बाइबल व्याख्या

होशे 8

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

नरसिंगा उठाओ: उकाब की तरह न्याय परमेश्वर के अपने घर पर झपट रहा है, क्योंकि वाचा तोड़ी गई है। इस्राएल चिल्लाकर कहता है कि वह परमेश्वर को जानता है, पर उसने अपने राजा खुद चुने, अपने सोने-चाँदी से बछड़ा गढ़ा, वेदियों की गिनती बढ़ाई और व्यवस्था को पराया समझा। इसलिए वह वायु बोकर बवण्डर काटेगा, अश्शूर के पास भाड़े पर जाएगा, और अंत में वही होगा जो सबसे कड़वा है: "वे मिस्र में लौट जाएँगे।"

मर्म

पद 2 सबसे डरावना वाक्य है, इसलिए नहीं कि वह झूठा है, बल्कि इसलिए कि वह सच्चा लगता है। "हे हमारे परमेश्वर, हम इस्राएली लोग तुझे जानते हैं।" यह प्रार्थना ठीक शब्दों में है, सही नाम पुकारती है, और फिर भी परमेश्वर उसे स्वीकार नहीं करते। क्यों? क्योंकि पद 13 के अनुसार बलिदान चल रहे थे और वेदियाँ बढ़ रही थीं, पर वे बलिदान उपासना नहीं, भोजन बन गए थे: "उसका फल माँस ही है; वे आप ही उसे खाते हैं।" यहाँ परमेश्वर धर्म की कमी की नहीं, धर्म की अधिकता की शिकायत करते हैं। ऐसी भक्ति जो अपने ही पेट में लौट आती है, वाचा नहीं, व्यापार है। और परमेश्वर व्यापार नहीं करते; वे प्रेम माँगते हैं।

जुड़ा हुआ सूत्र

इस अध्याय में तीन चीज़ें टूटती हैं, और तीनों मसीह में जुड़ती हैं। पहला, राजा: "वे राजाओं को ठहराते रहे, परन्तु मेरी इच्छा से नहीं।" इस्राएल के सिंहासन पर मानव चुनाव बैठा था; परमेश्वर स्वयं अपना राजा भेजेंगे, जिसे किसी सभा ने नहीं चुना। दूसरा, बलिदान: जो वेदियाँ पाप हटाने के लिए बनी थीं, वे "उसके पापी ठहरने का कारण भी ठहरीं।" इसका उत्तर और वेदियाँ नहीं, बल्कि एक याजक है जो स्वयं बलि बना और जिसे परमेश्वर ने स्वीकार किया। तीसरा, व्यवस्था: लाखों बातें लिखी गईं, पर "पराया" रहीं। नई वाचा का वादा यही है कि व्यवस्था पत्थर या पुस्तक पर नहीं, हृदय पर लिखी जाएगी, और पवित्र आत्मा उसे भीतर से अपनी बनाता है।

दर्पण

यह पाठ उस आदमी को छूता है जो रविवार को उपस्थित है और सोमवार को अपने फैसले अकेले लेता है। नौकरी बदलने का निर्णय, पैसा लगाने का निर्णय, बच्चों की शिक्षा का निर्णय, सब हो चुके, और प्रार्थना बाद में आती है, मुहर की तरह। "वे राजाओं को ठहराते रहे, परन्तु मेरी इच्छा से नहीं" आज भी यही है: हम सिंहासन पर किसी को बिठा चुके होते हैं और फिर परमेश्वर से समर्थन माँगते हैं। और पद 14 की चोट भी चुभती है, क्योंकि इस्राएल ने अपने कर्ता को भूलकर महल बनाए। बुरी चीज़ें नहीं, अच्छी चीज़ें: घर, सुरक्षा, बचत, गढ़वाले नगर। भूलना नास्तिकता नहीं, व्यस्तता है।

आज एक कागज़ पर वह एक निर्णय लिखिए जो आपने परमेश्वर से बिना पूछे लिया, और उसे ज़ोर से बोलकर उनके सामने रख दीजिए।

