बाइबल व्याख्या

दानिय्येल 7:7

बाइबल

पाठ

दानिय्येल रात के दर्शन में आगे देखता है और चौथा जन्तु उठता है। वह "भयंकर और डरावना और बहुत सामर्थी" है, उसके "बड़े-बड़े लोहे के दाँत" हैं, वह सब कुछ खा डालता है, चूर-चूर करता है, और जो बच जाता है उसे पैरों तले रौंद देता है। पहले तीन जन्तुओं की तरह उसकी तुलना किसी जाने-पहचाने पशु से नहीं की जा सकती; वह "सब पहले जन्तुओं से भिन्न है", और उसके दस सींग हैं।

मर्म

ध्यान दीजिए कि इस जन्तु का कोई नाम नहीं है। सिंह, रीछ, चीता, ये सब पहचाने जा सकते हैं, इनसे डर तो लगता है पर इन्हें समझा जा सकता है। चौथे के लिए दानिय्येल के पास कोई उपमा नहीं बची। यही इस पद का धार्मिक मर्म है: बुराई एक बिंदु पर आकर अपनी ही श्रेणी तोड़ देती है, वह केवल भूखी नहीं रहती, वह विनाश के लिए विनाश करती है। जो बचा हुआ हिस्सा वह खा भी नहीं सकता, उसे भी रौंद देती है। यह भूख नहीं, यह घृणा है। और फिर भी, पूरे अध्याय की व्याकरण देखिए, हर जन्तु को अधिकार "दिया गया" है। परमेश्वर इस दुःस्वप्न के बाहर खड़े नहीं हैं; वे इसके ऊपर सिंहासन पर बैठे हैं।

मुख्य सूत्र

समुद्र से जन्तु निकलते हैं, आकाश के बादलों से "मनुष्य के सन्तान सा कोई" आता है। यह विरोधाभास पूरे अध्याय की रीढ़ है और सीधे यीशु मसीह तक जाता है। लोहे के दाँत वाले साम्राज्य अपने अधिकार को दाँतों से छीनते हैं; मसीह को अधिकार दिया जाता है, और उनका राज्य "अविनाशी" ठहरता है। जब यीशु महायाजक के सामने खड़े होकर स्वयं को मनुष्य का पुत्र कहते हैं, तो वे ठीक यही दृश्य उद्धृत कर रहे थे, और कुछ ही घंटों बाद रोमी लोहा उन्हें कुचल देता है। सूत्र यह है: चौथा जन्तु मसीह को रौंदता है, और वहीं अपनी शक्ति खो बैठता है।

दर्पण

आपके जीवन में भी एक ऐसा जन्तु है जिसे आप नाम नहीं दे पाते। शायद वह दफ़्तर की वह व्यवस्था है जो आपको एक संख्या में बदल देती है। शायद वह बीमारी है जो न मारती है न जीने देती है। शायद वह क़र्ज़, वह मुक़दमा, वह रिश्तेदार जिसका फ़ोन देखकर आपकी छाती जकड़ जाती है। और सबसे गहरा डर यह है कि यह चीज़ आपसे सब कुछ ले लेगी और फिर बचे-खुचे को भी रौंद देगी, जैसे इस पद का जन्तु करता है। दानिय्येल इस डर को झुठलाता नहीं; पद 28 में वह लिखता है कि उसका मन घबराया ही रहा। परमेश्वर आपसे यह नहीं कहते कि डरावनी चीज़ें दरअसल डरावनी नहीं हैं। वे कहते हैं कि उनके दाँत गिने हुए हैं और उनका समय दिया हुआ है।

आज एक काग़ज़ पर उस एक शक्ति का नाम लिखिए जिसके सामने आप सबसे छोटे महसूस करते हैं, और उसके ठीक नीचे लिखिए: "इसे अधिकार दिया गया था।" फिर उस काग़ज़ को हाथ में लेकर एक वाक्य में प्रार्थना कीजिए।

