यशायाह 54:10
पाठ
पहाड़ टल सकते हैं। यह वाक्य उस दुनिया में कहा गया जहाँ पहाड़ ही स्थिरता का सबसे बड़ा प्रतीक था। परमेश्वर कहते हैं: "चाहे पहाड़ हट जाएँ और पहाड़ियाँ टल जाएँ, तो भी मेरी करुणा तुझ पर से कभी न हटेगी, और मेरी शान्तिदायक वाचा न टलेगी।" यानी जो सबसे अटल दिखता है, वह भी डगमगा सकता है, पर परमेश्वर की करुणा नहीं। और यह वचन किसी विजयी राष्ट्र से नहीं, बल्कि एक त्यागी हुई स्त्री के रूपक में बसे, टूटे हुए लोगों से कहा गया है, जिन्हें अभी-अभी बताया गया था कि उनका कर्ता ही उनका पति है।
मर्म
इस वचन का भार "वाचा" शब्द पर टिका है। परमेश्वर यहाँ भावना नहीं, बल्कि एक कानूनी, बंधनकारी प्रतिज्ञा दे रहे हैं। इब्रानी में जिसे हेसेद कहा जाता है, वह केवल दया नहीं, बल्कि वाचा के भीतर निभाई गई वफादारी है, वह प्रेम जो रिश्ते को तब भी पकड़े रहता है जब दूसरा पक्ष उसे तोड़ चुका हो। और ध्यान दीजिए, यह वाचा "शान्तिदायक" है। शालोम का अर्थ केवल युद्ध का अभाव नहीं, बल्कि सब कुछ अपनी जगह पर होना, टूटी हुई चीज़ों का फिर से जुड़ना। परमेश्वर यह नहीं कह रहे कि वे गुस्सा दबा लेंगे; वे कह रहे हैं कि क्रोध का अध्याय समाप्त हो चुका है, क्योंकि वे स्वयं उसे समाप्त कर चुके हैं।
सूत्र
पर कैसे समाप्त हुआ? यशायाह 54 अचानक नहीं आता। ठीक इससे पहले का अध्याय वह है जहाँ परमेश्वर का सेवक हमारे अपराधों के कारण घायल किया जाता है, और उसी अध्याय में कहा गया है कि हमारी शान्ति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी। यानी अध्याय 53 की कीमत के बाद ही अध्याय 54 की "शान्तिदायक वाचा" बोली जाती है। यह क्रम आकस्मिक नहीं; यही सुसमाचार का ढाँचा है। मसीह में परमेश्वर का क्रोध टला, इसलिए करुणा नहीं टलती। पौलुस गलातियों में इसी अध्याय की पहली आयत को कलीसिया पर लागू करता है, क्योंकि वह जानता है कि बाँझ स्त्री के असंख्य बच्चे मसीह के द्वारा ही जन्मते हैं। पहाड़ हिल सकते हैं; क्रूस पर जो हुआ, वह नहीं हिलता।
दर्पण
हम में से अधिकांश अपने जीवन के "पहाड़" जानते हैं: वह नौकरी जो कभी खत्म नहीं होने वाली थी, वह शरीर जो कभी थकता नहीं था, वह रिश्ता जिसे हम स्थायी मानते थे, वह बचत जो सब सँभाल लेगी। जब इनमें से कोई एक टल जाता है, तो भीतर एक सवाल उठता है जिसे हम ज़ोर से नहीं कहते: क्या परमेश्वर ने भी मुझसे मुँह फेर लिया? यह आयत उस सवाल को सीधे संबोधित करती है। आपकी असफलता, आपकी शर्म, वह अध्याय जिसे आप किसी को नहीं दिखाते, वह परमेश्वर की वाचा को रद्द नहीं कर सकता, क्योंकि वह वाचा आपके प्रदर्शन पर नहीं, उनकी शपथ पर टिकी है। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जो इस साल आपके जीवन में "टल" गई, और उसके नीचे यह वाक्य लिखकर ज़ोर से पढ़िए: "मेरी करुणा तुझ पर से कभी न हटेगी।"
संदर्भ
