बाइबल व्याख्या

एस्तेर 5

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

तीसरे दिन एस्तेर अपने राजकीय वस्त्र पहनकर, बिन बुलाए, राजा के भीतरी आँगन में जाकर खड़ी हो जाती है, और मृत्यु के बदले उसे सोने का राजदण्ड मिलता है। राजा दो बार उसे आधा राज्य तक देने का वचन देता है, पर एस्तेर कुछ नहीं माँगती; वह केवल भोज पर निमंत्रण देती है, और दूसरे दिन के लिए फिर टाल देती है। उसी शाम हामान, सम्मान से फूला हुआ, मोर्दकै को फाटक पर बैठा देखकर पचास हाथ ऊँचा फाँसी का खम्भा बनवाता है।

मर्म

इस पूरे अध्याय में परमेश्वर का नाम एक बार भी नहीं आता, और यही इसका सबसे गहरा धर्मविज्ञान है। एस्तेर की पुस्तक हमें उस दुनिया में रखती है जहाँ आकाश चुप है, कोई भविष्यद्वक्ता नहीं बोलता, कोई चमत्कार नहीं होता, और फिर भी सब कुछ ठीक उसी दिशा में मुड़ता है जिस दिशा में वाचा का परमेश्वर अपने लोगों को बचाने के लिए मुड़ता है। "तीसरे दिन" का उल्लेख आकस्मिक नहीं है; उपवास के बाद, मृत्यु की ओर चलकर, जीवन मिलता है। राजदण्ड का बढ़ाया जाना मानवीय कृपा है, पर पाठक जानता है कि उस कृपा के पीछे कोई और हाथ है। यह अनुग्रह का वह रूप है जो शोर नहीं करता: अदृश्य, बिना हस्ताक्षर, पर निर्णायक।

सूत्र

बाइबल में उद्धार बार-बार एक ऐसे व्यक्ति के द्वारा आता है जो अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों के लिए बीच में खड़ा होता है। मूसा पर्वत पर परमेश्वर के सामने खड़ा हुआ, एस्तेर क्षयर्ष के सिंहासन के सामने। दोनों में एक ही आकृति है: बिचवई, जो अपने लोगों के अपराध और खतरे को अपने शरीर पर उठाता है। यहाँ आकृति अपूर्ण है, क्योंकि एस्तेर को अनुमति मिलनी है, उसे डर लगता है, उसे देर करनी पड़ती है। मसीह में यह आकृति पूरी होती है: वह बिन बुलाए नहीं, बल्कि भेजा हुआ आता है, और उसके लिए कोई राजदण्ड नहीं बढ़ाया जाता। वह मरता है, और तीसरे दिन उठता है, और तब हमारे लिए सिंहासन के सामने आने का मार्ग सचमुच खुल जाता है।

दर्पण

हामान के मुँह से निकला वाक्य हमें बेधता है: "यह सब मेरी दृष्टि में व्यर्थ लगता है।" धन, संतान, पदोन्नति, रानी का विशेष निमंत्रण, सब कुछ उसके पास है, और एक आदमी का सिर न झुकना उस सारे ढेर को शून्य कर देता है। यह हमारी ही बीमारी है। वेतन बढ़ा, पर सहकर्मी की पदोन्नति ज़्यादा बड़ी थी। बच्चे ठीक चल रहे हैं, पर किसी रिश्तेदार की एक टिप्पणी पूरे सप्ताह को ज़हरीला कर देती है। जब हमारी पहचान दूसरों की स्वीकृति पर टिकी हो, तो एक इनकार सब कुछ व्यर्थ बना देता है, और हम मन ही मन खम्भे गढ़ने लगते हैं। आज ही, दस मिनट में: उस एक व्यक्ति का नाम काग़ज़ पर लिखिए जिसका सम्मान न मिलना आपको भीतर से खाता है, और उस नाम पर हाथ रखकर ऊँची आवाज़ में परमेश्वर से कहिए कि आपकी कीमत उस व्यक्ति के हाथ में नहीं है।

