लैव्यव्यवस्था 8
पाठ
परमेश्वर मूसा को आज्ञा देते हैं कि वह हारून और उसके पुत्रों को, उनके वस्त्रों, अभिषेक के तेल, पापबलि के बछड़े, दो मेढ़ों और अख़मीरी रोटी की टोकरी के साथ मिलापवाले तम्बू के द्वार पर ले आए, और वहाँ सारी मण्डली को इकट्ठा करे। मूसा उन्हें जल से नहलाता है, वस्त्र पहनाता है, तेल से अभिषेक करता है, तीन बलियाँ चढ़ाता है, और तीसरे मेढ़े का लहू हारून और उसके पुत्रों के दाहिने कान, दाहिने हाथ और दाहिने पाँव के अँगूठों पर लगाता है। अन्त में आज्ञा: सात दिन तक द्वार से बाहर न जाना, "ताकि तुम मर न जाओ।"
मूल मर्म
इस अध्याय में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि याजक को भी प्रायश्चित की आवश्यकता है। पद 34 में मूसा स्पष्ट कहता है: "जिससे तुम्हारा प्रायश्चित किया जाए।" जो व्यक्ति दूसरों के लिये बलि चढ़ाएगा, वह स्वयं पहले बछड़े के सिर पर हाथ रखता है। मध्यस्थ को भी मध्यस्थता चाहिए। यहाँ मनुष्य की कोई योग्यता काम नहीं आती; हारून पूरे अध्याय में कुछ नहीं करता, उसके साथ किया जाता है। उसे नहलाया जाता है, पहनाया जाता है, अभिषेक किया जाता है, उस पर लहू छिड़का जाता है। पवित्रता कमाई नहीं जाती, दी जाती है। और वह इतनी गम्भीर है कि लापरवाही मृत्यु है।
सूत्र
गौर करें कि अध्याय में एक वाक्य बार-बार लौटता है: "जिस प्रकार यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।" और अन्त में सात दिन। यह लय उत्पत्ति के पहले अध्याय की याद दिलाती है, जहाँ परमेश्वर बोलते हैं और वैसा ही हो जाता है, सात दिनों में। यहाँ भी कुछ नया रचा जा रहा है: एक स्थान जहाँ परमेश्वर मनुष्य के बीच रह सकते हैं। निवासस्थान लघु-सृष्टि है, और याजक उस सृष्टि में आदम की भूमिका फिर से निभाता है, इस बार लहू के द्वारा। परन्तु यह याजकपद अधूरा है, क्योंकि याजक स्वयं पापी है और मरणशील। मसीह वह अभिषिक्त महायाजक हैं जिन्हें अपने लिये बछड़े की आवश्यकता नहीं थी, और जिनका एक ही बलिदान सात दिनों तक दोहराने की माँग नहीं करता।
दर्पण
दाहिना कान, दाहिना हाथ, दाहिना पाँव। लहू शरीर के उन्हीं हिस्सों पर लगता है जिनसे हमारा दिन चलता है: जो हम सुनते हैं, जो हम करते हैं, जहाँ हम जाते हैं। आपका कान आज दफ़्तर की उस बातचीत में क्या सुन रहा था? आपका हाथ किस अनुबंध पर, किस स्क्रीन पर, किसके पैसे पर था? आपके पैर किस दरवाज़े तक गए और किस दरवाज़े से मुड़ गए? हम आध्यात्मिकता को हृदय के किसी भीतरी कमरे में रखना पसंद करते हैं, जहाँ कोई जाँच न सके। लैव्यव्यवस्था 8 उस कमरे का दरवाज़ा तोड़ देती है। यहाँ परमेश्वर पूरे शरीर पर दावा करते हैं, अधूरे समर्पण पर नहीं। आज सोने से पहले तीन बातें ऊँची आवाज़ में परमेश्वर को सौंप दें: आज सुनी एक बात, आज किया एक काम, आज गया एक स्थान।
शास्त्र की गूँज
यह अध्याय निर्गमन 32 के बाद आता है, और यही इसे लगभग असहनीय रूप से कृपामय बनाता है। जिस हारून ने सोने का बछड़ा गढ़ा था, उसी के माथे पर अब "पवित्र मुकुट" बाँधा जाता है। परमेश्वर उसे हटाकर किसी निर्दोष व्यक्ति को नहीं चुनते; वे दोषी को धोते, पहनाते और अभिषिक्त करते हैं। इब्रानियों की पत्री इसी अध्याय को उठाकर आगे ले जाती है: वहाँ बताया गया है कि हारून को प्रतिदिन पहले अपने पापों के लिये बलि चढ़ानी पड़ती थी, परन्तु मसीह ने अपने आप को एक ही बार चढ़ाकर उस श्रृंखला को समाप्त कर दिया। लैव्यव्यवस्था 8 का हर दोहराव क्रूस की एकमात्रता की ओर इशारा करता है।
मुख्य पात्र
हारून इस अध्याय का सबसे निष्क्रिय व्यक्ति है, और यही उसका सबसे गहरा उपदेश है। वह बोलता नहीं। वह न जल लेता है, न तेल, न छुरी। वह केवल बछड़े के सिर पर हाथ रखता है, अर्थात् स्वीकार करता है: यह मेरा स्थान लेकर मर रहा है। सोचिए उसकी मनःस्थिति: सारी मण्डली देख रही है, वही मण्डली जो कुछ समय पहले उसके बनाए बछड़े के आगे नाची थी। और फिर सात दिन तम्बू के द्वार पर, दिन-रात, बाहर जाने की अनुमति नहीं, कानों पर सूखा लहू, इस चेतावनी के साथ: "ताकि तुम मर न जाओ।" यह पदोन्नति का उत्सव नहीं, कृपा के भार तले चुप बैठना है।
पृष्ठभूमि
सीनै पर्वत के नीचे, मिस्र से निकलने के लगभग एक वर्ष बाद। निवासस्थान अभी-अभी खड़ा हुआ है, और लैव्यव्यवस्था के पहले सात अध्यायों में बलियों के नियम दिए जा चुके हैं। अब वे लोग नियुक्त किए जा रहे हैं जो उन नियमों को चलाएँगे। प्राचीन संसार में याजकपद शक्ति और आय का केन्द्र था, वंशानुगत विशेषाधिकार। परन्तु यहाँ हारून स्वयं को नियुक्त नहीं करता; उसे बुलाया जाता है, और वह भी खुले में, पूरी मण्डली के सामने, ताकि किसी को सन्देह न रहे कि यह अधिकार कहाँ से आया। एपोद, चपरास, ऊरीम और तुम्मीम, सोने का टीका: यह पोशाक सुन्दरता के लिये नहीं, पद और उत्तरदायित्व की सार्वजनिक घोषणा के लिये थी।
चिंतन
हारून को पहले स्वयं प्रायश्चित की आवश्यकता थी, उसके बाद ही वह दूसरों के लिये सेवा कर सका। आप जहाँ सेवा करते हैं, वहाँ आप किस बात को छिपाकर काम चला रहे हैं?
यदि आज परमेश्वर आपके कान, हाथ और पाँव पर दावा करें, तो आपकी दिनचर्या में सबसे पहले क्या बदलना पड़ेगा?
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