बाइबल व्याख्या

लैव्यव्यवस्था 6

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

अध्याय की शुरुआत एक ऐसे अपराध से होती है जो मंदिर में नहीं, बाज़ार में होता है: धरोहर में बेईमानी, लेन-देन में छल, पड़ी हुई वस्तु को पाकर झूठ बोलना, झूठी शपथ खाना। परमेश्वर इसे "यहोवा का विश्वासघात" कहते हैं, और इलाज दोहरा है: पूरी वस्तु लौटाओ, ऊपर से पाँचवाँ भाग जोड़ो, और फिर दोषबलि लाओ। इसके बाद याजकों के लिए नियम आते हैं: होमबलि की आग कभी न बुझे, राख सादे वस्त्रों में बाहर ले जाई जाए, अन्नबलि का शेष भाग याजक खाएँ, और पापबलि परमपवित्र मानी जाए, कुछ खाई जाए, कुछ जलाई जाए।

मूल बात

ध्यान दें कि पद 2 में शिकायत करने वाला पड़ोसी नहीं है, परमेश्वर हैं। जिसने अपने भाई की धरोहर हड़पी, उसने "यहोवा का विश्वासघात" किया। यह लेवीय व्यवस्था का सबसे तीखा नैतिक वाक्य है: सामाजिक बेईमानी धार्मिक अपराध है। परमेश्वर अपने आप को उन लोगों से बाँध लेते हैं जिनका पैसा चोरी हुआ, जिनका उधार वापस नहीं आया, जिनकी खोई हुई वस्तु किसी ने चुपचाप जेब में रख ली। और इसीलिए क्षमा का रास्ता वेदी से शुरू नहीं होता, हिसाब से शुरू होता है। पहले लौटाओ, फिर मेढ़ा लाओ। बलिदान वास्तविक भरपाई का विकल्प नहीं, उसका अनुसरण है।

जोड़ने वाला सूत्र

"वेदी पर आग लगातार जलती रहे; वह कभी बुझने न पाए।" यह वाक्य दो बार आता है, और यह पूरे पुराने नियम की गति को दिखाता है: प्रायश्चित का काम कभी खत्म नहीं होता, इसलिए आग कभी ठंडी नहीं पड़ती। रोज़ भोर को नई लकड़ी, रोज़ नया मेढ़ा, रोज़ याजक का अन्नबलि जो पूरा जला दिया जाता है। यह थकाऊ है, और जान-बूझकर थकाऊ है। जब यीशु मसीह क्रूस पर "पूरा हुआ" कहते हैं, तो वे इस अनंत दोहराव को तोड़ते हैं। पर वे उसे रद्द नहीं करते: वे उसका उत्तर हैं। जक्कई ने यह समझा था, जब उसने चौगुना लौटाने की बात कही; अनुग्रह मिलने पर उसने हिसाब बंद नहीं किया, खोल दिया।

दर्पण

तो कुछ ठोस बात करें। वह पैसा जो आपने किसी दोस्त से उधार लिया और जिसका ज़िक्र अब दोनों टाल देते हैं। वह टैक्स रिटर्न जिसमें आपने "थोड़ी" चतुराई की। दफ़्तर का वह घंटा जिसका वेतन आपने लिया पर काम नहीं किया। वह श्रेय जो आपने ले लिया, जबकि काम किसी जूनियर ने किया था। पद 5 का शब्द चुभता है: "जिस दिन यह मालूम हो कि वह दोषी है, उसी दिन।" कोई सुविधाजनक समय नहीं, कोई "जब हालात ठीक होंगे" नहीं। और पाँचवाँ भाग? वह आपको यह सिखाने के लिए है कि पछतावा सस्ता होता है, भरपाई महँगी। जो तोबा जेब को नहीं छूती, वह अक्सर हृदय को भी नहीं छूती।

