एज्रा 8
पाठ
एज्रा उन कुलों के मुखियों की सूची देता है जो अर्तक्षत्र के राज्यकाल में उसके साथ बाबेल से यरूशलेम लौटे। अहवा नदी के किनारे तीन दिन डेरा डालने पर पता चलता है कि दल में एक भी लेवीय नहीं है, इसलिए वह कासिप्या में इद्दो के पास दूत भेजता है और मन्दिर की सेवा करनेवाले लोग आ जाते हैं। फिर वह उपवास का प्रचार करता है, राजा से सिपाहियों का दल माँगने में लज्जा अनुभव करता है, बारह याजकों के हाथ में चाँदी-सोना तौलकर सौंपता है, सुरक्षित यरूशलेम पहुँचता है, वहाँ सब कुछ फिर तौलकर गिनवाता है, होमबलि चढ़ाता है और राजा की आज्ञाएँ अधिकारियों को देता है।
मर्म
इस अध्याय का सबसे ईमानदार वाक्य वह है जहाँ एज्रा अपनी शर्म कबूल करता है: "मैं मार्ग के शत्रुओं से बचने के लिये सिपाहियों का दल और सवार राजा से माँगने से लजाता था।" कारण भी वह छिपाता नहीं, क्योंकि उसने राजा के सामने बड़ी बात कह दी थी कि परमेश्वर अपने खोजियों पर कृपादृष्टि रखते हैं। यहाँ विश्वास कोई निजी भावना नहीं, वह एक सार्वजनिक दावा है जिसका हिसाब सड़क पर चुकाना पड़ता है। और परमेश्वर उस दावे को खाली नहीं छोड़ते: तीन बार "कृपादृष्टि" शब्द आता है, लेवियों के मिलने में, प्रार्थना के उत्तर में, और रास्ते की सुरक्षा में। अनुग्रह यहाँ अमूर्त नहीं, वह कर्मचारी, काफ़िला और सुरक्षित सड़क बनकर आता है।
उद्धार की कहानी का सूत्र
ध्यान दें कि यात्रा कब शुरू होती है: "पहले महीने के बारहवें दिन।" फसह का महीना। एक दल मिसर से नहीं, बाबेल से निकलता है, और अपने साथ राजा और उसके मंत्रियों की दी हुई चाँदी-सोना ले जाता है, ठीक वैसे जैसे निर्गमन में इस्राएल मिसरियों की दी हुई सम्पत्ति लेकर निकला था। यह दूसरा निर्गमन है, छोटा और अधिक विनम्र, पर उसी परमेश्वर की उसी कहानी का अगला अध्याय। और बलिदान की गिनती देखिए: "समस्त इस्राएल के निमित्त बारह बछड़े… पापबलि के लिये बारह बकरे।" लौटनेवाले मुट्ठी भर हैं, पर बलि बारहों गोत्रों के लिए है। यह आशा का हिसाब है, वर्तमान का नहीं। वही आशा मसीह में पूरी होती है, जो एक बिखरी हुई प्रजा को नहीं, पूरी सृष्टि को एक शरीर में इकट्ठा करते हैं।
दर्पण
आपके विश्वास ने कहाँ सार्वजनिक रूप से मुँह खोला है? दफ़्तर में कहा कि "परमेश्वर सँभाल लेंगे," परिवार में कहा कि हम ईमानदारी से ही चलेंगे, समूह में कहा कि यह निर्णय प्रार्थना में लिया है। और उसके बाद चुपचाप एक दूसरा इंतज़ाम भी रख लिया, वह सिपाहियों का दल जिसकी चर्चा हम किसी से नहीं करते। एज्रा यह नहीं कह रहा कि सुरक्षा माँगना पाप है; वह कह रहा है कि उसके अपने शब्दों ने उसे बाँध दिया था। दूसरी तरफ़ वह पैसे को लेकर बेहद व्यावहारिक है: दो बार तौलना, गवाहों के सामने, लिखित हिसाब। भरोसा और पारदर्शिता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
आज दस मिनट निकालिए: एक कागज़ पर वह बात लिखिए जिसके बारे में आपने खुलकर कहा है "परमेश्वर सँभालेंगे," और उसके नीचे वह चुपचाप रखा हुआ दूसरा इंतज़ाम भी लिखिए। फिर दोनों वाक्य ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने पढ़ दीजिए।
केंद्रीय पात्र
