बाइबल व्याख्या

कुलुस्सियों 2:9

बाइबल

पाठ

पौलुस कुलुस्सियों को चेतावनी दे चुका है कि कोई उन्हें "तत्व-ज्ञान और व्यर्थ धोखे" से शिकार न बना ले, और फिर वह इसका कारण एक ही वाक्य में रख देता है: "क्योंकि उसमें ईश्वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है।" यानी मसीह में परमेश्वर का कोई अंश, कोई झलक, कोई प्रतिबिम्ब नहीं, बल्कि परमेश्वर होने की सम्पूर्णता, और वह भी हवा में नहीं, एक असली मानव देह में, स्थायी रूप से बसी हुई है। यह वाक्य तर्क नहीं, नींव है, जिस पर अगला वाक्य टिकता है: "और तुम मसीह में भरपूर हो गए हो।"

मर्म

यहाँ जो कहा जा रहा है वह ईसाई विश्वास की सबसे कँटीली और सबसे मीठी बात है। परमेश्वर को जानने के लिए हमें ऊपर चढ़ना नहीं पड़ता; वे नीचे उतर आए हैं, और उतरने में उन्होंने अपना कुछ भी पीछे नहीं छोड़ा। "सारी परिपूर्णता" शब्द किसी बीच के दर्जे को जगह नहीं देता। मसीह न आधे देवता हैं, न कोई ऊँचा स्वर्गदूत, न परमेश्वर तक पहुँचने की एक सीढ़ी जिसके ऊपर और सीढ़ियाँ हों। इसका सीधा नतीजा यह है कि उद्धार में कोई कमी बाकी नहीं जिसे हमारे धार्मिक प्रयास पूरी करें। अनुग्रह अधूरा नहीं दिया जाता, क्योंकि जिसमें अनुग्रह दिया गया वह स्वयं अधूरा नहीं है।

सूत्र

पुराने नियम में परमेश्वर की महिमा एक जगह उतरती थी और वहाँ बस जाती थी: निवासस्थान बनकर तैयार हुआ और "यहोवा के तेज से भर गया" (निर्गमन 40)। वही चित्र यहाँ पूरा होता है, पर पत्थर और कपड़े के मन्दिर में नहीं, एक शरीर में। इसीलिए यूहन्ना लिखता है कि वचन देहधारी हुआ और हमारे बीच डेरा किया; यह भाषा जानबूझकर निवासस्थान की है। परमेश्वर सदा से अपनी प्रजा के बीच वास करना चाहते थे, वाचा का पूरा उद्देश्य यही था, और मसीह में वह इच्छा अपने अंतिम रूप तक पहुँचती है। छाया और मूल का जो अंतर पौलुस आगे पद 17 में करता है, उसकी जड़ यहीं है।

दर्पण

अगर मसीह में सब कुछ है, तो हमारी बेचैनी कहाँ से आती है? आप रविवार को यह मानते हैं और सोमवार सुबह फिर किसी और चीज़ से पूर्णता माँगने लगते हैं: थोड़ी और सफलता, बच्चों का ठीक चलना, शरीर का साथ देना, किसी अनुभव का रोमांच, या फिर वह सूक्ष्म धार्मिक घमंड कि मैंने दूसरों से ज़्यादा कर लिया। कुलुस्से का "तत्व-ज्ञान" आज कपड़े बदलकर आता है, पर उसका वादा वही है: मसीह ठीक हैं, पर काफ़ी नहीं। इस पद की धार यहीं चुभती है। यह आपकी कमी को नकारता नहीं, पर यह कहता है कि जिस खाली जगह को आप भरने दौड़ते हैं, वह पहले ही भर दी गई है, और आपको उसमें से जीना सीखना है, कमाना नहीं।

विवरण

"सदेह" शब्द पर रुकिए। यूनानी में यह सोमातिकोस है, यानी शरीर के रूप में, ठोस, छूने योग्य। पौलुस यह नहीं कहता कि परमेश्वर मसीह पर उतरे, जैसे कोई शक्ति किसी पात्र में उँडेली जाए और फिर हटा ली जाए। वह कहता है कि परिपूर्णता उसमें वास करती है, वर्तमान काल में, स्थायी रूप से। जो मसीह अभी जीवित हैं, उनका शरीर पुनरुत्थान के बाद भी छोड़ा नहीं गया। इसका अर्थ यह है कि देह कोई शर्मिंदगी की चीज़ नहीं जिससे आत्मा को बचकर निकलना है। जो धर्म शरीर को दुश्मन मानकर "यह न छूना, उसे न चखना" पर टिकता है, वह इसी एक शब्द से टूट जाता है।

