बाइबल व्याख्या

मत्ती 14:3

बाइबल
यह वचन JASHUVA MINISTRIES -INDIA द्वारा समर्पित है

पाठ

हेरोदेस ने यूहन्ना को पकड़वाया, जंजीरों में बँधवाया और जेलखाने में डाल दिया। कारण कोई धार्मिक विवाद नहीं था, बल्कि एक स्त्री: हेरोदियास, जो उसके सगे भाई फिलिप्पुस की पत्नी थी। मत्ती यह बात एक कोष्ठक की तरह डालता है, जैसे कोई पुरानी फाइल खोलकर पाठक को याद दिला रहा हो कि यह राजा पहले ही एक भविष्यद्वक्ता का खून अपने हाथ पर ले चुका है। और यह सब उस समय, जब वही हेरोदेस यीशु की चर्चा सुनकर बेचैन हो रहा है। एक वाक्य में तीन चीज़ें हैं: सत्ता, वासना, और एक आदमी जो सच बोलने की कीमत चुका रहा है।

मूल बात

कल्पना कीजिए वह जगह: मृत सागर के पूर्वी किनारे पर, ऊँची चट्टान पर बना मखेरुस का किला, नीचे नमक की चमकती चादर, हवा में गंधक की गंध। वहाँ नीचे तहखानों में एक जंगली-सा आदमी बैठा है जिसने कभी यरदन के किनारे भीड़ों को हिला दिया था। ऊपर मेज़ पर रोमी शराब है। यही परमेश्वर के राज्य और इस संसार के राज्य का असली नक्शा है। हेरोदेस के पास सैनिक हैं, हेरोदियास के पास पहुँच है, और यूहन्ना के पास केवल एक सच्चा वाक्य। मत्ती यह छिपाता नहीं कि इस दुनिया में सच्चाई अक्सर बेड़ियों में और झूठ सिंहासन पर बैठा मिलता है। परमेश्वर का राज्य ताकत से नहीं, गवाही से आगे बढ़ता है, और गवाही की कीमत शरीर से चुकाई जाती है।

जुड़ा हुआ धागा

यह दृश्य पहली बार नहीं घट रहा। इस्राएल की स्मृति में एक और राजा है जिसकी पत्नी ने भविष्यद्वक्ता का पीछा किया था: अहाब और ईज़ेबेल, और एलिय्याह जो जंगल में भागा। यूहन्ना उसी वेश में, उसी जंगल से निकलकर आता है, और वही वाक्य दोहराता है जो हर भविष्यद्वक्ता का काम है, "इसको रखना तुझे उचित नहीं है।" व्यवस्था में भाई की पत्नी को लेना साफ़ मना था; यूहन्ना कोई नया कानून नहीं गढ़ रहा, वह बस पुराना पढ़ रहा है। और आगे देखिए: बाँधा जाना, राजा का डरना, भीड़ का दबाव, न्याय का नाटक। यही क्रम कुछ अध्याय बाद यीशु के साथ दोहराया जाएगा। अग्रदूत जिस रास्ते पर पहले चलता है, प्रभु उसी पर पीछे आते हैं, और वहीं से उद्धार निकलता है।

दर्पण

हम आसानी से यूहन्ना के साथ खड़े होना चाहते हैं, पर सच यह है कि हममें से ज़्यादातर हेरोदेस की मेज़ के पास बैठे मेहमान हैं। दफ़्तर में हिसाब की वह गड़बड़ी जिसे सब जानते हैं और कोई नहीं बोलता। परिवार में वह रिश्ता जिस पर सालों से एक विनम्र चुप्पी ओढ़ा दी गई है, क्योंकि बोलने से त्योहार खराब हो जाएगा। कलीसिया में वह बात जो प्राचीनों की बैठक के बाद पार्किंग में कही जाती है, कमरे के भीतर नहीं। हेरोदेस ने यूहन्ना को मारा नहीं, सिर्फ़ तहख़ाने में डाल दिया; यही हमारी भी तरकीब है, सच को मारना नहीं, बस नीचे रख देना जहाँ उसकी आवाज़ दबी रहे। आज दिन ढलने से पहले एक कागज़ पर वह एक वाक्य लिखिए जो आप जानते हैं कि सच है और जिसे आपने डर के मारे नहीं कहा, उसे ज़ोर से पढ़िए, और परमेश्वर के सामने रख दीजिए।

मुख्य पात्र

हेरोदेस अन्तिपास असल में राजा था ही नहीं, "चौथाई देश का राजा" था, रोम की कृपा पर टिका एक ठेकेदार शासक, आधा इदूमी, यहूदियों की नज़र में हमेशा थोड़ा बाहरी। उसने हेरोदियास को पाने के लिए अपनी पहली पत्नी को छोड़ा था, और उससे सीमा पर युद्ध का ख़तरा मोल ले लिया। ऐसा आदमी हर तरफ़ से डरता है: रोम से, अरब के राजा से, भीड़ से, अपनी पत्नी से। इसलिए वह यूहन्ना को न छोड़ सकता है न मार सकता है, बस बाँध देता है। यह कमज़ोर आदमी की क्रूरता है, क्रूर आदमी की ताक़त नहीं। और जब वह बाद में यीशु की चर्चा सुनकर काँपता है, हमें पता चल जाता है कि जेल की सलाखें आवाज़ को रोक नहीं पाईं; वह उसके भीतर बोलती रही।

