बाइबल व्याख्या

प्रेरितों के काम 14

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

इकुनियुम में पौलुस और बरनबास आराधनालय में बोलते हैं, बहुत लोग विश्वास करते हैं, और उतनी ही तेज़ी से नगर दो हिस्सों में बँट जाता है; पथराव की धमकी उन्हें लुस्त्रा और दिरबे की ओर धकेल देती है। लुस्त्रा में जन्म से लँगड़ा एक आदमी चंगा होता है, और भीड़ दोनों को देवता समझकर बैल और फूलों के हार लेकर बलिदान चढ़ाने दौड़ पड़ती है, जिसे वे कपड़े फाड़कर मुश्किल से रोकते हैं। फिर वही भीड़ पलटती है, पौलुस पर पत्थर बरसते हैं, उसे मरा समझकर नगर के बाहर घसीटा जाता है। और वह उठकर लौट आता है, नई कलीसियाओं को दृढ़ करता है, प्राचीन ठहराता है, और अन्ताकिया पहुँचकर बताता है कि परमेश्वर ने अन्यजातियों के लिये विश्वास का द्वार खोल दिया।

मूल बात

इस अध्याय का धर्मवैज्ञानिक केंद्र तीसरे पद में छिपा है: प्रभु "अपने अनुग्रह के वचन पर गवाही देता था।" सुसमाचार यहाँ कोई धार्मिक सूचना नहीं, बल्कि अनुग्रह का वचन है, और चिन्ह उस वचन के नौकर हैं, उसके मालिक नहीं। ध्यान दीजिए कि चंगाई किसे मिलती है: एक ऐसे आदमी को जो कभी चला ही नहीं, जिसके पास देने को कुछ नहीं, जो केवल सुन रहा था। यही अनुग्रह का आकार है। और पद पन्द्रह में वही परमेश्वर "जीविते परमेश्वर" कहलाते हैं, जिसने स्वर्ग, पृथ्वी और समुद्र बनाया, यानी उद्धार का परमेश्वर और सृष्टि का परमेश्वर एक ही हैं। लुस्त्रा के लोगों को नई पहचान नहीं दी जा रही, उन्हें उसी रचयिता की ओर लौटने को कहा जा रहा है जिसकी वर्षा वे बरसों से पी रहे थे बिना उसका नाम जाने। अनुग्रह पहले से काम कर रहा था; अब उसका नाम बताया जा रहा है।

साझा सूत्र

पद सोलह एक पूरी बाइबल को एक वाक्य में समेट लेता है: "उसने बीते समयों में सब जातियों को अपने-अपने मार्गों में चलने दिया।" यह कठोर लगता है, पर यही वाचा की कहानी है। परमेश्वर ने अब्राहम को चुना था ताकि उसके द्वारा पृथ्वी के सब कुल आशीष पाएँ, और सदियों तक अन्यजातियाँ उस चुनाव के बाहर खड़ी रहीं, फिर भी वर्षा और फसल के रूप में एक मूक गवाही पाती रहीं। अब वह लंबा इंतज़ार टूटता है: "अन्यजातियों के लिये विश्वास का द्वार खोल दिया।" और यह द्वार किस कीमत पर खुला, यह पौलुस के शरीर पर लिखा है। नगर के बाहर घसीटा गया, मरा समझा गया, फिर उठकर नगर में लौटा। मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान का आकार उनके दूत पर मुहर की तरह छप जाता है। इसीलिए वे राज्य का नक्शा इस तरह खींचते हैं: "हमें बड़े क्लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा।"

दर्पण

वही भीड़ जो सुबह बैल लेकर आई थी, शाम तक पत्थर उठा चुकी है। हम इसे पढ़कर लुस्त्रा वालों पर सिर हिलाते हैं, पर हम भी उसी भीड़ के भीतर जीते हैं: वह प्रशंसा जो दफ़्तर में किसी सफल प्रोजेक्ट के बाद मिलती है, वह सम्मान जो कलीसिया में एक अच्छे प्रवचन या सेवा के बाद मिलता है, वह नज़र जिससे घर के लोग आपको देखते हैं। और हम जानते हैं कि यह कितनी जल्दी पलट सकती है। पौलुस और बरनबास का जवाब विनम्रता का दिखावा नहीं था, वह धर्मविज्ञान था: "हम भी तो तुम्हारे समान दुःख-सुख भोगी मनुष्य हैं।" जो आदमी महिमा स्वीकार कर लेता है, वह अगली बार अपमान से टूट जाएगा। आज ही उस एक व्यक्ति को एक छोटा संदेश भेजिए जिसने हाल में आपकी किसी बात की तारीफ़ की थी, और उसमें साफ़ लिखिए कि वह काम आपके बल से नहीं, परमेश्वर के अनुग्रह से हुआ।