अंतर्पाठ

पद 25 इसी जन्तु की व्याख्या खोलता है: वह "परमप्रधान के विरुद्ध बातें कहेगा" और "समयों और व्यवस्था के बदल देने की आशा करेगा।" यही अत्याचार का असली चेहरा है, केवल शरीर पर नहीं, कैलेंडर और क़ानून पर कब्ज़ा, ताकि लोग भूल जाएँ कि समय किसका है। प्रकाशितवाक्य 13 इसी छवि को उठाता है, और वहाँ भी जन्तु को "दिया गया" ही अधिकार है, कभी छीना हुआ नहीं। दानिय्येल 7 का अपना उत्तर पद 18 में आता है: "परमप्रधान के पवित्र लोग राज्य को पाएँगे।" जन्तु राज्य हड़पते हैं; संत उसे उपहार में पाते हैं।

श्रोताओं का चेहरा

पहले पाठक निर्वासित यहूदी थे, और बाद में वे जो अन्ताकुस के अत्याचार में मंदिर अपवित्र होते देख रहे थे। उनके लिए यह कोई भविष्यवाणी-पहेली नहीं थी बल्कि उनकी गली का दृश्य था। उन्होंने अपने बच्चों को साम्राज्य के पहियों के नीचे आते देखा था। "रौंदता है" शब्द उनके लिए रूपक नहीं था। और उन्होंने इस पद में जो सुना, वह यह था कि परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ता को यह दृश्य दिखाया, यानी उन्हें इसकी जानकारी है, यह उनकी नज़र से छूटा नहीं है। पीड़ित के लिए सबसे बड़ी राहत यही होती है कि कोई देख रहा है, और वह भूलेगा नहीं।

कठिन प्रश्न

फिर भी सवाल कड़वा बना रहता है: यदि अधिकार दिया गया है, तो देने वाला कौन है? इस पद को ईमानदारी से पढ़िए और आप परमेश्वर को उस लोहे के दाँत वाले जन्तु के ऊपर पाएँगे, पर उसे रोकते हुए नहीं। दानिय्येल इसका हल नहीं देता। वह केवल यह देता है कि "अन्त में" सिंहासन रखे जाते हैं और पुस्तकें खोली जाती हैं। बीच का समय, वह लंबा "साढ़े तीन काल", व्याख्या के बिना छोड़ दिया जाता है। मैं आपको इसका आसान उत्तर नहीं दूँगा, क्योंकि पाठ नहीं देता। पर यह ध्यान दीजिए: दानिय्येल घबराया रहा और फिर भी उसने लिख दिया। कभी-कभी विश्वास यही होता है, डर के साथ बैठे रहना और सच्चाई को दर्ज करते रहना।

मनन के प्रश्न

आपके जीवन का वह "चौथा जन्तु" कौन-सा है जिसे आपने अब तक नाम नहीं दिया, और नाम न देने से आपको क्या मिल रहा है?

यदि हर सत्ता का अधिकार "दिया गया" है, तो इस सप्ताह किस डर के सामने आपका रवैया बदलना चाहिए?

Daniel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Daniel

Dale Ralph Davis

Courage in exile and the God who rules history, told with verve.

Daniel: An Introduction and Commentary

Joyce Baldwin

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Daniel

Tremper Longman

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Daniel For You

David Helm

Standing firm in Babylon, with hope fixed on the true King.

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Daniel 7:7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