कठिन प्रश्न

यूहन्ना ने ठीक वही किया जो परमेश्वर ने उसे सौंपा था, और उसे तहख़ाना और तलवार मिली। कोई स्वर्गदूत दरवाज़ा नहीं खोलता, जैसे बाद में पतरस के लिए खुलेगा। यीशु, जो कुछ ही पंक्तियों बाद पाँच हज़ार को खिलाएँगे और पानी पर चलेंगे, अपने अग्रदूत को छुड़ाने मखेरुस नहीं जाते; समाचार सुनकर वे नाव पर चढ़कर एकान्त में चले जाते हैं। पाठ इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं देता, और हमें भी नहीं गढ़ना चाहिए। विश्वासयोग्यता कोई बीमा-पॉलिसी नहीं है। जो हम कह सकते हैं वह इतना ही है कि यीशु उस रास्ते से बचकर नहीं निकले, उसी पर चलकर गए, और वहीं से मृत्यु के पार का दरवाज़ा खोला। यह उत्तर नहीं है, साथ है।

पहले सुननेवाले

मत्ती जिनके लिए लिख रहा था, वे हेरोदेस वंश को इतिहास की किताब में नहीं, अपने मोहल्ले की कहानियों में जानते थे। उन्हें पता था कि इस परिवार ने बच्चों को मरवाया, प्राचीनों को ख़रीदा, और मन्दिर को सोने से ढककर अपनी बेशर्मी छिपाई। और उनकी अपनी कलीसिया में ऐसे लोग बैठे थे जिनके भाई या पति किसी रात उठा लिए गए थे। "जेलखाने में डाल दिया" उनके लिए कोई दूर की घटना नहीं थी, वह उनका अपना पता था। इस आयत में उन्होंने राहत नहीं, पहचान सुनी: तो हमारे साथ जो हो रहा है, वह विश्वास की नाकामी नहीं, उसी पुरानी लड़ाई का हिस्सा है। और ठीक इसके बाद रोटियाँ तोड़ी जाती हैं, भूखों के लिए, सुनसान जगह में।

मनन के प्रश्न

किस सच को आपने मारा नहीं, बस अपने भीतर के तहख़ाने में डाल रखा है, और वह अब भी वहाँ से क्या कह रहा है?

अगर विश्वासयोग्यता छुटकारे की गारंटी नहीं देती, तो आप परमेश्वर से आज क्या माँग रहे हैं: बचाव, या साथ?

Matthew में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Matthew For Everyone, Part 1

N.T. Wright

Short, fresh readings that make Matthew feel newly written.

The Message of Matthew

Michael Green

The King and his kingdom, traced through the whole Gospel.

Matthew: An Introduction and Commentary

R.T. France

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Matthew

Michael Wilkins

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

The Message of the Sermon on the Mount

John Stott

Stott's classic on Matthew 5-7, the charter of the kingdom.

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Matthew 14:3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