अन्तर्पाठ

इब्रानियों का वह वचन कि हम "अनुग्रह के सिंहासन के निकट" साहस के साथ आ सकते हैं, इस अध्याय को पढ़ने के बाद नया वज़न पा लेता है। एस्तेर तीन दिन उपवास करके, मृत्यु का जोखिम लेकर, काँपते हुए आँगन में खड़ी होती है; और वह राजा मात्र एक नशे में डूबा सम्राट है। हमारे लिए द्वार खुला है, और सिंहासन पर बैठा राजा हमें बचाने के लिए मर चुका है। दूसरी ओर, भजन 37 की पंक्ति कि दुष्ट अपना धनुष अपने ही ऊपर चलाता है, हामान के खम्भे पर पूरी होने वाली है। पचास हाथ ऊँचा वह खम्भा उसके अपने नाश का माप बन जाएगा, और यह संयोग नहीं, परमेश्वर के न्याय का ढंग है।

प्रश्न

एस्तेर क्यों टालती है? राजा ने दो बार आधा राज्य देने का वचन दिया, और वह चुप रह जाती है। कुछ लोग इसे चतुर रणनीति कहते हैं, कुछ कायरता। पाठ स्वयं कोई कारण नहीं देता, और यह चुप्पी हमें असहज करती है, क्योंकि हम चाहते हैं कि विश्वास के नायक निर्णायक क्षण में स्पष्ट और निर्भीक हों। मगर देर करने का परिणाम देखिए: उसी रात राजा की नींद उड़ती है और मोर्दकै का पुराना उपकार सामने आता है। यदि एस्तेर पहले दिन बोल देती, तो वह मोड़ न आता। इसका अर्थ यह नहीं कि हमारी हर हिचकिचाहट पवित्र है। इसका अर्थ है कि परमेश्वर की योजना हमारी अपूर्ण हिम्मत के भीतर से भी रास्ता बना लेती है, और यह जानकर राहत मिलती है, पर आलस का बहाना नहीं।

एक बारीकी

"अपने राजकीय वस्त्र पहनकर।" एस्तेर एक अनाथ यहूदी लड़की है, निर्वासन की संतान, जिसकी जाति का कोई क़ानूनी हक़ नहीं। वह जो पहनती है, वह उसका अपना नहीं; वह राजा की दी हुई पदवी है, और उसी उधार ली हुई गरिमा में वह सिंहासन के सामने खड़ी होती है। यहाँ अनुग्रह का पूरा व्याकरण छिपा है। हम भी परमेश्वर के सामने अपनी योग्यता के कपड़े पहनकर नहीं जाते, बल्कि उस धार्मिकता में जो हमें पहनाई गई है। हामान अपने वैभव की सूची गिनाता है, अपने कपड़े खुद बुनता है, और नंगा रह जाता है। एस्तेर कुछ नहीं गिनाती, और बच जाती है।

चिंतन

जब मेरे पास बहुत कुछ है और फिर भी एक व्यक्ति का इनकार सब व्यर्थ कर देता है, तो मैं वास्तव में किस पर टिका हुआ हूँ?

परमेश्वर के चुप रहने के दिनों में मैं उनकी उपस्थिति को कहाँ पहचान सकता हूँ, जब कोई चमत्कार नहीं दिखता?

Esther में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Esther

David Firth

Finds God's unseen hand in the one Bible book that never names him.

Esther

Karen Jobes

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Esther: An Introduction and Commentary

Debra Reid

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

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Esther 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

