उत्पत्ति 27
पाठ
इसहाक अंधा हो चुका है और अपनी मृत्यु की आहट सुन रहा है, इसलिए वह एसाव को शिकार लाने भेजता है ताकि भोजन के बाद वह उसे "जी भरकर" आशीर्वाद दे सके। रिबका यह सुन लेती है और अपने छोटे बेटे याकूब को बकरियों के बच्चों के माँस, एसाव के वस्त्रों और खालों से ढके हाथों के साथ पिता के सामने खड़ा कर देती है। स्पर्श और गंध बोली को झुठला देते हैं, और आशीर्वाद याकूब पर उतर जाता है। एसाव लौटता है, इसहाक थरथर काँपता है, एसाव "फूट फूटकर" रोता है, पर आशीर्वाद वापस नहीं लिया जा सकता। अध्याय का अंत घृणा, हत्या की योजना और एक माँ की चालाकी से रचे गए पलायन पर होता है।
मूल
यह कहानी हमें असहज करती है, क्योंकि परमेश्वर का वचन झूठ के रास्ते से होकर पूरा होता है। रिबका को गर्भ में ही कहा गया था कि बड़ा छोटे की सेवा करेगा; उसे किसी छल की ज़रूरत नहीं थी, फिर भी उसने छल चुना। और परमेश्वर ने अपना वादा वापस नहीं लिया। यहाँ पाठ हमें दो गलत निष्कर्षों से बचाता है: न तो यह कहता है कि साधन पवित्र थे, और न ही यह कहता है कि मनुष्य की धूर्तता परमेश्वर की योजना को चलाती है। इसके विपरीत, यह दिखाता है कि चुनाव योग्यता पर टिका नहीं है, वरना याकूब कभी न चुना जाता। आशीर्वाद अनुग्रह है, अर्जित अधिकार नहीं। पर अनुग्रह पाप के परिणाम मिटा नहीं देता: याकूब बीस साल निर्वासन में बिताएगा, और अपनी माँ का मुँह फिर कभी नहीं देखेगा।
साझा सूत्र
धोखे का यह दृश्य याकूब का पीछा नहीं छोड़ता। बीस साल बाद लाबान उसे अंधेरे में एक बेटी के बदले दूसरी थमा देगा, और सुबह जब याकूब शिकायत करेगा तो जवाब मिलेगा कि हमारे यहाँ छोटी को बड़ी से पहले नहीं दिया जाता। जिस क्रम को उसने पलटा था, वही क्रम उसके विरुद्ध हथियार बन जाता है। और फिर उसके अपने बेटे एक बकरे को मारकर, उसका लहू एक वस्त्र पर छिड़ककर, बूढ़े पिता की आँखों को धोखा देंगे। बकरी, वस्त्र, अंधा पिता, वही तीन चीज़ें। परमेश्वर इस टेढ़े परिवार को त्यागते नहीं, पर उसे सीधा करने में एक पूरी पीढ़ी लगा देते हैं। इसी वंश से वह आएगा जिसने आशीर्वाद चुराया नहीं, बल्कि आज्ञाकारिता से पाया, और फिर उसे बाँट दिया।
दर्पण
एसाव का प्रश्न इस अध्याय की सबसे मार्मिक पंक्ति है: "क्या तेरे मन में एक ही आशीर्वाद है?" यही डर हमारे भीतर भी काम करता है। जब भाई को ज़मीन का बड़ा हिस्सा मिलता है, जब सहकर्मी को वह पदोन्नति मिलती है जिसकी तैयारी आप कर रहे थे, जब किसी और के बच्चे की तस्वीरें आपकी निःसंतानता पर चुभती हैं, तब मन कहता है: आशीर्वाद सीमित है, और मेरे हिस्से का किसी और ने ले लिया। इसी डर से रिबका ने साज़िश रची और याकूब ने झूठ बोला। कमी का यह भय हमें अपने ही घर में प्रतिद्वंद्वी बना देता है। आज उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसकी सफलता आपको भीतर से खटकती है, और उसके लिए ऊँची आवाज़ में एक वाक्य का आशीर्वाद बोलिए, यह मानते हुए कि परमेश्वर के पास एक ही आशीर्वाद नहीं है।
अंतर्पाठ
