बाइबल व्याख्या

इब्रानियों 11:13

बाइबल
यह वचन Bachekrang Baptist Church द्वारा समर्पित है

पाठ

"ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएँ नहीं पाईं।" वाक्य की शुरुआत ही चुभती है। हाबिल से लेकर सारा तक, जिनके नाम अभी-अभी गिनाए गए, उनका अंत कब्र में हुआ, हाथ खाली। लेकिन लेखक यहीं नहीं रुकता: उन्होंने उन प्रतिज्ञाओं को "दूर से देखकर" आनन्द मनाया, जैसे कोई यात्री क्षितिज पर अपने शहर की रोशनी देखता है और मुस्कुरा उठता है, भले ही पैर अभी मीलों दूर हों। और फिर वह अजीब स्वीकारोक्ति: "हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।" यह हार का कबूलनामा नहीं, पहचान का दावा है। तीन बातें एक साथ: अधूरी मृत्यु, दूर से देखा गया आनन्द, और परदेशीपन को गले लगा लेना।

मूल मर्म

यह पद विश्वास की उस परिभाषा को खोलकर रख देता है जो पद 1 में दी गई थी, पर अब खून और मिट्टी के साथ। विश्वास का प्रमाण यह नहीं कि परमेश्वर ने कब जवाब दिया, बल्कि यह कि मनुष्य बिना जवाब पाए भी उन पर भरोसा किए हुए मरा। यहाँ परमेश्वर की सच्चाई उनके जीवनकाल से बड़ी साबित होती है: उनकी प्रतिज्ञाएँ इतनी विशाल हैं कि एक व्यक्ति की उम्र में समा ही नहीं सकतीं। इब्राहीम को पूरा कनान नहीं मिला, सिर्फ एक कब्रिस्तान की ज़मीन। फिर भी वह ठगा गया नहीं, क्योंकि वह जिस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहा था वह "स्थिर नींव वाला नगर" था। यही उद्धार का ढाँचा है: परमेश्वर अपने लोगों को इतिहास के भीतर आंशिक चिह्न देते हैं और अंत में स्वयं को।

सूत्र

इस पद का धागा उत्पत्ति से खिंचकर सीधे मसीह तक जाता है। इब्राहीम को जो दिखाया गया था वह एक देश, एक वंश और "पृथ्वी के सारे कुल" के लिए आशीष थी, यानी एक ऐसी प्रतिज्ञा जिसका आखिरी सिरा उसकी अपनी पीढ़ी में गिर ही नहीं सकता था। यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु कहते हैं कि इब्राहीम उनके दिन को देखकर मगन हुआ था, और इब्रानियों का लेखक ठीक यही बात दूसरे शब्दों में कह रहा है: इन लोगों ने दूर से जो देखा, वह अंततः एक व्यक्ति था। इसीलिए पद 40 में लेखक पलटकर कहता है कि वे "हमारे बिना सिद्धता को न पहुँचें"। पुराने नियम के विश्वासी और हम एक ही मेज़ पर बैठाए जाएँगे, क्योंकि पूर्ति का नाम मसीह है, कोई भूखंड नहीं।

दर्पण

आप जानते हैं कि बिना उत्तर पाए मरना कैसा दिखता है, क्योंकि आपने किसी को ऐसा करते देखा है। वह माँ जो अपने बेटे के लौट आने की प्रार्थना बीस साल करती रही और अंतिम साँस तक दरवाज़ा खुला रखा। वह आदमी जिसने चंगाई के लिए प्रार्थना की और रिपोर्ट फिर भी वही आई। हम चुपचाप यह मानकर चलते हैं कि विश्वास का प्रमाण उत्तर है, और जब उत्तर नहीं आता तो हमें लगता है हमारा विश्वास कमज़ोर था। यह पद उस समीकरण को तोड़ता है। यहाँ विश्वास की गवाही खाली हाथों के बावजूद दी गई है, उनके कारण नहीं। और यह हमारे भीतर की जड़ को भी उजागर करता है: हम इस धरती पर नागरिक बनकर बसना चाहते हैं, परदेशी नहीं रहना चाहते। आज यह करें: एक कागज़ पर वह एक प्रार्थना लिखिए जिसका उत्तर आपको आज तक नहीं मिला, और उसे रखकर ज़ोर से कहिए, "मैं इसे दूर से देखता हूँ, और परमेश्वर सच्चे हैं।"

