यूहन्ना 21:17
पाठ
भोजन के बाद झील के किनारे, कोयले की आग के पास, यीशु तीसरी बार शमौन से वही प्रश्न पूछते हैं: "क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?" तीसरी बार सुनकर पतरस उदास हो जाता है, मानो कोई पुराना घाव फिर से खुल गया हो। उसका उत्तर अब तर्क नहीं, आत्मसमर्पण है: "हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूँ।" वह अपने प्रेम का प्रमाण देने की कोशिश छोड़ देता है और स्वयं को उस दृष्टि के हवाले कर देता है जो उसके भीतर तक देखती है। और उसी क्षण, बिना किसी शर्त या परिवीक्षा-काल के, यीशु उसे काम सौंप देते हैं: "मेरी भेड़ों को चरा।"
केंद्र
यहाँ अनुग्रह का पूरा व्याकरण एक वाक्य में खुल जाता है। पतरस की बहाली किसी प्रतिज्ञा, पश्चात्ताप के आँसुओं या सुधरे हुए चरित्र पर नहीं टिकी, बल्कि मसीह के जानने पर टिकी है। ध्यान दीजिए कि पतरस अपना बचाव नहीं करता; वह केवल यीशु की सर्वज्ञता की दुहाई देता है। यही बाइबल का सबसे गहरा उलटफेर है: जो दृष्टि हमें उजागर करती है, वही दृष्टि हमें थामती भी है। परमेश्वर का जानना न्याय और अनुग्रह दोनों है, और मसीह में ये दोनों अलग नहीं होते। इसलिए पतरस को क्षमा के बाद कोई छोटी, सुरक्षित भूमिका नहीं मिलती। उसे भेड़ें सौंपी जाती हैं, और वे यीशु की भेड़ें हैं, पतरस की नहीं। अनुग्रह केवल दोष मिटाता नहीं, वह ज़िम्मेदारी लौटाता है, और यही उसकी सबसे ठोस पहचान है।
साझा सूत्र
भेड़ चराने का यह आदेश आसमान से नहीं गिरता; उसके पीछे पूरे पुराने नियम की एक लंबी शिकायत खड़ी है। यहेजकेल 34 में परमेश्वर इस्राएल के चरवाहों पर फूट पड़ते हैं क्योंकि उन्होंने अपना पेट भरा और भेड़ों को तितर-बितर छोड़ दिया, और फिर वे प्रतिज्ञा करते हैं कि वे स्वयं अपनी भेड़ों को ढूँढ़ेंगे और चराएँगे। यूहन्ना 10 में यीशु उस प्रतिज्ञा को अपने ऊपर ले लेते हैं: अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। अब, जी उठने के बाद, वही चरवाहा अपनी भेड़ें एक ऐसे आदमी के हाथ में देता है जो हाल ही में भागा था। यह वाचा की शैली है: परमेश्वर अपना काम मनुष्यों के माध्यम से करने की ज़िद करते हैं, और टूटे हुए मनुष्यों को ही चुनते हैं, ताकि साफ़ रहे कि भेड़ें किसकी हैं।
दर्पण
हम में से अधिकांश लोग पतरस की तरह अपने प्रेम का प्रमाण देने में माहिर हैं। आप रविवार को सेवा करते हैं, समूह चलाते हैं, घर में धैर्य रखने की कोशिश करते हैं, और भीतर कहीं एक खाता-बही चलती रहती है जिससे आप स्वयं को और परमेश्वर को समझाते हैं कि आप सच में उनके हैं। और फिर कोई क्षण आता है, दफ़्तर में बोला गया एक झूठ, बच्चे पर चिल्लाया गया एक वाक्य, वह पुरानी आदत जो फिर लौट आई, और पूरी बही एक झटके में रद्दी हो जाती है। पतरस यहाँ बही बंद कर देता है। वह कहता है, आप जानते हैं। यही विश्वास का सबसे वयस्क रूप है: अपने बारे में परमेश्वर की जानकारी को अपनी सफ़ाई से ज़्यादा भरोसेमंद मानना।
आज, अभी: एक कागज़ पर वह एक बात लिखिए जिसे आप सबसे कम चाहते हैं कि कोई जाने, और उसके नीचे ज़ोर से यह वाक्य बोलिए, "हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है।" फिर कागज़ फाड़ दीजिए।
विवरण
पहली दो बार यीशु एक शब्द इस्तेमाल करते हैं, और पतरस हर बार दूसरे शब्द से उत्तर देता है; हिंदी अनुवाद इसे "प्रेम" और "प्रीति" से पकड़ता है। यूनानी में यीशु पहले अगापाओ पूछते हैं, और पतरस फ़िलेओ (गहरा मित्रवत स्नेह) कहकर जवाब देता है, मानो वह बड़ा शब्द बोलने की हिम्मत ही न जुटा पाए। तीसरी बार यीशु नीचे उतर आते हैं और पतरस के ही शब्द में पूछते हैं: "क्या तू मुझसे प्रीति रखता है?" शायद इसीलिए पतरस उदास होता है, क्योंकि प्रभु ने उसकी सीमा मान ली है। यह अनुग्रह की सबसे कोमल हरकत है: परमेश्वर हमसे वह नहीं माँगते जो हम गा नहीं सकते, वे हमारी सुर पर उतर आते हैं और वहीं से शुरू करते हैं।
