ले।
पलतीएल बहूरीम तक रोता हुआ पीछे पीछे चलता रहा। फिर एक ही आदेश, "लौट जा", और वह लौट गया। बड़े लोगों के समझौतों में उसके आँसुओं की कोई गिनती नहीं थी। पर परमेश्वर ने उसे इस कहानी में दर्ज किया। तुम्हारा दर्द भी किसी की योजना में भले न गिना गया हो, स्वर्ग में वह गिना गया है।
तब अब्नेर बीस जन संग लिए हुए हेब्रोन में दाऊद के पास आया, और दाऊद ने अब्नेर और उसके संग के जनों के लिये भोज किया।" सोचो, यही अब्नेर बरसों दाऊद के विरुद्ध लड़ता रहा था। पर दाऊद ने तलवार नहीं, थाली परोसी। मेल अक्सर मैदान में नहीं, मेज पर शुरू होता है। जिस नाम को याद करके तुम्हारा मन आज भी कड़वा हो जाता है, क्या उसके लिए तुम्हारी मेज पर जगह है?
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