एज्रा भोला नहीं है। वह शास्त्री है, और इस अध्याय में उसकी भक्ति काग़ज़ी काम की शक्ल लेती है: वंशावलियाँ, नाम, संख्याएँ, "इन सभी के नाम लिखे हुए थे," तौल का लिखित रिकॉर्ड। जब लेवीय नहीं मिलते, वह हाथ नहीं मलता, ग्यारह आदमियों को नामवार चुनकर भेजता है और उन्हें समझाकर भेजता है कि क्या कहना है। यही आदमी तीन दिन नदी के किनारे उपवास करता है, बच्चों और सम्पत्ति के साथ, बिना पहरे के। उसका भीतरी परिदृश्य दो चीज़ों से बना है: दूसरों के बच्चों की ज़िम्मेदारी का बोझ, और यह जानना कि उसने राजा के सामने जो कहा है उसका मूल्य अब चुकाना है।
पहले श्रोता
जिन लोगों ने यह पहली बार पढ़ा, वे एक छोटे, फ़ारसी शासन के अधीन समुदाय में रहते थे, जहाँ सबसे बड़ा प्रश्न यह था: कौन असल में इस्राएल है? इसलिए नामों की सूची उनके लिए बोझिल ब्यौरा नहीं, पहचान का दस्तावेज़ थी। उन्होंने एक और बात सुनी जो हम अक्सर नहीं सुनते: लेवीय पहले तैयार नहीं थे। बाबेल में जीवन सुविधाजनक था, और मन्दिर की सेवा में लौटने का अर्थ था कमाई और स्थिरता छोड़ना। जो आया उसकी सूची साथ ही यह भी बताती है कि कितने नहीं आए। और "महानद के इस पार के अधिकारियों" का उल्लेख उन्हें याद दिलाता कि वे अभी भी किसी और के साम्राज्य में रह रहे हैं।
शास्त्र में गूँज
एज्रा का वाक्य "तुम तो यहोवा के लिये पवित्र हो, और ये पात्र भी पवित्र हैं" यशायाह 52 की उस पुकार को दोहराता है जहाँ यहोवा के पात्र उठानेवालों से कहा गया कि शुद्ध रहो, भागते हुए न निकलो, क्योंकि परमेश्वर आगे-आगे और पीछे-पीछे चलेंगे। एज्रा वही करता है: बिना पहरे, बिना जल्दबाज़ी। पर तनाव भी है। नहेमायाह उसी राजा से सेनापति और सवार लेकर निकलता है और उसे कोई शर्म नहीं। शास्त्र दोनों को दर्ज करता है, बिना एक को नियम बनाए; विश्वास का रूप हर बार वैसा नहीं होता। और नए नियम में पौलुस जब यरूशलेम के लिए चंदा ले जाता है, तो वह भी गवाहों के साथ चलता है ताकि इस उदार दान के विषय में कोई उस पर दोष न लगा सके। तौलना, गिनना, लिखना: यह अविश्वास नहीं, पवित्रता का व्यावहारिक चेहरा है।
चिंतन
आपके जीवन में कौन-सा "सिपाहियों का दल" है जिसे आप विश्वास के अपने सार्वजनिक शब्दों के पीछे चुपचाप तैयार रखते हैं?
परमेश्वर के काम में जो पैसा या ज़िम्मेदारी आपके हाथ से गुज़रती है, क्या वह भी दो बार तौली और गवाहों के सामने रखी जाती है?
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Ezra 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Ezra 8 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
एज्रा ने गिनती की और पाया कि लेवियों की कमी है। उसने आदमी भेजे, इंतजार किया, और जब शेरेब्याह अपने अठारह लोगों के साथ आया तो एज्रा ने अपनी योजना की तारीफ नहीं की। उसने लिखा, "हमारे परमेश्वर की कृपादृष्टि हम पर थी।" जो कमी तुझे आज खल रही है, उसे परमेश्वर के सामने रख। और जब कोई आए, तो याद रखना कि उसे किसने भेजा।
अहवा नदी से यरूशलेम तक का रास्ता लम्बा था, और एज्रा ने राजा से सिपाही माँगने में शर्म महसूस की थी, क्योंकि उसने कहा था कि परमेश्वर का हाथ उसके खोजनेवालों पर रहता है। फिर लिखा है, "हमारे परमेश्वर का हाथ हम पर रहा; और उसने हमको शत्रुओं और मार्ग पर घात लगानेवालों के हाथ से बचाया।" तूने जो कहा है कि परमेश्वर पर भरोसा है, क्या तेरा असली सहारा भी वही है?
हे प्रभु, आज मैं भी अपने भीतर का बोझ लेकर तेरे सामने झुकता हूँ। उपवास और प्रार्थना के साथ तुझसे विनती करता हूँ कि मेरी राह की कठिनाइयों में तू सहायक बन। तुझ पर भरोसा रखने वालों को तू कभी निराश नहीं करता, यही मेरी आशा है।
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