बाइबल व्याख्या

निर्गमन 21:14

बाइबल

पाठ

वेदी के सींग पर उसकी उँगलियाँ कसी हुई हैं। साँस फूली है, कुरता फटा है, और नाखूनों के नीचे किसी और का लहू सूख रहा है। वह जानता है यह जगह पवित्र है, और उसे उम्मीद है कि पवित्रता उसे ढाँप लेगी। पीछे से भीड़ आती है, मारे गए का भाई सबसे आगे। और तब परमेश्वर का वचन बीच में खड़ा होता है, मगर उस भागे हुए के पक्ष में नहीं: "परन्तु यदि कोई ढिठाई से किसी पर चढ़ाई करके उसे छल से घात करे, तो उसको मार डालने के लिये मेरी वेदी के पास से भी अलग ले जाना।" ठीक पिछले पद में परमेश्वर ने अनजाने में हुई हत्या के लिए शरण का स्थान ठहराने का वादा किया था। यहाँ वे उसी शरण का दरवाज़ा उस आदमी के मुँह पर बंद कर देते हैं जिसने घात लगाकर, छल से, ठंडे दिमाग़ से मारा है।

मूल

यह पद परमेश्वर की पवित्रता को धार्मिक स्थान से खींचकर उनके चरित्र में लौटा देता है। वेदी जादू नहीं है। वह कोई ऐसा घेरा नहीं जिसमें घुसकर आदमी परमेश्वर के न्याय को चकमा दे दे। "मेरी वेदी" कहकर वे उस पर अपना दावा जताते हैं, और उसी दावे के आधार पर उसे शरणस्थल होने से इनकार करते हैं जब शरण माँगने वाला अपने अपराध को छिपाने आया हो, पश्चाताप के साथ नहीं। ध्यान दें कि भेद कर्म में नहीं, नीयत में है: दोनों मामलों में एक आदमी मरा है, पर एक हाथ फिसला था और दूसरे ने घात लगाई थी। परमेश्वर हृदय पढ़ते हैं और उसी के अनुसार न्याय करते हैं। और उस मरे हुए का खून, जिसकी अब कोई आवाज़ नहीं बची, परमेश्वर की अदालत में सबसे तेज़ बोलता है। यही करुणा है, दूसरी दिशा से देखी गई।

सूत्र

यह पद अकेला नहीं खड़ा है। जो शरणस्थल परमेश्वर पद 13 में वादा करते हैं, वह आगे शरण-नगरों के रूप में खुलता है: छह शहर, सड़कें साफ़, दरवाज़े खुले, ताकि जिसका हाथ फिसला हो वह दौड़कर बच सके। परमेश्वर बचाने के लिए ढाँचा बनाते हैं, मगर झूठ को ढाँपने के लिए नहीं। और यहीं से एक लंबी रेखा क्रूस तक जाती है। क्योंकि मसीह में जो शरण मिलती है, वह पद 14 वाले आदमी के लिए भी खुलती है, उस आदमी के लिए जिसने जान-बूझकर, ठंडे दिमाग़ से पाप किया। पर वह शरण सस्ती नहीं। वेदी अब भी किसी को यूँ ही नहीं ढाँपती; वह ढाँपती है क्योंकि उस पर एक और बलिदान चढ़ चुका है। अंतर यह है कि दंड टला नहीं, किसी और के कंधे पर गया।

दर्पण

हमारे पास भी वेदी के सींग हैं, बस उनके नाम बदल गए हैं। रविवार की उपस्थिति। छोटे समूह की अगुवाई। दान की पर्ची। "मैं तो प्रार्थना करता हूँ" वाला वाक्य जो बातचीत को वहीं रोक देता है जहाँ जवाबदेही शुरू होनी थी। यह पद उन उँगलियों को सींग से अलग करता है और पूछता है: तूने जो किया, वह हाथ फिसलना था या योजना? दफ़्तर में वह मेल जो आपने तीन बार पढ़कर सबसे ज़्यादा चोट पहुँचाने वाले शब्द चुनकर भेजा। घर में वह चुप्पी जो सज़ा देने के लिए हथियार बनी। भाई-बहनों के बीच वह हिसाब जो आपने बरसों पहले तय कर लिया था और अब सिर्फ़ मौका देख रहे हैं। परमेश्वर आपकी धार्मिकता की दीवार के पीछे नहीं रुकते। वे नीयत तक चलते हैं, और वहीं बात करते हैं।

