बाइबल व्याख्या

यहेजकेल 30

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

यह पाठ

एक भुजा टूटी पड़ी है और किसी ने उस पर पट्टी तक नहीं बाँधी। फ़िरौन की भुजा, मिस्र की सैन्य शक्ति का प्रतीक, "न तो वह जोड़ी गई, न उस पर लेप लगाकर पट्टी चढ़ाई गई" (पद 21)। और परमेश्वर कहते हैं कि वे दूसरी भुजा भी तोड़ देंगे। अध्याय का पहला भाग एक विलाप-पुकार है: "हाय, हाय करो, हाय उस दिन पर!" मिस्र और उसके सहयोगी, कूश, पूत, लूद, कूब, तलवार से गिरेंगे; नोप, सोअन, नो, सीन, ओन, पीवेसेत, तहपन्हेस, एक-एक नगर नाम लेकर पुकारा जाता है और आग में सौंपा जाता है। नदियाँ सूख जाएँगी, मूरतें मिटेंगी, लोग जाति-जाति में बिखर जाएँगे। दूसरा भाग एक तिथि के साथ आता है, ग्यारहवें वर्ष के पहले महीने का सातवाँ दिन, और उस टूटी भुजा की बात करता है जिसे परमेश्वर स्वयं तोड़ते हैं।

मर्म

इस अध्याय में एक वाक्य तीन बार लौटता है: "वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।" यही इसका केंद्र है, और यही इसकी सबसे असहज बात। परमेश्वर यहाँ अपने को मनवाने के लिए राष्ट्रों के इतिहास को हिला देते हैं। हम चाहते हैं कि परमेश्वर खुद को सुंदरता में, सांत्वना में, भोर में प्रकट करें, और वे करते भी हैं। पर यहाँ वे अपने को वहाँ प्रकट करते हैं जहाँ एक साम्राज्य का गर्व टूटता है। "अपनी जिस सामर्थ्य पर मिस्री फूलते हैं, वह टूटेगी" (पद 6)। ध्यान दीजिए: परमेश्वर मिस्र की दुष्टता की सूची नहीं गिनाते। वे उसके घमंड को निशाना बनाते हैं, उस भरोसे को जो अपनी भुजा पर टिका है। क्या यही कारण है कि यह पाठ हमें चुभता है?

मुख्य सूत्र

"यहोवा का दिन निकट है; वह बादलों का दिन" (पद 3)। यह वाक्य मिस्र से कहीं बड़ा है। भविष्यद्वक्ताओं में यह दिन बार-बार लौटता है, और हर बार वह किसी एक राष्ट्र पर उतरकर भी उससे आगे इशारा करता रहता है, एक ऐसे दिन की ओर जब सब कुछ अपनी असली जगह पर रखा जाएगा। बादल अंधकार के भी प्रतीक हैं और परमेश्वर की उपस्थिति के भी; सीनै पर्वत पर भी बादल था। और फिर गुलगुता पर दोपहर को अंधेरा छा गया, जैसे तहपन्हेस में "दिन को अंधेरा होगा" (पद 18)। वहाँ न्याय किसी साम्राज्य पर नहीं, स्वयं परमेश्वर के पुत्र पर उतरा। वह दिन अब भी आना है, पर मसीह में हम जानते हैं कि न्यायी कौन है और उसने किसकी जगह खड़े होना चुना।

दर्पण

आपकी भुजा क्या है? वह चीज़ जिस पर आप चुपचाप फूलते हैं: बचत खाता जो आपको रात में सोने देता है, वह हुनर जिसके कारण दफ़्तर में आपको हटाया नहीं जा सकता, वह शरीर जो अब तक साथ देता आया है, वे संपर्क जिन्हें आप ज़रूरत पड़ने पर फ़ोन कर सकते हैं। इनमें से कुछ भी बुरा नहीं। पर यहेजकेल कहता है कि परमेश्वर कभी-कभी भुजा तोड़ते हैं, और ऐसा भी होता है कि दूसरी भुजा भी टूटती है, और कोई पट्टी नहीं बाँधता। क्या आप ऐसे परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं? यह प्रश्न टालने लायक नहीं है। आज, दस मिनट में: एक काग़ज़ पर उस एक चीज़ का नाम लिखिए जिसके बिना आपका जीवन असुरक्षित लगेगा, और उसी काग़ज़ पर नीचे लिखिए, "मैं यहोवा हूँ", फिर उसे ज़ोर से पढ़िए।