एक बारीकी

"वे वायु बोते हैं, और वे बवण्डर लवेंगे।" इब्रानी में यहाँ वायु के लिए रूअख़ शब्द है, वही शब्द जो साँस और आत्मा के लिए भी चलता है। मूर्तिपूजा को होशे खोखलापन कहते हैं: हवा। आप हवा बोते हैं, यानी कुछ भी नहीं बोते, और फिर भी फसल आती है, पर वह फसल तूफान है। शून्य से शून्य नहीं निकलता, विनाश निकलता है। यह पाप का वह नियम है जिसे हम भूल जाते हैं: निरर्थकता निष्क्रिय नहीं रहती, वह बढ़ती है। और ध्यान दीजिए, यही रूअख़ शब्द परमेश्वर की आत्मा के लिए भी है। जो हवा हम बोते हैं उसका उत्तर वह आत्मा है जो पिन्तेकुस्त के दिन आँधी की तरह आया, पर जलाने नहीं, जिलाने।

पहले सुननेवाले

ये उत्तरी राज्य के लोग थे, आठवीं सदी ईसा पूर्व के अंतिम दशक। सामरिया में अब भी व्यापार था, महल थे, वेदियों पर भीड़ थी। उनके कानों में "वे मिस्र में लौट जाएँगे" किसी भूगोल की बात नहीं थी, यह पूरी कहानी का उलट जाना था। निर्गमन रद्द। जिस दासता से परमेश्वर ने बाहर निकाला, उसी में वापसी। और "सामरिया का वह बछड़ा टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा" सुनकर उन्हें याद आया होगा कि मूसा ने भी एक बछड़े को तोड़ा था। होशे कह रहे हैं: तुम्हारा धर्म वहीं अटका है जहाँ तुम्हारी सबसे बड़ी विफलता थी।

पृष्ठभूमि

यारोबाम द्वितीय की समृद्धि के बाद इस्राएल राजनीतिक अराजकता में गिर चुका था; राजा तख्तापलट से बनते और मरते थे, इसलिए पद 4 केवल धार्मिक आरोप नहीं, ताज़ा इतिहास है। अश्शूर पूर्व से बढ़ रहा था, और सामरिया के शासक कभी मिस्र से, कभी अश्शूर से सौदा करते थे। पद 9 की तस्वीर करारी है: इस्राएल "जंगली गदहा" की तरह अकेला भटकता है और प्रेम खरीदने के लिए पैसे देता है, यानी वह राष्ट्र जो परमेश्वर की दुल्हन था अब गठबंधन के लिए भुगतान कर रहा है। कुछ ही वर्षों में, 722 ईसा पूर्व में, सामरिया गिरा और लोग निर्वासित हुए।

मनन के प्रश्न

मेरी उपासना में कौन-सा हिस्सा ऐसा है जिसका "फल माँस ही है", यानी जो अंततः मुझी को पोषित करने के लिए है, परमेश्वर के लिए नहीं?

परमेश्वर की व्यवस्था का कौन-सा हिस्सा मुझे आजकल "पराया" लगता है, और मैं उसे किस बहाने से टालता हूँ?

पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें

आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।

स्वीकारोक्ति

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संत अगस्तीन

अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।

उद्देश्य भरा जीवन

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रिक वॉरेन

चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

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भाई लॉरेन्स

रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।

जंगल का छिपने का स्थान

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कोरी टेन बूम

नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।

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Hosea 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