दानिय्येल 7:7 का क्या अर्थ है?
दानिय्येल रात के दर्शन में आगे देखता है और चौथा जन्तु उठता है। वह "भयंकर और डरावना और बहुत सामर्थी" है, उसके "बड़े-बड़े लोहे के दाँत" हैं, वह सब कुछ खा डालता है, चूर-चूर करता है, और जो बच जाता है उसे पैरों तले रौंद देता है। पहले तीन जन्तुओं की तरह उसकी तुलना किसी जाने-पहचाने पशु से नहीं की जा सकती; वह "सब पहले जन्तुओं से भिन्न है", और उसके दस सींग हैं।
दानिय्येल 7:7 किस विषय में है?
समुद्र से जन्तु निकलते हैं, आकाश के बादलों से "मनुष्य के सन्तान सा कोई" आता है। यह विरोधाभास पूरे अध्याय की रीढ़ है और सीधे यीशु मसीह तक जाता है। लोहे के दाँत वाले साम्राज्य अपने अधिकार को दाँतों से छीनते हैं; मसीह को अधिकार दिया जाता है, और उनका राज्य "अविनाशी" ठहरता है। जब यीशु महायाजक के सामने खड़े होकर स्वयं को मनुष्य का पुत्र कहते हैं, तो वे ठीक यही दृश्य उद्धृत कर रहे थे, और कुछ ही घंटों बाद रोमी लोहा उन्हें कुचल देता है। सूत्र यह है: चौथा जन्तु मसीह को रौंदता है, और वहीं अपनी शक्ति खो बैठता है।
दानिय्येल 7:7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक काग़ज़ पर उस एक शक्ति का नाम लिखिए जिसके सामने आप सबसे छोटे महसूस करते हैं, और उसके ठीक नीचे लिखिए: "इसे अधिकार दिया गया था।" फिर उस काग़ज़ को हाथ में लेकर एक वाक्य में प्रार्थना कीजिए।
दानिय्येल 7:7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पहले पाठक निर्वासित यहूदी थे, और बाद में वे जो अन्ताकुस के अत्याचार में मंदिर अपवित्र होते देख रहे थे। उनके लिए यह कोई भविष्यवाणी-पहेली नहीं थी बल्कि उनकी गली का दृश्य था। उन्होंने अपने बच्चों को साम्राज्य के पहियों के नीचे आते देखा था। "रौंदता है" शब्द उनके लिए रूपक नहीं था। और उन्होंने इस पद में जो सुना, वह यह था कि परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ता को यह दृश्य दिखाया, यानी उन्हें इसकी जानकारी है, यह उनकी नज़र से छूटा नहीं है। पीड़ित के लिए सबसे बड़ी राहत यही होती है कि कोई देख रहा है, और वह भूलेगा नहीं।
दानिय्येल 7:7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन का वह "चौथा जन्तु" कौन-सा है जिसे आपने अब तक नाम नहीं दिया, और नाम न देने से आपको क्या मिल रहा है?
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Daniel 7 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

पंख नोचे जाने का दृश्य डरावना लगता है, पर ध्यान दे कि उसके बाद क्या हुआ: "उसको मनुष्य का हृदय दिया गया।" नबूकदनेस्सर की कहानी यही थी। जब तक वह उड़ता रहा, वह पशु था। जमीन पर उतरकर ही वह इंसान बना।

तेरे जीवन में जो पंख टूटे, क्या वे सजा थे, या परमेश्वर तुझे हृदय लौटा रहा था?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 23

पिता, इस दुनिया की ताकतें बड़ी और डरावनी लगती हैं, जो कुचलती और निगल जाती हैं। पर मैं जानता हूँ कि हर राज्य आपके हाथ के नीचे है। जब खबरें डराएँ और भविष्य अंधेरा लगे, मेरे मन को थाम लीजिए। आपका राज्य ही आखिर में बना रहेगा, और मैं उसी पर भरोसा रखना चाहता हूँ।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 27

पिता, जब दुनिया की ताकतें बड़ी और डरावनी लगती हैं, मुझे याद दिला कि आखिरी राज्य आपका है और वह कभी खत्म नहीं होगा। मेरे डर को अपनी शांति से भर दीजिए, और मुझे धीरज से आपके साथ चलना सिखाइए।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 8

पिता, धन्यवाद कि आपने दानिय्येल को पहले ही वह छोटा सींग दिखा दिया, जिसमें "मनुष्य की सी आँखें और बड़ा बोल बोलनेवाला मुँह" था। घमंडी आवाज़ें हमें चौंकाती नहीं, क्योंकि आप उन्हें पहले से जानते हैं। आपकी दी हुई यह पहचान हमारे डर को शांत करती है।

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