अंतर्पाठ

राजा सुलैमान के दिनों में यह पद ज़िंदा होकर सामने आ गया। योआब, जिसने अबनेर और अमासा को गले मिलने के बहाने मारा था, ठीक "छल से", भागकर परमेश्वर के तम्बू में गया और वेदी के सींग पकड़ लिए। और उसे वहीं मार डाला गया। पवित्र स्थान ने उसे नहीं ढाँपा, क्योंकि वह पश्चाताप करने नहीं, बचने की तिकड़म करने आया था। इसके ठीक उलट नए नियम की वह पुकार है जिसमें विश्वासी परमेश्वर के सिंहासन के पास ढिठाई से नहीं, हिम्मत से जाते हैं, खाली हाथ, अपना अपराध कबूल करते हुए। दोनों आदमी वेदी के पास हैं। फ़र्क यह है कि एक अपना पाप छिपाने आया, दूसरा अपना पाप लेकर आया।

ब्यौरा

पूरे पद का भार एक छोटे शब्द पर टिका है: "भी"। "मेरी वेदी के पास से भी अलग ले जाना।" उस युग में यह वाक्य लगभग निंदा जैसा सुनाई देता होगा। पवित्र जगह से किसी को खींचकर निकालना, वह भी परमेश्वर के आदेश पर? आस-पास की जातियों में मंदिर की चौखट पकड़ लेना कानूनी ढाल थी। यह "भी" उस ढाल को तोड़ता है और साथ ही परमेश्वर की पवित्रता को ऊँचा उठाता है। क्योंकि जो वेदी हत्यारे को पनाह देती, वह पवित्र नहीं, बिकाऊ होती। ध्यान दें, यह वाक्य किसी उत्तेजित भीड़ के मुँह से नहीं निकलता; यह परमेश्वर स्वयं कह रहे हैं, अपनी ही वेदी के बारे में। वे अपने मंदिर को अपराध का गोदाम बनने से बचा रहे हैं।

संदर्भ

सीनै पर्वत की तराई, दस आज्ञाओं के तुरंत बाद। ये पद उसी नियम-संग्रह का हिस्सा हैं जिसे परमेश्वर एक ऐसी भीड़ को देते हैं जो कुछ महीने पहले तक ग़ुलाम थी: न अदालतें, न पुलिस, न जेल। न्याय फाटक पर बैठे पुरनियों के हाथ में था, और खून का बदला मरे हुए के सबसे नज़दीकी रिश्तेदार के हाथ में। ऐसे समाज में एक हत्या पूरे कुल के बीच पीढ़ियों तक चलने वाली खूनी लड़ाई बन सकती थी। परमेश्वर इस अराजकता में दो कीलें ठोंकते हैं: दुर्घटना के लिए शरण, और योजना के लिए कोई शरण नहीं। यह क्रूरता नहीं, सभ्यता की शुरुआत है, जहाँ मनुष्य का जीवन इतना भारी है कि उसे लेने वाला किसी धार्मिक तिकड़म से नहीं बच सकता।

चिंतन

आप किस "वेदी के सींग" को पकड़कर यह उम्मीद करते हैं कि परमेश्वर आपकी नीयत के बारे में सवाल नहीं करेंगे?

पिछले महीने आपने जो चोट पहुँचाई, वह हाथ फिसलना थी या योजना? और अगर योजना थी, तो आप उसे लेकर परमेश्वर के सामने कब जाएँगे?

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The Message of Exodus

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Exodus For You

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Exodus: An Introduction and Commentary

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Exodus 21:14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

