यशायाह 29
पाठ
यरूशलेम की वेदी से धुआँ उठ रहा है, पर्व पर पर्व आ रहे हैं, और उसी धुएँ के बीच एक आवाज़ चीखती है: "हाय, अरीएल, अरीएल।" परमेश्वर कहते हैं कि वे स्वयं इस नगर के विरुद्ध छावनी डालेंगे, और नगर धूल में से प्रेत की तरह गुनगुनाएगा; फिर अचानक घेरनेवाली जातियाँ रात के स्वप्न की तरह मिट जाएँगी। बीच का हिस्सा बताता है क्यों: लोग मुँह से आदर करते हैं पर मन दूर रखते हैं, उनके दर्शी अंधे हैं, और सारा प्रकाशन उनके लिए मुहरबन्द पुस्तक बन चुका है। अंत में स्वर पलटता है: लबानोन फलदाई बारी बनेगा, बहरे सुनेंगे, दरिद्र मगन होंगे, और याकूब का मुख फिर नीचा न होगा।
मर्म
इस अध्याय का धड़कता हुआ केंद्र पद 13 है: "ये लोग जो मुँह से मेरा आदर करते हुए समीप आते परन्तु अपना मन मुझसे दूर रखते हैं।" यह मूर्तिपूजा के विरुद्ध भविष्यवाणी नहीं है; यह ठीक-ठाक चलती हुई आराधना के विरुद्ध है। पर्व समय पर हो रहे हैं, बलिदान चढ़ रहे हैं, धर्म का पहिया घूम रहा है। और परमेश्वर कहते हैं: मुझे यह सुनाई नहीं देता, क्योंकि इसमें मन नहीं है। इससे भी कठोर बात पद 10 में है: अंधापन केवल मनुष्य का चुनाव नहीं, वह न्याय भी है। जो आँखें बार-बार बंद रखी जाती हैं, उन्हें परमेश्वर अंततः बंद ही रहने देते हैं। धर्म कभी मरता नहीं; वह केवल खोखला हो जाता है, और खोखलापन लंबे समय तक पवित्र दिखता रह सकता है।
सूत्र
यीशु मसीह ने यही पद 13 उठाकर फरीसियों के मुँह पर रख दिया (मत्ती 15:8-9), और इससे साफ़ होता है कि यशायाह का निशाना कोई प्राचीन अपवाद नहीं, बल्कि धार्मिक मनुष्य की स्थायी बीमारी है। पौलुस ने पद 14 उठाया (1 कुरिन्थियों 1:19): "इनके बुद्धिमानों की बुद्धि नष्ट होगी।" वह "अद्भुत काम" जिसकी धमकी यहाँ दी गई है, अंततः क्रूस के रूप में आया, एक ऐसी बचाने की रीति जो चतुर लोगों की समझ में नहीं समाती। और पद 18 का वचन, कि बहरे सुनेंगे और अंधे देखेंगे, गलील की धूल में शारीरिक रूप से पूरा हुआ, पर उसका असली वज़न यही है: मुहरबन्द पुस्तक खुल गई। जो स्वयं वचन हैं, वे ही मुहर तोड़ते हैं।
दर्पण
आप रविवार को उपस्थित रहते हैं, गीत के शब्द बिना सोचे गा लेते हैं, सही समय पर आमीन कहते हैं, और घर लौटकर वही आदमी रहते हैं जो गए थे। यह निंदा नहीं, निदान है। पद 15 उस परत को खोलता है जो नीचे छिपी रहती है: "हमको कौन देखता है?" यानी वह हिसाब जिसे आप किसी को नहीं दिखाते, वह ब्राउज़र इतिहास, वह बात जो आपने अपने जीवनसाथी से छिपाई, वह कार्यालय का समझौता जिसे आपने व्यावहारिकता कहकर ढक दिया। हम सचमुच मानते हैं कि जीवन के कुछ कमरे परमेश्वर की दृष्टि से बाहर हैं। आज, दिन ढलने से पहले, वह एक बात ज़ोर से बोलकर परमेश्वर के सामने नाम लेकर कहिए जिसे आप किसी से छिपाए हुए हैं। केवल एक वाक्य, मुँह से, मन से।
एक बारीकी