प्रश्न
फिर भी एक काँटा बाकी रहता है: यीशु ने पतरस को दुखी क्यों किया? वे एक बार में भी कह सकते थे, "मैंने तुझे क्षमा किया," और बात खत्म। तीन बार पूछना, वह भी कोयले की आग के पास जहाँ उसी गंध ने उसे इनकार की रात में लौटा दिया होगा, क्रूर लगता है। पाठ कोई सफ़ाई नहीं देता। मैं इसे मीठा नहीं करूँगा: कुछ घाव केवल खोले जाने से ही ठीक होते हैं, और इसका फ़ैसला घायल व्यक्ति नहीं, चिकित्सक करता है। पतरस को सार्वजनिक रूप से गिरने के बाद सार्वजनिक रूप से खड़ा किया जाना था, वरना वह जीवन भर अपने भीतर की अदालत में अपील करता रहता। पर यह भी सच है कि बहाली यहाँ आरामदायक नहीं है, और यीशु ने उसे आरामदायक बनाने की कोशिश नहीं की।
मुख्य पात्र
यह वही आदमी है जिसने कुछ ही देर पहले कमर कसकर झील में छलाँग लगा दी थी, वही पुराना आवेग, वही बिना सोचे दौड़ने वाला दिल। और यही आदमी अब चुप है। पतरस का पूरा आध्यात्मिक सफ़र अपने आप पर भरोसे से प्रभु के जानने पर भरोसे तक का सफ़र है। पहले वह दूसरों से तुलना करता था, "इनसे बढ़कर" वाला प्रश्न उसी घमंड की चुभन है; यहाँ तुलना गायब हो जाती है। उसकी उदासी कोई कमज़ोरी नहीं, वह पक्कापन की शुरुआत है, क्योंकि जो आदमी अपने बारे में भ्रम खो चुका है वही दूसरों की भेड़ों को सँभाल सकता है। अगली ही साँस में यीशु उसकी मृत्यु की बात करते हैं। चरवाहा बनने का अर्थ है अच्छे चरवाहे के पीछे-पीछे चलना, वहाँ तक जहाँ वह गया।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन-सी बात है जिसके बारे में आप चाहते हैं कि परमेश्वर उसे न देखें, और यदि वे उसे पहले से जानते हैं तो आपकी प्रार्थना कैसे बदल जाएगी?
यीशु ने पतरस को क्षमा के बाद आराम नहीं, ज़िम्मेदारी दी। आपको जो भेड़ें सौंपी गई हैं, वे कौन हैं, और आप उन्हें किसकी भेड़ें मानकर सँभालते हैं?
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John 21:17 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यूहन्ना 21:17 का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 21:17 किस विषय में है?
यूहन्ना 21:17 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यूहन्ना 21:17 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यूहन्ना 21:17 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
John 21 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
यूहन्ना अपनी पुस्तक खत्म करते हुए लिखता है, "और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक-एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं।" सोचो, जो तुम पढ़ते हो वह सिर्फ़ एक झलक है। जितना तुम उसे जानते हो, उससे कहीं ज़्यादा वह है। आज उसके बारे में जो तुम्हें अभी पता नहीं, उसे जानने की भूख रखो।
यूहन्ना अपनी पूरी किताब के अंत में खुद को नाम से नहीं, गवाही से पहचानता है, "यह वही चेला है, जो इन बातों की गवाही देता है और जिसने इन बातों को लिखा है।" जो सीना यीशु से सटा था, वही हाथ अब कलम पकड़े है। तुम्हारे जीवन की कौन सी बात ऐसी है जिसे तुम कह सको, मैंने खुद देखा है? गवाही सुनी हुई नहीं, जी हुई होती है।
प्रभु, तूने पहले ही किनारे पर आग जलाकर सब तैयार रखा था, फिर भी तूने कहा कि जो हमने पकड़ा है, उसमें से कुछ ले आएँ। मेरे पास जो थोड़ा सा है, वह तेरे सामने रखता हूँ। तू मेरी छोटी सी मेहनत को भी अपने काम में शामिल कर लेता है, इसके लिए धन्यवाद।
पिता, मैं बार-बार दूसरों की ओर देखता हूँ और पूछता हूँ कि उनका रास्ता मेरे से आसान क्यों है। मुझे तुलना की इस आदत से बचा। जो राह तूने मेरे लिए रखी है, उसी पर चलने की सादगी और भरोसा मुझे दे। तेरे पीछे चलना ही मेरे लिए काफ़ी हो।
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