पृष्ठभूमि

कुलुस्से के विश्वासी बहुदेववादी और रहस्यवादी वातावरण में जी रहे थे, जहाँ माना जाता था कि दिव्यता कई स्तरों में बँटी है और ऊपर तक पहुँचने के लिए बीच की शक्तियों को साधना पड़ता है, स्वर्गदूतों की पूजा और विशेष अनुशासन इसीलिए आकर्षक लगते थे। उनके कानों में "सारी परिपूर्णता" एक चुनौती की तरह गूँजा होगा: जो कुछ तुम ऊपर की सीढ़ियों पर खोज रहे हो, वह सब एक नाज़रत के आदमी में इकट्ठा है, जिसे रोम ने क्रूस पर चढ़ाया। छोटी, दबाव में जीती हुई इस मण्डली के लिए यह सिर्फ़ सिद्धांत नहीं था; यह उनके पड़ोसियों की धार्मिक श्रेष्ठता के सामने खड़े रहने का आधार था।

प्रश्न

फिर भी एक बात सहज नहीं बैठती: अगर परमेश्वर की सारी परिपूर्णता उस देह में वास करती थी, तो वह देह भूखी क्यों हुई, थकी क्यों, और गतसमनी में काँपी क्यों? पौलुस इसका हल नहीं देता, और हमें भी जल्दबाज़ी में नहीं देना चाहिए। कोई कहेगा कि परमेश्वर ने अपनी शक्ति छिपा ली, कोई कहेगा कि दो स्वभाव एक व्यक्ति में मिले रहे; भाषा जहाँ तक जा सकती है वहाँ तक जाती है, फिर रुक जाती है। यह रहस्य है, उलझन नहीं। और इसका फल हमारे हाथ में है: वह परमेश्वर जिनकी परिपूर्णता में कोई कमी नहीं, हमारी कमज़ोरी को बाहर से नहीं जानते, भीतर से जानते हैं।

चिंतन

आप अपने जीवन में किस जगह अब भी मान रहे हैं कि मसीह के अलावा कुछ और चाहिए, और वह "कुछ और" ईमानदारी से नाम लेकर क्या है?

यदि परमेश्वर ने देह को अपने वास के योग्य ठहराया, तो आप अपने शरीर, अपने काम और अपने रोज़मर्रा के कामों को किस नज़र से देखेंगे?

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Colossians and Philemon: An Introduction and Commentary

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Colossians 2:9 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