प्रश्न

पर एक बात यहाँ खुली रह जाती है, और उसे ढँकना बेईमानी होगी। ये नियम उसी व्यक्ति के लिए हैं जो स्वयं स्वीकार करता है, जिसे "मालूम हो" जाता है। जो कभी स्वीकार नहीं करता, जिसकी बेईमानी पकड़ी नहीं जाती, उसके शिकार का क्या? वह विधवा जिसकी ज़मीन गई और जिसे कभी पाँचवाँ भाग नहीं मिला? लेवीय व्यवस्था इसका उत्तर नहीं देती। वह सिर्फ़ यह कहती है कि परमेश्वर इसे अपने विरुद्ध अपराध मानते हैं, और जो परमेश्वर के विरुद्ध है वह अनदेखा नहीं रहता, चाहे इस जीवन में हिसाब न हो। यह ठंडी तसल्ली है, मानता हूँ। पर यह झूठी तसल्ली नहीं है, और आज सस्ती तसल्लियाँ बहुत हैं।

एक बारीकी

पद 10 और 11 पर रुकिए। याजक सनी के वस्त्र पहनकर राख उठाता है, फिर वे वस्त्र उतारकर दूसरे वस्त्र पहनता है, और राख छावनी से बाहर ले जाता है। राख गंदगी नहीं है; वह कल के बलिदान का बचा हुआ अंश है, कुछ पवित्र। पर उसे भी उठाना, ढोना, बाहर रखना पड़ता है, और यह काम प्रधान याजक के जिम्मे है। यहाँ पवित्रता का एक हिस्सा साफ़-सफ़ाई है। परमेश्वर की सेवा में वह उबाऊ, गंदा, अदृश्य काम शामिल है जिसे कोई नहीं देखता: कुर्सियाँ लगाना, हिसाब की किताब, बीमार माँ का बिस्तर बदलना। जो इसे छोटा समझता है, उसने वेदी को समझा ही नहीं।

मुख्य पात्र

इस अध्याय में बोलने वाले परमेश्वर हैं, और उनका स्वभाव विवरणों में दिखता है। वे उतने ही गंभीरता से मिट्टी के बरतन तोड़ने की बात करते हैं जितनी गंभीरता से पड़ोसी के साथ हुए छल की। वे याजकों को खाना देते हैं ("मैंने अपने हव्य में से उसको उनका निज भाग होने के लिये उन्हें दिया है"), और उसी साँस में माँग करते हैं कि उनके अभिषिक्त याजक का अपना चढ़ावा पूरा जलाया जाए, कभी न खाया जाए। यह वे परमेश्वर हैं जो पोषण भी करते हैं और छूट नहीं देते। वे नाराज़ देवता नहीं हैं जिन्हें शांत करना है; वे वह स्वामी हैं जो अपने लोगों के बीच रहना चाहते हैं, और इसलिए उनके व्यापार, उनकी रसोई और उनकी वेदी, तीनों को सच्चा देखना चाहते हैं।

चिंतन

जिस दिन यह मालूम हो, उसी दिन: क्या कोई ऐसा हिसाब है जिसे आप टाल रहे हैं, और जिसे इस हफ़्ते चुकाया जा सकता है?

आपके जीवन में वह "राख उठाने" जैसा काम कौन सा है, जिसे कोई नहीं देखता, और आप उसे कितनी इज़्ज़त देते हैं?

Leviticus में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Leviticus

Derek Tidball

Makes the sacrifices and holiness laws surprisingly clear and relevant.

Leviticus: An Introduction and Commentary

Jay Sklar

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Holiness to the Lord

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Leviticus 6 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