मुख्य पात्र

पौलुस यहाँ कोई लोहे का आदमी नहीं है। इकुनियुम में वह भाग जाता है, क्योंकि भागना भी कभी-कभी आज्ञाकारिता है। लुस्त्रा में वह चंगा करता है, पर जब भीड़ उसे देवता बनाने लगती है तो वह शांत सुधार नहीं करता, वह कपड़े फाड़कर भीड़ में कूद पड़ता है। उसकी घबराहट असली है। और फिर, पत्थरों से लहूलुहान होकर, वह उठता है और उसी नगर में वापस जाता है जहाँ से घसीटा गया था, और कुछ दिन बाद लुस्त्रा लौटकर उन्हीं नए विश्वासियों को दृढ़ करता है। यही उसका आत्मिक नक्शा है: अपनी महिमा के प्रति अत्यंत सतर्क, अपनी सुरक्षा के प्रति आश्चर्यजनक रूप से लापरवाह। आदमी वही है जो अपनी प्रतिष्ठा से डरता है और अपनी जान से नहीं।

एक बारीकी

लूका एक छोटा-सा ब्योरा देता है जिसे पढ़ते हुए आँख फिसल जाती है: भीड़ ने "लुकाउनिया भाषा में ऊँचे शब्द से" कहा। पौलुस और बरनबास यूनानी में बोल रहे थे; भीड़ अपनी स्थानीय बोली में फुसफुसा रही थी। यानी दोनों प्रेरितों को पता ही नहीं चला कि क्या पक रहा है, जब तक ज्यूस का पुजारी बैल और फूलों के हार लेकर फाटक पर नहीं आ गया। इसीलिए वे इतनी देर से प्रतिक्रिया देते हैं और इतनी घबराहट से। यह बारीकी हमें कुछ सिखाती है: सुसमाचार हमेशा किसी की अपनी भाषा में, अपनी देव-कथाओं में, अपनी समझ के ढाँचे में सुना जाता है, और वह ढाँचा उसे बिगाड़ भी सकता है। वचन बोलना काफ़ी नहीं; यह भी सुनना पड़ता है कि लोग किस भाषा में उसे दोहरा रहे हैं।

पहले श्रोता

लुकाउनिया में एक पुरानी कथा चलती थी कि ज्यूस और हिर्मेस एक बार मनुष्य रूप में इसी इलाके में आए थे और किसी ने उन्हें नहीं पहचाना, जिसका दंड पूरे क्षेत्र ने भुगता। इसलिए भीड़ की घबराई हुई जल्दबाज़ी समझ में आती है: वे वही गलती दोबारा नहीं करना चाहते थे। और लूका के पहले पाठक, जो अधिकतर अन्यजाति पृष्ठभूमि के मसीही थे, इस कहानी में अपना ही चेहरा देखते होंगे, क्योंकि वे भी कभी उन्हीं "व्यर्थ वस्तुओं" के सामने झुके थे। उनके लिए पद सत्ताईस कोई मिशन-रिपोर्ट नहीं, उनका जन्म-प्रमाणपत्र था। और पद बाईस कोई निराशावाद नहीं, बल्कि उस दुनिया में जीने का यथार्थ नक्शा था जहाँ विश्वास की कीमत नौकरी, परिवार और कभी-कभी जान थी।

मनन के प्रश्न

आपके जीवन में वह कौन-सी प्रशंसा है जिसे आप चुपचाप स्वीकार कर लेते हैं, और उसे लौटाने के लिए आपको अपने कौन-से "कपड़े फाड़ने" पड़ेंगे?

"हमें बड़े क्लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा" को आप एक नए विश्वासी से कैसे कहेंगे, बिना उसे डराए और बिना सच को नरम किए?

Acts में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Acts

John Stott

Stott's classic on how the gospel crossed every boundary on earth.

Acts For Everyone, Part 1

N.T. Wright

The church's explosive beginnings, explained with energy and care.