इब्रानियों की पत्री इसी अध्याय पर दो बार लौटती है। ग्यारहवें अध्याय में इसहाक के इस काँपते हुए आशीर्वाद को विश्वास का काम कहा गया है, क्योंकि उसने आखिरकार आने वाली बात को स्वीकार किया। और बारहवें अध्याय में एसाव के आँसू चेतावनी बन जाते हैं: उसने रोकर भी मन फिराव का अवसर नहीं पाया। यह कठोर लगता है, पर ध्यान दीजिए कि एसाव ने पहले ही अपना पहलौठे का अधिकार एक कटोरी दाल के बदले बेच दिया था; उसका शोक खोए हुए लाभ का था, बदले हुए हृदय का नहीं। दूसरी ओर, पौलुस रोमियों में इसी जोड़े को अनुग्रह के चुनाव का उदाहरण बनाता है, इसलिए नहीं कि याकूब बेहतर था, बल्कि इसलिए कि परमेश्वर चुनते हैं इससे पहले कि कोई कुछ अच्छा या बुरा करे।
विवरण
तैंतीसवें पद पर रुकिए: इसहाक "अत्यन्त थरथर काँपते हुए" बोलता है। यह केवल बूढ़े आदमी का सदमा नहीं है। इसहाक जानता था कि गर्भ में क्या कहा गया था, फिर भी उसने अपनी पसंद के बेटे को एकांत में बुलाया, शिकार के स्वाद के लिए। उस काँपने में उस आदमी का बोध है जिसे अभी-अभी पता चला कि वह परमेश्वर के विरुद्ध चल रहा था और हार गया। और तब वह वाक्य आता है जो सब कुछ बदल देता है: "वरन् उसको आशीष लगी भी रहेगी।" वह आशीर्वाद वापस लेने की कोशिश नहीं करता। एक अधूरे वाक्य में एक बूढ़ा पिता अपनी योजना छोड़कर परमेश्वर की योजना के आगे झुक जाता है। विश्वास कभी-कभी यही होता है: हारकर मान लेना कि जो हुआ, वह परमेश्वर का था।
संदर्भ
यह घटना कनान के दक्षिणी हिस्से में, चरवाहों और अर्ध-खानाबदोश जीवन की दुनिया में घटती है, जहाँ परिवार ही राज्य है और पिता का बोला हुआ वचन ही वसीयत। लिखित दस्तावेज़ नहीं, गवाहों के सामने कहा गया शब्द ही कानून है, इसीलिए इसहाक उसे रद्द नहीं कर सकता। पहलौठे का अधिकार संपत्ति का दुगुना हिस्सा और कुल का नेतृत्व देता था; आशीर्वाद उससे अलग चीज़ थी, अब्राहम से मिली प्रतिज्ञा की धारा। इसहाक शायद अपनी मृत्यु के बारे में जल्दबाज़ी में था, क्योंकि वह इसके बाद दशकों जीवित रहा। और अध्याय के अंत में रिबका का हित्ती बहुओं वाला बहाना बताता है कि यह घर कितना बँटा हुआ था: पत्नी पति से सच नहीं कहती, पिता एक बेटे को छिपाकर बुलाता है, माँ दूसरे को छिपाकर भेजती है।
चिंतन
इसहाक के काँपने और फिर "वरन् उसको आशीष लगी भी रहेगी" कहने के बीच जो क्षण है, वह आपके जीवन में कहाँ आया है, जहाँ आपको अपनी योजना छोड़कर परमेश्वर के फैसले को मानना पड़ा?
एसाव मानता है कि आशीर्वाद एक ही है और वह छिन चुका है। आप किस क्षेत्र में इस तरह जी रहे हैं, मानो परमेश्वर की उदारता सीमित हो और किसी और ने आपका हिस्सा ले लिया हो?
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Genesis 27 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद उस खेत के लिए जिसे आपने आशीष दी है, जिसकी सुगन्ध आज भी हमारी रोटी और हमारे घर तक पहुँचती है। आपके आशीर्वाद ने इसहाक के समय से लेकर अब तक हमें थामे रखा है। जो हाथ हमें आशीष देता है, वह कभी छोटा नहीं पड़ता।
पिता, धन्यवाद कि जब इसहाक ने कहा, "तेरा भाई छल से आया और तेरा आशीर्वाद ले गया," तब भी आपका वचन नहीं गिरा। धन्यवाद कि इंसानों की चालाकियाँ आपकी योजना को नहीं बिगाड़ पातीं, और जो आशीष आपने मेरे लिए ठहराई है, उसे कोई छीन नहीं सकता। धन्यवाद कि आप याकूब जैसे छल करनेवाले को भी नहीं छोड़ते, बल्कि बदलते हैं।
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