विवरण

हिन्दी अनुवाद "दूर से देखकर आनन्दित हुए" कहता है, पर मूल यूनानी में जो क्रिया है वह है ἀσπάζομαι (अस्पाज़ोमाई), जिसका अर्थ है अभिवादन करना, गले लगाकर स्वागत करना। यह सिर्फ़ देखना नहीं, हाथ हिलाकर पुकारना है। सोचिए: जहाज़ किनारे से बहुत दूर है, पर तट पर खड़ा आदमी पहचान लेता है कि उसका अपना आ रहा है, और हाथ उठा देता है। इब्राहीम ने प्रतिज्ञाओं को छुआ नहीं, पर उनका अभिवादन किया, जैसे किसी परिचित का। यही अंतर है ठंडी स्वीकृति और जीवित विश्वास के बीच। बहुत से लोग परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को दूर से देखते हैं और कंधे उचका देते हैं। विश्वास उन्हें दूर से देखता है और हाथ हिलाता है।

अंतर्पाठ

दो पुराने नियम के दृश्य इस पद के नीचे बहते हैं। पहला, उत्पत्ति 23, जहाँ इब्राहीम हित्तियों के सामने खड़ा होकर स्वयं को उनके बीच परदेशी और प्रवासी कहता है, और कनान की जिस एकमात्र ज़मीन का वह मालिक बनता है वह सारा की कब्र है। प्रतिज्ञा के देश में उसकी संपत्ति एक कब्रिस्तान। दूसरा, 1 इतिहास 29, जहाँ दाऊद अपनी शक्ति के शिखर पर, मंदिर के लिए सोना-चाँदी ढेर करने के बाद, प्रार्थना में कहता है कि हम अपने सब पुरखाओं की तरह परदेशी हैं और हमारे दिन छाया के समान हैं। यहाँ एक तनाव भी है: यहोशू की पुस्तक कहती है कि परमेश्वर की एक भी अच्छी बात अधूरी न रही, देश दे दिया गया। इब्रानियों का लेखक उसे झुठलाता नहीं, वह उसे छोटा बताता है। ज़मीन मिली, पर ज़मीन कभी असली वादा थी ही नहीं। और पतरस अपनी पहली पत्री में कलीसिया को ठीक यही नाम देता है, परदेशी और प्रवासी, यानी इब्राहीम की पहचान अब हमारी पहचान है।

श्रोता

जिन्होंने यह पत्र पहली बार सुना, वे मसीही बन चुके यहूदी थे जिनकी संपत्ति ज़ब्त हो चुकी थी और जिनके लिए पीछे लौटने का रास्ता अब भी खुला था; पद 15 यह खुले तौर पर स्वीकार करता है। उनके बीच कुछ लोग मर चुके थे, बिना यह देखे कि मसीह लौटे हैं, और यह चुभता सवाल हवा में लटका था: क्या वे हार गए? पद 13 उनका सीधा उत्तर है। तुम्हारे मरे हुए भाई-बहन उसी सूची में हैं जिसमें हाबिल, नूह और इब्राहीम हैं। घर न मिलना असफलता नहीं, विश्वास की सामान्य शक्ल है। और जो घर वे खोज रहे थे, वह उस यरूशलेम से भी बड़ा था जिसे वे पीछे छोड़ आए थे।

चिंतन

आप अपने जीवन में किस चीज़ को "स्थिर नींव वाला नगर" मान बैठे हैं, जो असल में सिर्फ़ एक तंबू है?

अगर आपकी सबसे लंबी प्रार्थना का उत्तर आपके जीवनकाल में न आए, तो क्या आप फिर भी परमेश्वर को सच्चा कहेंगे, और क्यों?

Hebrews में और गहराई से जानें

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The Message of Hebrews

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Hebrews For Everyone

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Hebrews 11:13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