मुख्य पात्र

इस अध्याय का मुख्य पात्र फ़िरौन नहीं, नबूकदनेस्सर भी नहीं। बार-बार कर्ता "मैं" है: मैं आग लगाऊँगा, मैं नदियों को सूखा डालूँगा, मैं भुजाओं को तोड़ूँगा, मैं बाबेल के राजा के हाथ में अपनी तलवार दूँगा। साम्राज्यों का सबसे बड़ा सम्राट भी यहाँ औज़ार है, हाथ नहीं। और यह परमेश्वर ठंडे नहीं हैं; पद 15 में "जलजलाहट" शब्द आता है, और पद 24 में फ़िरौन का कराहना ऐसे वर्णित है जैसे किसी मरते हुए घायल का। परमेश्वर उस कराह को अनसुना नहीं करते, वे उसे दर्ज करते हैं। यहाँ एक रहस्य है जिसे मैं सुलझा नहीं सकता: वही परमेश्वर जो विलाप करवाते हैं, विलाप के शब्द भी देते हैं। "हाय, हाय करो" यह आज्ञा उन्हीं के मुँह से निकलती है।

एक बारीकी

पद 21 का "लेप लगाकर पट्टी" रुककर देखने लायक है। यह चिकित्सा की भाषा है, हड्डी जोड़ने की, घाव बाँधने की। परमेश्वर यह नहीं कहते कि फ़िरौन मर गया; वे कहते हैं कि उसका इलाज नहीं हुआ। 605 ईसा पूर्व में कर्कमीश में और फिर यरूशलेम के घेरे के समय मिस्र की सेना पीछे हटी थी, और वह कभी पूरी तरह उबर न सकी। पर इस छवि में कुछ और भी है। परमेश्वर ही वे हैं जो घायल को बाँधते हैं; यहेजकेल 34 में वे स्वयं चरवाहे बनकर टूटे हुए को बाँधने आते हैं। यहाँ वह हाथ नहीं आता। क्यों नहीं? पाठ उत्तर नहीं देता। शायद यही इस पाठ की सबसे गहरी चुप्पी है, और हमें उसमें कुछ देर ठहरना चाहिए।

पृष्ठभूमि

यहेजकेल बाबेल में निर्वासितों के बीच बैठा है, कबार नदी के किनारे। तिथि संभवतः 587 ईसा पूर्व के आसपास की है, यरूशलेम के पतन के ठीक पहले या उसके आसपास। यहूदा की राजनीति वर्षों से एक दाँव पर टिकी थी: मिस्र के फ़िरौन पर भरोसा करो, बाबेल के विरुद्ध खड़े हो जाओ। फ़िरौन होप्रा ने सचमुच सेना भेजी, और फिर लौट गया। जिन नगरों के नाम पद 13 से 18 में गिने गए हैं, वे मिस्र के धार्मिक और सैनिक केंद्र थे: नोप यानी मेम्फिस, नो यानी थीब्स, ओन यानी हेलियोपोलिस, सूर्य-देवता का नगर। उन निर्वासितों के लिए यह सूची एक नक्शा थी जिस पर उनकी सारी राजनीतिक आशाएँ लिखी थीं, और परमेश्वर उस नक्शे को एक-एक करके पढ़कर आग में डाल देते हैं।

मनन के प्रश्न

"वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ" यह वाक्य इस अध्याय में तीन बार आता है। मेरे अपने जीवन में परमेश्वर ने अपने को कब और किस तरह मनवाया, और क्या वह अनुभव सुखद था?

जिस भुजा पर मैं टिका हूँ, अगर वह टूटे और कोई पट्टी न बाँधे, तो मेरे पास क्या बचेगा?

Ezekiel में और गहराई से जानें

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The Message of Ezekiel

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Ezekiel

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Ezekiel: An Introduction and Commentary