यशायाह के इस भाग के सुननेवाले बेबीलोन के बंधुए हैं, या वे लोग जो हाल ही में उस विनाश से लौटे हैं। यरूशलेम खंडहर है, मन्दिर जल चुका है, राजवंश समाप्त है। प्राचीन पूर्व में जब कोई नगर गिरता था, तो यह माना जाता था कि उसके देवता हार गए या उन्होंने नगर छोड़ दिया। इसी सामाजिक संसार में एक निःसंतान, त्यागी हुई स्त्री का अपमान सबसे गहरा अपमान था; उसके पास न सुरक्षा थी, न भविष्य, न समाज में स्थान। परमेश्वर इसी छवि को उठाते हैं। और अध्याय 9 में वे नूह की शपथ का हवाला देते हैं, क्योंकि बंधुआई उनके लिए एक जलप्रलय जैसी ही थी: सब कुछ बह गया। अब वे कहते हैं, वैसी बाढ़ फिर नहीं आएगी।
मुख्य पात्र
यहाँ मुख्य पात्र परमेश्वर स्वयं हैं, और वे आश्चर्यजनक रूप से खुलकर बोलते हैं। वे अपने क्रोध को छिपाते नहीं: "क्रोध के आवेग में आकर मैंने पल भर के लिये तुझ से मुँह छिपाया था।" यह कोई उदासीन देवता नहीं; यह वह परमेश्वर है जिसे चोट लगती है, जो मुँह फेरता है, और फिर स्वयं लौटता है। पर गौर कीजिए अनुपात पर: "क्षण भर" के मुकाबले "अनन्त करुणा"। परमेश्वर का क्रोध असली है, पर वह उनका स्वभाव नहीं, उनकी प्रतिक्रिया है; करुणा उनका स्वभाव है। और सबसे मार्मिक बात यह कि वे स्वयं को पति और छुड़ानेवाला, दोनों कहते हैं, दो भूमिकाएँ जो इस्राएल के कानून में अलग-अलग व्यक्तियों की थीं। वे ही घायल पक्ष हैं और वे ही बचानेवाले।
श्रोता
कल्पना कीजिए कि आप उन लौटे हुए बंधुओं में से हैं। आपने अपने पिता की कब्र परदेस में छोड़ी है। आप मलबे के बीच खड़े हैं और कोई आपसे कहता है कि तम्बू की रस्सियाँ लम्बी कीजिए, खूँटे मज़बूत कीजिए, क्योंकि जगह कम पड़ जाएगी। यह हास्यास्पद लगता होगा। इसी संदेह के बीच आयत 10 आती है, और उसमें एक शब्द है जो उन्हें हिला देता होगा: "वाचा"। उन्होंने तो वाचा तोड़ी थी, इसीलिए सब कुछ उजड़ा था। और अब परमेश्वर कह रहे हैं कि वे एक नई वाचा बाँध रहे हैं जो टल नहीं सकती। वे यह सुन रहे थे: हमारा भविष्य अब हमारी वफादारी पर नहीं, उनकी शपथ पर टिका है।
चिंतन
आपके जीवन का कौन-सा "पहाड़" हाल में टला है, और उसके टलने ने परमेश्वर के बारे में आपकी किस धारणा को उघाड़ दिया?
यदि यह वाचा मसीह के क्रूस पर पक्की हुई है, तो आपके किस डर का अब कोई कानूनी आधार नहीं बचा?
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Isaiah 54:10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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यशायाह 54:10 का क्या अर्थ है?
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यशायाह 54:10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यशायाह 54:10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Isaiah 54 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
क्योंकि यहोवा ने तुझे ऐसी स्त्री के समान बुलाया है जो त्यागी गई और मन से व्याकुल हो।" गौर कर, परमेश्वर तेरे दर्द को छिपाता नहीं, वह उसे नाम देकर बुलाता है। तू सोचती है तेरा टूटापन तुझे अयोग्य बनाता है, पर वही तो वह पता है जिस पर वह तुझे ढूँढ़ने आता है। जवानी का प्यार उसने नहीं भुलाया। क्या तू अब भी खुद को भूली हुई मानेगी?
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