इब्रानियों 11:13 का क्या अर्थ है?
"ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएँ नहीं पाईं।" वाक्य की शुरुआत ही चुभती है। हाबिल से लेकर सारा तक, जिनके नाम अभी-अभी गिनाए गए, उनका अंत कब्र में हुआ, हाथ खाली। लेकिन लेखक यहीं नहीं रुकता: उन्होंने उन प्रतिज्ञाओं को "दूर से देखकर" आनन्द मनाया, जैसे कोई यात्री क्षितिज पर अपने शहर की रोशनी देखता है और मुस्कुरा उठता है, भले ही पैर अभी मीलों दूर हों। और फिर वह अजीब स्वीकारोक्ति: "हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।" यह हार का कबूलनामा नहीं, पहचान का दावा है। तीन बातें एक साथ: अधूरी मृत्यु, दूर से देखा गया आनन्द, और परदेशीपन को गले लगा लेना।
इब्रानियों 11:13 किस विषय में है?
इस पद का धागा उत्पत्ति से खिंचकर सीधे मसीह तक जाता है। इब्राहीम को जो दिखाया गया था वह एक देश, एक वंश और "पृथ्वी के सारे कुल" के लिए आशीष थी, यानी एक ऐसी प्रतिज्ञा जिसका आखिरी सिरा उसकी अपनी पीढ़ी में गिर ही नहीं सकता था। यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु कहते हैं कि इब्राहीम उनके दिन को देखकर मगन हुआ था, और इब्रानियों का लेखक ठीक यही बात दूसरे शब्दों में कह रहा है: इन लोगों ने दूर से जो देखा, वह अंततः एक व्यक्ति था। इसीलिए पद 40 में लेखक पलटकर कहता है कि वे "हमारे बिना सिद्धता को न पहुँचें"। पुराने नियम के विश्वासी और हम एक ही मेज़ पर बैठाए जाएँगे, क्योंकि पूर्ति का नाम मसीह है, कोई भूखंड नहीं।
इब्रानियों 11:13 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
हिन्दी अनुवाद "दूर से देखकर आनन्दित हुए" कहता है, पर मूल यूनानी में जो क्रिया है वह है ἀσπάζομαι (अस्पाज़ोमाई), जिसका अर्थ है अभिवादन करना, गले लगाकर स्वागत करना। यह सिर्फ़ देखना नहीं, हाथ हिलाकर पुकारना है। सोचिए: जहाज़ किनारे से बहुत दूर है, पर तट पर खड़ा आदमी पहचान लेता है कि उसका अपना आ रहा है, और हाथ उठा देता है। इब्राहीम ने प्रतिज्ञाओं को छुआ नहीं, पर उनका अभिवादन किया, जैसे किसी परिचित का। यही अंतर है ठंडी स्वीकृति और जीवित विश्वास के बीच। बहुत से लोग परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को दूर से देखते हैं और कंधे उचका देते हैं। विश्वास उन्हें दूर से देखता है और हाथ हिलाता है।
इब्रानियों 11:13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
जिन्होंने यह पत्र पहली बार सुना, वे मसीही बन चुके यहूदी थे जिनकी संपत्ति ज़ब्त हो चुकी थी और जिनके लिए पीछे लौटने का रास्ता अब भी खुला था; पद 15 यह खुले तौर पर स्वीकार करता है। उनके बीच कुछ लोग मर चुके थे, बिना यह देखे कि मसीह लौटे हैं, और यह चुभता सवाल हवा में लटका था: क्या वे हार गए?
इब्रानियों 11:13 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अगर आपकी सबसे लंबी प्रार्थना का उत्तर आपके जीवनकाल में न आए, तो क्या आप फिर भी परमेश्वर को सच्चा कहेंगे, और क्यों?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Hebrews 11 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 32

पिता, धन्यवाद कि गिदोन, बाराक, शिमशोन, यिप्तह, दाऊद और शमूएल जैसे कमजोर और डरे हुए लोगों को भी आपने विश्वास की सूची में जगह दी। धन्यवाद कि आप मेरी कमियों के बावजूद मुझे भी काम में लाते हैं, और मेरा नाम भी आपके सामने याद रखा जाता है।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 12

पिता, धन्यवाद कि अब्राहम "मरा हुआ सा था", फिर भी आपने उससे आकाश के तारों और समुद्र तट की बालू के समान अनगिनत वंश उठाया। धन्यवाद कि मेरी थकी, सूखी सी परिस्थिति भी आपके हाथ में बाँझ नहीं रहती, और आपकी प्रतिज्ञा मेरी कमज़ोरी से बड़ी है।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 23

पिता, धन्यवाद कि मूसा के माता-पिता ने विश्वास से उसे तीन महीने छिपाए रखा और राजा की आज्ञा से न डरे। धन्यवाद कि आज भी आप माता-पिता को ऐसा साहस देते हैं कि वे डर के बीच अपने बच्चों को आपके हाथों में सौंप दें, और आप उनकी रक्षा करते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 36

कुछ लोगों ने ठट्ठों में उड़ाए जाने और कोड़े खाने; वरन् बाँधे जाने और कैद में पड़ने का भी अनुभव किया।" गौर करो, सूची ठट्ठों से शुरू होती है, कोड़ों से नहीं। परमेश्वर जानता है कि हँसी उड़ाया जाना भी एक घाव है। तेरे विश्वास पर जो ताने कसे जाते हैं, वे स्वर्ग में दर्ज हैं, और तू उन्हीं की कतार में खड़ा है जिनके योग्य यह संसार न था।

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