कुलुस्सियों 2:9 का क्या अर्थ है?
पौलुस कुलुस्सियों को चेतावनी दे चुका है कि कोई उन्हें "तत्व-ज्ञान और व्यर्थ धोखे" से शिकार न बना ले, और फिर वह इसका कारण एक ही वाक्य में रख देता है: "क्योंकि उसमें ईश्वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है।" यानी मसीह में परमेश्वर का कोई अंश, कोई झलक, कोई प्रतिबिम्ब नहीं, बल्कि परमेश्वर होने की सम्पूर्णता, और वह भी हवा में नहीं, एक असली मानव देह में, स्थायी रूप से बसी हुई है। यह वाक्य तर्क नहीं, नींव है, जिस पर अगला वाक्य टिकता है: "और तुम मसीह में भरपूर हो गए हो।"
कुलुस्सियों 2:9 किस विषय में है?
पुराने नियम में परमेश्वर की महिमा एक जगह उतरती थी और वहाँ बस जाती थी: निवासस्थान बनकर तैयार हुआ और "यहोवा के तेज से भर गया" (निर्गमन 40)। वही चित्र यहाँ पूरा होता है, पर पत्थर और कपड़े के मन्दिर में नहीं, एक शरीर में। इसीलिए यूहन्ना लिखता है कि वचन देहधारी हुआ और हमारे बीच डेरा किया; यह भाषा जानबूझकर निवासस्थान की है। परमेश्वर सदा से अपनी प्रजा के बीच वास करना चाहते थे, वाचा का पूरा उद्देश्य यही था, और मसीह में वह इच्छा अपने अंतिम रूप तक पहुँचती है। छाया और मूल का जो अंतर पौलुस आगे पद 17 में करता है, उसकी जड़ यहीं है।
कुलुस्सियों 2:9 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
"सदेह" शब्द पर रुकिए। यूनानी में यह सोमातिकोस है, यानी शरीर के रूप में, ठोस, छूने योग्य। पौलुस यह नहीं कहता कि परमेश्वर मसीह पर उतरे, जैसे कोई शक्ति किसी पात्र में उँडेली जाए और फिर हटा ली जाए। वह कहता है कि परिपूर्णता उसमें वास करती है, वर्तमान काल में, स्थायी रूप से। जो मसीह अभी जीवित हैं, उनका शरीर पुनरुत्थान के बाद भी छोड़ा नहीं गया। इसका अर्थ यह है कि देह कोई शर्मिंदगी की चीज़ नहीं जिससे आत्मा को बचकर निकलना है। जो धर्म शरीर को दुश्मन मानकर "यह न छूना, उसे न चखना" पर टिकता है, वह इसी एक शब्द से टूट जाता है।
कुलुस्सियों 2:9 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
फिर भी एक बात सहज नहीं बैठती: अगर परमेश्वर की सारी परिपूर्णता उस देह में वास करती थी, तो वह देह भूखी क्यों हुई, थकी क्यों, और गतसमनी में काँपी क्यों? पौलुस इसका हल नहीं देता, और हमें भी जल्दबाज़ी में नहीं देना चाहिए। कोई कहेगा कि परमेश्वर ने अपनी शक्ति छिपा ली, कोई कहेगा कि दो स्वभाव एक व्यक्ति में मिले रहे; भाषा जहाँ तक जा सकती है वहाँ तक जाती है, फिर रुक जाती है। यह रहस्य है, उलझन नहीं। और इसका फल हमारे हाथ में है: वह परमेश्वर जिनकी परिपूर्णता में कोई कमी नहीं, हमारी कमज़ोरी को बाहर से नहीं जानते, भीतर से जानते हैं।
कुलुस्सियों 2:9 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि परमेश्वर ने देह को अपने वास के योग्य ठहराया, तो आप अपने शरीर, अपने काम और अपने रोज़मर्रा के कामों को किस नज़र से देखेंगे?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Colossians 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्त धन्यवाद करते रहो।"

जड़ें नीचे जाती हैं, दिखती नहीं। पर उन्हीं की वजह से पेड़ आँधी में खड़ा रहता है। तेरा विश्वास भी वहीं मजबूत होता है जहाँ कोई नहीं देखता।

और ध्यान दे, पौलुस अंत में धन्यवाद जोड़ता है। जो मसीह में गहरा जड़ा है, उसकी शिकायतें कम और कृतज्ञता ज़्यादा हो जाती है। आज तेरे मुँह से क्या ज़्यादा निकल रहा है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, जो पुराना था वह तेरे साथ दफ़न हुआ, और तूने मुझे नया जीवन दिया। कभी कभी मैं फिर उसी कब्र की ओर लौटने लगता हूँ। मुझे याद दिला कि जिस सामर्थ्य ने यीशु को जिलाया, वही आज मुझमें काम कर रही है। मुझे उठकर चलने का भरोसा दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

पौलुस अभी अभी कह चुका था कि मसीह में "ज्ञान और बुद्धि के सारे भण्डार छिपे हुए हैं," और फिर तुरन्त चेतावनी देता है, "यह मैं इसलिए कहता हूँ कि कोई मनुष्य तुम्हें लुभानेवाली बातों से धोखा न दे।" धोखा हमेशा भद्दा नहीं लगता, वह मीठा लगता है, समझदार लगता है। बचाव तर्क नहीं, मसीह की गहरी पहचान है। जिसे तू सचमुच जानता है, उसकी नकल तुझे धोखा नहीं दे पाएगी।

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