होशे 8 का क्या अर्थ है?
नरसिंगा उठाओ: उकाब की तरह न्याय परमेश्वर के अपने घर पर झपट रहा है, क्योंकि वाचा तोड़ी गई है। इस्राएल चिल्लाकर कहता है कि वह परमेश्वर को जानता है, पर उसने अपने राजा खुद चुने, अपने सोने-चाँदी से बछड़ा गढ़ा, वेदियों की गिनती बढ़ाई और व्यवस्था को पराया समझा। इसलिए वह वायु बोकर बवण्डर काटेगा, अश्शूर के पास भाड़े पर जाएगा, और अंत में वही होगा जो सबसे कड़वा है: "वे मिस्र में लौट जाएँगे।"
होशे 8 किस विषय में है?
इस अध्याय में तीन चीज़ें टूटती हैं, और तीनों मसीह में जुड़ती हैं। पहला, राजा: "वे राजाओं को ठहराते रहे, परन्तु मेरी इच्छा से नहीं।" इस्राएल के सिंहासन पर मानव चुनाव बैठा था; परमेश्वर स्वयं अपना राजा भेजेंगे, जिसे किसी सभा ने नहीं चुना। दूसरा, बलिदान: जो वेदियाँ पाप हटाने के लिए बनी थीं, वे "उसके पापी ठहरने का कारण भी ठहरीं।" इसका उत्तर और वेदियाँ नहीं, बल्कि एक याजक है जो स्वयं बलि बना और जिसे परमेश्वर ने स्वीकार किया। तीसरा, व्यवस्था: लाखों बातें लिखी गईं, पर "पराया" रहीं। नई वाचा का वादा यही है कि व्यवस्था पत्थर या पुस्तक पर नहीं, हृदय पर लिखी जाएगी, और पवित्र आत्मा उसे भीतर से अपनी बनाता है।
होशे 8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक कागज़ पर वह एक निर्णय लिखिए जो आपने परमेश्वर से बिना पूछे लिया, और उसे ज़ोर से बोलकर उनके सामने रख दीजिए।
होशे 8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
ये उत्तरी राज्य के लोग थे, आठवीं सदी ईसा पूर्व के अंतिम दशक। सामरिया में अब भी व्यापार था, महल थे, वेदियों पर भीड़ थी। उनके कानों में "वे मिस्र में लौट जाएँगे" किसी भूगोल की बात नहीं थी, यह पूरी कहानी का उलट जाना था। निर्गमन रद्द। जिस दासता से परमेश्वर ने बाहर निकाला, उसी में वापसी। और "सामरिया का वह बछड़ा टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा" सुनकर उन्हें याद आया होगा कि मूसा ने भी एक बछड़े को तोड़ा था। होशे कह रहे हैं: तुम्हारा धर्म वहीं अटका है जहाँ तुम्हारी सबसे बड़ी विफलता थी।
होशे 8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
मेरी उपासना में कौन-सा हिस्सा ऐसा है जिसका "फल माँस ही है", यानी जो अंततः मुझी को पोषित करने के लिए है, परमेश्वर के लिए नहीं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Hosea 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 1

आपका धन्यवाद कि आप चुप नहीं रहते। "अपने मुँह में नरसिंगा लगा" कहकर आपने पहले ही चेतावनी दी, ताकि हम लौट आएँ। धन्यवाद कि आपने हमें अपनी वाचा और व्यवस्था दी है, और जब हम भटकते हैं तब भी आपका प्रेम हमें पुकारता रहता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

इस्राएल ने भलाई को मन से उतार दिया है, शत्रु उसका पीछा करेगा।" ध्यान दो, यहाँ भलाई ने इस्राएल को नहीं छोड़ा, इस्राएल ने भलाई को ठुकराया। परमेश्वर वहीं खड़ा था, पर उन्होंने मुँह फेर लिया।

आज खुद से पूछ, कहीं तू भी उस आवाज़ को टालता तो नहीं जो तुझे सही राह दिखाती है? जिसे हम धीरे धीरे मन से उतारते हैं, एक दिन उसकी कमी हमें अकेला कर देती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

एक कारीगर ने उसे बनाया, और वह परमेश्वर नहीं है; सामरिया का बछड़ा टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।" जिस बछड़े के सामने वे झुकते थे, वह उन्हीं के हाथों की मेहनत थी। सोचिए, अपनी ही बनाई चीज़ से सहारा माँगना। आज भी हम जो कमाते हैं, जो पद बनाते हैं, उसी से पूछते हैं, क्या मैं सुरक्षित हूँ? पर जो टूट सकता है, वह बचा नहीं सकता।

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