मत्ती 14:3 का क्या अर्थ है?
हेरोदेस ने यूहन्ना को पकड़वाया, जंजीरों में बँधवाया और जेलखाने में डाल दिया। कारण कोई धार्मिक विवाद नहीं था, बल्कि एक स्त्री: हेरोदियास, जो उसके सगे भाई फिलिप्पुस की पत्नी थी। मत्ती यह बात एक कोष्ठक की तरह डालता है, जैसे कोई पुरानी फाइल खोलकर पाठक को याद दिला रहा हो कि यह राजा पहले ही एक भविष्यद्वक्ता का खून अपने हाथ पर ले चुका है। और यह सब उस समय, जब वही हेरोदेस यीशु की चर्चा सुनकर बेचैन हो रहा है। एक वाक्य में तीन चीज़ें हैं: सत्ता, वासना, और एक आदमी जो सच बोलने की कीमत चुका रहा है।
मत्ती 14:3 किस विषय में है?
यह दृश्य पहली बार नहीं घट रहा। इस्राएल की स्मृति में एक और राजा है जिसकी पत्नी ने भविष्यद्वक्ता का पीछा किया था: अहाब और ईज़ेबेल, और एलिय्याह जो जंगल में भागा। यूहन्ना उसी वेश में, उसी जंगल से निकलकर आता है, और वही वाक्य दोहराता है जो हर भविष्यद्वक्ता का काम है, "इसको रखना तुझे उचित नहीं है।" व्यवस्था में भाई की पत्नी को लेना साफ़ मना था; यूहन्ना कोई नया कानून नहीं गढ़ रहा, वह बस पुराना पढ़ रहा है। और आगे देखिए: बाँधा जाना, राजा का डरना, भीड़ का दबाव, न्याय का नाटक। यही क्रम कुछ अध्याय बाद यीशु के साथ दोहराया जाएगा। अग्रदूत जिस रास्ते पर पहले चलता है, प्रभु उसी पर पीछे आते हैं, और वहीं से उद्धार निकलता है।
मत्ती 14:3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
हेरोदेस अन्तिपास असल में राजा था ही नहीं, "चौथाई देश का राजा" था, रोम की कृपा पर टिका एक ठेकेदार शासक, आधा इदूमी, यहूदियों की नज़र में हमेशा थोड़ा बाहरी। उसने हेरोदियास को पाने के लिए अपनी पहली पत्नी को छोड़ा था, और उससे सीमा पर युद्ध का ख़तरा मोल ले लिया। ऐसा आदमी हर तरफ़ से डरता है: रोम से, अरब के राजा से, भीड़ से, अपनी पत्नी से। इसलिए वह यूहन्ना को न छोड़ सकता है न मार सकता है, बस बाँध देता है। यह कमज़ोर आदमी की क्रूरता है, क्रूर आदमी की ताक़त नहीं। और जब वह बाद में यीशु की चर्चा सुनकर काँपता है, हमें पता चल जाता है कि जेल की सलाखें आवाज़ को रोक नहीं पाईं; वह उसके भीतर बोलती रही।
मत्ती 14:3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती जिनके लिए लिख रहा था, वे हेरोदेस वंश को इतिहास की किताब में नहीं, अपने मोहल्ले की कहानियों में जानते थे। उन्हें पता था कि इस परिवार ने बच्चों को मरवाया, प्राचीनों को ख़रीदा, और मन्दिर को सोने से ढककर अपनी बेशर्मी छिपाई। और उनकी अपनी कलीसिया में ऐसे लोग बैठे थे जिनके भाई या पति किसी रात उठा लिए गए थे। "जेलखाने में डाल दिया" उनके लिए कोई दूर की घटना नहीं थी, वह उनका अपना पता था। इस आयत में उन्होंने राहत नहीं, पहचान सुनी: तो हमारे साथ जो हो रहा है, वह विश्वास की नाकामी नहीं, उसी पुरानी लड़ाई का हिस्सा है। और ठीक इसके बाद रोटियाँ तोड़ी जाती हैं, भूखों के लिए, सुनसान जगह में।
मत्ती 14:3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अगर विश्वासयोग्यता छुटकारे की गारंटी नहीं देती, तो आप परमेश्वर से आज क्या माँग रहे हैं: बचाव, या साथ?
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Matthew 14 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

यूहन्ना ने कोई विद्रोह नहीं किया था, कोई सेना खड़ी नहीं की थी। उसने बस सच कहा था। "क्योंकि हेरोदेस ने अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास के कारण यूहन्ना को पकड़कर बाँधा और बन्दीगृह में डाल दिया था।" एक स्त्री के कारण, यानी एक ऐसे पाप के कारण जिसे हेरोदेस छोड़ना नहीं चाहता था। सोचो, क्या तुम्हारे जीवन में भी कोई सच है जिसे तुमने चुप करा दिया है, सिर्फ इसलिए कि वह तुम्हें बदलने को कहता है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, जब दिल टूटता है और शब्द नहीं मिलते, हमें बस यही रास्ता याद रहे कि सीधे तेरे पास आ जाएँ। हमारे आँसू, हमारा खालीपन, हमारे अनकहे सवाल, सब तेरे सामने रख देते हैं। तू सुनता है, यही हमारे लिए काफी है। हमें थामे रख।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 27

तूफान थमा नहीं था जब यीशु ने कहा, "ढाढ़स बाँधो! मैं हूँ; डरो मत।" लहरें वैसी ही ऊँची थीं, हवा वैसी ही तेज़। बदला सिर्फ़ इतना कि वे अब अकेले नहीं थे। ध्यान दे, चेलों ने उन्हें देखकर चिल्लाया था, क्योंकि डर में हम अपने उद्धारकर्ता को भी भूत समझ बैठते हैं। तेरी रात के जिस पहर में डर सबसे गहरा है, वहीं वे चल कर आते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

यीशु ने चेलों से कहा, "उनका जाना ज़रूरी नहीं, तुम ही उन्हें खाने को दो।" कितनी अजीब बात है। भीड़ भूखी थी, और चेलों के पास सिर्फ़ पाँच रोटी और दो मछली थीं। फिर भी यीशु ने ज़िम्मेदारी उन्हीं के हाथ में थमा दी।

आज भी वह यही करता है। तेरे पास जो थोड़ा है, वही उसके हाथ में रख। कमी तेरी नहीं, उसकी चिंता है। तू बस देना शुरू कर।

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