उत्पत्ति 29
पाठ
याकूब पूरब के देश पहुँचता है, एक कुएँ पर चरवाहों से मिलता है, और वहीं राहेल को देखता है; वह अकेले ही कुएँ का भारी पत्थर लुढ़का देता है, राहेल को चूमता है और ऊँचे स्वर से रो पड़ता है। लाबान उसे गले लगाकर घर ले आता है, और सात साल की सेवा का सौदा तय होता है, जो याकूब को "थोड़े ही दिनों के बराबर" लगते हैं क्योंकि वह राहेल से प्रीति रखता है। पर विवाह की रात अंधेरे में लिआ को भेज दिया जाता है, और भोर होते ही धोखा उजागर होता है। याकूब सात साल और सेवा करता है, दो पत्नियाँ पाता है, और अध्याय वहाँ जाकर ठहरता है जहाँ कोई नहीं सोचता: अप्रिय लिआ की कोख में, जिसके चार बेटे होते हैं, और चौथे का नाम वह यहूदा रखती है।
मर्म
इस अध्याय का धार्मिक केंद्र वहाँ नहीं है जहाँ रोमांस है, बल्कि वहाँ है जहाँ अन्याय है। याकूब ने अपने अंधे पिता को अंधकार में छला था; अब वही अंधकार उसके अपने विवाह-कक्ष में लौटता है, और "भोर को मालूम हुआ कि यह तो लिआ है।" परमेश्वर बदला नहीं लेते, पर वे नैतिक जगत को ऐसे बुनते हैं कि छल अपना ही चेहरा दिखाकर लौटता है। और फिर, ठीक जब कहानी मानवीय पसंद-नापसंद के हिसाब से चलती दिखती है, वाक्य पलटता है: "जब यहोवा ने देखा कि लिआ अप्रिय हुई।" परमेश्वर की दृष्टि उस पर पड़ती है जिसे किसी ने नहीं चुना। यही इस पाठ की नैतिक चुनौती है: हम सुंदरता, उपयोगिता और प्रीति के आधार पर लोगों को क्रम में लगाते हैं, और परमेश्वर उस क्रम को उलटकर अपना इतिहास आगे बढ़ाते हैं।
जोड़ने वाला सूत्र
ध्यान दीजिए कि यह अध्याय किस नाम पर आकर रुकता है। यहूदा। न रूबेन, न शिमोन, न लेवी, बल्कि वह चौथा बेटा जिसके जन्म पर लिआ ने पहली बार अपने पति का ज़िक्र ही नहीं किया: "अब की बार तो मैं यहोवा का धन्यवाद करूँगी।" इसी यहूदा के वंश से दाऊद आएगा, और उसी वंश से मसीह। यानी उद्धार का इतिहास उस स्त्री की कोख से होकर गुज़रता है जिसे उसके पति ने नहीं चुना और जिसके पिता ने उसे सौदे की तरह अंधेरे में भेज दिया। मत्ती की वंशावली इसे चुपचाप दोहराती है। परमेश्वर की चुनाव-प्रणाली मनुष्य की पसंद के विरुद्ध चलती है, और यह कोई काव्यात्मक सांत्वना नहीं, ठोस इतिहास है: जिसे मनुष्य दूसरे नंबर पर रखते हैं, उसे परमेश्वर पहले नंबर पर बुला सकते हैं।
दर्पण
यह पाठ हमें दो जगह चुभता है। पहली: हम भी लगातार लोगों को क्रम में लगाते हैं। दफ़्तर की टीम में वह सहकर्मी जो धीमा है, परिवार में वह भाई जो "सफल" नहीं हुआ, मंडली में वह व्यक्ति जिससे बात करके कुछ नहीं मिलता। हम कहते नहीं, पर हमारा समय बता देता है कि हमने किसे लिआ की श्रेणी में डाल रखा है। दूसरी: लाबान वाला हिस्सा। लाबान ने याकूब की प्रीति को देखा और उसकी कीमत लगा दी; उसने रिश्तेदारी की भाषा बोली और मज़दूरी की चालाकी चलाई। जहाँ हम किसी की ज़रूरत, अकेलेपन या भक्ति को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं, वहाँ हम लाबान हैं, चाहे कागज़ पर सब वैध हो। और याकूब को यह भी सुनना पड़ा कि उसका अपना पुराना छल किस स्वाद का था।