एस्तेर 5 का क्या अर्थ है?
तीसरे दिन एस्तेर अपने राजकीय वस्त्र पहनकर, बिन बुलाए, राजा के भीतरी आँगन में जाकर खड़ी हो जाती है, और मृत्यु के बदले उसे सोने का राजदण्ड मिलता है। राजा दो बार उसे आधा राज्य तक देने का वचन देता है, पर एस्तेर कुछ नहीं माँगती; वह केवल भोज पर निमंत्रण देती है, और दूसरे दिन के लिए फिर टाल देती है। उसी शाम हामान, सम्मान से फूला हुआ, मोर्दकै को फाटक पर बैठा देखकर पचास हाथ ऊँचा फाँसी का खम्भा बनवाता है।
एस्तेर 5 किस विषय में है?
बाइबल में उद्धार बार-बार एक ऐसे व्यक्ति के द्वारा आता है जो अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों के लिए बीच में खड़ा होता है। मूसा पर्वत पर परमेश्वर के सामने खड़ा हुआ, एस्तेर क्षयर्ष के सिंहासन के सामने। दोनों में एक ही आकृति है: बिचवई, जो अपने लोगों के अपराध और खतरे को अपने शरीर पर उठाता है। यहाँ आकृति अपूर्ण है, क्योंकि एस्तेर को अनुमति मिलनी है, उसे डर लगता है, उसे देर करनी पड़ती है। मसीह में यह आकृति पूरी होती है: वह बिन बुलाए नहीं, बल्कि भेजा हुआ आता है, और उसके लिए कोई राजदण्ड नहीं बढ़ाया जाता। वह मरता है, और तीसरे दिन उठता है, और तब हमारे लिए सिंहासन के सामने आने का मार्ग सचमुच खुल जाता है।
एस्तेर 5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इब्रानियों का वह वचन कि हम "अनुग्रह के सिंहासन के निकट" साहस के साथ आ सकते हैं, इस अध्याय को पढ़ने के बाद नया वज़न पा लेता है। एस्तेर तीन दिन उपवास करके, मृत्यु का जोखिम लेकर, काँपते हुए आँगन में खड़ी होती है; और वह राजा मात्र एक नशे में डूबा सम्राट है। हमारे लिए द्वार खुला है, और सिंहासन पर बैठा राजा हमें बचाने के लिए मर चुका है। दूसरी ओर, भजन 37 की पंक्ति कि दुष्ट अपना धनुष अपने ही ऊपर चलाता है, हामान के खम्भे पर पूरी होने वाली है। पचास हाथ ऊँचा वह खम्भा उसके अपने नाश का माप बन जाएगा, और यह संयोग नहीं, परमेश्वर के न्याय का ढंग है।
एस्तेर 5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"अपने राजकीय वस्त्र पहनकर।" एस्तेर एक अनाथ यहूदी लड़की है, निर्वासन की संतान, जिसकी जाति का कोई क़ानूनी हक़ नहीं। वह जो पहनती है, वह उसका अपना नहीं; वह राजा की दी हुई पदवी है, और उसी उधार ली हुई गरिमा में वह सिंहासन के सामने खड़ी होती है। यहाँ अनुग्रह का पूरा व्याकरण छिपा है। हम भी परमेश्वर के सामने अपनी योग्यता के कपड़े पहनकर नहीं जाते, बल्कि उस धार्मिकता में जो हमें पहनाई गई है। हामान अपने वैभव की सूची गिनाता है, अपने कपड़े खुद बुनता है, और नंगा रह जाता है। एस्तेर कुछ नहीं गिनाती, और बच जाती है।
एस्तेर 5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
परमेश्वर के चुप रहने के दिनों में मैं उनकी उपस्थिति को कहाँ पहचान सकता हूँ, जब कोई चमत्कार नहीं दिखता?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Esther 5 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 11

पिता, मेरे भीतर भी वह आवाज़ है जो अपनी कमाई, अपने नाम और अपने सम्मान की गिनती करके खुद को बड़ा दिखाना चाहती है। मुझे इस खोखली गिनती से बचा। मेरी पहचान इसमें हो कि तू मुझे जानता और प्रेम करता है, न कि इसमें कि लोग मुझे कितना सराहते हैं। मेरे मन को नम्र कर।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 4

पिता, एस्तेर की तरह मुझे भी सही समय की समझ दे। जब मन घबराता है, तब भी शांत रहकर तेरी अगुवाई पर भरोसा करना सिखा। जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि धीरज और साहस दे, ताकि जो कदम मैं उठाऊँ वह तेरी मर्ज़ी के अनुसार हो।

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