लैव्यव्यवस्था 6 का क्या अर्थ है?
अध्याय की शुरुआत एक ऐसे अपराध से होती है जो मंदिर में नहीं, बाज़ार में होता है: धरोहर में बेईमानी, लेन-देन में छल, पड़ी हुई वस्तु को पाकर झूठ बोलना, झूठी शपथ खाना। परमेश्वर इसे "यहोवा का विश्वासघात" कहते हैं, और इलाज दोहरा है: पूरी वस्तु लौटाओ, ऊपर से पाँचवाँ भाग जोड़ो, और फिर दोषबलि लाओ। इसके बाद याजकों के लिए नियम आते हैं: होमबलि की आग कभी न बुझे, राख सादे वस्त्रों में बाहर ले जाई जाए, अन्नबलि का शेष भाग याजक खाएँ, और पापबलि परमपवित्र मानी जाए, कुछ खाई जाए, कुछ जलाई जाए।
लैव्यव्यवस्था 6 किस विषय में है?
"वेदी पर आग लगातार जलती रहे; वह कभी बुझने न पाए।" यह वाक्य दो बार आता है, और यह पूरे पुराने नियम की गति को दिखाता है: प्रायश्चित का काम कभी खत्म नहीं होता, इसलिए आग कभी ठंडी नहीं पड़ती। रोज़ भोर को नई लकड़ी, रोज़ नया मेढ़ा, रोज़ याजक का अन्नबलि जो पूरा जला दिया जाता है। यह थकाऊ है, और जान-बूझकर थकाऊ है। जब यीशु मसीह क्रूस पर "पूरा हुआ" कहते हैं, तो वे इस अनंत दोहराव को तोड़ते हैं। पर वे उसे रद्द नहीं करते: वे उसका उत्तर हैं। जक्कई ने यह समझा था, जब उसने चौगुना लौटाने की बात कही; अनुग्रह मिलने पर उसने हिसाब बंद नहीं किया, खोल दिया।
लैव्यव्यवस्था 6 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पर एक बात यहाँ खुली रह जाती है, और उसे ढँकना बेईमानी होगी। ये नियम उसी व्यक्ति के लिए हैं जो स्वयं स्वीकार करता है, जिसे "मालूम हो" जाता है। जो कभी स्वीकार नहीं करता, जिसकी बेईमानी पकड़ी नहीं जाती, उसके शिकार का क्या? वह विधवा जिसकी ज़मीन गई और जिसे कभी पाँचवाँ भाग नहीं मिला?
लैव्यव्यवस्था 6 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इस अध्याय में बोलने वाले परमेश्वर हैं, और उनका स्वभाव विवरणों में दिखता है। वे उतने ही गंभीरता से मिट्टी के बरतन तोड़ने की बात करते हैं जितनी गंभीरता से पड़ोसी के साथ हुए छल की। वे याजकों को खाना देते हैं ("मैंने अपने हव्य में से उसको उनका निज भाग होने के लिये उन्हें दिया है"), और उसी साँस में माँग करते हैं कि उनके अभिषिक्त याजक का अपना चढ़ावा पूरा जलाया जाए, कभी न खाया जाए। यह वे परमेश्वर हैं जो पोषण भी करते हैं और छूट नहीं देते। वे नाराज़ देवता नहीं हैं जिन्हें शांत करना है; वे वह स्वामी हैं जो अपने लोगों के बीच रहना चाहते हैं, और इसलिए उनके व्यापार, उनकी रसोई और उनकी वेदी, तीनों को सच्चा देखना चाहते हैं।
लैव्यव्यवस्था 6 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन में वह "राख उठाने" जैसा काम कौन सा है, जिसे कोई नहीं देखता, और आप उसे कितनी इज़्ज़त देते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Leviticus 6 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 5

पिता, धन्यवाद कि आपने पाप के बाद केवल पछतावे पर नहीं छोड़ा, बल्कि सुधार का रास्ता भी दिया। "वह उसका पूरा दाम भर दे, और उसका पाँचवाँ भाग भी उसमें बढ़ाकर" दे, यह आपका प्रेम है जो टूटे रिश्तों को फिर से जोड़ता है। धन्यवाद कि उसी दिन, देर किए बिना, आप मेल कराना चाहते हैं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 16

हे प्रभु, जो कुछ भी आप हमें देते हैं, वह पवित्र है। हमें सिखा कि हम आपके दिए हुए हर उपहार को आदर से ग्रहण करें, उसे बाँटें, और उसके द्वारा आपके नाम की महिमा करें। हमारा जीवन आपकी सेवा में समर्पित रहे।

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