आज यह कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम काग़ज़ पर लिखिए जिसे आप चुपचाप दूसरे नंबर पर रखते आए हैं, और अभी उसे एक संदेश भेजिए जिसमें आप ठीक-ठीक बताएँ कि उसमें आपको क्या मूल्यवान लगता है।
संदर्भ
याकूब घर से भागा हुआ है। एसाव उसे मार डालना चाहता है, माँ ने उसे मामा लाबान के पास भेजा है, और बेतेल में परमेश्वर ने उससे वादा किया है। अब वह हारान पहुँचता है, हाथ में कुछ नहीं, न सेवक, न ऊँट, न उपहार, जबकि उसकी माता रिबका के लिए इसी इलाक़े में दहेज और ऊँटों का काफ़िला आया था। यह अंतर उसे लाबान के सामने कमज़ोर बना देता है: उसके पास देने को केवल श्रम है। चरवाहों की दुनिया में कुएँ साझा संपत्ति थे, पत्थर इसीलिए भारी था कि कोई अकेला पानी न चुरा ले, और नियम थे कि सब झुण्ड इकट्ठे होने पर ही पत्थर हटे। याकूब उस नियम को तोड़ता है। और उसी शाम, विवाह की रात, वह उस संस्कृति से टकराता है जहाँ पिता का अधिकार अंतिम है और बेटियाँ सौदे की इकाई हैं।
पहले सुनने वाले
इस्राएली जो यह कहानी सुनते थे, अपने बारह गोत्रों के नाम इसी अध्याय में जन्म लेते हुए सुनते थे। उनके लिए यह कोई प्रेमकथा नहीं थी, यह उनका अपना जन्म-प्रमाणपत्र था, और वह भी बेहद असहज सच्चाई के साथ: हमारी जड़ें एक छले गए विवाह में हैं, एक चालबाज़ मामा और एक चालबाज़ पूर्वज के बीच के सौदे में। कोई भी राष्ट्र अपनी उत्पत्ति ऐसे नहीं लिखता। पर वे यह भी सुनते थे कि उनका सबसे बड़ा गोत्र, यहूदा, और उनका याजक गोत्र, लेवी, उस माँ से आए जिसे किसी ने नहीं चाहा। यह सुनने वाले अधिकतर ग़रीब किसान और चरवाहे थे, ऐसे लोग जो जानते थे कि ताक़तवर के साथ सौदा करने का क्या मतलब होता है। उन्हें यह पता चलता था कि परमेश्वर उनके पक्ष में देखते हैं।
एक बारीकी
"तब याकूब ने राहेल को चूमा, और ऊँचे स्वर से रोया।" यह क्रम अजीब है: पहले चुंबन, फिर रोना, और उसके बाद जाकर वह अपना परिचय देता है। यह प्रेम में डूबे युवक का रोना नहीं है; यह उस भगोड़े का रोना है जिसने महीनों रेगिस्तान पार किया, जिसके पीछे भाई की तलवार है, और जिसे अचानक कुएँ पर अपने ही खून का चेहरा दिख जाता है। यह राहत का, थकान का, घर की याद का रोना है। और यही आदमी दो अध्याय बाद अपने ससुर से चालाकी में भिड़ेगा। पाठ हमें दिखाता है कि याकूब पत्थर लुढ़काने जितना मज़बूत और खुले में फूट पड़ने जितना कमज़ोर, दोनों एक साथ है। परमेश्वर ऐसे ही आधे-टूटे लोगों के साथ अपना काम करते हैं।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन-सा नियम या रिश्ता है जहाँ आप "वैध" तो हैं, पर लाबान की तरह किसी की ज़रूरत का लाभ उठा रहे हैं?
लिआ ने चौथे बेटे पर आकर पति से माँगना छोड़ा और परमेश्वर का धन्यवाद किया; आप किससे वह मान्यता माँगते रह गए हैं जो केवल परमेश्वर दे सकते हैं?
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