निर्गमन 21:14 का क्या अर्थ है?
वेदी के सींग पर उसकी उँगलियाँ कसी हुई हैं। साँस फूली है, कुरता फटा है, और नाखूनों के नीचे किसी और का लहू सूख रहा है। वह जानता है यह जगह पवित्र है, और उसे उम्मीद है कि पवित्रता उसे ढाँप लेगी। पीछे से भीड़ आती है, मारे गए का भाई सबसे आगे। और तब परमेश्वर का वचन बीच में खड़ा होता है, मगर उस भागे हुए के पक्ष में नहीं: "परन्तु यदि कोई ढिठाई से किसी पर चढ़ाई करके उसे छल से घात करे, तो उसको मार डालने के लिये मेरी वेदी के पास से भी अलग ले जाना।" ठीक पिछले पद में परमेश्वर ने अनजाने में हुई हत्या के लिए शरण का स्थान ठहराने का वादा किया था। यहाँ वे उसी शरण का दरवाज़ा उस आदमी के मुँह पर बंद कर देते हैं जिसने घात लगाकर, छल से, ठंडे दिमाग़ से मारा है।
निर्गमन 21:14 किस विषय में है?
यह पद अकेला नहीं खड़ा है। जो शरणस्थल परमेश्वर पद 13 में वादा करते हैं, वह आगे शरण-नगरों के रूप में खुलता है: छह शहर, सड़कें साफ़, दरवाज़े खुले, ताकि जिसका हाथ फिसला हो वह दौड़कर बच सके। परमेश्वर बचाने के लिए ढाँचा बनाते हैं, मगर झूठ को ढाँपने के लिए नहीं। और यहीं से एक लंबी रेखा क्रूस तक जाती है। क्योंकि मसीह में जो शरण मिलती है, वह पद 14 वाले आदमी के लिए भी खुलती है, उस आदमी के लिए जिसने जान-बूझकर, ठंडे दिमाग़ से पाप किया। पर वह शरण सस्ती नहीं। वेदी अब भी किसी को यूँ ही नहीं ढाँपती; वह ढाँपती है क्योंकि उस पर एक और बलिदान चढ़ चुका है। अंतर यह है कि दंड टला नहीं, किसी और के कंधे पर गया।
निर्गमन 21:14 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
राजा सुलैमान के दिनों में यह पद ज़िंदा होकर सामने आ गया। योआब, जिसने अबनेर और अमासा को गले मिलने के बहाने मारा था, ठीक "छल से", भागकर परमेश्वर के तम्बू में गया और वेदी के सींग पकड़ लिए। और उसे वहीं मार डाला गया। पवित्र स्थान ने उसे नहीं ढाँपा, क्योंकि वह पश्चाताप करने नहीं, बचने की तिकड़म करने आया था। इसके ठीक उलट नए नियम की वह पुकार है जिसमें विश्वासी परमेश्वर के सिंहासन के पास ढिठाई से नहीं, हिम्मत से जाते हैं, खाली हाथ, अपना अपराध कबूल करते हुए। दोनों आदमी वेदी के पास हैं। फ़र्क यह है कि एक अपना पाप छिपाने आया, दूसरा अपना पाप लेकर आया।
निर्गमन 21:14 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
सीनै पर्वत की तराई, दस आज्ञाओं के तुरंत बाद। ये पद उसी नियम-संग्रह का हिस्सा हैं जिसे परमेश्वर एक ऐसी भीड़ को देते हैं जो कुछ महीने पहले तक ग़ुलाम थी: न अदालतें, न पुलिस, न जेल। न्याय फाटक पर बैठे पुरनियों के हाथ में था, और खून का बदला मरे हुए के सबसे नज़दीकी रिश्तेदार के हाथ में। ऐसे समाज में एक हत्या पूरे कुल के बीच पीढ़ियों तक चलने वाली खूनी लड़ाई बन सकती थी। परमेश्वर इस अराजकता में दो कीलें ठोंकते हैं: दुर्घटना के लिए शरण, और योजना के लिए कोई शरण नहीं। यह क्रूरता नहीं, सभ्यता की शुरुआत है, जहाँ मनुष्य का जीवन इतना भारी है कि उसे लेने वाला किसी धार्मिक तिकड़म से नहीं बच सकता।
निर्गमन 21:14 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पिछले महीने आपने जो चोट पहुँचाई, वह हाथ फिसलना थी या योजना? और अगर योजना थी, तो आप उसे लेकर परमेश्वर के सामने कब जाएँगे?
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Exodus 21 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 36

पिता, तू जानता है कि मेरे भीतर कुछ आदतें हैं जो दूसरों को चोट पहुँचाती हैं, और मैं उन्हें पहले से पहचानता हूँ। मुझे लापरवाह होने से बचा। जहाँ मेरी वजह से किसी का नुकसान हुआ है, वहाँ भरपाई करने की हिम्मत दे, और अपने दिल पर पहरा बैठाना सिखा।

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