Acts: An Introduction and Commentary

I. Howard Marshall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Acts

Ajith Fernando

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Acts 14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रेरितों के काम 14 का क्या अर्थ है?
इकुनियुम में पौलुस और बरनबास आराधनालय में बोलते हैं, बहुत लोग विश्वास करते हैं, और उतनी ही तेज़ी से नगर दो हिस्सों में बँट जाता है; पथराव की धमकी उन्हें लुस्त्रा और दिरबे की ओर धकेल देती है। लुस्त्रा में जन्म से लँगड़ा एक आदमी चंगा होता है, और भीड़ दोनों को देवता समझकर बैल और फूलों के हार लेकर बलिदान चढ़ाने दौड़ पड़ती है, जिसे वे कपड़े फाड़कर मुश्किल से रोकते हैं। फिर वही भीड़ पलटती है, पौलुस पर पत्थर बरसते हैं, उसे मरा समझकर नगर के बाहर घसीटा जाता है। और वह उठकर लौट आता है, नई कलीसियाओं को दृढ़ करता है, प्राचीन ठहराता है, और अन्ताकिया पहुँचकर बताता है कि परमेश्वर ने अन्यजातियों के लिये विश्वास का द्वार खोल दिया।
प्रेरितों के काम 14 किस विषय में है?
पद सोलह एक पूरी बाइबल को एक वाक्य में समेट लेता है: "उसने बीते समयों में सब जातियों को अपने-अपने मार्गों में चलने दिया।" यह कठोर लगता है, पर यही वाचा की कहानी है। परमेश्वर ने अब्राहम को चुना था ताकि उसके द्वारा पृथ्वी के सब कुल आशीष पाएँ, और सदियों तक अन्यजातियाँ उस चुनाव के बाहर खड़ी रहीं, फिर भी वर्षा और फसल के रूप में एक मूक गवाही पाती रहीं। अब वह लंबा इंतज़ार टूटता है: "अन्यजातियों के लिये विश्वास का द्वार खोल दिया।" और यह द्वार किस कीमत पर खुला, यह पौलुस के शरीर पर लिखा है। नगर के बाहर घसीटा गया, मरा समझा गया, फिर उठकर नगर में लौटा। मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान का आकार उनके दूत पर मुहर की तरह छप जाता है। इसीलिए वे राज्य का नक्शा इस तरह खींचते हैं: "हमें बड़े क्लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा।"
प्रेरितों के काम 14 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पौलुस यहाँ कोई लोहे का आदमी नहीं है। इकुनियुम में वह भाग जाता है, क्योंकि भागना भी कभी-कभी आज्ञाकारिता है। लुस्त्रा में वह चंगा करता है, पर जब भीड़ उसे देवता बनाने लगती है तो वह शांत सुधार नहीं करता, वह कपड़े फाड़कर भीड़ में कूद पड़ता है। उसकी घबराहट असली है। और फिर, पत्थरों से लहूलुहान होकर, वह उठता है और उसी नगर में वापस जाता है जहाँ से घसीटा गया था, और कुछ दिन बाद लुस्त्रा लौटकर उन्हीं नए विश्वासियों को दृढ़ करता है। यही उसका आत्मिक नक्शा है: अपनी महिमा के प्रति अत्यंत सतर्क, अपनी सुरक्षा के प्रति आश्चर्यजनक रूप से लापरवाह। आदमी वही है जो अपनी प्रतिष्ठा से डरता है और अपनी जान से नहीं।
प्रेरितों के काम 14 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
लुकाउनिया में एक पुरानी कथा चलती थी कि ज्यूस और हिर्मेस एक बार मनुष्य रूप में इसी इलाके में आए थे और किसी ने उन्हें नहीं पहचाना, जिसका दंड पूरे क्षेत्र ने भुगता। इसलिए भीड़ की घबराई हुई जल्दबाज़ी समझ में आती है: वे वही गलती दोबारा नहीं करना चाहते थे। और लूका के पहले पाठक, जो अधिकतर अन्यजाति पृष्ठभूमि के मसीही थे, इस कहानी में अपना ही चेहरा देखते होंगे, क्योंकि वे भी कभी उन्हीं "व्यर्थ वस्तुओं" के सामने झुके थे। उनके लिए पद सत्ताईस कोई मिशन-रिपोर्ट नहीं, उनका जन्म-प्रमाणपत्र था। और पद बाईस कोई निराशावाद नहीं, बल्कि उस दुनिया में जीने का यथार्थ नक्शा था जहाँ विश्वास की कीमत नौकरी, परिवार और कभी-कभी जान थी।
प्रेरितों के काम 14 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
"हमें बड़े क्लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा" को आप एक नए विश्वासी से कैसे कहेंगे, बिना उसे डराए और बिना सच को नरम किए?
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Acts 14 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 16

पिता, तूने बीते समयों में लोगों को उनकी अपनी राहों पर चलने दिया, फिर भी तूने कभी उन्हें छोड़ा नहीं। मैं भी कई बार अपनी मर्ज़ी की राह चुनता हूँ। मुझे अपने धीरज की याद दिला, और धीरे से वापस अपने पास बुला ले।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 26

पिता, धन्यवाद कि पौलुस और बरनबास जिस काम के लिये तेरे अनुग्रह में सौंपे गए थे, उसे तूने पूरा करवाया। धन्यवाद कि हम भी अपने बल पर नहीं, तेरे अनुग्रह के भरोसे भेजे जाते हैं, और तू लौटने तक साथ चलता और सेवा को सिद्ध करता है।

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