"अरीएल" नाम पर रुकिए। इब्रानी में यह शब्द वेदी के उस ऊपरी हिस्से के लिए इस्तेमाल होता है जहाँ आग जलती है, अग्निकुंड; और इसमें "परमेश्वर का सिंह" की ध्वनि भी सुनाई देती है। यशायाह यह नाम दो बार बोलते हैं और फिर पद 2 में उसे घुमा देते हैं: "वह मेरी दृष्टि में सचमुच अरीएल सा ठहरेगा।" नगर जो वेदी का चूल्हा था, वह स्वयं जलती हुई वेदी बन जाएगा। जहाँ कभी पशु चढ़ते थे, वहाँ अब नगर चढ़ेगा। यह शब्दों का खेल नहीं, एक भयानक तर्क है: जहाँ आराधना खोखली हो जाती है, वहाँ आराधक स्वयं बलि बन जाता है। पवित्र स्थान सबसे सुरक्षित जगह नहीं; वह सबसे गरम जगह है।
पहले सुननेवाले
कल्पना कीजिए: सन्हेरीब की सेना उत्तर से बढ़ रही है, नगरों के नाम एक-एक कर गिर रहे हैं, और यरूशलेम में राजनयिक मिस्र से गुप्त संधि की बात कर रहे हैं, "अंधेरे में काम करके।" मन्दिर में सब कुछ सामान्य है। इन लोगों ने यशायाह से जो सुना वह यह था: तुम्हारा असली घेरनेवाला अश्शूर नहीं, परमेश्वर हैं। यह उनके पूरे धर्मशास्त्र को उलट देता था, क्योंकि यहोवा तो सिय्योन के रक्षक थे। और फिर, उसी साँस में, पद 5 से 8: घेरनेवाली भीड़ एक भूखे आदमी के स्वप्न जैसी मिट जाएगी, जो जागकर पाता है कि पेट खाली ही है। न्याय और बचाव, दोनों एक ही हाथ से। उनके लिए यह राहत से ज़्यादा भय की बात थी।
कठिन प्रश्न
पद 10 को आसान नहीं किया जा सकता: "यहोवा ने तुम को भारी नींद में डाल दिया है और उसने तुम्हारी नबीरूपी आँखों को बन्द कर दिया है।" यदि अंधापन परमेश्वर का दिया हुआ है, तो उसके लिए दोष किसका? पाठ यह सुलझाता नहीं। वह दोनों सच साथ रखता है: लोग अपना मन दूर रखते हैं, और परमेश्वर उनकी आँखें बंद करते हैं। शायद यही सबसे भयानक न्याय है, जब परमेश्वर किसी को वही देते हैं जो उसने बार-बार माँगा है, यानी अपने आप में बंद रहना। और फिर भी अध्याय यहाँ खत्म नहीं होता। पद 24 कहता है कि भटका हुआ मन बुद्धि पाएगा। मुहर टूटती है, पर मनुष्य के हाथ से नहीं।
चिंतन
पिछले महीने की आपकी आराधना में कौन-सा हिस्सा केवल मुँह का था, और आप उसे जानते हुए भी क्यों दोहराते रहे?
"हमको कौन देखता है?" यह प्रश्न आपके जीवन के किस कोने में चुपचाप काम कर रहा है?
Isaiah में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Isaiah: An Introduction and Commentary
A lifetime of Isaiah study distilled into one accessible volume.
Keeps the big storyline of judgment and comfort wonderfully clear.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Isaiah 29 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यशायाह 29 का क्या अर्थ है?
यशायाह 29 किस विषय में है?
यशायाह 29 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यशायाह 29 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यशायाह 29 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Isaiah 29 में आपको क्या स्पर्श करता है?
इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