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Ezekiel 30 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यहेजकेल 30 का क्या अर्थ है?
एक भुजा टूटी पड़ी है और किसी ने उस पर पट्टी तक नहीं बाँधी। फ़िरौन की भुजा, मिस्र की सैन्य शक्ति का प्रतीक, "न तो वह जोड़ी गई, न उस पर लेप लगाकर पट्टी चढ़ाई गई" (पद 21)। और परमेश्वर कहते हैं कि वे दूसरी भुजा भी तोड़ देंगे। अध्याय का पहला भाग एक विलाप-पुकार है: "हाय, हाय करो, हाय उस दिन पर!
यहेजकेल 30 किस विषय में है?
"यहोवा का दिन निकट है; वह बादलों का दिन" (पद 3)। यह वाक्य मिस्र से कहीं बड़ा है। भविष्यद्वक्ताओं में यह दिन बार-बार लौटता है, और हर बार वह किसी एक राष्ट्र पर उतरकर भी उससे आगे इशारा करता रहता है, एक ऐसे दिन की ओर जब सब कुछ अपनी असली जगह पर रखा जाएगा। बादल अंधकार के भी प्रतीक हैं और परमेश्वर की उपस्थिति के भी; सीनै पर्वत पर भी बादल था। और फिर गुलगुता पर दोपहर को अंधेरा छा गया, जैसे तहपन्हेस में "दिन को अंधेरा होगा" (पद 18)। वहाँ न्याय किसी साम्राज्य पर नहीं, स्वयं परमेश्वर के पुत्र पर उतरा। वह दिन अब भी आना है, पर मसीह में हम जानते हैं कि न्यायी कौन है और उसने किसकी जगह खड़े होना चुना।
यहेजकेल 30 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इस अध्याय का मुख्य पात्र फ़िरौन नहीं, नबूकदनेस्सर भी नहीं। बार-बार कर्ता "मैं" है: मैं आग लगाऊँगा, मैं नदियों को सूखा डालूँगा, मैं भुजाओं को तोड़ूँगा, मैं बाबेल के राजा के हाथ में अपनी तलवार दूँगा। साम्राज्यों का सबसे बड़ा सम्राट भी यहाँ औज़ार है, हाथ नहीं। और यह परमेश्वर ठंडे नहीं हैं; पद 15 में "जलजलाहट" शब्द आता है, और पद 24 में फ़िरौन का कराहना ऐसे वर्णित है जैसे किसी मरते हुए घायल का। परमेश्वर उस कराह को अनसुना नहीं करते, वे उसे दर्ज करते हैं। यहाँ एक रहस्य है जिसे मैं सुलझा नहीं सकता: वही परमेश्वर जो विलाप करवाते हैं, विलाप के शब्द भी देते हैं। "हाय, हाय करो" यह आज्ञा उन्हीं के मुँह से निकलती है।
यहेजकेल 30 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यहेजकेल बाबेल में निर्वासितों के बीच बैठा है, कबार नदी के किनारे। तिथि संभवतः 587 ईसा पूर्व के आसपास की है, यरूशलेम के पतन के ठीक पहले या उसके आसपास। यहूदा की राजनीति वर्षों से एक दाँव पर टिकी थी: मिस्र के फ़िरौन पर भरोसा करो, बाबेल के विरुद्ध खड़े हो जाओ। फ़िरौन होप्रा ने सचमुच सेना भेजी, और फिर लौट गया। जिन नगरों के नाम पद 13 से 18 में गिने गए हैं, वे मिस्र के धार्मिक और सैनिक केंद्र थे: नोप यानी मेम्फिस, नो यानी थीब्स, ओन यानी हेलियोपोलिस, सूर्य-देवता का नगर। उन निर्वासितों के लिए यह सूची एक नक्शा थी जिस पर उनकी सारी राजनीतिक आशाएँ लिखी थीं, और परमेश्वर उस नक्शे को एक-एक करके पढ़कर आग में डाल देते हैं।
यहेजकेल 30 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जिस भुजा पर मैं टिका हूँ, अगर वह टूटे और कोई पट्टी न बाँधे, तो मेरे पास क्या बचेगा?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ezekiel 30 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 24

पिता, धन्यवाद कि भुजाओं को दृढ़ करना और तोड़ना आपके ही हाथ में है। जैसे आपने कहा, "मैं बाबेल के राजा की भुजाएँ दृढ़ करूँगा," वैसे ही मेरी कमज़ोर भुजाओं को भी आप थामते हैं। धन्यवाद कि मेरा बल अपने सामर्थ्य में नहीं, आपकी इच्छा में सुरक्षित है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

मैं बाबेल के राजा की भुजाओं को सम्भालूँगा, परन्तु फ़िरौन की भुजाएँ गिर जाएँगी।" एक ही परमेश्वर, एक को थामता है, दूसरे को छोड़ देता है। फ़िरौन की भुजा कमज़ोर नहीं थी, बस बिना सहारे की थी। तेरी ताकत किस पर टिकी है? जिस दिन परमेश्वर का हाथ हट जाए, सबसे मज़बूत बाँह भी लटक जाती है। आज अपनी भुजा उसी के हाथ में सौंप दे।

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